07 Aug लोकसभा ने पारित किया बिल: सरकार UPI और RuPay पर MDR लगा सकेगी
✎ लोकसभा द्वारा पारित विधेयक सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर MDR ढांचे को संशोधित करने की शक्ति प्रदान करेगा, जिसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper II — शासन
- Prelims: UPI, MDR, RuPay कार्ड, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, NPCI, डिजिटल भुगतान
- Essay: भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था का भविष्य, समावेशी विकास में प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: लोकसभा द्वारा पारित विधेयक सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर MDR ढांचे को संशोधित करने की शक्ति प्रदान करेगा, जिसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
लोकसभा ने हाल ही में एक विधेयक पारित किया है जिसका उद्देश्य कर नियमों को आसान बनाना और बैंकों तथा भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने से रोकने वाले मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाना है। यह विधेयक UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर शून्य-MDR ढांचे को संशोधित करने के लिए सरकार को कानूनी समर्थन प्रदान करेगा, जिससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे और नवाचार में निवेश करने में मदद मिलेगी।
पृष्ठभूमि
- शून्य MDR नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर डिजिटल लेनदेन का बोझ कम करना था, जिससे इसके व्यापक उपयोग को प्रोत्साहन मिले।
- हालांकि, बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं ने तर्क दिया है कि शून्य MDR से उन्हें डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे के रखरखाव और उन्नयन में निवेश करने में कठिनाई होती है।
- MDR वह शुल्क है जो एक व्यापारी अपने ग्राहकों से क्रेडिट या डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक को देता है।
- सरकार का प्रस्ताव है कि यह शुल्क व्यापारियों पर लागू होगा, न कि उपयोगकर्ताओं पर, और यह क्रेडिट व डेबिट कार्ड पर लगने वाले शुल्क से कम होगा।
- वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि NPCI (भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम) की UPI और सेवा संचालन समिति अभी MDR पर निर्णय लेगी, और यह विधेयक संसद द्वारा ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित होने के बाद होगा।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है?
- मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह लागत है जो एक व्यापारी को अपने ग्राहकों से क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों (जैसे UPI) के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने के लिए चुकानी पड़ती है।
- यह शुल्क आमतौर पर लेनदेन मूल्य के एक प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है और यह व्यापारी के बैंक द्वारा वसूला जाता है।
- MDR को कई संस्थाओं के बीच साझा किया जाता है, जिसमें जारीकर्ता बैंक (ग्राहक का बैंक), अधिग्रहणकर्ता बैंक (व्यापारी का बैंक) और भुगतान नेटवर्क (जैसे RuPay, Visa, Mastercard) शामिल हैं।
- यह शुल्क बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को भुगतान बुनियादी ढांचे को बनाए रखने, धोखाधड़ी से सुरक्षा प्रदान करने और नवाचार में निवेश करने में मदद करता है।
- भारत में, सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कुछ भुगतान माध्यमों, विशेष रूप से UPI और RuPay कार्ड पर MDR को शून्य कर दिया था।
- प्रस्तावित विधेयक सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर शून्य-MDR ढांचे को संशोधित करने की शक्ति देगा, जिससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| UPI और RuPay लेनदेन पर MDR हटाने का प्रावधान | यह बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे और नवाचार में निवेश करने में मदद करेगा। |
| भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम (Payment and Settlement Systems Act) तथा आयकर अधिनियम (I-Tax Act) के बीच संबंध समाप्त करना | यह सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर शून्य-MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) ढांचे को संशोधित करने के लिए कानूनी आधार प्रदान करेगा। |
| MDR केवल व्यापारियों पर लागू होगा, उपयोगकर्ताओं पर नहीं | यह सुनिश्चित करेगा कि डिजिटल भुगतान का उपयोग करने वाले सामान्य उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त शुल्क न पड़े। |
| ₹2,000 से अधिक के व्यावसायिक भुगतानों पर 0.25% से 0.4% तक शुल्क की अनुमति | यह बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए राजस्व का एक स्रोत प्रदान करेगा, जिससे वे अपनी सेवाओं में सुधार कर सकें। |
| क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर लगने वाले शुल्क से कम MDR | यह डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में मदद करेगा क्योंकि यह पारंपरिक कार्ड भुगतानों की तुलना में अधिक किफायती होगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह बैंकों और फिनटेक कंपनियों को डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगा, जिससे नवाचार और सेवाओं में सुधार होगा।
- MDR से प्राप्त राजस्व डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने और विस्तारित करने में मदद करेगा, जिससे वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा मिलेगा।
- यह डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दे सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और नकदी पर निर्भरता कम होगी।
वित्तीय समावेशन
- डिजिटल भुगतान को और अधिक सुलभ और कुशल बनाकर, यह विधेयक उन लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने में मदद कर सकता है जो वर्तमान में इससे बाहर हैं।
- यह छोटे व्यापारियों और व्यवसायों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे उनकी पहुंच व्यापक ग्राहक आधार तक होगी।
प्रशासनिक और नियामक महत्व
- यह सरकार को डिजिटल भुगतान नीतियों को अधिक लचीले ढंग से संशोधित करने की शक्ति प्रदान करता है, जिससे बदलते बाजार की जरूरतों के अनुसार त्वरित समायोजन संभव होगा।
- भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम तथा आयकर अधिनियम के बीच संबंध हटाने से नियामक स्पष्टता बढ़ेगी और डिजिटल भुगतान क्षेत्र के लिए एक सुसंगत ढांचा तैयार होगा।
चुनौतियाँ
1. उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष प्रभाव
- हालांकि MDR सीधे उपयोगकर्ताओं पर नहीं लगेगा, व्यापारी लागत को उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं, जिससे अंततः उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ सकता है।
- छोटे व्यापारी, जिनके पास कम मार्जिन होता है, MDR को अवशोषित करने में अधिक कठिनाई महसूस कर सकते हैं, जिससे वे डिजिटल भुगतान से दूर हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: मुद्रास्फीति, उपभोक्ता संरक्षण
2. डिजिटल भुगतान अपनाने में बाधा
- यदि MDR के कारण व्यापारियों को अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ती है, तो वे UPI जैसे डिजिटल भुगतान विधियों को अपनाने में हिचकिचा सकते हैं।
- यह ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान के प्रसार को धीमा कर सकता है, जहां व्यापारी पहले से ही कम लाभ मार्जिन पर काम कर रहे हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय समावेशन
3. नियामक अनिश्चितता
- MDR दरों और उनके कार्यान्वयन के संबंध में स्पष्टता की कमी से बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
- सरकार द्वारा भविष्य में MDR ढांचे में बार-बार बदलाव से बाजार में अस्थिरता आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: नियामक निकाय, नीति निर्माण
4. प्रतियोगिता पर प्रभाव
- MDR शुल्क की संरचना छोटे फिनटेक खिलाड़ियों के लिए बड़े बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल बना सकती है।
- यह बाजार में एकाधिकार या अल्पाधिकार की स्थिति को जन्म दे सकता है, जिससे नवाचार और उपभोक्ता विकल्प सीमित हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: प्रतिस्पर्धा नीति, बाजार संरचना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| MDR का व्यापारियों पर बोझ | छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों (MSMEs) के लिए अतिरिक्त लागत, जो अंततः उपभोक्ताओं को हस्तांतरित हो सकती है। |
| डिजिटल लेनदेन की वृद्धि पर संभावित प्रभाव | यदि व्यापारी MDR के कारण डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से हिचकिचाते हैं, तो यह डिजिटल लेनदेन की गति को धीमा कर सकता है। |
| नियामक ढाँचे में अस्पष्टता | MDR की दरें और उनके कार्यान्वयन के संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देशों की कमी से बाजार में अनिश्चितता पैदा हो सकती है। |
| वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों पर असर | यदि डिजिटल भुगतान महंगा हो जाता है, तो यह उन लोगों के लिए बाधा बन सकता है जो पहली बार डिजिटल प्रणाली में प्रवेश कर रहे हैं। |
आगे की राह
- सरकार को MDR दरों को निर्धारित करते समय छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए।
- MDR ढांचे के संबंध में स्पष्ट और पारदर्शी दिशानिर्देश जारी किए जाने चाहिए ताकि बैंकों, फिनटेक कंपनियों और व्यापारियों के लिए अनिश्चितता कम हो।
- डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जाना चाहिए, भले ही MDR लागू हो।
- MDR के प्रभावों की नियमित निगरानी की जानी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो नीति में समायोजन किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ रहे।
- उपभोक्ताओं और व्यापारियों को MDR के बारे में शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि वे इसके प्रभावों को समझ सकें और सूचित निर्णय ले सकें।
- MDR से प्राप्त राजस्व का उपयोग डिजिटल भुगतान सुरक्षा, नवाचार और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
UPI शुल्क · व्यापारी छूट दर (MDR) · भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम · डिजिटल भुगतान · वित्तीय समावेशन · राजकोषीय नीतियां · भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) · रुपे कार्ड · फिनटेक नवाचार · आर्थिक संवृद्धि · डिजिटल अर्थव्यवस्था · उपभोक्ता संरक्षण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 265: विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया जाएगा।
अवधारणा प्रवाह
लोकसभा ने विधेयक पारित किया → सरकार को UPI/RuPay MDR में बदलाव का अधिकार → MDR व्यापारियों पर लागू, उपयोगकर्ताओं पर नहीं → बैंकों/फिनटेक को राजस्व मिलेगा → बुनियादी ढांचे और नवाचार में निवेश → डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. व्यापारी छूट दर (MDR) वह शुल्क है जो बैंक व्यापारियों से डिजिटल लेनदेन स्वीकार करने के लिए लेते हैं।
2. वर्तमान में, UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर कोई MDR लागू नहीं होता है।
3. हाल ही में पारित विधेयक सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर MDR ढांचे को संशोधित करने का कानूनी अधिकार देता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। MDR वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए अपने बैंक को देते हैं। कथन 2 सही है। वर्तमान में, सरकार की ‘जीरो MDR’ नीति के तहत UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर कोई MDR नहीं लगता है। कथन 3 सही है। हाल ही में लोकसभा द्वारा पारित विधेयक सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर शून्य-MDR ढांचे को संशोधित करने का अधिकार देता है।
Q2. व्यापारी छूट दर (MDR) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
1. यह शुल्क सीधे उपभोक्ताओं पर लगाया जाता है।
2. यह बैंकों और फिनटेक कंपनियों को डिजिटल भुगतान अवसंरचना में निवेश करने में मदद कर सकता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: केवल 2 — कथन 1 गलत है। MDR शुल्क व्यापारियों पर लगाया जाता है, उपभोक्ताओं पर नहीं। हालांकि, कुछ व्यापारी इसे अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं। कथन 2 सही है। MDR बैंकों और फिनटेक कंपनियों को डिजिटल भुगतान अवसंरचना के विकास और नवाचार में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान कर सकता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर व्यापारी छूट दर (MDR) लगाने के हालिया प्रस्ताव का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। यह भारत में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र और वित्तीय समावेशन को कैसे प्रभावित कर सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** UPI और RuPay कार्ड पर MDR लगाने के हालिया विधेयक का संक्षिप्त परिचय दें। MDR की अवधारणा और वर्तमान ‘जीरो MDR’ नीति का उल्लेख करें।
2. **MDR लगाने के पक्ष में तर्क:**
* बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए राजस्व सृजन।
* डिजिटल भुगतान अवसंरचना में निवेश और नवाचार को प्रोत्साहन।
* भुगतान सेवा प्रदाताओं की परिचालन लागत की भरपाई।
* क्रेडिट/डेबिट कार्ड पर लगने वाले शुल्क से कम होने की संभावना।
3. **MDR लगाने के विपक्ष में तर्क/संभावित चुनौतियाँ:**
* छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ।
* उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क का हस्तांतरण।
* डिजिटल लेनदेन को अपनाने की गति धीमी होने की संभावना।
* वित्तीय समावेशन के प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव।
* नकदी लेनदेन की ओर वापसी का जोखिम।
4. **डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव:**
* **सकारात्मक:** बेहतर अवसंरचना, उन्नत सुरक्षा, नए उत्पादों का विकास।
* **नकारात्मक:** लेनदेन की लागत में वृद्धि, छोटे व्यवसायों के लिए बाधाएँ।
5. **वित्तीय समावेशन पर प्रभाव:**
* **सकारात्मक:** दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार।
* **नकारात्मक:** कम आय वाले व्यक्तियों और छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान महंगा हो सकता है, जिससे वे इससे दूर हो सकते हैं।
6. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें, जिसमें MDR के लाभों और चुनौतियों दोनों को स्वीकार किया जाए। सरकार द्वारा संभावित प्रभावों को कम करने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों (जैसे छोटे लेनदेन के लिए छूट, कैपिंग, जागरूकता अभियान) का सुझाव दें। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की भूमिका का उल्लेख करें।
स्रोत: Times of India
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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