30 Jul वंदे मातरम् को मिलेगा राष्ट्रगान जैसा विधिक संरक्षण: जानिए क्या है राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – महत्त्वपूर्ण प्रावधान, संशोधन, संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व | GS Paper IV — लोक प्रशासन में नैतिकता – शासन व्यवस्था में ईमानदारी
- Prelims: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्र गान (जन गण मन), राष्ट्र गीत (वंदे मातरम्), संविधान सभा, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, आनंदमठ, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन (1896), स्वदेशी आंदोलन
- Essay: राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान और राष्ट्रीय एकता, कानून के माध्यम से राष्ट्रीय गौरव का संरक्षण: आवश्यकता और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ के समान विधिक संरक्षण प्रदान करता है, जिससे इसके गायन को बाधित करना या इसमें व्यवधान उत्पन्न करना दंडनीय अपराध बन जाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 हाल ही में प्रस्तुत किया गया है। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन करता है, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ को वही विधिक संरक्षण प्रदान करना है जो वर्तमान में राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है। इस संशोधन के तहत राष्ट्र गीत के गायन को जानबूझकर रोकना या उसके गायन में संलग्न सभा में व्यवधान उत्पन्न करना अब दंडनीय अपराध होगा।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971: यह अधिनियम भारतीय राष्ट्र गान के अनादर को रोकने के लिए विशिष्ट विधिक संरक्षण प्रदान करता है।
- संविधान सभा की बैठक (24 जनवरी, 1950): तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए इसे ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और दर्जा देने की बात कही थी।
- विधिक प्रावधानों में कमी: डॉ. राजेंद्र प्रसाद की घोषणा के बावजूद, राष्ट्र गीत को राष्ट्र गान के समान विशिष्ट वैधानिक संरक्षण प्रदान करने वाला कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था।
- वंदे मातरम् का इतिहास: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत पहली बार 1875 में साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ और बाद में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया।
- स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका: रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इसे संगीतबद्ध किया और 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार गाया गया।
- संशोधन का उद्देश्य: यह विधेयक राष्ट्र गीत को राष्ट्र गान के समान विधिक संरक्षण प्रदान करके इस लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने के लिए लाया गया है।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
- यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन का प्रस्ताव करता है।
- संशोधन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ के साथ-साथ राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी समान विधिक संरक्षण प्रदान करना है।
- विधेयक की धारा 3 में प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो जानबूझकर राष्ट्र गान अथवा राष्ट्र गीत के गायन को रोकता है, उसे दंडित किया जाएगा।
- इसके अतिरिक्त, जो कोई भी राष्ट्र गान अथवा राष्ट्र गीत का गायन करती किसी सभा में व्यवधान उत्पन्न करता है, वह भी दंडनीय होगा।
- दंड के प्रावधानों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है; यह तीन वर्ष तक के कारावास, अथवा जुर्माने, अथवा दोनों से दंडनीय रहेगा।
- धारा 3क (जो 2003 में जोड़ी गई थी) के अंतर्गत, धारा 2 या धारा 3 के अधीन दूसरी या उसके बाद की प्रत्येक दोषसिद्धि की स्थिति में कम-से-कम एक वर्ष के कारावास का अनिवार्य दंड यथावत् रहेगा।
- अब वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करने की पुनरावृत्ति करने वाले दोषियों पर भी यही अनिवार्य दंड लागू होगा।
- इस कानून को ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ कहा जाएगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता / प्रावधान | महत्व |
|---|---|
| संरक्षण का दायरा | राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 केवल राष्ट्र गान (जन गण मन) को विधिक संरक्षण देता था। संशोधन विधेयक इसे राष्ट्र गीत (वंदे मातरम्) तक भी विस्तारित करता है। |
| निषिद्ध आचरण | मूल अधिनियम राष्ट्र गान के गायन को रोकने या उसमें व्यवधान डालने को दंडनीय बनाता था। संशोधन विधेयक में राष्ट्र गीत के गायन को रोकने या उसमें व्यवधान डालने को भी दंडनीय बनाया गया है। |
| दंड | मूल अधिनियम और संशोधन विधेयक दोनों में दंड (तीन वर्ष तक का कारावास, जुर्माना, या दोनों) में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। |
| दोषसिद्धि की पुनरावृत्ति | मूल अधिनियम की धारा 3क के तहत, दूसरी या उसके बाद की दोषसिद्धि पर कम-से-कम एक वर्ष का कारावास अनिवार्य था। संशोधन विधेयक इस प्रावधान को राष्ट्र गीत के अपमान की पुनरावृत्ति पर भी लागू करता है। |
| संवैधानिक सभा का उल्लेख | संशोधन विधेयक डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 24 जनवरी, 1950 के वक्तव्य का हवाला देता है, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को जन गण मन के समान सम्मान देने की बात कही थी। |
महत्व
सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व
- यह विधेयक राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ को ‘जन गण मन’ के समान विधिक संरक्षण प्रदान कर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उसकी ऐतिहासिक भूमिका और सांस्कृतिक महत्व को औपचारिक रूप से मान्यता देता है।
- यह भारत की राष्ट्रीय पहचान के दो महत्वपूर्ण प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करता है, जो नागरिकों में राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना को सुदृढ़ करेगा।
विधिक स्पष्टता एवं समानता
- यह विधेयक उस विधिक कमी को दूर करता है जिसके तहत राष्ट्र गान को तो संरक्षण प्राप्त था, लेकिन राष्ट्र गीत को नहीं, जिससे दोनों राष्ट्रीय प्रतीकों के बीच समानता स्थापित होती है।
- यह राष्ट्र गीत के अपमान या उसके गायन में व्यवधान उत्पन्न करने वाले कृत्यों के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान स्थापित करता है, जिससे ऐसे मामलों में न्यायिक कार्यवाही आसान होगी।
ऐतिहासिक संदर्भ का सम्मान
- यह विधेयक संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उस वक्तव्य को कार्यान्वित करता है, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को राष्ट्र गान के समान दर्जा दिए जाने की बात कही थी, जिससे ऐतिहासिक प्रतिबद्धता पूरी होती है।
- यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के ‘प्रतिरोध के सशक्त प्रतीक’ के रूप में निभाई गई भूमिका को सम्मान देता है।
चुनौतियाँ
1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सम्मान
- कुछ आलोचक यह तर्क दे सकते हैं कि राष्ट्र गीत के गायन में व्यवधान को दंडनीय बनाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(ए)) पर अनुचित प्रतिबंध हो सकता है।
- यह संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान सुनिश्चित हो, लेकिन नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन न हो।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान: मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19)
2. कानून का दुरुपयोग
- किसी भी कानून की तरह, इस संशोधन का भी दुरुपयोग होने की संभावना रहती है, जहाँ छोटे-मोटे व्यवधानों को भी जानबूझकर किए गए अपराध के रूप में देखा जा सकता है।
- यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कानून का उपयोग केवल वास्तविक अपमान या व्यवधान के मामलों में ही हो, न कि असहमति को दबाने के लिए।
यूपीएससी लिंक: शासन: पारदर्शिता और जवाबदेही
3. जागरूकता और प्रवर्तन
- कानून के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए नागरिकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों दोनों के बीच पर्याप्त जागरूकता आवश्यक है।
- यह सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस और न्यायपालिका इस कानून की भावना को समझें और इसका निष्पक्ष रूप से प्रवर्तन करें।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: कानून और व्यवस्था
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| मौलिक अधिकारों पर प्रभाव | अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(ए)) पर संभावित प्रतिबंध की आशंका। |
| कानून के दुरुपयोग की संभावना | छोटे-मोटे व्यवधानों या असहमति को दबाने के लिए कानून का गलत इस्तेमाल होने का जोखिम। |
| परिभाषा की अस्पष्टता | ‘जानबूझकर रोकना’ या ‘व्यवधान उत्पन्न करना’ जैसे शब्दों की व्याख्या में भिन्नता हो सकती है, जिससे मनमानी की संभावना। |
| जागरूकता का अभाव | नागरिकों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच नए प्रावधानों के बारे में पर्याप्त जानकारी की कमी। |
आगे की राह
- कानून के प्रावधानों के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाएँ ताकि नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझ सकें।
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ ताकि वे नए प्रावधानों की सही व्याख्या और निष्पक्ष कार्यान्वयन सुनिश्चित कर सकें।
- यह सुनिश्चित किया जाए कि कानून का उपयोग केवल वास्तविक अपमान या व्यवधान के मामलों में ही हो, न कि असहमति या आलोचना को दबाने के लिए।
- संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ और ‘सदाचार’ के आधार पर लगाए गए उचित प्रतिबंधों के दायरे में ही इस कानून को लागू किया जाए।
- समय-समय पर कानून के प्रभाव की समीक्षा की जाए ताकि इसके कार्यान्वयन में आने वाली किसी भी समस्या का समाधान किया जा सके।
- न्यायपालिका को इस कानून की व्याख्या करते समय मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय सम्मान के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 · राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 · राष्ट्र गान · राष्ट्र गीत वंदे मातरम् · संवैधानिक संरक्षण · समान दर्जा · अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता · मूल कर्तव्य · संविधान सभा · डॉ. राजेंद्र प्रसाद
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 19(2): अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध
अवधारणा प्रवाह
संविधान सभा ने वंदे मातरम् को राष्ट्र गान के समान दर्जा देने की बात कही। → राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 केवल राष्ट्र गान को संरक्षण देता था। → राष्ट्र गीत को विधिक संरक्षण का अभाव महसूस किया गया। → राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया गया। → विधेयक राष्ट्र गीत को राष्ट्र गान के समान विधिक संरक्षण प्रदान करता है। → राष्ट्र गीत के अपमान या व्यवधान पर दंडनीय अपराध का प्रावधान किया गया।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 केवल राष्ट्र गान को विधिक संरक्षण प्रदान करता है।
2. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 राष्ट्र गीत वंदे मातरम् को राष्ट्र गान के समान ही विधिक संरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव करता है।
3. वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और इसे पहली बार रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने संगीतबद्ध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मूल अधिनियम केवल राष्ट्र गान को संरक्षण देता था। कथन 2 सही है क्योंकि विधेयक का उद्देश्य राष्ट्र गीत को समान संरक्षण देना है। कथन 3 भी सही है, वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और इसे पहली बार रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने संगीतबद्ध किया था।
Q2. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन करता है।
- यह राष्ट्र गीत वंदे मातरम् को राष्ट्र गान जन गण मन के समान विधिक संरक्षण प्रदान करता है।
- इस संशोधन के तहत राष्ट्र गीत के गायन को जानबूझकर रोकना दंडनीय अपराध नहीं होगा।
- संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को वंदे मातरम् को जन गण मन के समान सम्मान देने की बात कही थी।
उत्तर: इस संशोधन के तहत राष्ट्र गीत के गायन को जानबूझकर रोकना दंडनीय अपराध नहीं होगा। — विकल्प C सही नहीं है। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्र गीत के गायन को जानबूझकर रोकना अथवा उसके गायन में संलग्न सभा में व्यवधान उत्पन्न करना दंडनीय अपराध होगा। अन्य सभी कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों की चर्चा कीजिए। राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत को समान विधिक संरक्षण प्रदान करने के औचित्य का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत विधेयक के उद्देश्य और पृष्ठभूमि से करें। विधेयक के प्रमुख प्रावधानों (धारा 3 में संशोधन, शामिल आचरण, दंड) का विस्तार से उल्लेख करें। दूसरे भाग में, राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत को समान विधिक संरक्षण प्रदान करने के औचित्य का विश्लेषण करें। इसमें संविधान सभा की चर्चाओं, डॉ. राजेंद्र प्रसाद के वक्तव्य, स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् की भूमिका और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के महत्व को शामिल करें। साथ ही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) जैसे मूल अधिकारों के साथ इसके संभावित टकराव या संतुलन पर भी विचार करें। न्यायिक निर्णयों (यदि कोई हों) का उल्लेख करें और एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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