वाराणसी के घाटों पर बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चुनौतियां, छतों पर हो रही अंत्येष्टि

Cremations shift to rooftops as rising Ganga swallows Varanasi’s iconic ghats — diagram

वाराणसी के घाटों पर बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चुनौतियां, छतों पर हो रही अंत्येष्टि

Varanasi ghats flood impactGhatsMannikarnikaDashashwamedhWater levelRisingSubmergedActivitiesCremationsGanga AartiImpactDisruptedEconomic loss
Varanasi ghats flood impact

✎ गंगा नदी में बढ़ते जलस्तर से वाराणसी के घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान, अंतिम संस्कार और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, जो जलवायु परिवर्तन और शहरी नियोजन की चुनौतियों को उजागर करता है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति, भूगोल  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी
  • Prelims: गंगा नदी, वाराणसी के घाट, बाढ़, आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, शहरी बाढ़, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF)
  • Essay: नदियाँ, संस्कृति और शहरीकरण का अंतर्संबंध, जलवायु परिवर्तन: भारत के शहरों पर बढ़ता खतरा

त्वरित पुनरावृत्ति: गंगा नदी में बढ़ते जलस्तर से वाराणसी के घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान, अंतिम संस्कार और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, जो जलवायु परिवर्तन और शहरी नियोजन की चुनौतियों को उजागर करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर भारी वर्षा के कारण बढ़ गया है, जिससे कई प्रमुख घाट जलमग्न हो गए हैं। मणिकर्णिका और दशाश्वमेध घाट जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर अंतिम संस्कार और गंगा आरती जैसे धार्मिक अनुष्ठान ऊँचे स्थानों, जैसे छतों पर, किए जा रहे हैं। इस स्थिति ने स्थानीय निवासियों, तीर्थयात्रियों और नाव संचालकों के लिए गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं, जिससे दैनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

पृष्ठभूमि

  • गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदियों में से एक है, जो लाखों लोगों के लिए जीवनदायिनी है।
  • वाराणसी, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित एक प्राचीन शहर है और हिंदू धर्म के सात पवित्र शहरों में से एक है।
  • शहर के घाट, जैसे मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) और दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh Ghat), धार्मिक अनुष्ठानों, अंतिम संस्कारों और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र हैं।
  • मानसून के मौसम में भारी वर्षा के कारण गंगा नदी का जलस्तर बढ़ना एक सामान्य घटना है, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी तीव्रता और आवृत्ति में वृद्धि देखी गई है।
  • नदी के बढ़ते जलस्तर से न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ बाधित होती हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, विशेषकर नाव संचालकों और घाटों पर निर्भर छोटे व्यवसायों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • आपदा प्रबंधन (Disaster Management) एजेंसियाँ, जैसे राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), ऐसी स्थितियों में बचाव और राहत कार्यों के लिए सक्रिय रहती हैं।

गंगा नदी में बाढ़ और इसके प्रभाव

  • गंगा नदी में बाढ़ मुख्य रूप से मानसून के मौसम में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा और सहायक नदियों से आने वाले अत्यधिक पानी के कारण आती है।
  • वाराणसी में घाटों का जलमग्न होना एक आवर्ती समस्या है, जो शहरी बुनियादी ढाँचे और धार्मिक प्रथाओं को प्रभावित करती है।
  • मणिकर्णिका घाट, जो एक प्रमुख श्मशान घाट है, पर अंतिम संस्कार के लिए स्थान की कमी हो जाती है, जिससे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • दशाश्वमेध घाट पर प्रसिद्ध गंगा आरती को ऊँचे स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ता है, जिससे इसकी पारंपरिक भव्यता प्रभावित होती है।
  • नाव सेवाएँ निलंबित होने से स्थानीय परिवहन और पर्यटन उद्योग पर सीधा असर पड़ता है, जिससे हजारों नाव संचालकों और संबंधित व्यवसायों की आजीविका प्रभावित होती है।
  • बढ़ता जलस्तर घाटों के बीच संपर्क को बाधित करता है, जिससे लोगों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है और सुरक्षा जोखिम बढ़ जाते हैं।
  • स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल, जैसे जल पुलिस, NDRF और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC), स्थिति की निगरानी करते हैं और एहतियाती उपाय करते हैं।
  • दीर्घकालिक समाधानों में नदी तट प्रबंधन, शहरी नियोजन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूलन रणनीतियाँ शामिल हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार वाराणसी के सबसे पुराने श्मशान घाटों में से एक, जहाँ प्रतिदिन लगभग 100 शवों का दाह संस्कार होता है।
दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती प्रसिद्ध धार्मिक अनुष्ठान जो अब जलस्तर बढ़ने के कारण छत से आयोजित किया जा रहा है।
नाव सेवाओं का निलंबन सुरक्षा कारणों से गंगा नदी में नावों का संचालन बंद, जिससे स्थानीय आजीविका प्रभावित।
जल स्तर में वृद्धि गंगा नदी का जल स्तर खतरे के निशान 71.26 मीटर के करीब, जिससे घाटों का निचला हिस्सा जलमग्न।
आपदा प्रतिक्रिया जल पुलिस, NDRF और PAC की टीमें घाटों पर निगरानी कर रही हैं।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • गंगा नदी प्रणाली का पारिस्थितिक संतुलन भारतीय उपमहाद्वीप के लिए महत्वपूर्ण है, और इसका अत्यधिक जलस्तर या प्रदूषण इस संतुलन को बिगाड़ सकता है।
  • नदी के जलस्तर में वृद्धि, विशेषकर मानसून के दौरान, बाढ़ के मैदानों और आर्द्रभूमियों के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती है।

सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व

  • वाराणसी के घाटों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है, जहाँ लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।
  • दाह संस्कार और गंगा आरती जैसे अनुष्ठानों में व्यवधान से स्थानीय समुदायों और धार्मिक भावनाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

आर्थिक महत्व

  • नाव संचालन, चाय की दुकानें और अन्य विक्रेता जैसे कई छोटे व्यवसाय गंगा नदी और घाटों पर निर्भर करते हैं।
  • पर्यटन और तीर्थयात्रा से जुड़ी आर्थिक गतिविधियाँ जलस्तर बढ़ने के कारण बाधित होती हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

आपदा प्रबंधन

  • नदी के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न स्थिति आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों की प्रभावशीलता का परीक्षण करती है।
  • स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत बलों की त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वय आवश्यक हो जाता है।

चुनौतियाँ

1. शहरी बाढ़ और जल निकासी

  • भारी बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण शहरी क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बुनियादी ढाँचा और जनजीवन प्रभावित होता है।
  • शहर की जल निकासी प्रणालियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे जलभराव और संबंधित समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

2. आजीविका पर प्रभाव

  • नाविकों, विक्रेताओं और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों की आजीविका सीधे तौर पर नदी के सामान्य संचालन पर निर्भर करती है।
  • सेवाओं के निलंबन से इन समुदायों के लिए आर्थिक संकट पैदा होता है।

3. बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा

  • घाटों, सड़कों और अन्य तटीय बुनियादी ढाँचे को बढ़ते जलस्तर और कटाव से नुकसान का खतरा होता है।
  • दीर्घकालिक समाधानों के अभाव में यह समस्या हर साल दोहराई जाती है।

4. सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता

  • बाढ़ का पानी पीने के पानी के स्रोतों को दूषित कर सकता है, जिससे जल-जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • शमशान घाटों पर दाह संस्कार के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं से स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

5. सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठानों में व्यवधान

  • धार्मिक अनुष्ठानों जैसे गंगा आरती और दाह संस्कार के लिए वैकल्पिक स्थानों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं पर असर पड़ता है।
  • घाटों का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है, और उनका जलमग्न होना एक गंभीर सांस्कृतिक चिंता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार निचले हिस्से के जलमग्न होने से दाह संस्कार छतों पर स्थानांतरित, जिससे असुविधा और प्रतीक्षा का समय बढ़ सकता है।
नाव सेवाओं का निलंबन सुरक्षा कारणों से नाव संचालन बंद, जिससे नाव चालकों और संबंधित व्यवसायों की आजीविका प्रभावित।
दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती जलस्तर बढ़ने के कारण आरती को निचले प्लेटफॉर्म से छत पर स्थानांतरित करना पड़ा, जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा।
घाटों के बीच संपर्क का टूटना जलस्तर बढ़ने से घाटों के बीच आवागमन बाधित, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को परेशानी।
पुनरावर्ती समस्या यह समस्या हर साल मानसून में होती है, जिससे स्थायी समाधान की आवश्यकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme)

आगे की राह

  • नदी के किनारे के बुनियादी ढाँचे को बाढ़ प्रतिरोधी बनाने के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
  • शहरी जल निकासी प्रणालियों को उन्नत करना ताकि भारी बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के प्रभाव को कम किया जा सके।
  • आपदा प्रबंधन योजनाओं को मजबूत करना, जिसमें पूर्व चेतावनी प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र शामिल हों।
  • नाविकों और घाटों पर निर्भर अन्य व्यवसायों के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसरों या वित्तीय सहायता पर विचार करना।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) के आधार पर नदी के तटबंधों और कटाव नियंत्रण उपायों को लागू करना।
  • जन जागरूकता अभियान चलाना ताकि लोग बाढ़ के दौरान सुरक्षित रहने के उपायों से अवगत हों और प्रशासन का सहयोग करें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जलवायु परिवर्तन · शहरी बाढ़ · आपदा प्रबंधन · नदी प्रदूषण · पर्यावरण संरक्षण · सतत विकास · गंगा नदी · शहरी नियोजन · बुनियादी ढाँचा · जलवायु अनुकूलन · नदी बेसिन प्रबंधन · संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार (स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित जीवन का अधिकार)
  • अनुच्छेद 243W: नगर पालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व (शहरी नियोजन और जल निकासी)

अवधारणा प्रवाह

भारी वर्षा  →  गंगा नदी का जलस्तर बढ़ना  →  वाराणसी के घाटों का जलमग्न होना  →  धार्मिक अनुष्ठानों और नाव सेवाओं में व्यवधान  →  स्थानीय आजीविका और पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव  →  आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा की चुनौती

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. गंगा नदी का उद्गम गंगोत्री ग्लेशियर से होता है।
3. भारत में बाढ़ प्रबंधन केवल केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। NDRF गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। कथन 2 सही है। गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड में गंगोत्री ग्लेशियर से होता है। कथन 3 गलत है। भारत में बाढ़ प्रबंधन केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की एक संयुक्त जिम्मेदारी है, जिसमें राज्य सरकारें प्राथमिक भूमिका निभाती हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

  1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: ऊर्जा सुरक्षा
  2. नमामि गंगे कार्यक्रम: गंगा नदी का संरक्षण
  3. स्मार्ट सिटी मिशन: शहरी विकास
  4. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: ग्रामीण विद्युतीकरण

उत्तर: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: ग्रामीण विद्युतीकरण — प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना है, न कि ग्रामीण विद्युतीकरण।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में शहरी बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि हुई है। वाराणसी में गंगा नदी के बढ़ते जल स्तर के संदर्भ में, शहरी बाढ़ के कारणों और इसके प्रबंधन के लिए आवश्यक उपायों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: शहरी बाढ़ की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता का संक्षिप्त परिचय, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में। वाराणसी में गंगा के बढ़ते जल स्तर की घटना का उल्लेख।
2. शहरी बाढ़ के कारण:
क. प्राकृतिक कारण: अत्यधिक वर्षा, नदी का बढ़ता जल स्तर (जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर पिघलना), अपर्याप्त जल निकासी क्षमता।
ख. मानवजनित कारण: अनियोजित शहरीकरण, अतिक्रमण, जल निकायों का संकुचन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की कमी, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा।
3. शहरी बाढ़ के प्रभाव: जान-माल का नुकसान, आर्थिक व्यवधान, स्वास्थ्य संकट, सामाजिक विस्थापन, सांस्कृतिक स्थलों पर प्रभाव (जैसे वाराणसी के घाट)।
4. प्रबंधन के लिए आवश्यक उपाय:
क. संरचनात्मक उपाय: बेहतर जल निकासी प्रणाली, बाढ़ नियंत्रण संरचनाएँ (तटबंध), जल संचयन, वेटलैंड्स का संरक्षण।
ख. गैर-संरचनात्मक उपाय: प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, आपदा प्रबंधन योजनाएँ, भूमि उपयोग नियोजन, जन जागरूकता, क्षमता निर्माण।
ग. नीतिगत और संस्थागत उपाय: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की भूमिका, नमामि गंगे जैसे कार्यक्रम, जलवायु अनुकूलन रणनीतियाँ, अंतर-एजेंसी समन्वय।
5. समालोचनात्मक परीक्षण: मौजूदा उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन, चुनौतियों (निधियों की कमी, राजनीतिक इच्छाशक्ति, कार्यान्वयन अंतराल) और आगे की राह पर चर्चा। स्थायी और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।
6. निष्कर्ष: एक व्यापक और बहु-आयामी रणनीति की आवश्यकता पर जोर, जिसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और अनुकूलन करने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी शामिल हो।

स्रोत: The Indian Express

Uttar Pradesh PCS (UPPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों के जलमग्न होने के कारण, स्थानीय प्रशासन द्वारा अपनाई गई नवीनतम शवदाह पद्धति निम्नलिखित में से कौन सी है?

  1. घाटों पर शवदाह की जगह घरों की छतों पर शवदाह करना
  2. गंगा के जलस्तर में वृद्धि को रोकने के लिए बाँधों का निर्माण
  3. घाटों पर शवदाह को पूर्णतः प्रतिबंधित कर देना
  4. गंगा में शव प्रवाहित करने की परंपरा को पुनर्जीवित करना

उत्तर: घाटों पर शवदाह की जगह घरों की छतों पर शवदाह करना — वाराणसी में बढ़ते जलस्तर के कारण घाटों के जलमग्न होने से बचने हेतु प्रशासन ने घरों की छतों पर शवदाह की पद्धति अपनाई है।

Mains: वाराणसी के घाटों और गंगा नदी के संरक्षण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए। साथ ही, बताइए कि इस संकट ने स्थानीय संस्कृति और पर्यटन पर किस प्रकार प्रभाव डाला है?


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment