25 Jul विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) : वैज्ञानिक नवाचार और नीतिगत प्रभाव का एक दशक
पाठ्यक्रम – सामान्य अध्ययन – 3 – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- शीतकालीन कोहरा प्रयोग (WiFEX): वैज्ञानिक नवाचार और नीतिगत प्रभाव का एक दशक
प्रारंभिक परीक्षा के लिए :
शीतकालीन कोहरा प्रयोग (WiFEX) क्या है? भारत में परिवहन सुरक्षा के लिए इसके उद्देश्यों, प्रमुख विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।
मुख्य परीक्षा के लिए :
WiFEX को अपने कार्यान्वयन और विस्तार में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
ख़बरों में क्यों?
- हाल ही में वर्ष 2015 में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) से शुरू किया गया विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) अब दस वर्ष पूरे कर चुका है। यह उत्तर भारत में घने शीतकालीन कोहरे पर आधारित अग्रणी अनुसंधान परियोजना है।
- इसे विश्व की सबसे व्यापक और दीर्घकालिक कोहरा अनुसंधान पहलों में से एक माना जाता है, जो विशेष रूप से इंडो-गैंगेटिक मैदान पर केंद्रित है।
- इस परियोजना ने कोहरे की गतिशीलता, विविधता और सूक्ष्म भौतिकी को समझने में उल्लेखनीय प्रगति की है। इससे प्राप्त ज्ञान ने उच्च-रिज़ॉल्यूशन कोहरा पूर्वानुमान मॉडल के विकास में सहायता की है, जिसका उपयोग अब विमानन और परिवहन के क्षेत्र में किया जा रहा है।
विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX ) का परिचय :
- उद्देश्य : WiFEX का मुख्य उद्देश्य इंडो-गैंगेटिक मैदान में घने शीतकालीन कोहरे की उत्पत्ति, संरचना और विविधता का अध्ययन करना है।
- शुरुआत वर्ष : इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी।
- स्थान : पहले इसे दिल्ली के IGI हवाई अड्डे से शुरू किया गया, फिर इसका विस्तार नोएडा के जेवर हवाई अड्डे और हरियाणा के हिसार तक किया गया।
- नेतृत्व संस्था : इस परियोजना का नेतृत्व भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे कर रहा है।
- संलग्न मंत्रालय : यह परियोजना पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अंतर्गत संचालित है।
- सहयोगी संस्थाएँ : भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) इसमें सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
WiFEX का मुख्य उद्देश्य :
- कोहरे की सूक्ष्म भौतिकी को समझना – तापमान उलटना (temperature inversion), आर्द्रता और वायुमंडलीय अशांति के स्वरूपों का अध्ययन करना।
- कोहरे की विविधता का विश्लेषण करना – यह जानना कि किस तरह कोहरे के स्वरूप भौगोलिक और समय की दृष्टि से बदलते हैं।
- उच्च सटीकता वाले पूर्वानुमान मॉडल विकसित करना – त्वरित (nowcasting: 0–6 घंटे) और लघुकालिक भविष्यवाणी के लिए मॉडल तैयार करना।
- परिवहन सुरक्षा को सुधारना – दृश्यता की कमी के कारण उड़ानों, ट्रेनों और सड़क परिवहन में होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना।
- आपदा तैयारी में सहायता करना – कोहरे के पूर्वानुमानों को आपदा चेतावनी प्रणालियों में एकीकृत करना।
- विज्ञान और नीति के बीच समन्वय स्थापित करना – हवाई अड्डा प्राधिकरणों, शहरी योजनाकारों और नीति निर्माताओं को वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध कराना।
- स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ाना – भारत के लिए क्षेत्र-विशेष पूर्वानुमान मॉडल और आंकड़े तैयार करना।
WiFEX की प्रमुख विशेषताएँ :
- उन्नत उपकरणों का प्रयोग – माइक्रोमौसमीय टावर, सीलोमीटर और LIDAR का प्रयोग कर कोहरे से संबंधित आंकड़े एकत्र किए जाते हैं।
- उच्च आवृत्ति पर वास्तविक समय की निगरानी – तापमान प्रोफाइल, हवा की गति, अशांति और एरोसोल्स का सतत डेटा संग्रहण किया जाता है।
- व्यापक डेटा संग्रह – मृदा ऊष्मा प्रवाह, सापेक्षिक आर्द्रता, दृश्यता और प्रदूषकों की जानकारी एकत्र की जाती है।
- रणनीतिक स्थान चयन – पहले IGI हवाई अड्डे पर आरंभ हुआ और बाद में जेवर व हिसार तक इसे विस्तारित किया गया है।
- कोहरे के जीवन चक्र पर ध्यान – कोहरे के बनने, तीव्र होने, टिकने और समाप्त होने की प्रक्रिया का विश्लेषण किया जाता है।
- पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन – इसके तहत शहरी ऊष्मा द्वीप, प्रदूषण और भूमि उपयोग परिवर्तन का कोहरे पर प्रभाव का अध्ययन किया जाता है।
- परिचालन पूर्वानुमान मॉडल – 3 किमी रिज़ॉल्यूशन वाला संभाव्य कोहरा पूर्वानुमान मॉडल विकसित किया गया, जिसकी सटीकता 85% तक है।
WiFEX की प्रमुख उपलब्धियाँ :
- उच्च-रिज़ॉल्यूशन पूर्वानुमान मॉडल :
- रिज़ॉल्यूशन: 3 किमी ग्रिड
- सटीकता: 85% से अधिक (घने कोहरे की स्थिति में)
- उपयोग: कोहरे के आरंभ, अवधि और समाप्ति की भविष्यवाणी करता है।
- परिचालन लाभ :
- उड़ानों में देरी और डायवर्जन की घटनाएँ कम होती हैं।
- रनवे की सुरक्षा में सुधार होता है।
- हवाई अड्डों और वायु यातायात नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर चेतावनी प्रणाली विकसित हुई है।
- वैज्ञानिक अंतर्दृष्टियाँ :
- कोहरे के निर्माण में एरोसोल्स और सूक्ष्म कणों की भूमिका स्पष्ट हुई है।
- शहरी ऊष्मा द्वीप को कोहरे की तीव्रता में योगदानकर्ता के रूप में पहचाना गया।
- शहरीकरण और वनों की कटाई जैसे भूमि उपयोग परिवर्तनों के प्रभाव को समझा गया।
WiFEX का व्यापक सामाजिक एवं पर्यावरणीय महत्व :
- जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम : जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव और उत्सर्जन में वृद्धि से कोहरे की तीव्रता व आवृत्ति बढ़ रही है।
- शहरीकरण और ऊष्मा द्वीप : अनियोजित शहरी विकास से तापमान ग्रेडिएंट में बदलाव आता है जिससे कोहरे का स्वरूप प्रभावित होता है।
- वायु प्रदूषण और धुंध : WiFEX के अनुसार PM2.5 और PM10 जैसे कणों का कोहरा और स्मॉग बनने में गहरा संबंध है।
- आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) : NDMA और IMD की चेतावनी प्रणालियों को WiFEX के आंकड़ों से मजबूती मिली है।
- परिवहन और बुनियादी ढांचा योजना : यह विमानन, रेलवे और राजमार्ग क्षेत्र में कोहरा-प्रभावित व्यवधानों से निपटने में सहायक होता है।
- विज्ञान और नीति का समन्वय : यह कार्यक्रम वैज्ञानिक अनुसंधान और नीतिगत निर्णयों के बीच सेतु का कार्य करता है।
- सतत शहरी नियोजन : WiFEX के निष्कर्ष शहरी डिज़ाइन, हरित संरचना और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को दिशा प्रदान करते हैं।
अनुसंधान परियोजना से जुड़ी मुख्य चुनौतियाँ :
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मौसम संबंधी उपकरणों की सीमित उपलब्धता के कारण वहाँ से संबंधित आंकड़ों का अभाव देखा जाता है, जिससे पूर्वानुमान प्रणाली में अंधे क्षेत्र (blind spots) बनते हैं।
- तेजी से और अनियोजित ढंग से हो रहे शहरीकरण के कारण स्थानीय सूक्ष्म जलवायु में परिवर्तन हो रहे हैं, जिससे कोहरे की भविष्यवाणी करना अधिक जटिल होता जा रहा है।
- आम जनता और परिवहन संचालन से जुड़े व्यक्तियों में कोहरे के पूर्वानुमानों के प्रति जागरूकता की कमी है, जिससे समय पर चेतावनी का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता।
- विमानन, रेलवे और सड़क परिवहन प्रणालियों में कोहरे से संबंधित चेतावनी तंत्र का समुचित एकीकरण अभी भी नहीं हो पाया है, जिससे इन प्रणालियों की कार्यकुशलता प्रभावित होती है।
- कोहरे की निगरानी के लिए आवश्यक उच्च तकनीकी उपकरणों की लागत अधिक होती है, और उनके रखरखाव में भी कई तकनीकी और वित्तीय चुनौतियाँ आती हैं।
- भारत के विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक विशेषताएँ, भूमि उपयोग और मौसम संबंधी विविधताओं के कारण पूरे देश के लिए एक समान कोहरा पूर्वानुमान मॉडल लागू कर पाना अत्यंत कठिन कार्य है।
- पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के साथ सीमापार डेटा साझाकरण और संयुक्त अनुसंधान में निरंतरता का अभाव है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर कोहरे के समग्र अध्ययन में बाधा उत्पन्न होती है।
आगे की राह :
- कोहरे के पूर्वानुमान को अधिक सटीक और व्यावहारिक बनाने के लिए, रनवे-विशिष्ट स्थानीय पूर्वानुमान प्रणालियों को और अधिक विस्तारित किया जाना चाहिए ताकि हवाई अड्डों पर विशेष परिस्थितियों के अनुसार चेतावनी दी जा सके।
- मौसम पूर्वानुमान की गुणवत्ता और अनुकूलन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी आधुनिक तकनीकों को WiFEX मॉडल में शामिल किया जाना आवश्यक है।
- WiFEX की पहुंच को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसे पूर्वी भारत, उत्तर-पूर्वी राज्यों और हिमालयी तलहटी जैसे कोहरा-प्रवण क्षेत्रों तक विस्तार देना चाहिए।
- क्षेत्रीय और वैश्विक पूर्वानुमान क्षमता को मजबूत करने के लिए WiFEX को अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों के साथ डेटा साझा करने और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं में सहयोग करना चाहिए।
- कोहरे से उत्पन्न यातायात व्यवधानों को कम करने के उद्देश्य से, WiFEX आधारित पूर्वानुमान प्रणाली को भारत की राष्ट्रीय परिवहन योजना में एकीकृत किया जाना चाहिए।
- कोहरे की निगरानी और विश्लेषण की दक्षता को बढ़ाने के लिए नवीनतम मौसम निगरानी उपकरणों की स्थापना की जानी चाहिए तथा डेटा संग्रह नेटवर्क को और अधिक व्यापक बनाया जाना चाहिए।
- कोहरे से जुड़ी चेतावनियों को आम नागरिकों और परिवहन से जुड़े ऑपरेटरों तक प्रभावी रूप से पहुँचाने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, डैशबोर्ड और SMS अलर्ट जैसी सहज जन-संचार प्रणालियाँ विकसित की जानी चाहिए।
निष्कर्ष :
- विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) भारत में वायुमंडलीय विज्ञान, मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरा है।
- इस परियोजना ने उत्तर भारत में शीत ऋतु के दौरान होने वाले घने कोहरे जैसे अनिश्चित और जटिल प्राकृतिक घटनाक्रम को वैज्ञानिक रूप से समझने योग्य और पूर्वानुमान योग्य तत्त्व में परिवर्तित कर दिया है।
- WiFEX की सफलता का आधार उन्नत तकनीकी उपकरणों का प्रयोग, गहन वैज्ञानिक अनुसंधान, और नीति-निर्माताओं के साथ सशक्त समन्वय में निहित है।
- इस पहल के माध्यम से अब कोहरे के गठन, तीव्रता, अवधि और लोप होने की प्रक्रिया को अधिक गहराई से समझा जा सका है, जिससे समयबद्ध चेतावनियाँ और परिवहन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी है।
- जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और अनियोजित शहरीकरण के बढ़ते प्रभावों के बीच, WiFEX एक ऐसा डेटा-संपन्न और नीति-संवेदनशील मॉडल प्रस्तुत करता है, जिसे न केवल भारत के अन्य क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है, बल्कि वैश्विक संदर्भों में भी अपनाया जा सकता है।
- यह पहल वैज्ञानिक शोध और जनहित आधारित नीति निर्माण के बीच एक सफल सेतु के रूप में उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसके साथ ही बदलते जलवायु, प्रदूषण और शहरी विस्तार के दौर में, WiFEX एक प्रमाण आधारित समाधान प्रदान करता है।
स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
- इसका समन्वय भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान द्वारा किया जाता है।
- इसका प्रमुख फोकस इंडो-गैंगेटिक मैदान में ग्रीष्मकालीन धूल भरी आँधियों के पूर्वानुमान पर है।
- इसने 3 किमी रिज़ॉल्यूशन वाला कोहरा पूर्वानुमान मॉडल विकसित किया है।
- इसके निष्कर्ष केवल विमानन पूर्वानुमानों के लिए प्रयुक्त होते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों के आधार पर सही विकल्प का चयन कीजिए:
A. केवल 1 और 3
B. केवल 1, 2 और 4
C. केवल 2 और 3
D. केवल 1, 3 और 4
सही उत्तर – A
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (WiFEX) क्या है? भारत में मौसम पूर्वानुमान, आपदा तैयारी और जनसुरक्षा के क्षेत्र में इसकी भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। इस परियोजना से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और उसके समाधान के प्रमुख उपायों से संबंधित सुझाव दीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

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