संशोधित ‘उड़ान’ योजना: क्षेत्रीय हवाई संपर्क विस्तार पर कार्यशाला

संशोधित 'उड़ान' योजना: क्षेत्रीय हवाई संपर्क विस्तार पर कार्यशाला — Airports in India

संशोधित ‘उड़ान’ योजना: क्षेत्रीय हवाई संपर्क विस्तार पर कार्यशाला

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बुनियादी ढाँचा, निवेश मॉडल, विकास)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, विकास प्रक्रियाएं)  |  GS Paper I — भूगोल (परिवहन और संचार)
  • Prelims: उड़ान योजना, संशोधित उड़ान, नागर विमानन नीति 2016, क्षेत्रीय हवाई संपर्क, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, आर्थिक विकास
  • Essay: भारत के आर्थिक विकास में बुनियादी ढांचे की भूमिका: एक क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य, कनेक्टिविटी से समृद्धि तक: भारत के विकास पथ में विमानन क्षेत्र का योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: उड़ान योजना भारत में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने, अप्रयुक्त हवाई अड्डों को पुनर्जीवित करने और हवाई यात्रा को आम आदमी के लिए किफायती बनाने की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो संतुलित क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समावेशन का मार्ग प्रशस्त करती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘संशोधित उड़ान’ योजना पर हितधारकों की एक कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य देश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क की भविष्य की योजना पर विचार-विमर्श करना और विमानन उद्योग को संशोधित उड़ान दिशानिर्देश प्रस्तुत करना था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई, 2026 को जोधपुर हवाई अड्डे से ‘संशोधित उड़ान’ योजना का शुभारंभ किया था, जो क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने के सरकार के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में हवाई अड्डों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि: 2001 में 65 से बढ़कर 2014 में 74 और पिछले 12 वर्षों में 90 अप्रयुक्त/अनुपयोगी हवाई पट्टियों को पुनर्संचालित करके कुल 164+ परिचालन हवाई अड्डे।
  • राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति 2016: इस नीति ने भारत के नागरिक उड्डयन परिदृश्य को बदल दिया, जिससे उड़ान योजना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • उड़ान योजना का शुभारंभ: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘हवाई चप्पल से हवाई जहाज’ के सपने को साकार करने के उद्देश्य से शुरू की गई।
  • घरेलू हवाई यातायात में वृद्धि: मई 2026 में 1.5 करोड़ से अधिक यात्रियों के साथ अब तक का सबसे अधिक मासिक घरेलू हवाई यातायात दर्ज किया गया।
  • क्षेत्रीय असंतुलन का समाधान: पहले हवाई यातायात मुख्य रूप से शीर्ष छह हवाई अड्डों पर केंद्रित था, जिससे द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में हवाई सेवा कम थी।
  • संशोधित उड़ान का शुभारंभ: 4 जुलाई, 2026 को जोधपुर हवाई अड्डे से प्रधानमंत्री द्वारा ‘संशोधित उड़ान’ योजना का शुभारंभ किया गया।

उड़ान (UDAN) योजना क्या है?

  • UDAN का पूर्ण रूप ‘उड़े देश का आम नागरिक’ है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (RCS) के तहत एक प्रमुख पहल है।
  • इसका उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ाना और हवाई यात्रा को आम आदमी के लिए किफायती बनाना है।
  • यह योजना 2016 की राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति का एक प्रमुख घटक है।
  • यह योजना अप्रयुक्त और कम उपयोग वाले हवाई अड्डों को पुनर्जीवित करके क्षेत्रीय हवाई मार्गों पर कनेक्टिविटी प्रदान करने पर केंद्रित है।
  • यह व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) तंत्र के माध्यम से एयरलाइंस को प्रोत्साहन प्रदान करती है ताकि क्षेत्रीय मार्गों पर किराए को किफायती रखा जा सके।
  • योजना के तहत, एक निश्चित संख्या में सीटें रियायती किराए पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे आम जनता के लिए हवाई यात्रा सुलभ हो सके।
  • इसका लक्ष्य संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना और देश के हर कोने तक विमानन का लाभ पहुंचाना है।
  • संशोधित उड़ान योजना पिछले चरणों की सीख पर आधारित है और इसमें हितधारकों की प्रतिक्रिया के आधार पर सुधार किए गए हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा के विमानन नेटवर्क से जोड़ना।
अप्रयुक्त/अनुपयोगी हवाई पट्टियों का पुनर्संचालन मौजूदा बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग और नए हवाई अड्डों के विकास की लागत को कम करना।
व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) एयरलाइंस को क्षेत्रीय मार्गों पर परिचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना, जिससे किराए किफायती रहें।
किफायती किराए आम आदमी के लिए हवाई यात्रा को सुलभ बनाना, ‘हवाई चप्पल से हवाई जहाज’ के सपने को साकार करना।
संतुलित क्षेत्रीय विकास आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, पर्यटन को प्रोत्साहन देना और रोजगार के अवसर पैदा करना।
उड़ान यात्री कैफे हवाई अड्डों पर यात्रियों के लिए किफायती जलपान विकल्प प्रदान करना, यात्रा अनुभव को बेहतर बनाना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार से व्यापार, वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को गति मिलती है।
  • नए हवाई अड्डों और मार्गों के खुलने से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, विशेषकर द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में।
  • कृषि उत्पादों (जैसे दरभंगा की शाही लीची) और अन्य वस्तुओं के निर्यात को सुविधाजनक बनाता है, जिससे किसानों और स्थानीय उद्योगों को लाभ होता है।
  • निवेश को आकर्षित करता है और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देता है, जैसा कि किशनगढ़ के संगमरमर उद्योग के मामले में देखा गया है।

सामाजिक महत्व

  • आम आदमी के लिए हवाई यात्रा को सुलभ बनाकर सामाजिक समानता को बढ़ावा देता है, जिससे ‘हवाई चप्पल से हवाई जहाज’ का सपना साकार होता है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में सुधार करता है।
  • तीर्थयात्रा और पर्यटन को बढ़ावा देता है, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
  • लोगों की मानसिकता में बदलाव लाता है, जहां हवाई यात्रा अब केवल अभिजात वर्ग तक सीमित नहीं है।

रणनीतिक महत्व

  • देश के भीतर बेहतर कनेक्टिविटी से आपातकालीन सेवाओं और आपदा राहत कार्यों में तेजी आती है।
  • यह योजना क्षेत्रीय असंतुलन को कम करके समावेशी विकास सुनिश्चित करती है, जिससे देश के सभी हिस्सों को विकास का लाभ मिलता है।
  • भारत को दुनिया के तीसरे सबसे बड़े घरेलू नागरिक उड्डयन बाजार के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे वैश्विक मंच पर इसकी स्थिति मजबूत होती है।
  • सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी प्रदान करके राष्ट्रीय सुरक्षा को भी परोक्ष रूप से मजबूत करती है।

चुनौतियाँ

1. बुनियादी ढांचा और क्षमता

  • कई छोटे हवाई अड्डों पर अभी भी आधुनिक सुविधाओं, नेविगेशनल एड्स और रात में उड़ान भरने की क्षमता का अभाव है।
  • मौजूदा हवाई अड्डों पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ की कमी।
  • उड़ान मार्गों के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी में देरी।

2. व्यवहार्यता और स्थिरता

  • कुछ क्षेत्रीय मार्गों पर यात्रियों की संख्या कम होने के कारण एयरलाइंस के लिए परिचालन को लाभदायक बनाए रखना मुश्किल होता है।
  • व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) पर अत्यधिक निर्भरता, जो लंबी अवधि में टिकाऊ नहीं हो सकती है।
  • ईंधन की बढ़ती कीमतें और परिचालन लागत एयरलाइंस के लिए चुनौती बनी हुई है।

3. एयरलाइन भागीदारी

  • छोटे शहरों के लिए पर्याप्त विमानों की उपलब्धता और रखरखाव की चुनौती।
  • एयरलाइंस द्वारा लाभप्रदता के कारण बड़े शहरों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना, जिससे छोटे मार्गों की उपेक्षा हो सकती है।

4. नियामक और परिचालन चुनौतियां

  • विमानन सुरक्षा मानकों को बनाए रखना और उनका अनुपालन सुनिश्चित करना।
  • विभिन्न हितधारकों (एयरलाइंस, हवाई अड्डा प्राधिकरण, राज्य सरकारें) के बीच समन्वय की कमी।
  • मौसम संबंधी बाधाएं और अप्रत्याशित परिचालन मुद्दे।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कम यात्री भार कुछ क्षेत्रीय मार्गों पर एयरलाइंस के लिए वित्तीय व्यवहार्यता।
बुनियादी ढांचे की कमी छोटे हवाई अड्डों पर आधुनिक सुविधाओं और रात में उड़ान भरने की क्षमता का अभाव।
VGF पर निर्भरता दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और योजना की आत्मनिर्भरता।
भूमि अधिग्रहण नए हवाई अड्डों के विकास और विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण में देरी।
पर्यावरण संबंधी चिंताएं नए हवाई अड्डों के निर्माण और विस्तार से पर्यावरणीय प्रभाव।
कुशल जनशक्ति की कमी एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, पायलट और रखरखाव कर्मियों की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति 2016
  • राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP)
  • गति शक्ति मास्टर प्लान
  • भारतमाला परियोजना (सड़क संपर्क)
  • सागरमाला परियोजना (बंदरगाह संपर्क)
  • मेक इन इंडिया (विमान निर्माण और रखरखाव)
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (ग्रामीण संपर्क)
  • डिजिटल इंडिया (डिजिटल कनेक्टिविटी)
  • अमृत भारत स्टेशन योजना (रेलवे बुनियादी ढाँचा)
  • स्वदेश दर्शन योजना (पर्यटन विकास)

आगे की राह

  • बुनियादी ढांचे का उन्नयन: क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर रात में उड़ान भरने की सुविधा, आधुनिक नेविगेशनल एड्स और पर्याप्त एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) क्षमता का विकास करना।
  • स्थिरता मॉडल: VGF के अलावा अन्य राजस्व सृजन मॉडल (जैसे पर्यटन पैकेज, कार्गो सेवाएं) विकसित करके योजना की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: हवाई अड्डों के विकास, संचालन और रखरखाव में निजी निवेश को प्रोत्साहित करना।
  • अंतर-मंत्रालयी समन्वय: नागरिक उड्डयन मंत्रालय, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
  • कौशल विकास: विमानन क्षेत्र के लिए कुशल जनशक्ति (पायलट, ATC कर्मी, रखरखाव इंजीनियर) के प्रशिक्षण और विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
  • तकनीकी नवाचार: ड्रोन और उन्नत हवाई गतिशीलता (AAM) जैसी नई तकनीकों का पता लगाना ताकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और बढ़ाया जा सके।
  • पर्यावरण स्थिरता: हवाई अड्डों के विकास और संचालन में हरित प्रौद्योगिकियों और टिकाऊ प्रथाओं को अपनाना।
  • मांग-आधारित विस्तार: मार्गों का चयन करते समय स्थानीय मांग, पर्यटन क्षमता और आर्थिक व्यवहार्यता का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246: संघ सूची (हवाई यातायात, हवाई अड्डे, विमानन सुरक्षा)
  • सातवीं अनुसूची: संघ सूची (प्रविष्टि 29 – हवाई मार्ग, विमानन)
  • राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति 2016: नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए एक व्यापक नीतिगत ढाँचा
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1994: हवाई अड्डों के प्रबंधन और विकास के लिए

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति 2016  →  उड़ान योजना का शुभारंभ (क्षेत्रीय कनेक्टिविटी)  →  अप्रयुक्त हवाई अड्डों का पुनर्संचालन  →  किफायती हवाई किराए (VGF के माध्यम से)  →  क्षेत्रीय हवाई संपर्क में वृद्धि  →  संतुलित क्षेत्रीय विकास और आर्थिक प्रोत्साहन  →  आम आदमी के लिए हवाई यात्रा की सुलभता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. उड़ान (UDAN) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति 2016 का एक हिस्सा है।
2. यह केवल नए हवाई अड्डों के निर्माण पर केंद्रित है, न कि अप्रयुक्त हवाई पट्टियों के पुनर्संचालन पर।
3. व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) इस योजना का एक महत्वपूर्ण घटक है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि उड़ान योजना राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति 2016 का एक प्रमुख घटक है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना अप्रयुक्त और कम उपयोग वाले हवाई अड्डों को पुनर्जीवित करने पर भी केंद्रित है। कथन 3 सही है क्योंकि VGF एयरलाइंस को क्षेत्रीय मार्गों पर परिचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

Q2. हाल ही में समाचारों में रही ‘संशोधित उड़ान’ योजना का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. केवल अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देना।
  2. भारत के प्रमुख महानगरों के बीच हवाई यातायात बढ़ाना।
  3. क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार करना और हवाई यात्रा को आम आदमी के लिए किफायती बनाना।
  4. रक्षा उद्देश्यों के लिए हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण करना।

उत्तर: क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार करना और हवाई यात्रा को आम आदमी के लिए किफायती बनाना। — संशोधित उड़ान योजना का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार करना, अप्रयुक्त और कम उपयोग वाले हवाई अड्डों को पुनर्जीवित करना और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) के माध्यम से हवाई यात्रा को आम आदमी के लिए किफायती बनाना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने में उड़ान (UDAN) योजना के महत्व का विश्लेषण कीजिए। इस योजना के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं और इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में उड़ान योजना के महत्व पर चर्चा करें, जिसमें आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक लाभ शामिल हों, जैसे क्षेत्रीय विकास, पर्यटन प्रोत्साहन और आम आदमी के लिए सुलभता। दूसरे भाग में, योजना के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालें, जैसे बुनियादी ढांचे की कमी, वित्तीय व्यवहार्यता, एयरलाइन भागीदारी और नियामक मुद्दे। अंत में, इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए ठोस सुझाव दें, जिसमें बुनियादी ढांचे का उन्नयन, निजी क्षेत्र की भागीदारी, स्थिरता मॉडल और अंतर-मंत्रालयी समन्वय शामिल हों।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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