संसदीय समिति ने उर्वरक पीएसयू विनिवेश पर केंद्र के जवाब पर उठाए सवाल, समीक्षा की मांग

संसदीय समिति ने उर्वरक पीएसयू विनिवेश पर केंद्र के जवाब पर उठाए सवाल, समीक्षा की मांग — Parliament panel vs Centre on fertiliser PSU disinvestment

संसदीय समिति ने उर्वरक पीएसयू विनिवेश पर केंद्र के जवाब पर उठाए सवाल, समीक्षा की मांग

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था और शासन, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, निवेश मॉडल, कृषि
  • Prelims: विनिवेश (Disinvestment), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs), संसदीय स्थायी समितियां (Parliamentary Standing Committees), उर्वरक क्षेत्र (Fertiliser Sector), खाद्य सुरक्षा (Food Security), रणनीतिक क्षेत्र (Strategic Sector)
  • Essay: भारत में आर्थिक सुधारों की दिशा और दशा, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: विनिवेश सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य वित्तीय संसाधन जुटाना और दक्षता बढ़ाना है, लेकिन उर्वरक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इसके निहितार्थों पर सावधानीपूर्वक विचार करना आवश्यक है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

रसायन और उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उर्वरक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के विनिवेश के संबंध में केंद्र सरकार की प्रतिक्रियाओं को अपर्याप्त पाया है। समिति ने सरकार से खाद्य सुरक्षा, पुराने उर्वरक संयंत्रों के आधुनिकीकरण और राज्य के स्वामित्व वाली उर्वरक कंपनियों के भविष्य से संबंधित प्रमुख चिंताओं का समाधान करने को कहा है। समिति ने इस क्षेत्र को ‘रणनीतिक’ के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने के निर्णय से पहले विनिवेश प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने पर भी सवाल उठाया है।

पृष्ठभूमि

  • संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 18 सिफारिशों में से केवल 4 को ही संतोषजनक ढंग से स्वीकार किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया है, जबकि 11 सिफारिशों पर सरकार की प्रतिक्रियाएं अपर्याप्त पाई गईं।
  • समिति ने इस बात पर जोर दिया है कि उर्वरक क्षेत्र को ‘रणनीतिक’ के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने का निर्णय अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है, फिर भी विनिवेश की प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं।
  • समिति ने सरकार से उर्वरक क्षेत्र की दीर्घकालिक आवश्यकताओं का आकलन किए बिना विनिवेश प्रक्रियाओं को आगे न बढ़ाने की सिफारिश की थी।
  • भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए उर्वरक क्षेत्र का महत्व सर्वोपरि है, क्योंकि यह कृषि उत्पादकता को सीधे प्रभावित करता है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) का विनिवेश सरकार की आर्थिक नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संसाधनों को जुटाना और दक्षता बढ़ाना है।
  • संसदीय समितियाँ सरकार के कामकाज की जांच करने और नीतियों पर सिफारिशें देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

विनिवेश (Disinvestment) क्या है?

  • विनिवेश का अर्थ है सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी को बेचना।
  • इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय संसाधनों को जुटाना, सार्वजनिक ऋण को कम करना और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में दक्षता में सुधार करना है।
  • विनिवेश के माध्यम से प्राप्त धन का उपयोग सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए किया जा सकता है।
  • विनिवेश रणनीतिक या गैर-रणनीतिक हो सकता है। रणनीतिक विनिवेश में सरकार अपनी अधिकांश हिस्सेदारी बेच देती है और प्रबंधन नियंत्रण निजी क्षेत्र को सौंप देती है।
  • भारत में विनिवेश की प्रक्रिया 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद से शुरू हुई, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को उदार बनाना था।
  • विनिवेश के लिए एक अलग विभाग, निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) है, जो वित्त मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
  • उर्वरक क्षेत्र को ‘रणनीतिक’ के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए या नहीं, यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत बहस है, क्योंकि इसका सीधा संबंध खाद्य सुरक्षा से है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
उर्वरक क्षेत्र का रणनीतिक वर्गीकरण खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) का विनिवेश सरकार की वित्तीय नीतियों और राजकोषीय स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
संसदीय समिति की सिफारिशें सरकारी जवाबदेही और नीति निर्माण में पारदर्शिता सुनिश्चित करती हैं।
दीर्घकालिक उर्वरक आवश्यकता आकलन देश की भविष्य की कृषि जरूरतों और उत्पादन क्षमता की योजना बनाने हेतु आवश्यक।
पुराने उर्वरक संयंत्रों का आधुनिकीकरण उत्पादन दक्षता बढ़ाने और पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण।
आयात निर्भरता वैश्विक बाजार की अस्थिरता से देश की खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • उर्वरक क्षेत्र में विनिवेश से सरकारी खजाने पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ता है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह क्षेत्र की दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकता है।
  • पुराने संयंत्रों का आधुनिकीकरण उत्पादन लागत को कम कर सकता है और आयात पर निर्भरता घटा सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • विनिवेश से प्राप्त आय का उपयोग अन्य विकास परियोजनाओं या राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने के लिए किया जा सकता है।

रणनीतिक महत्व

  • उर्वरक क्षेत्र का रणनीतिक वर्गीकरण खाद्य सुरक्षा (Food Security) के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कृषि उत्पादन की रीढ़ है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की उपस्थिति आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करती है।
  • उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के प्रति देश की सुभेद्यता (Vulnerability) को कम करती है।

शासन और जवाबदेही

  • संसदीय समितियाँ सरकार की नीतियों और निर्णयों पर विधायी निरीक्षण (Legislative Oversight) प्रदान करती हैं, जिससे जवाबदेही बढ़ती है।
  • समितियों की सिफारिशों पर सरकार की प्रतिक्रिया नीति निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
  • विनिवेश जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों से पहले विस्तृत आकलन और सार्वजनिक बहस आवश्यक है ताकि दीर्घकालिक निहितार्थों पर विचार किया जा सके।

चुनौतियाँ

1. रणनीतिक वर्गीकरण पर अनिश्चितता

  • उर्वरक क्षेत्र को ‘रणनीतिक’ के रूप में वर्गीकृत करने पर निर्णय में देरी से विनिवेश नीतियों में अस्पष्टता बनी हुई है।
  • यह अनिश्चितता सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के भविष्य और उनमें निवेश योजनाओं को प्रभावित करती है।

2. दीर्घकालिक आकलन का अभाव

  • उर्वरक की दीर्घकालिक आवश्यकता, उत्पादन क्षमता और आयात निर्भरता का विस्तृत अध्ययन किए बिना विनिवेश प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
  • यह देश की भविष्य की खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

3. पुराने संयंत्रों का आधुनिकीकरण

  • कई उर्वरक संयंत्र पुराने हो चुके हैं, जिन्हें आधुनिकीकरण की आवश्यकता है ताकि दक्षता बढ़ाई जा सके और प्रदूषण कम किया जा सके।
  • विनिवेश के कारण इन संयंत्रों के आधुनिकीकरण की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

4. संसदीय समितियों की सिफारिशों की अनदेखी

  • सरकार द्वारा संसदीय समिति की सिफारिशों पर अपर्याप्त प्रतिक्रिया या उन्हें ‘नोट’ करना विधायी निरीक्षण की प्रभावशीलता को कम करता है।
  • यह लोकतांत्रिक जवाबदेही और नीति निर्माण में पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उर्वरक क्षेत्र का रणनीतिक वर्गीकरण खाद्य सुरक्षा पर संभावित प्रभाव और विनिवेश नीति में अस्पष्टता।
दीर्घकालिक उर्वरक आवश्यकता का आकलन भविष्य की कृषि जरूरतों और उत्पादन क्षमता की अनदेखी से उत्पन्न जोखिम।
पुराने उर्वरक संयंत्रों का आधुनिकीकरण दक्षता में कमी, पर्यावरणीय प्रभाव और विनिवेश के कारण आधुनिकीकरण में बाधा।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का भविष्य राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों की भूमिका और उनके कर्मचारियों के रोजगार पर प्रभाव।
आयात निर्भरता वैश्विक बाजार की अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के प्रति सुभेद्यता।
संसदीय समिति की सिफारिशों पर प्रतिक्रिया सरकारी जवाबदेही में कमी और विधायी निरीक्षण की प्रभावशीलता पर प्रश्न।

आगे की राह

  • उर्वरक क्षेत्र को ‘रणनीतिक’ के रूप में वर्गीकृत करने पर त्वरित निर्णय लिया जाए, ताकि विनिवेश नीति में स्पष्टता आ सके।
  • विनिवेश से पहले देश की दीर्घकालिक उर्वरक आवश्यकताओं, उत्पादन क्षमता और आयात निर्भरता का व्यापक अध्ययन किया जाए।
  • पुराने उर्वरक संयंत्रों के आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए।
  • संसदीय समितियों की सिफारिशों पर सरकार द्वारा समयबद्ध और संतोषजनक प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए, जिससे विधायी निरीक्षण मजबूत हो।
  • विनिवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाए।
  • उर्वरक क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा दिया जाए ताकि स्वदेशी उत्पादन और नवाचार को प्रोत्साहन मिल सके।
  • खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए विनिवेश निर्णयों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

उर्वरक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम · विनिवेश नीति · खाद्य सुरक्षा · संसदीय स्थायी समिति · रणनीतिक क्षेत्र · दीर्घकालिक उर्वरक आवश्यकताएँ · सरकारी जवाबदेही · आर्थिक सुधार · कृषि क्षेत्र · राजकोषीय प्रबंधन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 75’, ‘note’: ‘मंत्रिपरिषद का संसद के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 105’, ‘note’: ‘संसद के सदस्यों और समितियों के विशेषाधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 118’, ‘note’: ‘संसद की प्रक्रिया के नियम बनाने की शक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

संसदीय समिति की सिफारिशें  →  सरकार द्वारा अपर्याप्त प्रतिक्रिया  →  विनिवेश नीति पर अनिश्चितता  →  खाद्य सुरक्षा पर संभावित प्रभाव  →  कृषि आत्मनिर्भरता के लक्ष्य पर असर  →  सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के भविष्य पर प्रश्न  →  विधायी निरीक्षण और जवाबदेही पर चिंता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. उर्वरक क्षेत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उर्वरक क्षेत्र को वर्तमान में भारत सरकार द्वारा एक ‘रणनीतिक’ क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
2. संसदीय स्थायी समिति ने उर्वरक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश से पहले देश की दीर्घकालिक उर्वरक आवश्यकताओं का आकलन करने की सिफारिश की है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: केवल 2 — कथन 1 गलत है क्योंकि संसदीय समिति ने उर्वरक क्षेत्र को रणनीतिक क्षेत्र के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने की मांग की है, जिसका अर्थ है कि यह वर्तमान में इस रूप में वर्गीकृत नहीं है। कथन 2 सही है क्योंकि समिति ने विनिवेश निर्णयों से पहले उत्पादन क्षमता, खपत के रुझान और आयात निर्भरता का विस्तृत दीर्घकालिक अध्ययन करने की सिफारिश की है।

Q2. भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के विनिवेश के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. विनिवेश का उद्देश्य सरकार के राजकोषीय घाटे को कम करना हो सकता है।
  2. विनिवेश से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो सकता है।
  3. विनिवेश नीति केवल गैर-रणनीतिक क्षेत्रों तक ही सीमित है।
  4. विनिवेश से प्राप्त आय का उपयोग सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।

उत्तर: विनिवेश नीति केवल गैर-रणनीतिक क्षेत्रों तक ही सीमित है। — भारत में विनिवेश नीति रणनीतिक और गैर-रणनीतिक दोनों क्षेत्रों में लागू होती है, हालांकि रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार की न्यूनतम उपस्थिति बनाए रखने का लक्ष्य होता है। इसलिए, यह कहना गलत है कि यह केवल गैर-रणनीतिक क्षेत्रों तक ही सीमित है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल ही में एक संसदीय समिति ने उर्वरक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश के संबंध में सरकार के दृष्टिकोण पर चिंता व्यक्त की है। इस संदर्भ में, भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश के औचित्य और चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। क्या उर्वरक क्षेत्र को ‘रणनीतिक’ क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश के पीछे के तर्कों (जैसे राजकोषीय घाटा कम करना, दक्षता बढ़ाना) और चुनौतियों (जैसे रोजगार हानि, रणनीतिक नियंत्रण का नुकसान) पर चर्चा करें। दूसरे भाग में, उर्वरक क्षेत्र को ‘रणनीतिक’ के रूप में वर्गीकृत करने के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करें, जिसमें खाद्य सुरक्षा, किसानों पर प्रभाव, आयात निर्भरता और राष्ट्रीय हित जैसे कारकों पर विचार करें। संसदीय समिति की सिफारिशों का उल्लेख करें।

स्रोत: Hindustan Times


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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