07 Aug सहकारी बैंकों के माध्यम से ही पेंशन वितरण करें: किसान जनता संगठन

✎ सामाजिक कल्याण पेंशन के वितरण में सहकारी बैंकों की भूमिका वित्तीय समावेशन और घर-घर सेवा के माध्यम से कमजोर वर्गों को लाभ पहुँचाने में महत्वपूर्ण है, जबकि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का लक्ष्य पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था
- Prelims: सहकारी बैंक, सामाजिक कल्याण पेंशन, आधार-लिंक्ड भुगतान, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), वित्तीय समावेशन, राज्य सरकार की नीतियां
- Essay: कल्याणकारी राज्य की अवधारणा और उसका क्रियान्वयन, भारत में वित्तीय समावेशन: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: सामाजिक कल्याण पेंशन के वितरण में सहकारी बैंकों की भूमिका वित्तीय समावेशन और घर-घर सेवा के माध्यम से कमजोर वर्गों को लाभ पहुँचाने में महत्वपूर्ण है, जबकि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का लक्ष्य पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
किसान जनता, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से संबद्ध एक किसान संगठन ने राज्य सरकार के उस निर्णय का विरोध किया है जिसमें सामाजिक कल्याण पेंशन के वितरण से सेवा सहकारी बैंकों को अलग किया गया है। संगठन ने इस कदम को ‘जन-विरोधी’ बताया है, जिसके अनुसार यह बुजुर्गों और आर्थिक रूप से पिछड़े लाभार्थियों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। उनका तर्क है कि आधार-लिंक्ड वाणिज्यिक बैंक खातों में सीधे पेंशन हस्तांतरित करने से घर-घर पेंशन वितरण की कुशल प्रणाली समाप्त हो जाएगी, जिससे कमजोर वर्ग के लोगों को अपनी मासिक पेंशन निकालने के लिए बैंकों और अक्षय केंद्रों पर लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ेगा।
पृष्ठभूमि
- भारत में सामाजिक कल्याण पेंशन योजनाएँ केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जाती हैं, जिनका उद्देश्य वृद्ध, विधवाओं, विकलांग व्यक्तियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
- इन पेंशनों का वितरण पारंपरिक रूप से विभिन्न माध्यमों से होता रहा है, जिसमें डाकघर, बैंक और स्थानीय सहकारी संस्थाएँ शामिल हैं।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) प्रणाली के तहत, सरकार का लक्ष्य बिचौलियों को समाप्त कर सीधे लाभार्थियों के खातों में धन हस्तांतरित करना है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़े।
- आधार (Aadhaar) को बैंक खातों से जोड़ना DBT प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसका उद्देश्य लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करना और डुप्लीकेशन को रोकना है।
- सहकारी बैंक (Cooperative Banks) भारत में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेषकर उन लोगों तक पहुँचने में जहाँ वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएँ कम हैं।
- कई राज्यों में, सेवा सहकारी बैंक (Service Cooperative Banks) सामाजिक कल्याण पेंशन को लाभार्थियों के घर तक पहुँचाने का कार्य करते रहे हैं, जिससे विशेष रूप से बुजुर्गों और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को सुविधा मिलती है।
सहकारी बैंक और सामाजिक कल्याण पेंशन वितरण
- सहकारी बैंक ऐसे वित्तीय संस्थान हैं जिनका स्वामित्व और संचालन उनके सदस्यों द्वारा किया जाता है। ये ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कार्य करते हैं और अपने सदस्यों को ऋण, जमा और अन्य बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- भारत में सहकारी बैंकों को प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs), राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) और शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) में वर्गीकृत किया जा सकता है।
- सामाजिक कल्याण पेंशन योजनाएँ, जैसे कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS) या राज्य-विशिष्ट पेंशन योजनाएँ, कमजोर वर्गों को नियमित आय सहायता प्रदान करती हैं।
- पेंशन वितरण में सहकारी बैंकों की भूमिका विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रही है, जहाँ उनकी पहुँच और स्थानीय समुदाय के साथ जुड़ाव उन्हें एक प्रभावी वितरण तंत्र बनाता है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का उद्देश्य लीकेज को कम करना और लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुँचाना है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में डिजिटल साक्षरता और बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच की चुनौतियाँ भी सामने आती हैं।
- आधार-लिंक्ड बैंक खातों में सीधे पेंशन हस्तांतरण से पारदर्शिता बढ़ती है, लेकिन यह उन लाभार्थियों के लिए कठिनाई पैदा कर सकता है जिनके पास बैंक शाखाओं तक आसान पहुँच नहीं है या जो डिजिटल लेनदेन में सहज नहीं हैं।
- घर-घर पेंशन वितरण प्रणाली, जैसा कि कुछ सहकारी बैंकों द्वारा प्रदान की जाती है, विशेष रूप से बुजुर्गों, विकलांगों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा है।
- नीति निर्माताओं को दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ लाभार्थियों की सुविधा और पहुँच के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है, खासकर जब सामाजिक सुरक्षा लाभों की बात आती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सहकारी बैंकों द्वारा पेंशन वितरण | यह प्रणाली ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लाभार्थियों तक पहुँचने में प्रभावी रही है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनकी वाणिज्यिक बैंकों तक सीधी पहुँच नहीं है। |
| घर-घर वितरण प्रणाली | वृद्ध और कमजोर लाभार्थियों को बैंक शाखाओं तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे उनके लिए सुविधा और सुगमता सुनिश्चित होती है। |
| आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को लाभ | यह प्रणाली उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो डिजिटल साक्षरता की कमी या शारीरिक अक्षमताओं के कारण स्वयं बैंक लेनदेन करने में असमर्थ हैं। |
| स्थानीय स्तर पर वित्तीय समावेशन | सहकारी बैंक स्थानीय समुदायों के साथ गहरे संबंध रखते हैं और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। |
| वाणिज्यिक बैंकों में प्रत्यक्ष हस्तांतरण का प्रस्ताव | यह प्रस्ताव आधार (Aadhaar) से जुड़े वाणिज्यिक बैंक खातों के माध्यम से सीधे पेंशन वितरण का सुझाव देता है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना हो सकता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- वृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर लाभार्थियों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना, खासकर उन लोगों के लिए जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं या दूरदराज के इलाकों में रहते हैं।
- पेंशन वितरण में सुगमता और पहुँच सुनिश्चित करके सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना, जिससे हाशिए पर पड़े वर्गों को सशक्त किया जा सके।
आर्थिक महत्व
- सहकारी बैंकों की भूमिका को मजबूत करना, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय वित्तीय समावेशन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- पेंशन के समय पर वितरण से लाभार्थियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बनी रहती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह सुनिश्चित होता है।
प्रशासनिक महत्व
- पेंशन वितरण प्रणाली की दक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखना, जबकि यह सुनिश्चित करना कि यह लाभार्थियों के लिए सुलभ और सुविधाजनक हो।
- सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत वितरण तंत्र का होना आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. वृद्ध और कमजोर लाभार्थियों के लिए असुविधा
- वाणिज्यिक बैंकों में लंबी कतारें और प्रतीक्षा समय वृद्ध व्यक्तियों के लिए शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- डिजिटल साक्षरता की कमी और बैंक लेनदेन की जटिलताएँ कमजोर वर्गों के लिए बाधाएँ उत्पन्न कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
2. वित्तीय समावेशन पर प्रभाव
- सहकारी बैंकों की भूमिका को कम करने से ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं तक पहुँच प्रभावित हो सकती है, खासकर जहाँ वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएँ कम हैं।
- यह उन लोगों को बैंकिंग प्रणाली से बाहर कर सकता है जिनके पास आधार से जुड़े वाणिज्यिक बैंक खाते नहीं हैं या उन्हें खोलने में कठिनाई होती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था: वित्तीय समावेशन और बैंकिंग क्षेत्र
3. घर-घर वितरण प्रणाली का विघटन
- सहकारी बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली घर-घर वितरण सेवा एक कुशल और संवेदनशील प्रणाली थी जो लाभार्थियों की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करती थी।
- इस प्रणाली को हटाने से उन लाभार्थियों के लिए कठिनाई होगी जो स्वयं बैंक तक पहुँचने में असमर्थ हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन: कल्याणकारी योजनाओं का कार्यान्वयन
4. तकनीकी और बुनियादी ढाँचा संबंधी चुनौतियाँ
- सभी लाभार्थियों के पास आधार से जुड़े वाणिज्यिक बैंक खाते नहीं हो सकते हैं, और उन्हें खोलने में समय और प्रयास लग सकता है।
- दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और बैंकिंग बुनियादी ढाँचे की कमी प्रत्यक्ष हस्तांतरण प्रणाली के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी: ई-शासन और डिजिटल पहल
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पेंशन वितरण प्रणाली में बदलाव | वृद्ध और आर्थिक रूप से पिछड़े लाभार्थियों के लिए असुविधा और पहुँच संबंधी समस्याएँ। |
| सहकारी बैंकों की भूमिका में कमी | ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव। |
| प्रत्यक्ष हस्तांतरण की चुनौतियाँ | आधार-लिंकिंग, डिजिटल साक्षरता और बैंकिंग बुनियादी ढाँचे की कमी। |
| घर-घर वितरण का अभाव | शारीरिक रूप से अक्षम और कमजोर लाभार्थियों के लिए पेंशन प्राप्त करने में कठिनाई। |
| सार्वजनिक विरोध | किसान जनता जैसे संगठनों द्वारा इसे ‘जन-विरोधी उपाय’ बताया जाना। |
आगे की राह
- पेंशन वितरण प्रणाली में बदलाव से पहले सभी हितधारकों, विशेषकर लाभार्थियों और सहकारी बैंकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए।
- एक हाइब्रिड मॉडल (Hybrid Model) पर विचार किया जा सकता है, जहाँ वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से प्रत्यक्ष हस्तांतरण के साथ-साथ सहकारी बैंकों द्वारा घर-घर वितरण की सुविधा भी जारी रहे।
- वृद्ध और कमजोर लाभार्थियों के लिए बैंक शाखाओं में विशेष काउंटर और प्राथमिकता सेवाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- डिजिटल साक्षरता और बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।
- सहकारी बैंकों को मजबूत करने और उन्हें आधुनिक बैंकिंग तकनीकों से लैस करने के लिए उपाय किए जाने चाहिए ताकि वे प्रभावी ढंग से सेवाएँ प्रदान कर सकें।
- पेंशन वितरण प्रणाली की प्रभावशीलता और पहुँच का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि किसी भी समस्या को समय पर पहचाना और सुधारा जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सहकारी बैंक · सामाजिक कल्याण पेंशन · वितरण प्रणाली · आधार-लिंक्ड भुगतान · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) · वित्तीय समावेशन · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · वृद्ध नागरिक · कमजोर वर्ग · राज्य सरकार की नीतियां · लोक कल्याणकारी राज्य · सेवा वितरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘राज्य सभी नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराएगा।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि।’}
अवधारणा प्रवाह
राज्य सरकार द्वारा सहकारी बैंकों से पेंशन वितरण हटाने का प्रस्ताव। → किसान जनता जैसे संगठनों द्वारा इस कदम का विरोध। → लाभार्थियों, विशेषकर वृद्ध और कमजोर लोगों के लिए असुविधा की आशंका। → वाणिज्यिक बैंकों में लंबी कतारें और डिजिटल पहुँच की चुनौतियाँ। → सहकारी बैंकों द्वारा घर-घर वितरण प्रणाली के महत्व पर जोर। → सामाजिक कल्याण और वित्तीय समावेशन पर संभावित नकारात्मक प्रभाव। → एक समावेशी और सुलभ पेंशन वितरण प्रणाली की आवश्यकता।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में सहकारी बैंक केवल शहरी क्षेत्रों में कार्य करते हैं।
2. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजना का उद्देश्य बिचौलियों को समाप्त कर लाभार्थियों तक सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना है।
3. आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016, आधार संख्या को कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य बनाता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि सहकारी बैंक शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कार्य करते हैं। कथन 2 सही है, DBT का मुख्य उद्देश्य यही है। कथन 3 गलत है, सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों ने आधार को कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य बनाने पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं, हालांकि कुछ योजनाओं में यह आवश्यक हो सकता है।
Q2. अभिकथन (A): सहकारी बैंकों को सामाजिक कल्याण पेंशन के वितरण से हटाना वृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर लाभार्थियों के लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न कर सकता है।
कारण (R): सहकारी बैंक अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में घर-घर वितरण प्रणाली के माध्यम से सेवाएँ प्रदान करते हैं, जो वाणिज्यिक बैंकों के लिए संभव नहीं है।
सही विकल्प चुनें:
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि समाचार रिपोर्ट में भी यही चिंता व्यक्त की गई है। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि सहकारी बैंकों की घर-घर वितरण प्रणाली कमजोर वर्गों के लिए सुविधाजनक होती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सामाजिक कल्याण पेंशन के वितरण में सहकारी बैंकों की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से पेंशन वितरण में आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** सामाजिक कल्याण पेंशन और उनके वितरण के महत्व पर संक्षिप्त प्रकाश डालें।
2. **सहकारी बैंकों की भूमिका:**
* **सकारात्मक पहलू:** ग्रामीण पहुँच, घर-घर वितरण, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा, स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ाव, वृद्ध और कमजोर वर्गों के लिए सुविधा।
* **नकारात्मक पहलू/सीमाएँ:** सीमित तकनीकी क्षमता, नियामक चुनौतियाँ, शासन संबंधी मुद्दे, वित्तीय स्थिरता के मुद्दे (कुछ मामलों में)।
3. **प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली:**
* **उद्देश्य और लाभ:** पारदर्शिता, बिचौलियों का उन्मूलन, लीकेज में कमी, दक्षता।
* **चुनौतियाँ:** डिजिटल डिवाइड, तकनीकी साक्षरता का अभाव, बैंक शाखाओं तक पहुँच की कमी (विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में), लंबी कतारें, आधार-लिंकिंग से संबंधित समस्याएँ, सर्वर डाउनटाइम, वृद्ध व्यक्तियों के लिए असुविधा।
4. **संभावित समाधान:**
* सहकारी बैंकों की तकनीकी क्षमता का उन्नयन।
* वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों के बीच समन्वय।
* मोबाइल बैंकिंग और बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (BC) मॉडल का विस्तार।
* जागरूकता अभियान और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा।
* शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना।
* वैकल्पिक वितरण तंत्रों पर विचार (जैसे पोस्ट ऑफिस)।
5. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें जो दक्षता और समावेशन दोनों को सुनिश्चित करे, लोक कल्याणकारी राज्य के लक्ष्यों को प्राप्त करने पर जोर दे।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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