10 Oct सीएक्यूएम ने अमृतसर-तरनतारन में पराली जलाने पर लगाई रोक
✎ पराली दहन नियंत्रण के लिए CAQM इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन को बढ़ावा देने के साथ-साथ ज़िला प्रशासन के साथ मिलकर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन सुनिश्चित करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, कृषि | GS Paper II — शासन व्यवस्था
- Prelims: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), पराली दहन, इन-सीटू प्रबंधन, एक्स-सीटू प्रबंधन, फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी, वायु प्रदूषण
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास: चुनौतियाँ एवं समाधान, कृषि पद्धतियाँ और पर्यावरणीय प्रभाव: एक विश्लेषण
त्वरित पुनरावृत्ति: पराली दहन नियंत्रण के लिए CAQM इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन को बढ़ावा देने के साथ-साथ ज़िला प्रशासन के साथ मिलकर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन सुनिश्चित करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की एक उच्च-स्तरीय टीम ने धान की कटाई के वर्तमान मौसम में पंजाब के अमृतसर और तरनतारन ज़िलों का दौरा किया। इन ज़िलों की पहचान धान की पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट के रूप में की गई है। टीम ने ज़िला प्रशासन के साथ पराली दहन को रोकने के उपायों की समीक्षा की और ज़मीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए हॉटस्पॉट गाँवों का दौरा भी किया। यह दौरा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में सर्दियों के वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के आयोग के प्रयासों का एक हिस्सा है।
पृष्ठभूमि
- पराली दहन (Stubble Burning) उत्तर भारत में, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, धान की कटाई के बाद किसानों द्वारा खेतों में फसल अवशेषों को जलाने की एक सामान्य प्रथा है।
- यह प्रथा सर्दियों के मौसम में दिल्ली-NCR क्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बनती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- पराली दहन से मिट्टी की उर्वरता में कमी आती है, सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है, जो जलवायु परिवर्तन में योगदान देता है।
- सरकार और विभिन्न नियामक निकाय, जैसे CAQM, पराली दहन को रोकने और इसके स्थायी समाधान खोजने के लिए विभिन्न उपाय कर रहे हैं।
- इन उपायों में फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों का वितरण, इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत के बाहर) पराली प्रबंधन को बढ़ावा देना, और किसानों को जागरूक करना शामिल है।
- न्यायिक हस्तक्षेप और सरकारी नीतियों के बावजूद, पराली दहन की समस्या अभी भी बनी हुई है, जिसके लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) क्या है?
- CAQM एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है, जिसका गठन ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021’ के तहत किया गया है।
- इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से संबंधित समस्याओं के लिए समन्वय, अनुसंधान, पहचान और समाधान करना है।
- आयोग के पास वायु प्रदूषण को रोकने और नियंत्रित करने के लिए व्यापक शक्तियाँ हैं, जिनमें नियम बनाना, दिशानिर्देश जारी करना और प्रवर्तन उपाय करना शामिल है।
- यह विभिन्न हितधारकों, जैसे केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
- CAQM वायु गुणवत्ता मानकों को निर्धारित करता है और उनके अनुपालन की निगरानी करता है।
- यह वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और उन्हें कम करने के लिए तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देता है।
- आयोग के पास वायु प्रदूषण के उल्लंघन के लिए दंड लगाने की शक्ति भी है।
- यह वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों और कार्य योजनाओं को विकसित करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) की टीम का दौरा | पराली जलाने की समस्या के समाधान हेतु उच्च-स्तरीय निगरानी और जमीनी स्थिति का आकलन। |
| हॉटस्पॉट जिलों की पहचान | समस्याग्रस्त क्षेत्रों पर केंद्रित कार्रवाई सुनिश्चित करना, जैसे अमृतसर और तरनतारन। |
| इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन | पराली के खेत में ही और खेत के बाहर प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना। |
| CRM (फसल अवशेष प्रबंधन) मशीनरी की उपलब्धता | किसानों को पराली प्रबंधन के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करना। |
| फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती | पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना। |
| नियंत्रण कक्ष और हेल्प डेस्क | किसानों को CRM मशीनरी और संबंधित सहायता तक आसान पहुँच प्रदान करना। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण (Air Pollution) को कम करना, विशेषकर NCR (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में सर्दियों के दौरान।
- मिट्टी के स्वास्थ्य और उर्वरता को बनाए रखना, क्योंकि पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
सामाजिक महत्व
- किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सशक्त बनाना।
- वायु प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को कम करके जन स्वास्थ्य में सुधार करना।
आर्थिक महत्व
- पराली को बायोमास (Biomass) ऊर्जा या अन्य उत्पादों में परिवर्तित कर किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना।
- कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और मशीनीकरण को बढ़ावा देना।
शासनिक महत्व
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करना ताकि पराली जलाने की समस्या का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके।
- स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही और क्षमता को मजबूत करना।
चुनौतियाँ
1. किसानों की आर्थिक स्थिति
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए CRM मशीनरी खरीदना या किराए पर लेना महंगा हो सकता है।
- पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने में प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना
2. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन
- किसानों में पराली जलाने के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में जागरूकता की कमी।
- पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बदलने में प्रतिरोध।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, सामाजिक सशक्तिकरण
3. CRM मशीनरी की उपलब्धता और पहुंच
- सभी किसानों के लिए पर्याप्त संख्या में CRM मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- मशीनरी के रखरखाव और संचालन के लिए कौशल विकास की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: कृषि, प्रौद्योगिकी मिशन
4. एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचा
- पराली को इकट्ठा करने, परिवहन करने और उद्योगों तक पहुंचाने के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता।
- बायोमास आधारित उद्योगों की सीमित संख्या।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, निवेश मॉडल
5. प्रवर्तन और निगरानी
- पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी ढंग से नजर रखना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना।
- जमीनी स्तर पर अधिकारियों की सीमित संख्या और संसाधनों की कमी।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पराली जलाने की प्रथा | वायु प्रदूषण, मिट्टी की उर्वरता में कमी, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन। |
| किसानों की आर्थिक बाधाएं | पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने में उच्च लागत। |
| मशीनरी की उपलब्धता | सभी किसानों तक फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों की पहुंच सुनिश्चित करना। |
| जागरूकता की कमी | पराली जलाने के हानिकारक प्रभावों और वैकल्पिक समाधानों के बारे में किसानों में जानकारी का अभाव। |
| प्रबंधन बुनियादी ढांचा | पराली के एक्स-सीटू (खेत के बाहर) उपयोग के लिए पर्याप्त संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण सुविधाओं का अभाव। |
| प्रवर्तन में चुनौतियाँ | नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करना और उल्लंघनकर्ताओं पर नज़र रखना। |
आगे की राह
- किसानों को पराली प्रबंधन मशीनरी (CRM) खरीदने या किराए पर लेने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्रदान की जाए।
- पराली के इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत के बाहर) उपयोग के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए।
- किसानों को पराली जलाने के हानिकारक प्रभावों और वैकल्पिक समाधानों के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
- पराली को बायोमास ऊर्जा, खाद या अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाए।
- पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन और सैटेलाइट जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों को पराली प्रबंधन के लिए नई और लागत प्रभावी तकनीकों पर शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाए ताकि पराली जलाने की समस्या का एक एकीकृत और स्थायी समाधान निकाला जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पराली जलाना · वायु प्रदूषण · फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) · इन-सीटू प्रबंधन · एक्स-सीटू प्रबंधन · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · सतत कृषि · पर्यावरण संरक्षण · कृषि अपशिष्ट · राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) · फ्लाइंग स्क्वॉड · अंतर-राज्यीय सहयोग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना’}
अवधारणा प्रवाह
धान की कटाई के बाद पराली का उत्पन्न होना। → किसान द्वारा पराली को जलाना (कम लागत और समय के कारण)। → वायुमंडल में प्रदूषणकारी तत्वों का उत्सर्जन (विशेषकर PM2.5)। → NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में गिरावट। → जन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव और पर्यावरणीय क्षति। → CAQM द्वारा निगरानी और पराली प्रबंधन उपायों का कार्यान्वयन।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय है।
2. पराली जलाना मुख्य रूप से सर्दियों के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
3. फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी का उपयोग पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन दोनों के लिए किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 सही है। CAQM एक सांविधिक निकाय है जिसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित किया गया है। कथन 2 सही है। पराली जलाना NCR में सर्दियों के वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। कथन 3 सही है। CRM मशीनरी जैसे बेलर एक्स-सीटू प्रबंधन में और हैप्पी सीडर जैसे उपकरण इन-सीटू प्रबंधन में सहायक होते हैं।
Q2. अभिकथन (A): वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब के हॉटस्पॉट जिलों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए ‘फ्लाइंग स्क्वॉड’ तैनात किए हैं।
कारण (R): पराली जलाना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि CAQM ने पराली जलाने को कम करने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि पराली जलाना NCR में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती का उद्देश्य इसी प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पराली जलाने की समस्या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है। इस समस्या के समाधान हेतु फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी और इन-सीटू तथा एक्स-सीटू प्रबंधन उपायों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इस संदर्भ में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के प्रयासों का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत पराली जलाने की समस्या और NCR पर इसके प्रभाव के संक्षिप्त परिचय से करें।
1. **समस्या का मूल:** धान की कटाई के बाद पराली जलाने की प्रथा, इसके पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर प्रकाश डालें।
2. **फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी की भूमिका:**
* **इन-सीटू प्रबंधन:** हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, ज़ीरो टिल ड्रिल जैसी मशीनों का उल्लेख करें जो पराली को खेत में ही मिट्टी में मिला देती हैं। इसके लाभ (मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण) बताएं।
* **एक्स-सीटू प्रबंधन:** बेलर जैसी मशीनों का वर्णन करें जो पराली की गांठें बनाती हैं। इन गांठों के उपयोग (बायोमास आधारित बिजली संयंत्र, इथेनॉल उत्पादन, पशु चारा, पैकेजिंग सामग्री) पर चर्चा करें।
* **चुनौतियाँ:** किसानों के लिए मशीनों की उपलब्धता, लागत, जागरूकता की कमी।
3. **वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के प्रयास:**
* **स्थापना और जनादेश:** CAQM अधिनियम, 2021 के तहत इसकी स्थापना और NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए इसकी व्यापक शक्तियों का उल्लेख करें।
* **नीतिगत हस्तक्षेप:** पराली जलाने पर प्रतिबंध, राज्यों के साथ समन्वय, कार्य योजनाएँ।
* **निगरानी और प्रवर्तन:** फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती, हॉटस्पॉट गांवों की पहचान, जिला प्रशासन के साथ समीक्षा बैठकें, हेल्पलाइन नंबर।
* **जागरूकता और प्रोत्साहन:** किसानों को CRM मशीनरी उपलब्ध कराने में सहायता, सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियाँ।
* **आपूर्ति श्रृंखला का विकास:** एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए उद्योगों के साथ किसानों को जोड़ना।
4. **मूल्यांकन:** CAQM के प्रयासों की प्रभावशीलता का विश्लेषण करें। इसकी सफलताएँ (कुछ हद तक पराली जलाने की घटनाओं में कमी) और चुनौतियाँ (निरंतर निगरानी की आवश्यकता, किसानों की भागीदारी) दोनों को उजागर करें।
5. **निष्कर्ष:** समस्या के स्थायी समाधान के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण (प्रौद्योगिकी, नीति, जागरूकता, प्रवर्तन और अंतर-राज्यीय सहयोग) की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Punjab PCS (PPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: सीएक्यूएम (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) द्वारा हाल ही में अमृतसर एवं तरनतारन ज़िले में पराली जलाने से रोकने के लिए किए गए उपायों की समीक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कदम इन ज़िलों द्वारा उठाया गया था?
- कृषि अपशिष्ट प्रबंधन केंद्रों की स्थापना
- धान की खेती में सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक को बढ़ावा देना
- पराली जलाने के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई
- उपरोक्त सभी
उत्तर: उपरोक्त सभी — अमृतसर एवं तरनतारन ज़िलों ने पराली जलाने से रोकने के लिए कृषि अपशिष्ट प्रबंधन केंद्रों की स्थापना, डीएसआर तकनीक को बढ़ावा देना और सख्त कानूनी कार्रवाई सहित सभी उपाय अपनाए।
Mains: सीएक्यूएम द्वारा अमृतसर एवं तरनतारन ज़िले में पराली जलाने से उत्पन्न प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों का विश्लेषण कीजिए। इसके साथ ही, पंजाब राज्य में पराली प्रबंधन हेतु केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से लागू की जा रही ‘एकीकृत नीति’ के महत्व पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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