सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार न्यायाधीशों को मुख्य न्यायाधीश पद पर नियुक्ति की सिफारिश की

Supreme Court collegium recommends elevation of four judges as Chief Justices of different HCs — concept mind map

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार न्यायाधीशों को मुख्य न्यायाधीश पद पर नियुक्ति की सिफारिश की

Map of Delhi High Court, Patna High Court, Bombay High Court, Calcu highlighted on the map of India — सुप्रीम कोर्ट…
मानचित्र व माइंड-मैप: Supreme Court collegium recommendations for HC Chief Justices

✎ कॉलेजियम प्रणाली सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए एक न्यायिक रूप से विकसित तंत्र है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: महत्वपूर्ण प्रावधान, कार्य और उत्तरदायित्व; न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली  |  GS Paper II — कार्यपालिका और न्यायपालिका का पृथक्करण
  • Prelims: सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीशों की नियुक्ति, न्यायाधीशों का स्थानांतरण, भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI), अनुच्छेद 217, अनुच्छेद 222
  • Essay: भारत में न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही, न्यायिक नियुक्तियों में कॉलेजियम प्रणाली की प्रासंगिकता

त्वरित पुनरावृत्ति: कॉलेजियम प्रणाली सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए एक न्यायिक रूप से विकसित तंत्र है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने हाल ही में दो उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण की भी सिफारिश की है। यह निर्णय भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता में 6 अगस्त को हुई एक बैठक में लिया गया।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय संविधान के तहत, न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
  • उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, संबंधित राज्य के राज्यपाल और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में) से परामर्श के बाद की जाती है।
  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण का प्रावधान भी संविधान में है, जो राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद किया जाता है।
  • कॉलेजियम प्रणाली न्यायिक नियुक्तियों और स्थानांतरण के लिए विकसित एक तंत्र है, जिसका संविधान में स्पष्ट उल्लेख नहीं है, बल्कि यह न्यायिक निर्णयों के माध्यम से स्थापित हुई है।
  • इस प्रणाली का उद्देश्य कार्यपालिका के हस्तक्षेप को कम करके न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखना है, हालांकि इसकी पारदर्शिता और जवाबदेही पर अक्सर बहस होती रही है।

कॉलेजियम प्रणाली क्या है?

  • कॉलेजियम प्रणाली सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए भारत में उपयोग की जाने वाली प्रणाली है।
  • यह प्रणाली सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के माध्यम से विकसित हुई है, विशेष रूप से ‘तीन न्यायाधीशों के मामलों’ (First, Second and Third Judges’ Cases) के माध्यम से।
  • सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
  • उच्च न्यायालय कॉलेजियम में संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और उस उच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशें कार्यपालिका (सरकार) के लिए बाध्यकारी होती हैं, हालांकि सरकार कुछ मामलों में पुनर्विचार का अनुरोध कर सकती है।
  • उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण की सिफारिश भी सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा की जाती है।
  • इस प्रणाली की आलोचना अक्सर इसकी अपारदर्शिता, भाई-भतीजावाद की संभावना और जवाबदेही की कमी के लिए की जाती है, जबकि इसके समर्थक न्यायिक स्वतंत्रता के लिए इसे आवश्यक मानते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति यह न्यायिक प्रशासन और न्याय वितरण प्रणाली की दक्षता सुनिश्चित करता है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने में मदद करता है, साथ ही न्यायाधीशों को विभिन्न न्यायिक वातावरण का अनुभव कराता है।
कॉलेजियम प्रणाली यह सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र है।
न्यायिक रिक्तियों को भरना समय पर नियुक्तियाँ अदालतों पर काम के बोझ को कम करती हैं और लंबित मामलों को निपटाने में सहायता करती हैं।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता नियुक्ति और स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता न्यायिक स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण है।

महत्व

न्यायिक प्रशासन

  • उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्यायिक प्रशासन में स्थिरता और निरंतरता आती है।
  • यह विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायिक नेतृत्व को मजबूत करता है, जिससे न्यायपालिका की कार्यप्रणाली में सुधार होता है।

न्याय वितरण प्रणाली

  • मुख्य न्यायाधीशों की समय पर नियुक्ति से लंबित मामलों को कम करने और न्याय तक पहुँच में सुधार करने में मदद मिलती है।
  • यह न्यायिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है और नागरिकों के लिए न्याय को अधिक सुलभ बनाता है।

संघवाद और न्यायिक संतुलन

  • विभिन्न राज्यों में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में न्यायिक प्रणाली प्रभावी ढंग से कार्य करे।

न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही

  • कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से नियुक्तियाँ न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखने में मदद करती हैं, क्योंकि यह कार्यपालिका के हस्तक्षेप को सीमित करती है।
  • हालांकि, इस प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता

  • कॉलेजियम प्रणाली की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता (Transparency) की कमी को लेकर अक्सर चिंताएँ व्यक्त की जाती हैं।
  • नियुक्ति और स्थानांतरण के मानदंडों को सार्वजनिक न करने से प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

2. न्यायिक रिक्तियों का बैकलॉग

  • उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के पद लंबे समय तक खाली रहते हैं, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित होता है।
  • यह लंबित मामलों की संख्या में वृद्धि करता है और न्याय वितरण में देरी का कारण बनता है।

3. कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच तनाव

  • न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच अक्सर मतभेद देखे जाते हैं।
  • यह संवैधानिक संतुलन और शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत को प्रभावित करता है।

4. क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व

  • न्यायिक नियुक्तियों में विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक समूहों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • यह न्यायिक प्रणाली की विविधता और समावेशिता को प्रभावित करता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कॉलेजियम की अपारदर्शिता नियुक्ति प्रक्रिया में स्पष्ट मानदंडों और कारणों की कमी से जनता का विश्वास कम होता है।
न्यायिक रिक्तियों का उच्च स्तर न्यायाधीशों की कमी से मामलों का निपटान धीमा होता है और न्याय में देरी होती है।
कार्यपालिका-न्यायपालिका गतिरोध नियुक्ति प्रक्रिया पर असहमति से संवैधानिक संस्थानों के बीच तनाव बढ़ता है।
न्यायिक जवाबदेही का अभाव कॉलेजियम के निर्णयों की समीक्षा के लिए कोई स्पष्ट तंत्र नहीं है।
न्यायिक नियुक्तियों में विविधता की कमी न्यायपालिका में विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि और लिंग का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व।

आगे की राह

  • कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए नियुक्ति के मानदंडों और कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
  • न्यायिक रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
  • न्यायिक नियुक्तियों के लिए एक स्थायी सचिवालय (Secretariat) स्थापित किया जा सकता है, जो नियुक्ति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करे।
  • न्यायिक नियुक्तियों में सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय उपाय किए जाने चाहिए।
  • न्यायिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) स्थापित किया जा सकता है।
  • कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि नियुक्ति प्रक्रिया पर आम सहमति बन सके।
  • राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (National Judicial Appointments Commission – NJAC) जैसे वैकल्पिक तंत्रों पर फिर से विचार किया जा सकता है, जिसमें संवैधानिक वैधता और न्यायिक स्वतंत्रता का ध्यान रखा जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

न्यायिक नियुक्तियाँ · कॉलेजियम प्रणाली · उच्च न्यायालय · भारत के मुख्य न्यायाधीश · न्यायाधीशों का स्थानांतरण · न्यायिक स्वतंत्रता · संविधान का अनुच्छेद 217 · संविधान का अनुच्छेद 222 · न्यायिक जवाबदेही · न्यायिक सक्रियता · शक्ति पृथक्करण · न्यायिक समीक्षा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 124’, ‘note’: ‘सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 217’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 222’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 233’, ‘note’: ‘जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की बैठक  →  उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की सिफारिश  →  उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण की सिफारिश  →  सरकार द्वारा सिफारिशों की समीक्षा  →  राष्ट्रपति द्वारा नियुक्तियों को मंजूरी  →  न्यायिक रिक्तियों को भरना और प्रशासन में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों का एक कॉलेजियम उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफारिश करता है।
2. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है।
3. कॉलेजियम प्रणाली का विकास संविधान के किसी विशिष्ट अनुच्छेद के तहत नहीं हुआ है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के माध्यम से हुआ है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं, न कि चार। कथन 2 सही है। अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा CJI और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है। कथन 3 सही है। कॉलेजियम प्रणाली ‘तीन न्यायाधीशों के मामलों’ (First Judges Case, Second Judges Case, Third Judges Case) के माध्यम से विकसित हुई है, न कि किसी संवैधानिक प्रावधान से।

Q2. अभिकथन (A): सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने हाल ही में विभिन्न उच्च न्यायालयों में चार न्यायाधीशों को मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है।
कारण (R): कॉलेजियम प्रणाली भारत में उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए एक स्थापित तंत्र है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) हालिया समाचार के अनुसार सही है। कारण (R) भी सही है क्योंकि कॉलेजियम प्रणाली वास्तव में भारत में उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए स्थापित तंत्र है। R, A का सही स्पष्टीकरण है क्योंकि कॉलेजियम प्रणाली के अस्तित्व के कारण ही ऐसी सिफारिशें की जाती हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण में कॉलेजियम प्रणाली की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण करें। क्या यह प्रणाली न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच उचित संतुलन स्थापित करती है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कॉलेजियम प्रणाली का संक्षिप्त परिचय, इसका विकास और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति/स्थानांतरण में इसकी केंद्रीय भूमिका। (अनुच्छेद 217 और 222 का उल्लेख)
2. **कॉलेजियम प्रणाली की भूमिका:**
* उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया।
* उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण की प्रक्रिया।
* ‘तीन न्यायाधीशों के मामलों’ (First, Second, Third Judges Cases) का संदर्भ।
3. **न्यायिक स्वतंत्रता के पक्ष में तर्क:**
* कार्यपालिका के हस्तक्षेप से बचाव।
* न्यायपालिका की स्वायत्तता सुनिश्चित करना।
* न्यायाधीशों को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखना।
4. **जवाबदेही और पारदर्शिता पर चिंताएँ:**
* प्रणाली में पारदर्शिता की कमी।
* भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप।
* कोई स्पष्ट चयन मानदंड नहीं।
* कार्यपालिका की सीमित भूमिका और ‘चेक एंड बैलेंस’ की कमी।
* राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) का संदर्भ और उसे असंवैधानिक घोषित किया जाना।
5. **संतुलन का विश्लेषण:**
* क्या वर्तमान प्रणाली न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच एक आदर्श संतुलन बनाती है? पक्ष और विपक्ष में तर्क।
* सुधारों की आवश्यकता पर विभिन्न समितियों और विशेषज्ञों के विचार।
6. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें, जिसमें प्रणाली के महत्व को स्वीकार करते हुए, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए संभावित सुधारों का सुझाव दिया जाए।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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