स्टील फ्रेम से स्मार्ट फ्रेम तक सक्षम प्रशासन @ मिशन कर्मयोगी

स्टील फ्रेम से स्मार्ट फ्रेम तक सक्षम प्रशासन @ मिशन कर्मयोगी

  • मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 2 – के अंतर्गत ‘ भारतीय संविधान एवं शासन व्यवस्था, भारतीय राजनीति और शासन – प्रणाली, लोक प्रशासन, राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस ’ खण्ड से संबंधित।
  • प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत – ‘ मिशन कर्मयोगी, कर्मयोगी अधिकारी – सक्षम शासन, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (e-HRMS), भाषिणी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जन सेवा प्रशिक्षण कार्यक्रम (फेज – II), विकसित भारत @ 2047’ खण्ड से संबंधित।
  • निबंध प्रश्न पत्र के अंतर्गत – ‘ राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस बनाम संवैधानिक आधार अनुच्छेद 308-323 (भाग XIV) संघ और राज्यों के अधीन सेवाओं से संबंधित, द्वितीय प्रशासनिक आयोग की सिफारिशें ’ खण्ड से संबंधित। 

 

ख़बरों में क्यों ?

 

 

  • हाल ही में केन्द्र सरकार ने अपने केंद्रीय बजट 2026-27 में मिशन कर्मयोगी लिए बड़े वित्तीय संसाधन आवंटित किए गए हैं, जिससे प्रशिक्षण और प्रशासनिक सुधार को मजबूती मिली है।
  • हाल ही में केन्द्र सरकार ने मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी कर्मचारियों के कौशल-वर्धन, प्रशासनिक सुधार और प्रशासनिक क्षमता निर्माण में एक प्रमुख प्रशासनिक सुधार पहल के रूप में जोर देकर लागू किया है। 
  • इसके अलावा कई राज्यों में मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मिशन की प्रगति समीक्षा, अनिवार्य क्षमता-निर्माण कार्यक्रम लागू करने, तथा iGOT Karmayogi डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षण को बढ़ाने जैसे कदम उठा रहे हैं, ताकि सरकारी सेवाओं की प्रभावशीलता, जवाबदेही और दक्षता में सुधार हो सके।
  • इसके अतिरिक्त देशभर में विशाल-पैमाने पर जन सेवा प्रशिक्षण कार्यक्रम (फेज-II) के सफलतापूर्वक संपन्न होने की खबरें भी हैं, जिनके तहत लाखों सरकारी अधिकारियों को क्षमता विकास पाठ्यक्रमों से जोड़ा गया है।

 

मिशन कर्मयोगी क्या है?

 

  • यह भारत सरकार द्वारा 2 सितंबर, 2020 को शुरू किया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली को ‘नियम-आधारित’ (Rule-based) से बदलकर ‘भूमिका-आधारित’ (Role-based) बनाना है।

 

मिशन कर्मयोगी की पृष्ठभूमि : 

 

  • मिशन कर्मयोगी की पृष्ठभूमि भारत की सिविल सेवा में समय के साथ उभरी संरचनात्मक और कार्यात्मक कमजोरियों से जुड़ी है। यद्यपि सिविल सेवा को लंबे समय से प्रशासन का ‘स्टील फ्रेम’ कहा जाता रहा है, फिर भी बदलती सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप इसमें कई खामियाँ स्पष्ट होने लगीं है। 
  • देश के विभिन्न विभागों का साइलो में कार्य करना इसके आपसी समन्वय को कमजोर करता था, जबकि जवाबदेही की व्यवस्था में कौशल-विकास के बजाय वरिष्ठता और पदोन्नति को अधिक महत्व दिया जाता था। 
  • इसके अतिरिक्त, 19वीं सदी के औपनिवेशिक प्रशासनिक ढाँचे के आधार पर 21वीं सदी की जटिल और तकनीक-प्रधान समस्याओं का समाधान करना त्वरित रूप से करना कठिन होता जा रहा था। 
  • भारत के वर्तमान प्रशासनिक ढाँचे में व्याप्त इन्हीं चुनौतियों को दूर करने और एक सक्षम, उत्तरदायी तथा भविष्य के भारत के लिए तैयार नौकरशाही के निर्माण के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिशन कर्मयोगी को एक व्यापक ‘क्षमता निर्माण’ कार्यक्रम के रूप में परिकल्पित किया गया है।

 

मिशन कर्मयोगी का मुख्य उद्देश्य : 

 

 

  • मिशन कर्मयोगी का प्राथमिक लक्ष्य भारतीय सिविल सेवा को अधिक पारदर्शी, सक्रिय और तकनीक-सक्षम बनाना है। इसके विस्तृत उद्देश्य निम्नलिखित हैं – 
  • भूमिका – आधारित प्रशिक्षण (Role-based Training) प्रदान करना : इसके तहत अधिकारियों को केवल उनके पद के नियमों तक सीमित न रखकर, उनकी विशिष्ट कार्य-भूमिका (Job Role) के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना भी है।
  • निरंतर सीखने की संस्कृति (Continuous Learning) को विकसित करना : यह सिविल सेवकों के लिए प्रशिक्षण को केवल सेवा के आरंभ (Induction) तक सीमित न रखकर, उनके पूरे करियर के दौरान ‘आजीवन सीखने’ की प्रक्रिया पर जोर देने पर आधारित है।
  • व्यवहारगत और कार्यात्मक दक्षता को बढ़ाना : यह मिशन लोक सेवकों में जनता के प्रति संवेदनशीलता, विनम्रता और व्यावसायिकता जैसे व्यवहारगत परिवर्तनों के साथ-साथ डोमेन ज्ञान (Domain Knowledge) को बढ़ाने पर आधारित है।
  • प्रौद्योगिकी का आपस में एकीकरण (iGOT-Karmayogi) करना : इसके तहत एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विश्व स्तरीय सामग्री तक पहुंच सुनिश्चित करना, ताकि कर्मचारी कहीं भी और कभी भी प्रशिक्षण ले सकें।
  • साझा संसाधन और इकोसिस्टम विकसित करना : इसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच ‘साइलो’ (Silos) की संस्कृति को खत्म करना और संसाधनों का साझा उपयोग करके प्रशिक्षण लागत को कम करना है।
  • स्व-सुधार का अवसर प्रदान करना : मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों को अपनी क्षमता का स्वयं मूल्यांकन करने और अपनी पसंद के विषयों में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर देने पर आधारित है।

 

मिशन कर्मयोगी के मुख्य स्तंभ : 

 

मिशन कर्मयोगी निम्नलिखित छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है-

  • नीतिगत ढांचा (Policy Framework)
  • संस्थागत ढांचा (Institutional Framework)
  • योग्यता ढांचा (Competency Framework)
  • डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म (iGOT-Karmayogi)
  • इलेक्ट्रॉनिक मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (e-HRMS)
  • निगरानी और मूल्यांकन ढांचा (Monitoring and Evaluation)

 

मिशन कर्मयोगी से जुड़ी प्रमुख चुनौतियाँ : 

 

 

  • इस महत्वाकांक्षी योजना के मार्ग में कई प्रशासनिक, तकनीकी और सांस्कृतिक बाधाएं हैं। जो निम्नलिखित है – 
  • भारतीय नौकरशाही में परिवर्तन की प्रक्रिया को अपनाने के प्रति मानसिक प्रतिरोध : भारतीय नौकरशाही में लंबे समय से चली आ रही ‘नियम-आधारित’ व्यवस्था के कारण वरिष्ठ अधिकारियों में नई डिजिटल कार्यशैली और सीखने की प्रक्रिया को अपनाने के प्रति मानसिक अवरोध है।
  • डिजिटल विभाजन संबंधी चुनौतियाँ : भारत के दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए उच्च गति इंटरनेट और स्मार्ट उपकरणों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।
  • भाषागत बाधाएँ : वर्तमान में iGOT प्लेटफॉर्म पर अधिकांश उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री अंग्रेजी में है, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं में कार्य करने वाले कर्मचारियों को समझने में कठिनाई होती है।
  • मूल्यांकन की सटीकता का अभाव होना : किसी अधिकारी के व्यवहारगत परिवर्तन ( जैसे – सहानुभूति या नैतिकता ) को डेटा या अंकों के आधार पर सटीक रूप से मापना अत्यंत जटिल कार्य है।
  • प्रासंगिक और अद्यतन शिक्षण सामग्री की गुणवत्ता की कमी : 2.5 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के लिए निरंतर प्रासंगिक और अद्यतन (Updated) शिक्षण सामग्री तैयार करना एक विशाल कार्य है।

 

समाधान / आगे की राह : 

 

  • भारत में इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और संस्थागत ढांचे को निम्नलिखित कदम उठाने की आवश्यकता है – 
  • प्रोत्साहन और रिवॉर्ड सिस्टम को प्रोत्साहित करने की जरूरत : जो कर्मचारी डिजिटल प्रशिक्षण में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, उनके स्कोर को उनके ‘वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन’ (APAR) से जोड़ा जाना चाहिए ताकि वे सीखने के लिए प्रेरित हों।
  • क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद – कार्य को बढ़ावा देने की आवश्यकता : AI-आधारित अनुवाद उपकरणों ( जैसे – ‘भाषिणी’ ) का उपयोग करके सभी पाठ्यक्रमों को संविधान की 22 आधिकारिक भाषाओं में उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  • हाइब्रिड लर्निंग मॉडल को अपनाने की जरूरत : जहाँ डिजिटल पहुंच कम है, वहां फिजिकल वर्कशॉप और ऑनलाइन मॉड्यूल का मिला-जुला रूप (Blended Learning) अपनाना चाहिए।
  • निजी क्षेत्र के साथ सहयोग करने की आवश्यकता : विशिष्ट तकनीकी विषयों ( जैसे – डेटा साइंस, AI, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ) के लिए निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों और वैश्विक संस्थानों से सामग्री साझा करनी चाहिए।
  • क्षमता निर्माण के लिए मजबूत निगरानी तंत्र को समय-समय पर ऑडिट करने की आवश्यकता : क्षमता निर्माण आयोग (CBC) को समय-समय पर ऑडिट करना चाहिए कि मंत्रालयों में प्रशिक्षण का वास्तविक प्रभाव जमीनी स्तर पर सेवाओं में सुधार के रूप में दिख रहा है अथवा नहीं दिख रहा है।

 

निष्कर्ष : 

 

 

  • मिशन कर्मयोगी का प्रभावी एवं समावेशी कार्यान्वयन भारत को ‘न्यूनतम सरकार – अधिकतम शासन’ की अवधारणा की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर करेगा। यह पहल न केवल नौकरशाही की दक्षता, उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता को सुदृढ़ करेगी, बल्कि आम नागरिकों के ‘इज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) में भी ठोस और सकारात्मक सुधार सुनिश्चित करेगी।
  • मिशन कर्मयोगी मात्र एक पारंपरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय शासन प्रणाली में लोकतांत्रिक सुदृढ़ीकरण का एक संरचनात्मक और दीर्घकालिक सुधार प्रयास है। यह प्रशासन को ‘ नियम-प्रधान से उद्देश्य-प्रधान ’ , तथा ‘ पद-केन्द्रित से नागरिक-केन्द्रित ’ बनाने की दिशा में एक संगठित पहल प्रस्तुत करता है।
  • यदि इस मिशन को दूरदृष्टि, राजनीतिक संकल्प और संस्थागत प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाता है, तो यह ‘न्यूनतम सरकार – अधिकतम शासन’ के आदर्श को व्यवहारिक वास्तविकता में परिवर्तित कर सकता है। ‘पब्लिक सर्विस’ को ‘सेल्फ-सर्विस’ से ऊपर रखने की यह सुव्यवस्थित सोच अंततः 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में एक सशक्त आधारशिला सिद्ध होगी।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. मिशन कर्मयोगी के छह स्तंभों में निम्नलिखित में से कौन-कौन से शामिल हैं?

  1. नीतिगत ढांचा (Policy Framework)
  2. संस्थागत ढांचा (Institutional Framework)
  3. योग्यता ढांचा (Competency Framework)
  4. डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म (iGOT-Karmayogi)
  5. इलेक्ट्रॉनिक मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (e-HRMS)
  6. निगरानी और मूल्यांकन ढांचा (Monitoring and Evaluation Framework)

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: 

A. केवल 1, 2, 3 और 4 

B. केवल 4, 5 और 6 C) 

C. केवल 1, 3, 4 और 5 

D. उपर्युक्त सभी (1, 2, 3, 4, 5 और 6)।

उत्तर –  D. उपर्युक्त सभी।

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. मिशन कर्मयोगी के मूल उद्देश्यों और इसके प्रमुख स्तंभों पर प्रकाश डालते हुए चर्चा कीजिए कि यह कार्यक्रम भारतीय नौकरशाही को ‘नियम-आधारित’ से ‘भूमिका-आधारित’ शासन में बदलने में किस प्रकार सहायक है? इसके प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन चुनौतियों के समाधान की राह सुझाएं। (शब्द सीमा – 250 अंक – 15) 

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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