30 Jul अटल भूजल योजना: भूजल संरक्षण में सफलता और सामुदायिक भागीदारी का मॉडल


मानचित्र व माइंड-मैप: Atal Bhujal Yojana: Implementation & Impact
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, कृषि
- Prelims: अटल भूजल योजना, भूजल प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी, जल सुरक्षा योजना, जल बजट, केंद्रीय क्षेत्र योजना, विश्व बैंक, ग्राम पंचायत
- Essay: जल संरक्षण और प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी की भूमिका, भारत में सतत विकास के लिए भूजल संसाधनों का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: अटल भूजल योजना भूजल के सतत प्रबंधन के लिए समुदाय-आधारित और सहभागी दृष्टिकोण पर केंद्रित एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसने भूजल स्तर में सुधार और सामुदायिक जागरूकता में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana) के कार्यान्वयन और इसके प्रभावों पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) द्वारा किए गए इस आकलन अध्ययन में योजना के तहत भूजल स्तर में सुधार, सामुदायिक जागरूकता में वृद्धि और महिलाओं की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण बदलावों को रेखांकित किया गया है। यह रिपोर्ट योजना के सफल पायलट कार्यान्वयन और भविष्य के लिए इसके अनुकरणीय मॉडल के रूप में महत्व को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में भूजल (Groundwater) एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से कृषि, पेयजल और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
- केंद्रीय भूजल बोर्ड (Central Ground Water Board) के अनुसार, देश के कई हिस्सों में भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे जल स्तर में गिरावट और जल गुणवत्ता में कमी आ रही है।
- भूजल के अत्यधिक दोहन से निपटने और इसके सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक भागीदारी आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता महसूस की गई।
- इस पृष्ठभूमि में, केंद्र सरकार ने विश्व बैंक (World Bank) के सहयोग से अटल भूजल योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य भूजल प्रबंधन में सुधार लाना था।
- यह योजना उन राज्यों और जिलों पर केंद्रित थी जहाँ भूजल की कमी गंभीर थी और इसके प्रबंधन में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता थी।
- योजना का लक्ष्य केवल तकनीकी समाधान प्रदान करना नहीं था, बल्कि भूजल संसाधनों के प्रबंधन में स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना भी था।
अटल भूजल योजना क्या है?
- अटल भूजल योजना जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti) की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme) है, जिसे 1 अप्रैल, 2020 से 15 अक्टूबर, 2025 तक पायलट आधार पर लागू किया गया।
- यह योजना विश्व बैंक द्वारा आंशिक रूप से वित्त पोषित है, जिसका उद्देश्य भूजल प्रबंधन में सुधार के लिए संस्थागत ढाँचे को मजबूत करना और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।
- योजना का कार्यान्वयन गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 80 जिलों के 229 ब्लॉकों की 8,203 जल की कमी वाली ग्राम पंचायतों में किया गया।
- योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर सहभागी जल बजट (Participatory Water Budget) और जल सुरक्षा योजनाएं (Water Security Plans) तैयार की जाती हैं और उन्हें प्रतिवर्ष अद्यतन किया जाता है।
- इसमें आपूर्ति-पक्ष (Supply-side) और मांग-पक्ष (Demand-side) दोनों हस्तक्षेपों पर जोर दिया गया है, जिसमें जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण/नवीनीकरण और कुशल जल-उपयोग प्रथाओं को बढ़ावा देना शामिल है।
- योजना में भूजल डेटा के मापन और सार्वजनिक प्रकटीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें डिजिटल जल स्तर रिकॉर्डर और वर्षा मापी जैसे उपकरण स्थापित किए गए हैं।
- महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निर्णय लेने में कम से कम 33% भागीदारी अनिवार्य की गई थी, जिससे सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा मिला।
- योजना का एक प्रमुख घटक क्षमता निर्माण (Capacity Building) है, जिसके तहत ब्लॉक, जिला और राज्य-स्तरीय प्रशिक्षणों के साथ-साथ 1.28 लाख से अधिक ग्राम पंचायत-स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किए गए।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समुदाय-आधारित सहभागी भूजल प्रबंधन | स्थानीय समुदायों को भूजल संरक्षण और प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाता है, जिससे योजनाओं की स्वीकार्यता और प्रभावशीलता बढ़ती है। |
| पायलट आधार पर 7 राज्यों में कार्यान्वयन | गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे जल-संकटग्रस्त राज्यों में विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने और सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान करने में मदद करता है। |
| जल बजट और जल सुरक्षा योजनाओं का निर्माण | ग्राम पंचायत स्तर पर जल संसाधनों के यथार्थवादी आकलन और टिकाऊ उपयोग के लिए रणनीतिक योजना को बढ़ावा देता है। |
| महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य | निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की कम से कम 33% भागीदारी सुनिश्चित करके लैंगिक समानता और समावेशिता को बढ़ावा देता है। |
| आपूर्ति-पक्ष संरचनाओं का निर्माण/नवीनीकरण | जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए भौतिक अवसंरचना का निर्माण करता है, जिससे भूजल स्तर में प्रत्यक्ष सुधार होता है। |
| कुशल जल-उपयोग प्रथाओं को बढ़ावा | ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई, मल्चिंग और फसल विविधीकरण जैसी तकनीकों के माध्यम से कृषि में पानी के उपयोग की दक्षता बढ़ाता है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- भूजल स्तर में सुधार: योजना के तहत शामिल 229 ब्लॉकों में से 180 ब्लॉकों में भूजल स्तर में सुधार देखा गया है, जो जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- जल संरक्षण और पुनर्भरण: आपूर्ति-पक्ष संरचनाओं के निर्माण और नवीनीकरण से वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलता है।
- कुशल जल-उपयोग: लगभग 9.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कुशल जल-उपयोग प्रथाओं को अपनाने से पानी की बर्बादी कम होती है और पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है।
सामाजिक महत्व
- सामुदायिक जागरूकता और भागीदारी: क्षमता निर्माण और IEC (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियों के माध्यम से भूजल मुद्दों पर सामुदायिक जागरूकता बढ़ी है, जिससे जनभागीदारी सुनिश्चित हुई है।
- महिलाओं का सशक्तिकरण: भूजल प्रबंधन में नेतृत्व और निर्णय लेने में महिलाओं की कम से कम 33% भागीदारी अनिवार्य करने से लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा मिला है।
- सामाजिक समावेशन: योजना के कार्यान्वयन में गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों को शामिल करने से सामाजिक समावेशिता मजबूत हुई है।
आर्थिक महत्व
- कृषि उत्पादकता में वृद्धि: कुशल जल-उपयोग प्रथाओं को अपनाने से किसानों को कम पानी में अधिक फसल उगाने में मदद मिलती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।
- जल संसाधनों का स्थायी प्रबंधन: भूजल के स्थायी उपयोग को बढ़ावा देने से भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता आती है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: जल संरक्षण और प्रबंधन गतिविधियों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
शासनिक महत्व
- विकेंद्रीकृत प्रबंधन: ग्राम पंचायत स्तर पर जल बजट और जल सुरक्षा योजनाओं का निर्माण विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करता है।
- डेटा-आधारित निर्णय: भूजल डेटा का मापन और सार्वजनिक प्रकटीकरण नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने में मदद करता है।
- अंतर-राज्यीय सहयोग: 7 राज्यों में पायलट कार्यान्वयन विभिन्न भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक संदर्भों में भूजल प्रबंधन के लिए मॉडल प्रदान करता है।
चुनौतियाँ
1. भूजल स्तर में गिरावट
- अत्यधिक दोहन: कृषि, औद्योगिक और घरेलू उपयोग के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन भूजल स्तर में लगातार गिरावट का एक प्रमुख कारण है।
- जलवायु परिवर्तन: अनियमित वर्षा पैटर्न और सूखे की बढ़ती आवृत्ति भूजल पुनर्भरण को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, जल संसाधन
2. जागरूकता और क्षमता निर्माण
- सीमित सामुदायिक भागीदारी: कुछ क्षेत्रों में भूजल प्रबंधन के महत्व के बारे में जागरूकता की कमी के कारण सामुदायिक भागीदारी सीमित हो सकती है।
- तकनीकी ज्ञान का अभाव: स्थानीय समुदायों और हितधारकों में जल बजट और कुशल जल-उपयोग प्रथाओं को लागू करने के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान और कौशल की कमी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, शासन
3. डेटा की उपलब्धता और गुणवत्ता
- डेटा अंतराल: कुछ क्षेत्रों में भूजल स्तर, उपयोग और गुणवत्ता से संबंधित विश्वसनीय और अद्यतन डेटा की कमी हो सकती है।
- डेटा एकीकरण: विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा को एकीकृत करने और उसका विश्लेषण करने में चुनौतियाँ आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, शासन
4. योजना का विस्तार और वित्तपोषण
- पायलट कार्यक्रम की सीमाएं: अटल भूजल योजना एक पायलट कार्यक्रम था, और इसके सफल मॉडलों को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने के लिए पर्याप्त वित्तपोषण और संस्थागत समर्थन की आवश्यकता होगी।
- राज्यों के बीच असमानता: विभिन्न राज्यों में भूजल की स्थिति और प्रबंधन क्षमता में असमानताएं हैं, जिससे एक समान दृष्टिकोण लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास, संघीय ढाँचा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूजल का अत्यधिक दोहन | कृषि, शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण भूजल का अनियंत्रित निष्कर्षण, जिससे जलभृतों पर दबाव बढ़ रहा है। |
| प्रदूषण | औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि रसायन और अनुपचारित सीवेज भूजल को दूषित कर रहे हैं, जिससे पीने योग्य पानी की उपलब्धता कम हो रही है। |
| जलवायु परिवर्तन के प्रभाव | अनियमित वर्षा पैटर्न, सूखे और बाढ़ की बढ़ती घटनाओं से भूजल पुनर्भरण और उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। |
| जागरूकता की कमी | भूजल के महत्व और इसके स्थायी प्रबंधन के बारे में आम जनता और कुछ हितधारकों के बीच पर्याप्त जागरूकता का अभाव। |
| संस्थागत समन्वय का अभाव | भूजल प्रबंधन में शामिल विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी, जिससे नीतियों का खंडित कार्यान्वयन होता है। |
| तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ | आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने और बड़े पैमाने पर पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय संसाधनों की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- अटल भूजल योजना
आगे की राह
- अटल भूजल योजना के सफल मॉडलों को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए।
- भूजल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी को और मजबूत करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाए जाएं।
- भूजल डेटा संग्रह, विश्लेषण और सार्वजनिक प्रकटीकरण के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय डेटाबेस और निगरानी प्रणाली विकसित की जाए।
- कुशल जल-उपयोग प्रथाओं (जैसे सूक्ष्म सिंचाई) को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान की जाए।
- भूजल प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त नियामक उपाय लागू किए जाएं और अपशिष्ट जल उपचार सुविधाओं में सुधार किया जाए।
- भूजल प्रबंधन में अंतर-राज्यीय सहयोग और समन्वय को बढ़ावा दिया जाए, विशेषकर उन नदी घाटियों में जो कई राज्यों में फैली हुई हैं।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए वर्षा जल संचयन और कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।
- भूजल प्रबंधन में महिलाओं और अन्य हाशिए पर पड़े समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अटल भूजल योजना · सामुदायिक भागीदारी · भूजल प्रबंधन · जल सुरक्षा योजना · जल बजट · महिला सशक्तिकरण · क्षमता निर्माण · सतत जल संसाधन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
- राज्य सूची (सातवीं अनुसूची): जल आपूर्ति, सिंचाई, नहरें, जल निकासी, तटबंध, जल विद्युत
अवधारणा प्रवाह
भूजल का अत्यधिक दोहन और जल संकट → अटल भूजल योजना का कार्यान्वयन (समुदाय-आधारित दृष्टिकोण) → जल बजट, जल सुरक्षा योजनाएँ और क्षमता निर्माण → आपूर्ति-पक्ष संरचनाओं का निर्माण और कुशल जल-उपयोग → भूजल स्तर में सुधार और सामुदायिक जागरूकता में वृद्धि → स्थायी भूजल प्रबंधन और जल सुरक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. अटल भूजल योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना देश के सभी राज्यों में लागू की गई है।
2. इसका उद्देश्य समुदाय-आधारित सहभागी भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
3. इस योजना के तहत महिलाओं की सक्रिय निर्णय लेने में कम से कम 33% भागीदारी अनिवार्य की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि यह योजना पायलट आधार पर सात राज्यों में लागू की गई थी, सभी राज्यों में नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि यह समुदाय-आधारित सहभागी भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देती है। कथन 3 सही है क्योंकि महिलाओं की सक्रिय निर्णय लेने में कम से कम 33% भागीदारी अनिवार्य की गई थी।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा राज्य अटल भूजल योजना के पायलट कार्यान्वयन क्षेत्रों में शामिल नहीं था?
- गुजरात
- मध्य प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- उत्तर प्रदेश
उत्तर: छत्तीसगढ़ — अटल भूजल योजना का कार्यान्वयन गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में किया गया था। छत्तीसगढ़ राज्य में इस योजना का कार्यान्वयन नहीं किया गया था।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अटल भूजल योजना के प्रमुख उद्देश्यों और कार्यान्वयन रणनीतियों पर चर्चा कीजिए। भूजल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने में यह योजना कितनी सफल रही है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana) का संक्षिप्त परिचय, इसके लॉन्च की तिथि और मुख्य उद्देश्य (सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से भूजल प्रबंधन)।
2. प्रमुख उद्देश्य: योजना के मुख्य उद्देश्यों का विस्तृत वर्णन, जैसे भूजल स्तर में सुधार, जल सुरक्षा योजनाएं, जल बजट, क्षमता निर्माण आदि।
3. कार्यान्वयन रणनीतियाँ: योजना की कार्यान्वयन रणनीतियों का उल्लेख, जिसमें पायलट राज्य, ग्राम पंचायत-स्तरीय प्रशिक्षण, डिजिटल निगरानी, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भूमिका, और महिलाओं की भागीदारी (33% अनिवार्यता) शामिल हैं।
4. सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने में सफलता: भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के प्रभाव आकलन अध्ययन के निष्कर्षों का हवाला देते हुए सामुदायिक जागरूकता में वृद्धि, निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी, सामाजिक समावेशिता और समुदाय की तत्परता जैसे बिंदुओं पर चर्चा। भूजल स्तर में सुधार वाले ब्लॉकों का डेटा (229 में से 180 ब्लॉकों में सुधार) और जल बजट/सुरक्षा योजनाओं के निर्माण का उल्लेख।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: यदि कोई चुनौतियाँ हों (हालांकि लेख में सीधे उल्लिखित नहीं हैं, फिर भी सामान्य भूजल प्रबंधन चुनौतियों का उल्लेख किया जा सकता है) और भविष्य के लिए सिफारिशें।
6. निष्कर्ष: योजना के महत्व और सतत भूजल प्रबंधन में इसके योगदान पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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