अनुच्छेद 370 निरसन के 7 साल: मोदी ने बताया जम्मू-कश्मीर का बदलता चेहरा

प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 370 और 35(ए) के निरसन के सात वर्ष पूरे होने पर उसके महत्व के बारे में बताया — concept mind map

अनुच्छेद 370 निरसन के 7 साल: मोदी ने बताया जम्मू-कश्मीर का बदलता चेहरा

✎ अनुच्छेद 370 और 35(ए) के निरसन ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का भारतीय संघ के साथ पूर्ण संवैधानिक एकीकरण सुनिश्चित किया, जिससे क्षेत्र में समावेशी विकास और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व; संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ; स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ  |  GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों के संबंध
  • Prelims: अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35(ए), जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, संघवाद, संवैधानिक एकीकरण
  • Essay: भारत में राष्ट्रीय एकता और अखंडता की चुनौतियाँ तथा समाधान, समावेशी विकास: संवैधानिक प्रावधानों का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: अनुच्छेद 370 और 35(ए) के निरसन ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का भारतीय संघ के साथ पूर्ण संवैधानिक एकीकरण सुनिश्चित किया, जिससे क्षेत्र में समावेशी विकास और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों का मार्ग प्रशस्त हुआ।

यह खबर चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस कदम को भारत के समावेशी विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया, जिससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का भी उल्लेख किया, जिनकी राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता को इस ऐतिहासिक निर्णय से साकार होते देखा गया।

पृष्ठभूमि

  • जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त था, जो इसे अपना अलग संविधान, ध्वज और आंतरिक प्रशासन के मामलों में स्वायत्तता प्रदान करता था।
  • अनुच्छेद 35(ए) को 1954 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा संविधान में शामिल किया गया था, जो जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार और विशेषाधिकार प्रदान करता था, तथा गैर-स्थायी निवासियों को राज्य में संपत्ति खरीदने या सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने से रोकता था।
  • इन अनुच्छेदों के कारण, भारत के संविधान के कई प्रावधान, जिनमें मौलिक अधिकार और विभिन्न केंद्रीय कानून शामिल हैं, जम्मू-कश्मीर में सीधे लागू नहीं होते थे।
  • 5 अगस्त, 2019 को, भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के खंड (1) को छोड़कर सभी खंडों को निरस्त कर दिया और अनुच्छेद 35(ए) को समाप्त कर दिया।
  • इसी दिन, संसद ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019) भी पारित किया, जिसने जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर (विधानसभा के साथ) और लद्दाख (विधानसभा के बिना)—में विभाजित कर दिया।
  • सरकार का तर्क था कि ये अनुच्छेद क्षेत्र के विकास में बाधा डाल रहे थे और भारत के अन्य हिस्सों के साथ इसके पूर्ण एकीकरण को रोक रहे थे।
  • इस निर्णय के बाद, भारत का संविधान पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर लागू हो गया, जिससे महिलाओं और हाशिये के समुदायों सहित सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्राप्त हुए।

अनुच्छेद 370 और 35(ए) क्या थे?

  • अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक अस्थायी प्रावधान था, जो जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष स्वायत्तता प्रदान करता था।
  • यह अनुच्छेद रक्षा, विदेश मामले और संचार को छोड़कर अन्य सभी मामलों में जम्मू-कश्मीर को अपना कानून बनाने की शक्ति देता था।
  • अनुच्छेद 35(ए) भारतीय संविधान का एक प्रावधान था, जो जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल को ‘स्थायी निवासियों’ को परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार और विशेषाधिकार प्रदान करने का अधिकार देता था।
  • यह अनुच्छेद गैर-स्थायी निवासियों को राज्य में अचल संपत्ति खरीदने, सरकारी नौकरियों में आवेदन करने या छात्रवृत्ति प्राप्त करने से प्रतिबंधित करता था।
  • अनुच्छेद 35(ए) को संविधान में सीधे संशोधन के बजाय राष्ट्रपति के आदेश (संविधान (जम्मू और कश्मीर पर लागू) आदेश, 1954) के माध्यम से जोड़ा गया था।
  • इन अनुच्छेदों के कारण, जम्मू-कश्मीर में भारत के संविधान के कई मौलिक अधिकार और अन्य केंद्रीय कानून लागू नहीं होते थे, जिससे संवैधानिक एकीकरण में बाधा आती थी।
  • 5 अगस्त, 2019 को, भारत सरकार ने इन अनुच्छेदों को निरस्त कर दिया, जिससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का भारतीय संघ के साथ पूर्ण संवैधानिक एकीकरण हुआ।
  • निरसन के बाद, भारतीय संविधान के सभी प्रावधान, जिनमें मौलिक अधिकार, अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण और पंचायती राज अधिनियम शामिल हैं, अब इन केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अनुच्छेद 370 और 35(ए) का निरसन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए भारत के समावेशी विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर।
संवैधानिक अधिकारों का पूर्ण कार्यान्वयन महिलाओं और हाशिए पर पड़े समुदायों का सशक्तिकरण, जिन्हें दशकों तक इन अधिकारों से वंचित रखा गया था।
बुनियादी ढांचे का विस्तार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे का उल्लेखनीय विकास।
नए अवसरों का सृजन शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता और खेल जैसे क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न हुए।
राष्ट्रीय एकता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक राष्ट्र, एक विधान’ के दृष्टिकोण की पूर्ति।

महत्व

राजनीतिक और संवैधानिक महत्व

  • अनुच्छेद 370 और 35(ए) के निरसन ने जम्मू-कश्मीर को भारत के संविधान के पूर्ण दायरे में लाया, जिससे सभी केंद्रीय कानून और अधिकार क्षेत्र राज्य में लागू हो सके।
  • यह कदम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करता है, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के सिद्धांत को साकार करता है।
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने से शासन में सुधार और विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है।

सामाजिक और मानवाधिकार संबंधी महत्व

  • महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों को अब भारत के संविधान के तहत उपलब्ध सभी मौलिक अधिकार और सुरक्षा प्राप्त हैं, जिनमें शिक्षा का अधिकार (Right to Education) और आरक्षण नीतियां शामिल हैं।
  • दशकों से वंचित रहे लोगों को अब स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व और अन्य संवैधानिक अधिकारों का लाभ मिल रहा है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिला है।
  • नागरिकों को अब भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र सहित सभी न्यायिक उपचारों तक पहुंच प्राप्त है, जिससे न्याय प्रणाली में विश्वास बढ़ा है।

आर्थिक और विकासात्मक महत्व

  • बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आई है, जिसमें सड़क, रेल और संचार नेटवर्क का विस्तार शामिल है, जिससे कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।
  • शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और उद्यमिता के क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न हुए हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आजीविका के साधन बढ़े हैं।
  • निवेश के लिए अनुकूल माहौल बना है, जिससे पर्यटन और अन्य उद्योगों में वृद्धि की संभावना है, जो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित कर सकता है।

सुरक्षा और शासन संबंधी महत्व

  • केंद्रीय कानूनों के पूर्ण कार्यान्वयन से कानून और व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली है और आतंकवाद एवं अलगाववाद पर अंकुश लगाने में सहायता मिली है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि हुई है, जिससे सुशासन को बढ़ावा मिला है और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाने में मदद मिली है।
  • स्थानीय प्रशासन को मजबूत किया गया है, जिससे विकास परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और नागरिकों की शिकायतों के निवारण में सुधार हुआ है।

चुनौतियाँ

1. स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक संवेदनशीलता

  • स्थानीय आबादी के बीच अपनी विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
  • बाहरी लोगों द्वारा भूमि खरीद और जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आशंकाओं को दूर करना आवश्यक है।

2. राजनीतिक प्रक्रिया का सामान्यीकरण

  • क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह से बहाल करना और स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व को सशक्त करना एक चुनौती है।
  • विधानसभा चुनावों का आयोजन और एक निर्वाचित सरकार की स्थापना महत्वपूर्ण कदम हैं।

3. आर्थिक विकास और रोजगार सृजन

  • क्षेत्र में स्थायी आर्थिक विकास सुनिश्चित करना और पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करना आवश्यक है, विशेषकर युवाओं के लिए।
  • पर्यटन, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।

4. सुरक्षा और शांति स्थापना

  • आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ की चुनौतियों का सामना करना जारी है, जिसके लिए निरंतर सतर्कता और प्रभावी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
  • स्थानीय आबादी के बीच विश्वास बहाली और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्थानीय पहचान का संरक्षण संस्कृति, भाषा और विशिष्ट पहचान को बनाए रखने की आवश्यकता।
जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आशंका बाहरी लोगों द्वारा भूमि खरीद और नौकरी के अवसरों पर प्रभाव की चिंता।
राजनीतिक सामान्यीकरण लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की बहाली और निर्वाचित सरकार की स्थापना में देरी।
आर्थिक असमानता क्षेत्रीय असंतुलन और सभी वर्गों तक विकास के लाभों का न पहुंचना।
सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ आतंकवाद, घुसपैठ और स्थानीय आबादी के बीच विश्वास बहाली की आवश्यकता।

आगे की राह

  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह से बहाल करना और विधानसभा चुनावों का आयोजन करना।
  • स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर भागीदारी को बढ़ावा देना।
  • क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और विरासत के संरक्षण के लिए विशेष नीतियां बनाना।
  • स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने हेतु कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना।
  • पर्यटन, कृषि और हस्तशिल्प जैसे पारंपरिक उद्योगों को पुनर्जीवित करना और उनमें निवेश आकर्षित करना।
  • बुनियादी ढांचे के विकास को जारी रखना, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, ताकि कनेक्टिविटी और पहुंच में सुधार हो।
  • कानून और व्यवस्था बनाए रखते हुए मानवाधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करना तथा सुरक्षा बलों और नागरिकों के बीच विश्वास बहाली करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अनुच्छेद 370 · अनुच्छेद 35A · जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन · समावेशी विकास · राष्ट्रीय एकता · संवैधानिक अधिकार · डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी · संघवाद · विशेष दर्जा · केंद्र-राज्य संबंध

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

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  • {‘article’: ‘पांचवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन’}
  • {‘article’: ‘छठी अनुसूची’, ‘note’: ‘जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन’}

अवधारणा प्रवाह

अनुच्छेद 370 और 35(ए) का निरसन  →  जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन  →  भारत के संविधान का पूर्ण कार्यान्वयन  →  विकास और अवसरों में वृद्धि  →  महिलाओं और हाशिए के समुदायों का सशक्तिकरण  →  राष्ट्रीय एकता और समावेशी विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को एक विशेष दर्जा प्रदान किया था, जिसमें भारत के संविधान के सभी प्रावधान सीधे लागू नहीं होते थे।
2. अनुच्छेद 35A ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा को ‘स्थायी निवासियों’ को परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार प्रदान करने की शक्ति दी थी।
3. अनुच्छेद 370 और 35A को 5 अगस्त, 2019 को निरस्त कर दिया गया था।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता दी थी। कथन 2 सही है क्योंकि अनुच्छेद 35A ने राज्य विधानमंडल को स्थायी निवासियों को परिभाषित करने का अधिकार दिया था। कथन 3 सही है क्योंकि ये अनुच्छेद 5 अगस्त, 2019 को निरस्त किए गए थे।

Q2. अभिकथन (A): प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 370 और 35A के निरसन को भारत के समावेशी विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है।
कारण (R): इन अनुच्छेदों के निरसन के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में महिलाओं तथा हाशिए के समुदायों को भारत के संविधान के पूर्ण कार्यान्वयन के माध्यम से सशक्त किया गया है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि प्रधानमंत्री ने निरसन को समावेशी विकास का मील का पत्थर बताया है। कारण (R) भी सही है और यह (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि निरसन के बाद ही संविधान के पूर्ण प्रावधान लागू हुए, जिससे वंचित समुदायों को सशक्तिकरण मिला।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अनुच्छेद 370 और 35A के निरसन के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में आए परिवर्तनों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह कदम भारत के संघवाद की भावना के अनुरूप था? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अनुच्छेद 370 और 35A का संक्षिप्त परिचय और उनके निरसन की तिथि (5 अगस्त, 2019)।
2. **सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों का परीक्षण:**
* **सकारात्मक परिवर्तन:** बुनियादी ढाँचे का विस्तार (सड़कें, बिजली), शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुँच, उद्यमिता और खेल के अवसरों में वृद्धि, महिलाओं और हाशिए के समुदायों का सशक्तिकरण (जैसे आरक्षण, संपत्ति अधिकार), केंद्रीय कानूनों का पूर्ण कार्यान्वयन (जैसे RTI, मनरेगा, SC/ST अधिनियम), पर्यटन में वृद्धि, निवेश आकर्षित करने के प्रयास।
* **चुनौतियाँ/आलोचनाएँ:** राजनीतिक अस्थिरता, स्थानीय पहचान और संस्कृति पर संभावित प्रभाव की चिंताएँ, सुरक्षा संबंधी मुद्दे, बेरोजगारी की दर, मानवाधिकारों पर चिंताएँ (यदि कोई हों), स्थानीय राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ।
3. **संघवाद की भावना के अनुरूपता:**
* **समर्थन में तर्क:** ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा, जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाना, सभी नागरिकों के लिए समान संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करना, अलगाववाद को कम करना, आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना।
* **विरोध में तर्क:** राज्य विधानमंडल की सहमति के बिना निर्णय, केंद्र द्वारा राज्यों की स्वायत्तता का अतिक्रमण, विशेष प्रावधानों को हटाने की प्रक्रिया पर संवैधानिक बहस, स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं की अनदेखी का आरोप।
* **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें, जिसमें परिवर्तनों के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को स्वीकार किया जाए और यह बताया जाए कि यह कदम संघवाद की व्याख्या पर विभिन्न दृष्टिकोणों को जन्म देता है, लेकिन इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता और समावेशी विकास था।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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