आंध्र प्रदेश में मानव अंग प्रत्यारोपण संशोधन विधेयक पारित, अंग तस्करी पर रोक

Transplantation of Human Organs (Amendment) Bill passed to bridge organ demand-supply gap and curb trafficking in Andhra — diagram

आंध्र प्रदेश में मानव अंग प्रत्यारोपण संशोधन विधेयक पारित, अंग तस्करी पर रोक

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✎ मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य आंध्र प्रदेश में अंगदान की मांग-आपूर्ति के अंतर को कम करना और अंग तस्करी पर अंकुश लगाना है, जो केंद्रीय 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011' के अनुरूप है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — स्वास्थ्य, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय  |  GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ तथा इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा एवं बेहतरी के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं उनके अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।
  • Prelims: मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994, मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011, आंध्र प्रदेश मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक, 2026, ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन, स्वैप डोनेशन, निकट संबंधी की परिभाषा
  • Essay: स्वास्थ्य सेवा में नैतिक दुविधाएँ और विधायी प्रतिक्रियाएँ, भारत में अंगदान की चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य आंध्र प्रदेश में अंगदान की मांग-आपूर्ति के अंतर को कम करना और अंग तस्करी पर अंकुश लगाना है, जो केंद्रीय ‘मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011’ के अनुरूप है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

आंध्र प्रदेश विधानसभा ने हाल ही में आंध्र प्रदेश मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में अंगों की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को कम करना तथा अंग तस्करी पर अंकुश लगाना है। यह राज्य अधिनियम केंद्रीय ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ के अनुरूप है, जिसमें 2011 के केंद्रीय संशोधन अधिनियम के बाद राज्य स्तर पर भी बदलाव की आवश्यकता थी ताकि चिकित्सा आवश्यकताओं और नैतिक चुनौतियों के अनुकूल बना जा सके।

पृष्ठभूमि

  • भारत में मानव अंगों का प्रत्यारोपण ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ (Transplantation of Human Organs Act, 1994) द्वारा शासित होता है, जिसका उद्देश्य अंगदान और प्रत्यारोपण को विनियमित करना तथा अंग तस्करी को रोकना है।
  • वर्ष 2011 में केंद्रीय अधिनियम में ‘मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011’ (Transplantation of Human Organs and Tissues Act, 2011) के माध्यम से महत्वपूर्ण संशोधन किए गए, जिसमें मानव ऊतकों (जैसे त्वचा, कॉर्निया, हृदय वाल्व) को भी कानूनी दायरे में लाया गया।
  • 2011 के संशोधनों ने ‘निकट संबंधी’ (near relative) की परिभाषा का विस्तार किया, जिसमें दादा-दादी और पोते-पोतियों को शामिल किया गया, जिससे जीवित दाताओं का एक व्यापक कानूनी पूल उपलब्ध हो सके।
  • इन संशोधनों ने ‘स्वैप डोनेशन’ (swap donations) का भी प्रावधान किया, जिससे दो असंगत दाता-प्राप्तकर्ता जोड़े आपस में दाताओं की अदला-बदली कर सकें, जिससे दोनों प्राप्तकर्ताओं को संगत अंग मिल सकें।
  • संशोधनों ने कमजोर आबादी की सुरक्षा के लिए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को कड़ा किया, मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों से अंग या ऊतक निकालने पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया और नाबालिगों से दान को प्रतिबंधित किया।
  • अंतर्राष्ट्रीय चिंताओं को दूर करने के लिए, 2011 के संशोधनों में विदेशी नागरिकों के लिए प्राधिकरण समिति की मंजूरी अनिवार्य की गई और भारतीय नागरिकों को विदेशियों को दान करने से प्रतिबंधित किया गया, जब तक कि वे निकट संबंधी न हों।
  • मस्तिष्क मृत्यु (brain death) प्रमाणन के लिए विशेष न्यूरोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता की स्थिति में, संशोधनों ने स्वतंत्र चिकित्सकों को नामित करने की अनुमति दी, बशर्ते वे प्रत्यारोपण टीम का हिस्सा न हों।
  • आंध्र प्रदेश का मूल अधिनियम, ‘आंध्र प्रदेश मानव अंग अधिनियम, 1995’, केंद्रीय अधिनियम के अनुरूप था और अब केंद्रीय संशोधनों के बाद राज्य स्तर पर भी इसे अद्यतन करने की आवश्यकता थी।

मानव अंग प्रत्यारोपण क्या है?

  • मानव अंग प्रत्यारोपण एक शल्य प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति के क्षतिग्रस्त या रोगग्रस्त अंग को किसी अन्य व्यक्ति (दाता) से स्वस्थ अंग से बदला जाता है।
  • यह प्रक्रिया गुर्दे, हृदय, यकृत, फेफड़े, अग्न्याशय और आंतों जैसे अंगों के लिए की जा सकती है।
  • अंगदान जीवित दाताओं (जैसे गुर्दे या यकृत का एक हिस्सा) या मृत दाताओं (मस्तिष्क मृत व्यक्ति) से हो सकता है।
  • भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण को विनियमित करने के लिए ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ और उसके बाद के संशोधन लागू हैं।
  • इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को नैतिक और पारदर्शी बनाना तथा अंग तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों को रोकना है।
  • अधिनियम में ‘ब्रेन डेथ’ (मस्तिष्क मृत्यु) को परिभाषित किया गया है, जो अंगदान के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त है, क्योंकि ऐसे व्यक्ति के अंग अभी भी कार्यशील हो सकते हैं।
  • अंगदान की प्रक्रिया में दाता और प्राप्तकर्ता के बीच रक्त समूह और ऊतक संगतता का मिलान महत्वपूर्ण होता है ताकि प्रत्यारोपण की सफलता सुनिश्चित की जा सके।
  • भारत में अंगदान की दर कम है, जिससे अंगों की मांग और आपूर्ति के बीच एक बड़ा अंतर बना हुआ है, जिसे पाटने के लिए विधायी और जागरूकता प्रयासों की आवश्यकता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मानव अंगों और ऊतकों का समावेश कानूनी दायरे का विस्तार, जिसमें त्वचा, कॉर्निया, हृदय वाल्व, टेंडन और अस्थि मज्जा जैसे ऊतक शामिल हैं, जिससे दान और प्रत्यारोपण के अवसर बढ़ते हैं।
‘निकट संबंधी’ की परिभाषा का विस्तार दादा-दादी और पोते-पोतियों को शामिल करने से जीवित दाताओं का पूल बढ़ता है, जिससे असंबद्ध दाताओं के लिए आवश्यक जटिल अनुमोदन प्रक्रियाओं से बचा जा सकता है।
स्वैप दान का प्रावधान दो असंगत दाता-प्राप्तकर्ता जोड़ों को दाताओं की अदला-बदली करने में सक्षम बनाता है, जिससे संगत अंगों के सफल प्रत्यारोपण के अवसर बढ़ते हैं।
कमजोर आबादी के लिए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय मानसिक रूप से अक्षम व्यक्तियों से अंग या ऊतक निकालने पर सख्त प्रतिबंध और नाबालिगों से दान को सीमित करना, नैतिक चिंताओं को संबोधित करना।
विदेशी नागरिकों के लिए अनुमोदन विदेशी नागरिकों के लिए प्राधिकरण समिति (Authorisation Committee) की मंजूरी अनिवार्य करना और भारतीय नागरिकों को विदेशियों को दान करने से रोकना, जब तक कि वे निकट संबंधी न हों, अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को दूर करना।
ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन के लिए स्वतंत्र चिकित्सकों का नामांकन विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता में देरी से बचने के लिए स्वतंत्र चिकित्सकों को नामित करने की अनुमति, बशर्ते वे प्रत्यारोपण टीम का हिस्सा न हों।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह संशोधन विधेयक अंग दान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अधिक सुलभ और नैतिक बनाता है, जिससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों के लिए जीवन बचाने की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
  • मानव अंगों के साथ-साथ ऊतकों को भी कानूनी दायरे में लाने से विभिन्न चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती है, जैसे कि कॉर्निया या अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण।
  • कमजोर आबादी, जैसे मानसिक रूप से अक्षम व्यक्तियों और नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे अंग व्यापार और शोषण पर अंकुश लगता है।

स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा

  • अंगों और ऊतकों की मांग-आपूर्ति के अंतर को कम करने में मदद करता है, जिससे प्रत्यारोपण के लिए प्रतीक्षा समय कम हो सकता है।
  • स्वैप दान (Swap donations) की अनुमति देने से उन परिवारों के लिए प्रत्यारोपण की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं जहाँ दाता और प्राप्तकर्ता सीधे संगत नहीं होते हैं।
  • ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन (Brain Death Certification) के लिए स्वतंत्र चिकित्सकों को नामित करने का प्रावधान प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी को कम करता है, जो अंग की व्यवहार्यता के लिए महत्वपूर्ण है।

शासन और कानूनी

  • यह विधेयक केंद्रीय कानून, मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011 (Transplantation of Human Organs (Amendment) Act, 2011) के साथ राज्य कानून को संरेखित करता है, जिससे पूरे देश में एकरूपता और सुसंगतता सुनिश्चित होती है।
  • अंग व्यापार और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कानूनी ढाँचे को मजबूत करता है, जिसमें विदेशी नागरिकों से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।
  • यह कानून चिकित्सा नैतिकता और बदलते चिकित्सा विज्ञान की आवश्यकताओं के अनुकूल होने के लिए आवश्यक अद्यतन प्रदान करता है।

चुनौतियाँ

1. अंगों की कमी

  • भारत में अंग दान की दर अभी भी कम है, जिससे प्रत्यारोपण के लिए अंगों की भारी कमी बनी हुई है।
  • जागरूकता की कमी और सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ अंग दान को बढ़ावा देने में एक बड़ी चुनौती हैं।

2. अंग व्यापार और नैतिक चिंताएँ

  • अंगों की कमी अक्सर अवैध अंग व्यापार को जन्म देती है, जिससे कमजोर व्यक्तियों का शोषण होता है।
  • दान और प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती है।

3. बुनियादी ढाँचा और विशेषज्ञता

  • देश के कई हिस्सों में प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक विशेष चिकित्सा सुविधाओं और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी है।
  • ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन के लिए विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट की उपलब्धता एक चुनौती हो सकती है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

4. कानूनी और नियामक प्रवर्तन

  • संशोधित कानूनों का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंग व्यापार से निपटने के लिए विभिन्न देशों के बीच समन्वय की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अंग दान की कम दर जनसंख्या की तुलना में दान किए गए अंगों की संख्या बहुत कम है, जिससे प्रतीक्षा सूची लंबी होती है।
जागरूकता का अभाव अंग दान के महत्व और प्रक्रिया के बारे में आम जनता में जानकारी की कमी।
अवैध अंग व्यापार अंगों की कमी और उच्च मांग के कारण संगठित अपराधों द्वारा अंग व्यापार का जोखिम।
चिकित्सा बुनियादी ढाँचे की कमी विशेषज्ञ डॉक्टरों, प्रशिक्षित कर्मचारियों और प्रत्यारोपण सुविधाओं की अपर्याप्तता, खासकर छोटे शहरों में।
नैतिक दुविधाएँ दान और प्रत्यारोपण से संबंधित नैतिक मुद्दों, जैसे कि सहमति, पारदर्शिता और कमजोर वर्गों के शोषण को रोकना।
अंतर्राष्ट्रीय समन्वय सीमा पार अंग व्यापार को रोकने और विदेशी नागरिकों से संबंधित मामलों को संभालने में चुनौतियाँ।

आगे की राह

  • अंग दान के महत्व के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, जिसमें धार्मिक नेताओं और सामुदायिक संगठनों को शामिल किया जाए।
  • अंग दान पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाया जाए, जिसमें ऑनलाइन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस के साथ एकीकरण जैसे विकल्प शामिल हों।
  • अंग प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक चिकित्सा बुनियादी ढाँचे, विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में, को मजबूत किया जाए और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  • अंग व्यापार को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाए और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ त्वरित और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को मानकीकृत किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि योग्य चिकित्सक समय पर उपलब्ध हों।
  • स्वैप दान और अन्य नवीन दान मॉडलों को बढ़ावा दिया जाए ताकि उपलब्ध अंगों का अधिकतम उपयोग हो सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाए ताकि सीमा पार अंग व्यापार को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके और विदेशी नागरिकों से संबंधित मामलों को नैतिक रूप से संभाला जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मानव अंग प्रत्यारोपण · अंगदान · अंग तस्करी · मानव ऊतक · मस्तिष्क मृत्यु · स्वैप दान · निकट संबंधी · कानूनी ढाँचा · नैतिक चुनौतियाँ · सार्वजनिक स्वास्थ्य

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

अंगों की मांग-आपूर्ति में अंतर  →  अंग व्यापार और नैतिक चुनौतियाँ  →  मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम में संशोधन  →  कानूनी दायरे का विस्तार और सुरक्षा उपाय  →  प्रत्यारोपण के अवसर में वृद्धि और शोषण पर अंकुश

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में मानव अंग प्रत्यारोपण केंद्रीय ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ द्वारा शासित होता है।
2. ‘मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011’ ने मानव ऊतकों को कानूनी दायरे में शामिल किया।
3. ‘स्वैप दान’ की अवधारणा का उद्देश्य असंगत दाता-प्राप्तकर्ता जोड़ों के बीच अंग प्रत्यारोपण को सुविधाजनक बनाना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि भारत में अंग प्रत्यारोपण का मुख्य कानून केंद्रीय ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ है। कथन 2 भी सही है क्योंकि 2011 के संशोधन ने ऊतकों (जैसे त्वचा, कॉर्निया) को शामिल करके कानून का विस्तार किया। कथन 3 भी सही है क्योंकि स्वैप दान दो असंगत जोड़ों को दाता बदलने की अनुमति देता है, जिससे प्रत्यारोपण के अवसर बढ़ते हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा ‘मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011’ का एक प्रमुख प्रावधान नहीं है?

  1. मानसिक रूप से अक्षम व्यक्तियों से अंग या ऊतक निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध।
  2. निकट संबंधी की परिभाषा में दादा-दादी और पोते-पोतियों को शामिल करना।
  3. विदेशी नागरिकों को अंगदान करने वाले भारतीय नागरिकों पर कोई प्रतिबंध नहीं।
  4. मस्तिष्क मृत्यु प्रमाणन के लिए स्वतंत्र चिकित्सकों के नामांकन की अनुमति देना।

उत्तर: विदेशी नागरिकों को अंगदान करने वाले भारतीय नागरिकों पर कोई प्रतिबंध नहीं। — 2011 के संशोधन अधिनियम ने भारतीय नागरिकों द्वारा विदेशियों को अंगदान करने पर प्रतिबंध लगाया, जब तक कि वे निकट संबंधी न हों। इसलिए, ‘विदेशी नागरिकों को अंगदान करने वाले भारतीय नागरिकों पर कोई प्रतिबंध नहीं’ एक गलत कथन है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में मानव अंग प्रत्यारोपण के कानूनी ढाँचे का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। अंगदान और अंग तस्करी के बीच की खाई को पाटने तथा नैतिक चुनौतियों का समाधान करने में ‘मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011’ की भूमिका का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर की रूपरेखा:
1. परिचय: भारत में अंगदान की आवश्यकता और अंग तस्करी की समस्या का संक्षिप्त परिचय। ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ का उल्लेख।
2. कानूनी ढाँचा: ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ के मुख्य प्रावधानों का वर्णन करें, जिसमें अंगदान, मस्तिष्क मृत्यु की अवधारणा और प्राधिकरण समितियों की भूमिका शामिल है।
3. 2011 के संशोधन की भूमिका:
क. ‘निकट संबंधी’ की परिभाषा का विस्तार (दादा-दादी, पोते-पोती)।
ख. ‘स्वैप दान’ (Swap Donation) की शुरुआत।
ग. मानव ऊतकों (Human Tissues) को कानूनी दायरे में शामिल करना।
घ. कमजोर आबादी (मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति, नाबालिग) की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान।
ङ. विदेशी नागरिकों से संबंधित अंगदान पर प्रतिबंध।
च. मस्तिष्क मृत्यु प्रमाणन में देरी से बचने के लिए स्वतंत्र चिकित्सकों की अनुमति।
4. आलोचनात्मक विश्लेषण:
क. सकारात्मक प्रभाव: अंगदान को बढ़ावा देने, कानूनी दायरे का विस्तार करने और तस्करी पर अंकुश लगाने में संशोधन की सफलता।
ख. चुनौतियाँ और सीमाएँ: अंगदान-मांग के अंतर को पूरी तरह से पाटने में चुनौतियाँ, जागरूकता की कमी, भ्रष्टाचार की संभावना, नैतिक दुविधाएँ और कार्यान्वयन में कमियाँ।
5. निष्कर्ष: अंगदान को बढ़ावा देने और तस्करी को रोकने के लिए कानूनी ढाँचे को मजबूत करने, सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और नैतिक दिशानिर्देशों का पालन करने की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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