23 Oct एसआरआईएचईआर दीक्षांत: एआई और जीन थेरेपी से बदल रहा है चिकित्सा का भविष्य
✎ सटीक चिकित्सा = जीनोमिक्स + कृत्रिम बुद्धिमत्ता + व्यक्ति-विशिष्ट निदान और उपचार; भारत की प्राथमिकता इसे जीवनशैली जनित रोगों की रोकथाम के साथ जोड़ना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित नीतियाँ और संस्थागत ढाँचा) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव-प्रौद्योगिकी के स्वास्थ्य में अनुप्रयोग) | GS Paper III — स्वास्थ्य (गैर-संचारी रोग और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य देखभाल)
- Prelims: सटीक चिकित्सा (Precision Medicine), जीन चिकित्सा (Gene Therapy), जीनोम इंडिया परियोजना (Genome India Project), जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology, DBT), BioE3 नीति (Biotechnology for Economy, Environment and Employment Policy), गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Diseases, NCDs), राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission, NMC), मानित विश्वविद्यालय (Deemed to be University), राष्ट्रीय सिकल सेल रक्तहीनता उन्मूलन मिशन (National Sickle Cell Anaemia Elimination Mission)
- Essay: तकनीकी नवाचार और मानवीय स्पर्श: कृत्रिम बुद्धिमत्ता युग में चिकित्सक की भूमिका, रोकथाम पहले, उपचार बाद में: भारत में जीवनशैली जनित रोगों की बढ़ती चुनौती और स्वास्थ्य नीति
त्वरित पुनरावृत्ति: सटीक चिकित्सा = जीनोमिक्स + कृत्रिम बुद्धिमत्ता + व्यक्ति-विशिष्ट निदान और उपचार; भारत की प्राथमिकता इसे जीवनशैली जनित रोगों की रोकथाम के साथ जोड़ना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चेन्नई स्थित श्री रामचंद्र उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (SRIHER) के 42वें दीक्षांत समारोह में कहा कि विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्देशित और जीन-आधारित सटीक चिकित्सा के युग में प्रवेश कर रहा है, तथा भारत उन्नत स्वास्थ्य समाधानों के अग्रणी प्रदाताओं में उभर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाली पीढ़ी के चिकित्सकों के सामने नई तकनीकों के उपयोग का अवसर भी होगा और उन्हें नैदानिक व्यवहार में इन्हें प्रभावी ढंग से समाहित करने की चुनौती भी होगी। उन्होंने स्वदेशी टीकों, जीन चिकित्सा और चिकित्सा अनुसंधान में भारत की प्रगति का उल्लेख किया, साथ ही मधुमेह और हृदय रोग जैसे जीवनशैली जनित रोगों के युवाओं में बढ़ते प्रभाव पर रोकथाम को प्राथमिकता देने पर बल दिया। समारोह में उन्होंने जीनोमिक्स, जैव-विनिर्माण और परमाणु चिकित्सा में सहयोग बढ़ाने के लिए संस्थान को आमंत्रित भी किया। यह संदर्भ इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें तकनीकी क्षमता, रोग-भार में बदलाव और चिकित्सा शिक्षा के बीच का संबंध एक साथ दिखाई देता है।
पृष्ठभूमि
- रोग-भार में परिवर्तन (Epidemiological Transition): भारत में स्वास्थ्य समस्याएँ पहले मुख्यतः संचारी रोगों पर केंद्रित थीं, जबकि अब गैर-संचारी रोगों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती जीवन प्रत्याशा इस बदलाव को और गहरा करती है।
- जीनोम इंडिया परियोजना: जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की पहल के अंतर्गत भारतीय जनसंख्या के आनुवंशिक विविधता-आधारित डेटा के संग्रह और विश्लेषण को प्राथमिकता दी गई है, जिससे सटीक चिकित्सा के लिए आधार तैयार होता है।
- जैव-प्रौद्योगिकी नीति: BioE3 नीति (2024) जैव-प्रौद्योगिकी को आर्थिक संवृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखती है, जिसमें जैव-विनिर्माण एक प्रमुख क्षेत्र है।
- चिकित्सा शिक्षा का नियामक ढाँचा: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) चिकित्सा शिक्षा के मानक और चिकित्सा पेशे के नियमन से जुड़ा प्रमुख संस्थान है।
- विकसित भारत 2047 का लक्ष्य: मानव पूँजी की रक्षा और उत्पादक कार्यबल के लिए युवाओं में दीर्घकालिक रोगों की रोकथाम को राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों से जोड़ा गया है।
सटीक चिकित्सा (Precision Medicine) क्या है?
- सटीक चिकित्सा में उपचार और निवारक रणनीति को व्यक्ति के आनुवंशिक गुणों, जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों के अनुसार तैयार किया जाता है। इसे व्यक्ति-केंद्रित चिकित्सा भी कहा जाता है।
- जीनोमिक्स (Genomics) किसी जीव के संपूर्ण आनुवंशिक पदार्थ (DNA) के अध्ययन से संबंधित है। इससे रोगों के आनुवंशिक कारणों की पहचान और जोखिम का पूर्वानुमान संभव होता है।
- जीन चिकित्सा (Gene Therapy) में रोग के मूल आनुवंशिक दोष को सुधारने या नियंत्रित करने के लिए जीन में परिवर्तन या जीन-आधारित हस्तक्षेप किया जाता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) बड़े चिकित्सा डेटा का विश्लेषण कर प्रारंभिक निदान, रोग-पूर्वानुमान और उपचार चयन में सहायता करती है। इसका उपयोग करते समय चिकित्सक का निर्णय ही अंतिम रहता है।
- जीवनशैली जनित रोग (Lifestyle Diseases) जैसे मधुमेह और हृदय रोग में प्रारंभिक पहचान, जोखिम-नियंत्रण और दीर्घकालिक प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनकी जटिलताएँ वर्षों बाद प्रकट होती हैं।
- भारत में आयुष्मान भारत जैसी योजनाएँ उपचार की पहुँच बढ़ाती हैं, परंतु उन्नत तकनीकों की लागत और समान पहुँच एक नीतिगत चुनौती बनी रहती है।
- स्वास्थ्य डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का संदर्भ प्रासंगिक है, क्योंकि आनुवंशिक और चिकित्सा डेटा अत्यंत संवेदनशील होता है।
- तकनीक का प्रभावी एकीकरण चिकित्सकों के प्रशिक्षण, नैतिक दिशानिर्देशों और साक्ष्य-आधारित नैदानिक अभ्यास पर निर्भर करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence, AI) आधारित चिकित्सा | निदान की सटीकता बढ़ाती है और चिकित्सकीय निर्णय को डेटा-आधारित बनाती है; चिकित्सा पद्धति में व्यापक बदलाव का संकेत देती है। |
| सटीक चिकित्सा (Precision Medicine) | रोगी के आनुवंशिक और जैविक गुणों के अनुसार उपचार तय करती है, जिससे एक ही उपचार सबके लिए लागू करने की पारंपरिक पद्धति से हटकर व्यक्तिगत उपचार की ओर बढ़ा जाता है। |
| जीन चिकित्सा (Gene Therapy) और स्वदेशी टीके | आनुवंशिक रोगों के उपचार और टीका-निर्माण में भारत की क्षमता को दर्शाते हैं; स्वास्थ्य सेवा में आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण से प्रासंगिक हैं। |
| जीवनशैली से जुड़े रोग (Lifestyle Diseases) | मधुमेह और हृदय रोग जैसे रोग अब युवाओं में भी बढ़ रहे हैं; इनकी रोकथाम स्वास्थ्य नीति की प्रमुख प्राथमिकता बनती है। |
| निवारक स्वास्थ्य सेवा (Preventive Healthcare) | प्रारंभिक पहचान, जोखिम कारकों में कमी और दीर्घकालिक प्रबंधन पर बल देती है, ताकि जटिलताओं और स्वास्थ्य-व्यय का बोझ घटे। |
| जीनोमिक्स, बायोमैन्युफैक्चरिंग और परमाणु चिकित्सा में सहयोग | अनुसंधान संस्थानों और शिक्षा-जगत के बीच साझेदारी से नवाचार को औद्योगिक उत्पादन और नैदानिक उपयोग से जोड़ने की दिशा मिलती है। |
महत्व
स्वास्थ्य और सामाजिक महत्व
- जीवनशैली रोगों की बढ़ती घटनाओं के बीच निवारक दृष्टिकोण से स्वास्थ्य-परिणामों में सुधार की संभावना बनती है।
- 30 वर्ष की आयु में मधुमेह होने पर कई दशकों तक जटिलताओं का जोखिम रहता है, इसलिए प्रारंभिक रोकथाम का सामाजिक मूल्य अधिक है।
- बढ़ती जीवन प्रत्याशा के साथ दीर्घकालिक और संक्रामक, दोनों प्रकार के रोगों से निपटने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जीनोमिक्स का समन्वय चिकित्सा-अनुसंधान की गति और गुणवत्ता दोनों बढ़ा सकता है।
- जीन चिकित्सा और स्वदेशी टीकों में प्रगति से भारत की जैव-प्रौद्योगिकी क्षमता का प्रदर्शन होता है।
आर्थिक और औद्योगिक महत्व
- बायोमैन्युफैक्चरिंग में सहयोग से जैव-औषधि उत्पादन का घरेलू आधार मजबूत होता है और आयात पर निर्भरता घटाने में सहायता मिल सकती है।
- सटीक चिकित्सा और डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की मांग बढ़ती है, जिससे रोजगार और नवाचार के अवसर बनते हैं।
विकसित भारत 2047 से संबंध
- युवाओं में दीर्घकालिक रोगों की रोकथाम को मानव क्षमता की रक्षा से जोड़ा गया है, जो विकसित भारत के लक्ष्य के लिए आवश्यक कार्यबल की गुणवत्ता से सीधे संबंधित है।
चुनौतियाँ
1. नैतिक और डेटा संरक्षण की चुनौती
- जीनोमिक और स्वास्थ्य डेटा अत्यंत संवेदनशील होता है; उसकी सहमति, भंडारण और उपयोग के लिए स्पष्ट नियम आवश्यक हैं।
- एआई-आधारित प्रणालियों में एल्गोरिद्म के पूर्वाग्रह और निर्णय की पारदर्शिता जैसे प्रश्न उठते हैं।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधान स्वास्थ्य-डेटा के प्रसंस्करण पर लागू होते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन, डेटा संरक्षण कानून और नैतिकता
2. जीवनशैली रोगों का बढ़ता बोझ
- मधुमेह और हृदय रोग अब कम उम्र में उभर रहे हैं, जिससे दीर्घकालिक उपचार-व्यय और उत्पादकता-हानि बढ़ती है।
- संक्रामक और गैर-संक्रामक, दोनों प्रकार के रोग एक साथ स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव डालते हैं।
- केवल उपचार पर निर्भरता के बजाय जीवनशैली में परिवर्तन और जागरूकता पर बल देना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियाँ और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति
3. नियमन, सत्यापन और सुरक्षा
- नई जीन चिकित्सा और एआई-आधारित उपकरणों के लिए नैदानिक परीक्षण, सुरक्षा और प्रभावशीलता के मानक तय करना आवश्यक है।
- औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत नियामक ढांचे को नई तकनीकों के अनुरूप अद्यतन करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: नियामक संस्थाएँ और सार्वजनिक स्वास्थ्य कानून
4. सुलभता और समान पहुँच
- उन्नत और सटीक चिकित्सा की लागत अधिक होने से यह शहरी और सम्पन्न वर्ग तक सीमित रह सकती है।
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधारभूत सुविधाओं की कमी से तकनीकी लाभ असमान रूप से वितरित हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य सेवाओं में समान पहुँच
5. मानव संसाधन का तकनीकी प्रशिक्षण
- चिकित्सा शिक्षा में एआई, जीनोमिक्स और डेटा विज्ञान का समावेश अभी प्रारंभिक अवस्था में है।
- चिकित्सकों को नई तकनीकों को नैदानिक अभ्यास में एकीकृत करने के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: GS-2 और GS-3: शिक्षा सुधार और कौशल विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डेटा गोपनीयता | जीनोमिक और स्वास्थ्य डेटा के दुरुपयोग या अनधिकृत उपयोग का जोखिम। |
| एल्गोरिद्मिक पूर्वाग्रह | प्रशिक्षण डेटा की सीमाओं से कुछ समूहों के लिए निदान की सटीकता कम हो सकती है। |
| नियामक अंतराल | नई जीन चिकित्सा और एआई उपकरणों के लिए मानक और निगरानी तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं हैं। |
| जीवनशैली रोगों की वृद्धि | युवाओं में मधुमेह और हृदय रोग बढ़ने से दीर्घकालिक स्वास्थ्य-व्यय और उत्पादकता पर असर। |
| लागत और सुलभता | उन्नत उपचार की ऊँची लागत से समान पहुँच में बाधा। |
| कौशल अंतर | चिकित्सा और तकनीकी पेशेवरों में नई तकनीकों के व्यावहारिक ज्ञान की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Programme for Prevention and Control of Non-Communicable Diseases, NP-NCD)
- जीनोम इंडिया परियोजना (Genome India Project)
आगे की राह
- स्कूल और कॉलेज स्तर से स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ाकर जीवनशैली रोगों की रोकथाम को व्यवहार-परिवर्तन के साथ जोड़ा जाए।
- मधुमेह और उच्च रक्तचाप की नियमित जाँच को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सुनिश्चित कर प्रारंभिक पहचान को व्यापक बनाया जाए।
- जीनोमिक और स्वास्थ्य डेटा के लिए स्पष्ट सहमति, सुरक्षित भंडारण और उपयोग-सीमा से जुड़े मानक तय किए जाएँ।
- जीन चिकित्सा और एआई-आधारित उपकरणों के लिए नैदानिक परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
- शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और उद्योग के बीच साझेदारी को बढ़ाकर अनुसंधान के परिणामों को व्यावसायिक उत्पादन में बदला जाए।
- चिकित्सा पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीनोमिक्स और चिकित्सीय नैतिकता को शामिल कर भावी चिकित्सकों को तैयार किया जाए।
- उन्नत चिकित्सा सेवाओं की पहुँच ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक बढ़ाने के लिए टेलीमेडिसिन और क्षेत्रीय केंद्रों का विस्तार किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) · सटीक चिकित्सा (Precision Medicine) · जीन-आधारित उपचार (Gene-based Therapies) · जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ (Lifestyle Diseases) · निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) · जीनोमिक्स (Genomics) · बायोमैन्युफैक्चरिंग (Biomanufacturing) · परमाणु चिकित्सा (Nuclear Medicine) · स्वास्थ्य सेवा नवाचार (Healthcare Innovation) · विकसित भारत 2047
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 47: पोषण, जीवन-स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार का राज्य का कर्तव्य
- अनुच्छेद 21: जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का न्यायिक विस्तार
अवधारणा प्रवाह
जीवनशैली रोगों (मधुमेह, हृदय रोग) का युवाओं में बढ़ना और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि से नई स्वास्थ्य माँगें उत्पन्न होना। → निवारक स्वास्थ्य सेवा पर बल, जिससे प्रारंभिक पहचान और दीर्घकालिक रोग प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ती है। → कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जीनोमिक्स से सटीक चिकित्सा का विकास, जिससे निदान और उपचार रोगी-विशिष्ट बनते हैं। → जीन चिकित्सा और स्वदेशी टीकों में अनुसंधान से घरेलू जैव-प्रौद्योगिकी क्षमता का विस्तार। → शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और उद्योग के सहयोग से बायोमैन्युफैक्चरिंग और नैदानिक उपयोग का विस्तार। → नैतिक, नियामक और डेटा संरक्षण ढांचे के सुदृढ़ होने पर ही तकनीकी लाभ समान रूप से जनता तक पहुँचता है। → सुदृढ़ मानव संसाधन और निवारक स्वास्थ्य से मानव क्षमता का संरक्षण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में योगदान।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल निदान में सहायता कर सकता है, उपचार प्रोटोकॉल में नहीं।
2. सटीक चिकित्सा (Precision Medicine) व्यक्तियों की आनुवंशिक संरचना के आधार पर उपचार को अनुकूलित करती है।
3. भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है, जिससे निवारक स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता बढ़ गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि AI निदान के साथ-साथ उपचार प्रोटोकॉल और दवा खोज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कथन 2 सही है क्योंकि सटीक चिकित्सा का मुख्य सिद्धांत व्यक्तियों की आनुवंशिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली कारकों के आधार पर उपचार को अनुकूलित करना है। कथन 3 भी सही है, जैसा कि केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया है कि युवाओं में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती घटनाओं ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल को एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता बना दिया है।
Q2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सटीक चिकित्सा (Precision Medicine) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सबसे उपयुक्त है?
- AI और सटीक चिकित्सा केवल संक्रामक रोगों के उपचार पर केंद्रित हैं।
- सटीक चिकित्सा AI के बिना संभव नहीं है।
- AI और सटीक चिकित्सा का संयोजन व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल समाधानों को बढ़ावा देता है।
- AI का उपयोग केवल चिकित्सा अनुसंधान तक ही सीमित है, नैदानिक अभ्यास तक नहीं।
उत्तर: AI और सटीक चिकित्सा का संयोजन व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल समाधानों को बढ़ावा देता है। — विकल्प (C) सबसे उपयुक्त है। AI और सटीक चिकित्सा का संयोजन व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल समाधानों को बढ़ावा देता है, जिससे निदान, उपचार और रोग प्रबंधन में अधिक सटीकता आती है। AI निदान, उपचार प्रोटोकॉल और दवा खोज में सहायता करता है, जबकि सटीक चिकित्सा व्यक्तियों की आनुवंशिक संरचना के आधार पर उपचार को अनुकूलित करती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जीन-आधारित सटीक चिकित्सा के उभरते युग में भारत की स्वास्थ्य सेवा क्षमताओं को बढ़ाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, युवाओं में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल रणनीतियों के महत्व पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** AI और सटीक चिकित्सा के युग में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों का संक्षिप्त परिचय दें, जैसा कि केंद्रीय मंत्री के बयान में परिलक्षित होता है।
2. **प्रौद्योगिकी की भूमिका (AI और सटीक चिकित्सा):**
* **निदान और उपचार:** AI-सहायता प्राप्त निदान, व्यक्तिगत उपचार प्रोटोकॉल, दवा खोज और विकास में AI की भूमिका।
* **सटीक चिकित्सा:** व्यक्तियों की आनुवंशिक संरचना, जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों के आधार पर उपचार को अनुकूलित करने में जीन-आधारित चिकित्सा का महत्व।
* **अनुसंधान और विकास:** जीनोमिक्स, बायोमैन्युफैक्चरिंग और परमाणु चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में सहयोग और नवाचार का उल्लेख।
* **उदाहरण:** स्वदेशी टीके और जीन थेरेपी में भारत की प्रगति।
3. **निवारक स्वास्थ्य देखभाल रणनीतियाँ:**
* **जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता बोझ:** मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों का युवाओं में बढ़ता प्रसार और इसके दीर्घकालिक प्रभाव।
* **रोकथाम का महत्व:** प्रारंभिक हस्तक्षेप, दीर्घकालिक रोग प्रबंधन और स्वास्थ्य शिक्षा की आवश्यकता।
* **’विकसित भारत 2047′ से संबंध:** मानव क्षमता की रक्षा और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में निवारक स्वास्थ्य देखभाल की भूमिका।
4. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** तकनीकी एकीकरण की चुनौतियाँ, नैतिक विचार, डेटा गोपनीयता और स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुँच सुनिश्चित करना।
5. **निष्कर्ष:** भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के भविष्य के लिए प्रौद्योगिकी और निवारक रणनीतियों के सहयोगात्मक महत्व पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: चेन्नई में आयोजित एसआरआईएचईआर दीक्षांत समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा उल्लिखित ‘विश्व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) निर्देशित जीन-आधारित सटीक चिकित्सा’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- एसआरआईएचईआर तमिलनाडु का पहला संस्थान है जिसने जीन-आधारित चिकित्सा अनुसंधान शुरू किया है।
- डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई के माध्यम से जीन-आधारित चिकित्सा को ‘भविष्य की चिकित्सा’ के रूप में वर्णित किया है।
- तमिलनाडु सरकार ने एआई निर्देशित चिकित्सा के लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार की है।
- एसआरआईएचईआर द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में केवल चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था।
उत्तर: डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई के माध्यम से जीन-आधारित चिकित्सा को ‘भविष्य की चिकित्सा’ के रूप में वर्णित किया है। — डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई द्वारा संचालित जीन-आधारित सटीक चिकित्सा को ‘भविष्य की चिकित्सा’ के रूप में वर्णित किया, जो व्यक्तिगत उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।
Mains: तमिलनाडु में एआई एवं जीन-आधारित सटीक चिकित्सा के विकास हेतु राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों एवं चुनौतियों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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