17 Sep ओज़ोन संरक्षण और जलवायु संतुलन बनाम वैश्विक कार्यवाही और साझा सुरक्षा
पाठ्यक्रम – सामान्य अध्ययन – 3 – पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी – ओज़ोन संरक्षण और जलवायु संतुलन बनाम वैश्विक कार्यवाही और साझा सुरक्षा
प्रारंभिक परीक्षा के लिए – वियना कन्वेंशन (1985), कृषि और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987), किगाली संशोधन (2016), वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF), पृथ्वी पर जीवन के लिए ओज़ोन परत का क्या महत्व है?
मुख्य परीक्षा के लिए – ओज़ोन परत की सुरक्षा से संबंधित प्रमुख वैश्विक पहल क्या हैं?
ख़बरों में क्यों?
- हाल ही में, 16 सितंबर 2025 को विश्व ओज़ोन दिवस ” (विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक – From Science to Global Action)” थीम के साथ मनाया गया।
- इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सफलता की सराहना की और इसे सामूहिक प्रयासों की प्रभावशीलता का प्रमाण बताया।
- भारत ने भी अपनी कूलिंग एक्शन प्लान (2019) और एचएफसी फेज-डाउन रणनीति (2023) जैसी पहलों के माध्यम से इस वैश्विक प्रयास में अपनी अग्रणी भूमिका प्रदर्शित की है।
ओज़ोन और ओज़ोन परत क्या है?

- ओज़ोन (O₃) तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से मिलकर बना एक अणु है। वायुमंडल के समतापमंडल (stratosphere) में 15 से 50 किलोमीटर की ऊँचाई पर इसकी एक मोटी परत मौजूद है, जिसे ओज़ोन परत कहते हैं।
- इसे पृथ्वी का “सनस्क्रीन” भी कहा जाता है क्योंकि यह सूर्य की हानिकारक यूवी-बी किरणों को अवशोषित करता है।
- यह परत पृथ्वी के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है, जो सूर्य से आने वाली हानिकारक यूवी-बी (UV-B) किरणों को अवशोषित कर लेती है।
- ये किरणें त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद और फसलों को नुकसान पहुँचाने का कारण बनती हैं। इस प्रकार, ओज़ोन परत पृथ्वी पर जीवन की रक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है।
ओज़ोन परत के क्षय के प्रमुख कारण :

- ओज़ोन परत के क्षय का मुख्य कारण मानव निर्मित रासायनिक पदार्थों का उत्सर्जन है। ये रसायन वायुमंडल में लंबे समय तक बने रहते हैं और समतापमंडल में पहुँचकर सूर्य के प्रकाश से टूटकर क्लोरीन और ब्रोमीन जैसे परमाणु छोड़ते हैं। ये परमाणु ओज़ोन के अणुओं को तेज़ी से नष्ट करते हैं।
- ओज़ोन क्षयकारी पदार्थ (ODS) : क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC), हैलॉन्स, हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (HCFC), कार्बन टेट्राक्लोराइड और मिथाइल ब्रोमाइड इसके कुछ प्रमुख उदाहरण हैं।
- यह जानना आश्चर्यजनक है कि एक क्लोरीन परमाणु लगभग 1,00,000 ओज़ोन अणुओं को नष्ट कर सकता है। समतापमंडल में मौजूद 85% क्लोरीन का स्रोत मानव गतिविधियाँ हैं।
- ज्वालामुखी विस्फोट जैसे प्राकृतिक कारणों की भूमिका हालाँकि बहुत ही कम है, लेकिन 1991 में माउंट पिनातुबो विस्फोट के बाद ओज़ोन क्षय में कुछ वृद्धि देखी गई थी।
ओज़ोन क्षयकारी पदार्थ और उनके मुख्य उपयोग :
- सीएफसी – रेफ्रिजरेशन, एयर-कंडीशनिंग, एयरोसोल स्प्रे।
- हैलॉन्स – अग्निशमन, विशेषकर विमानन व संवेदनशील प्रतिष्ठान।
- एचसीएफसी – अस्थायी विकल्प, परंतु अब भी हानिकारक।
- कार्बन टेट्राक्लोराइड – सॉल्वेंट, क्लीनिंग एजेंट।
- मिथाइल ब्रोमाइड – कृषि में मृदा धूमन।

ओज़ोन क्षय के पर्यावरणीय प्रभाव :
ओज़ोन क्षय के गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव होते हैं। जो निम्नलिखित है –
- मानव स्वास्थ्य : ओज़ोन परत में 1% की कमी से यूवी-बी किरणों का स्तर 2% बढ़ जाता है, जिससे हर साल लगभग 20 लाख नए मोतियाबिंद के मामले सामने आते हैं। इसके अलावा, त्वचा कैंसर और प्रतिरक्षा प्रणाली का कमज़ोर होना भी इसके प्रमुख प्रभाव हैं।
- कृषि और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र : यह गेहूँ, धान और सोयाबीन जैसी फसलों की प्रकाश-संश्लेषण क्षमता को कम करता है। इसके साथ ही, यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में प्लवक (plankton) को नुकसान पहुँचाता है, जो मत्स्य पालन और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- सामग्री को क्षति : प्लास्टिक, लकड़ी और वस्त्र जैसी सामग्री भी यूवी-बी किरणों के संपर्क में आकर जल्दी खराब हो जाती है।
ओज़ोन परत की सुरक्षा से संबंधित वैश्विक पहल :
- वियना कन्वेंशन (1985) : ओज़ोन परत की सुरक्षा पर पहला वैश्विक ढाँचा।
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) : अब तक का सबसे सफल पर्यावरणीय समझौता, जिसने 99% ओज़ोन क्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया है।
- किगाली संशोधन (2016) : इसका उद्देश्य एचएफसी (HFCs) के उपयोग को कम करना है, जिससे 0.5°C तक तापमान वृद्धि को रोका जा सकता है।
- वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) : 1996–2000 में 160 मिलियन डॉलर सहायता, अतिरिक्त 60 मिलियन एचसीएफसी और मिथाइल ब्रोमाइड के लिए।

ओज़ोन परत की सुरक्षा से संबंधित भारत की प्रमुख पहल और उपलब्धियाँ :
- ODS नियमन (2000) : CFC और हैलॉन्स वाले नए उपकरण प्रतिबंधित।
- CFC फेज-आउट : 1 अगस्त 2008 से उत्पादन बंद, समय से 17 माह पहले।
- HCFC फेज-आउट: 2013 फ्रीज़ और 2015 तक 10% कमी हासिल।
- इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (2019): विश्व का पहला; 2037–38 तक 20–25% कूलिंग डिमांड घटाने का लक्ष्य।
- HFC फेज-डाउन रणनीति (2023): कोल्ड-चेन, रेफ्रिजरेशन और एयर-कंडीशनिंग में विकल्पों को बढ़ावा।
- क्षमता निर्माण: 20,000 से अधिक तकनीशियन ODS-मुक्त तकनीक में प्रशिक्षित।
- वैश्विक नेतृत्व: विकासशील देशों के लिए वित्तीय-तकनीकी सहयोग सुनिश्चित किया; 1990 में मल्टीलेटरल फंड का गठन।
व्यक्तिगत स्तर पर योगदान :
- CFC-मुक्त/ईको-फ्रेंडली उपकरणों की खरीद।
- पुराने AC/फ्रिज का सुरक्षित निपटान, गैस रिकवरी।
- किसान: मिथाइल ब्रोमाइड की जगह इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट।
- तकनीशियन: रेफ्रिजरेंट रिसाइक्लिंग और लीक चेक।
- नागरिक: जागरूकता अभियान में भागीदारी।
अतिरिक्त आवश्यक कदम :
- ODS और HFC की अवैध तस्करी पर सख्त निगरानी।
- प्राकृतिक रेफ्रिजरेंट (CO₂, अमोनिया, हाइड्रोकार्बन) पर अनुसंधान।
- ओज़ोन-जलवायु रणनीतियों का एकीकरण; भारत में कूलिंग की मांग 2037 तक 8 गुना बढ़ने की संभावना।
- क्षेत्रीय भाषाओं में जन-जागरूकता।
- दक्षिण–दक्षिण सहयोग में भारत की अग्रणी भूमिका।
निष्कर्ष :
- विश्व ओज़ोन दिवस हमें केवल पिछली सफलताओं की याद भर ही नहीं दिलाता है, बल्कि यह दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि जब विज्ञान पर आधारित नीतियों और वैश्विक एकजुटता को मिला दिया जाए, तो किसी भी पर्यावरणीय संकट का समाधान संभव है।
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और भारत जैसे देशों के नेतृत्व ने यह साबित कर दिया है कि विज्ञान-आधारित नीतियाँ और वैश्विक सहयोग सबसे गंभीर पर्यावरणीय संकटों जैसे सबसे बड़ी चुनौतियों को भी प्रभावी ढंग से हल किया जा सकता है।
- ओज़ोन परत के ठीक और स्वस्थ होने के साथ ही, हमारी असली चुनौती अब जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भी ऐसी ही तात्कालिकता और सामूहिक प्रयास दिखाना जरूरी है, ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ ग्रह प्रदान करने को सुनिश्चित कर सकें।
स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. निम्नलिखित में से कौन-से मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत ओज़ोन क्षयकारी पदार्थ (ODS) के रूप में वर्गीकृत हैं?
- हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (HCFCs)
- हैलॉन्स
- कार्बन टेट्राक्लोराइड
- अमोनिया
सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 2 और 4
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (a)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. “मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को एक सफल वैश्विक पर्यावरणीय संधि के रूप में जाना जाता है।” इस कथन के आलोक में इसकी प्रमुख उपलब्धियों की चर्चा कीजिए तथा भारत द्वारा ओज़ोन संरक्षण के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों को स्पष्ट करते हुए बताइए कि भविष्य में ओज़ोन संरक्षण को जलवायु कार्रवाई से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है ? ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

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