09 Aug किसानों ने निराश किया बजट, उद्योग ने किया स्वागत
✎ कृषि बजट कृषि क्षेत्र के समग्र विकास और किसानों के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत उपकरण है, जिसमें सिंचाई, ऊर्जा और बाज़ार पहुँच जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। | GS Paper III — कृषि मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन तथा संबंधित विषय एवं बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।
- Prelims: कृषि बजट, सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation), सौर पंप (Solar Pumps), कृषि ऋण, फसल विविधीकरण, कृषि-व्यवसाय (Agri-business)
- Essay: भारत में कृषि क्षेत्र का भविष्य: चुनौतियाँ और अवसर, सतत कृषि विकास में सरकारी नीतियों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: कृषि बजट कृषि क्षेत्र के समग्र विकास और किसानों के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत उपकरण है, जिसमें सिंचाई, ऊर्जा और बाज़ार पहुँच जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
जहाँ एक ओर किसानों ने बजट को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल बताया है, वहीं दूसरी ओर उद्योग जगत ने सिंचाई, जल उपयोग दक्षता और कृषि के लिए विश्वसनीय ऊर्जा समर्थन से संबंधित पहलों का स्वागत किया है। यह भिन्न प्रतिक्रियाएँ कृषि क्षेत्र के समक्ष मौजूद जटिल चुनौतियों और विभिन्न हितधारकों की अपेक्षाओं को उजागर करती हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है, जो देश की लगभग आधी आबादी को रोज़गार प्रदान करती है।
- कृषि क्षेत्र को अक्सर मानसून पर अत्यधिक निर्भरता, अपर्याप्त सिंचाई सुविधाओं, बाज़ार तक पहुँच की कमी और ऋण उपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए विभिन्न योजनाओं और नीतियों के माध्यम से प्रयास करती रही है।
- बजट में कृषि के लिए आवंटित राशि और नीतियों का सीधा प्रभाव किसानों की आजीविका और कृषि-आधारित उद्योगों पर पड़ता है।
- सूक्ष्म सिंचाई जैसी तकनीकों को जल संरक्षण और फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- ऊर्जा सुरक्षा और कृषि कार्यों के लिए विश्वसनीय बिजली आपूर्ति भी किसानों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है।
- कृषि-व्यवसाय को बढ़ावा देने से कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और किसानों के लिए बेहतर आय के अवसर पैदा हो सकते हैं।
- जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण जैसी सुविधाएँ किसानों को प्रीमियम बाज़ारों तक पहुँचने में मदद कर सकती हैं।
कृषि बजट और उसकी प्रासंगिकता
- कृषि बजट सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास, किसानों के कल्याण और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवंटित वित्तीय संसाधनों और नीतिगत पहलों का एक वार्षिक विवरण है।
- यह बजट कृषि ऋण, सिंचाई, फसल बीमा, बाज़ार अवसंरचना, अनुसंधान और विकास तथा कृषि विस्तार सेवाओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित होता है।
- कृषि बजट का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार सृजित करना और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाना है।
- सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई) जल-उपयोग दक्षता में सुधार करती है, जिससे कम पानी में अधिक फसल उत्पादन संभव होता है।
- सौर पंप कृषि कार्यों के लिए स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत प्रदान करते हैं, जिससे किसानों की बिजली पर निर्भरता कम होती है और परिचालन लागत घटती है।
- कृषि-व्यवसाय में कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और वितरण शामिल है, जो किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्ति में मदद करता है।
- जैविक उत्पादों का प्रमाणीकरण उपभोक्ताओं के विश्वास को बढ़ाता है और किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहन प्रदान करता है, जिससे उन्हें उच्च मूल्य वाले बाज़ारों तक पहुँच मिलती है।
- किसानों के लिए मुफ्त बिजली जैसी सब्सिडी से सिंचाई लागत कम होती है, लेकिन इसके दीर्घकालिक पर्यावरणीय और वित्तीय प्रभाव भी होते हैं।
- बोरवेल, ट्यूबवेल और फार्म पॉन्ड जैसे अतिरिक्त सिंचाई स्रोत वर्षा-आधारित कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई के दायरे में लाते हैं, जिससे फसल की विफलता का जोखिम कम होता है।
- बजट में उद्योग के लिए पंपसेट जैसे कृषि उपकरणों पर सब्सिडी का प्रावधान, ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों को अपनाने को प्रोत्साहित कर सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कृषि कार्यों के लिए निःशुल्क तीन-फेज़ बिजली | किसानों को विश्वसनीय सिंचाई सुनिश्चित करने के लिए ₹7,432.58 करोड़ का आवंटन। |
| सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) का विस्तार | 2,22,794 एकड़ में सूक्ष्म सिंचाई के लिए ₹785 करोड़ का आवंटन, जिससे 95,000 किसान लाभान्वित होंगे। छोटे और सीमांत किसानों के लिए 100% सब्सिडी, अन्य किसानों के लिए 75% सब्सिडी। |
| अतिरिक्त सिंचाई स्रोतों का निर्माण | बोरवेल, ट्यूबवेल और फार्म पॉन्ड के माध्यम से वर्षा-सिंचित भूमि को सुनिश्चित सिंचाई के तहत लाना। |
| जल उपयोग दक्षता में सुधार | उपलब्ध जल संसाधनों के कुशल उपयोग पर सरकार का विशेष ध्यान। |
| कृषि के लिए विश्वसनीय ऊर्जा सहायता | पंप उद्योग द्वारा सिंचाई और जल-उपयोग दक्षता में सुधार से संबंधित पहलों का स्वागत। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सूक्ष्म सिंचाई के विस्तार से कृषि उत्पादकता (Agricultural productivity) में वृद्धि होगी, जिससे किसानों की आय में सुधार होगा।
- जल संरक्षण (Water conservation) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित होगी।
- पंप उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे विनिर्माण क्षेत्र में संवृद्धि और रोजगार सृजन होगा।
सामाजिक महत्व
- छोटे और सीमांत किसानों को 100% सब्सिडी मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना सकेंगे।
- सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका के अवसर बढ़ेंगे।
पर्यावरणीय महत्व
- जल उपयोग दक्षता में सुधार और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने से भूजल स्तर (Groundwater level) के अत्यधिक दोहन को कम करने में मदद मिलेगी।
- सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों को प्रोत्साहन मिलने से कार्बन उत्सर्जन (Carbon emissions) में कमी आएगी और सतत कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. किसानों की अपेक्षाओं और बजट प्रावधानों के बीच अंतर
- किसान संघों का कहना है कि बजट उनकी प्रमुख मांगों को पूरा करने में विफल रहा है।
- जैविक उत्पादों (Organic products) के प्रमाणीकरण के लिए कार्यालय जैसी विशिष्ट क्षेत्रीय मांगों पर कोई घोषणा नहीं की गई है।
यूपीएससी लिंक: कृषि क्षेत्र में चुनौतियाँ और सरकारी नीतियाँ
2. कृषि-व्यवसाय बनाम कृषि पर ध्यान
- किसानों का मानना है कि बजट का ध्यान कृषि-व्यवसाय पर अधिक है, न कि सीधे कृषि पर।
- यह छोटे और सीमांत किसानों की आवश्यकताओं की अनदेखी कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक मुद्दे
3. सौर पंपों की अपर्याप्त घोषणा
- किसानों ने सौर पंपों से संबंधित घोषणाओं को अपर्याप्त बताया है।
- ऊर्जा-कुशल पंपसेटों (Energy-efficient pumpsets) को सब्सिडी घटक में शामिल करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: कृषि में ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा
4. सूक्ष्म सिंचाई के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधाएँ
- सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के लिए आवश्यक दबाव और प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु उपयुक्त पंपों का चयन महत्वपूर्ण है।
- सब्सिडी केवल सिंचाई प्रणाली तक सीमित न रहकर ऊर्जा-कुशल पंपसेटों को भी शामिल करनी चाहिए।
यूपीएससी लिंक: जल संसाधन प्रबंधन और कृषि नवाचार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| किसान संघों की अनदेखी | बजट में किसान संघों द्वारा दिए गए सुझावों पर चुप्पी। |
| जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण | कोयंबटूर में जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण कार्यालय की मांग पर कोई घोषणा नहीं। |
| कृषि-व्यवसाय पर अधिक जोर | किसानों का मानना है कि बजट कृषि के बजाय कृषि-व्यवसाय पर अधिक केंद्रित है। |
| सौर पंपों की अपर्याप्तता | सौर पंपों से संबंधित घोषणाओं को किसानों द्वारा अपर्याप्त बताया गया। |
| पंपसेट सब्सिडी का अभाव | सूक्ष्म सिंचाई के लिए ऊर्जा-कुशल पंपसेटों को सब्सिडी घटक में शामिल न करना। |
आगे की राह
- किसान संघों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर उनकी मांगों और सुझावों को नीति निर्माण में शामिल करना चाहिए।
- जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना पर विचार करना चाहिए ताकि स्थानीय किसानों को सुविधा मिल सके।
- कृषि-व्यवसाय के साथ-साथ छोटे और सीमांत किसानों की प्रत्यक्ष कृषि आवश्यकताओं पर भी समान ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- सौर पंपों के लिए अधिक व्यापक और आकर्षक योजनाएं शुरू करनी चाहिए, जिसमें ऊर्जा-कुशल पंपसेटों को भी सब्सिडी के दायरे में लाया जाए।
- सूक्ष्म सिंचाई के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंप उद्योग के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए, ताकि उपयुक्त और ऊर्जा-कुशल पंपों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
- जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए किसानों को आधुनिक तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में शिक्षित और प्रशिक्षित करना चाहिए।
- कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना चाहिए, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कृषि बजट · सूक्ष्म सिंचाई · जल उपयोग दक्षता · सौर ऊर्जा पंप · किसानों की आय · कृषि उत्पादकता · सरकारी नीतियां · राजकोषीय सहायता · कृषि क्षेत्र · ग्रामीण विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘राज्य सूची में कृषि का विषय’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों द्वारा व्यय’}
अवधारणा प्रवाह
बजट में कृषि संबंधी घोषणाएँ → किसानों और उद्योग की प्रतिक्रियाएँ → सूक्ष्म सिंचाई और ऊर्जा सहायता पर जोर → कृषि उत्पादकता और जल संरक्षण में सुधार → किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) प्रणाली में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई शामिल हैं।
2. भारत में सूक्ष्म सिंचाई के लिए छोटे और सीमांत किसानों को 100% सब्सिडी प्रदान की जाती है।
3. सूक्ष्म सिंचाई से जल उपयोग दक्षता में सुधार होता है और कृषि उत्पादकता बढ़ती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। सूक्ष्म सिंचाई में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी विधियाँ शामिल हैं जो सीधे पौधों की जड़ों में पानी पहुँचाती हैं। कथन 2 सही है। समाचार के अनुसार, छोटे और सीमांत किसानों को सूक्ष्म सिंचाई के लिए 100% सब्सिडी मिलती है। कथन 3 सही है। सूक्ष्म सिंचाई से पानी की बर्बादी कम होती है, जिससे जल उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसल की पैदावार में सुधार होता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा पंपों के उपयोग के संभावित लाभों का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
- यह केवल बड़े किसानों के लिए ही आर्थिक रूप से व्यवहार्य है।
- यह कृषि कार्यों के लिए विश्वसनीय ऊर्जा सहायता प्रदान करता है और बिजली पर निर्भरता कम करता है।
- यह केवल वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
- यह केवल जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण में मदद करता है।
उत्तर: यह कृषि कार्यों के लिए विश्वसनीय ऊर्जा सहायता प्रदान करता है और बिजली पर निर्भरता कम करता है। — सौर ऊर्जा पंप कृषि कार्यों के लिए एक विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा स्रोत प्रदान करते हैं, जिससे ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम होती है और किसानों को सिंचाई के लिए एक स्थिर ऊर्जा आपूर्ति मिलती है। यह सभी प्रकार के किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है, न कि केवल बड़े किसानों के लिए।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कृषि क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता (Water-use efficiency) बढ़ाने में सूक्ष्म सिंचाई की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही, भारत में इसके प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और संभावित समाधानों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) का संक्षिप्त परिचय और जल उपयोग दक्षता के संदर्भ में इसका महत्व।
2. **सूक्ष्म सिंचाई की भूमिका (सकारात्मक पहलू):**
* जल संरक्षण: पानी की बर्बादी में कमी।
* उत्पादकता में वृद्धि: पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग, फसल की गुणवत्ता में सुधार।
* ऊर्जा दक्षता: कम पानी और बिजली की आवश्यकता।
* मिट्टी का स्वास्थ्य: मिट्टी के कटाव और लवणता में कमी।
* किसानों की आय: लागत में कमी और उपज में वृद्धि से आय में वृद्धि।
3. **चुनौतियाँ:**
* उच्च प्रारंभिक लागत: छोटे और सीमांत किसानों के लिए वहनीयता।
* तकनीकी ज्ञान का अभाव: किसानों के बीच जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी।
* पंपसेट का मुद्दा: ऊर्जा-कुशल पंपसेट की उपलब्धता और सब्सिडी में उनका समावेश।
* रखरखाव और मरम्मत: ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा प्रदाताओं की कमी।
* सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन: सब्सिडी वितरण और निगरानी में चुनौतियाँ।
4. **संभावित समाधान:**
* सब्सिडी का विस्तार और सरलीकरण: सभी किसानों तक पहुँच सुनिश्चित करना।
* जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम: किसानों को तकनीकी जानकारी प्रदान करना।
* ऊर्जा-कुशल पंपसेट को बढ़ावा देना: सब्सिडी में इन्हें शामिल करना।
* सामुदायिक सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएँ: छोटे किसानों के लिए सामूहिक मॉडल।
* अनुसंधान और विकास: स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सस्ती तकनीकें विकसित करना।
* निजी क्षेत्र की भागीदारी: स्थापना और रखरखाव सेवाओं में।
5. **निष्कर्ष:** भारत की जल सुरक्षा और कृषि संवृद्धि के लिए सूक्ष्म सिंचाई का महत्व, तथा इसके प्रभावी कार्यान्वयन हेतु एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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