05 Feb केंद्रीय बजट (Union Budget ) 2026 – 27: अन्य प्रमुख क्षेत्र
इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS)
सामान्य अध्ययन-III : भारतीय अर्थव्यवस्था वृद्धि एवं विकास योजना सरकारी बजट राजकोषीय नीति समावेशी विकास
प्रिलिम्स के लिये : केंद्रीय बजट, बायोसिमिलर, इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना, दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण, ऑरेंज इकोनॉमी, प्रतिभूति लेनदेन कर (STT)
मेन्स के लिये : आर्थिक विकास और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण में बजट की भूमिका, विनिर्माण-आधारित विकास और आत्मनिर्भर भारत, पूंजीगत व्यय-आधारित विकास बनाम रोज़गार सृजन, महत्त्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक स्वायत्तता
केंद्रीय बजट 2026–27 में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ (75% वृद्धि) किया गया
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में छह गुना वृद्धि हुई और यह 2014-15 में 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।
निर्यात में आठ गुना वृद्धि हुई और यह ₹3.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जिससे विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 25 लाख रोजगार सृजित हुए।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (ईसीएमएसई) का लक्ष्य 2030-31 तक 500 बिलियन डॉलर का घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जो भारत सेमीकंडक्टर मिशन का पूरक होगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के बारे में :
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रक :
उत्पादन में वृद्धि: इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹11.3 लाख करोड़ हो गया है, जो कि छह गुना वृद्धि है।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात: निर्यात ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹3.27 लाख करोड़ हो गया है, जिसमें आठ गुना की बढ़ोतरी देखी गई है।
रोजगार: पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्रक में लगभग 25 लाख नौकरियों का सृजन हुआ है।
ECMS का महत्त्व :
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तंत्र: यह 2030-31 तक $500 बिलियन का घरेलू तंत्र निर्मित करने में मदद करेगा।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) का पूरक: यह घरेलू सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए ISM के साथ मिलकर कार्य करेगा।
केंद्रीय बजट 2026-27 निवेश-प्रेरित औद्योगिक विकास के मुख्य चालक के रूप में पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) को प्राथमिकता देता है
पूंजीगत वस्तुओं का तात्पर्य किसी भी ऐसे संयंत्र, मशीनरी, उपकरण या सहायक सामग्रियों (accessories) से है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के निर्माण या उत्पादन या सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं। इसमें प्रतिस्थापन (replacement), आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन या विस्तार के लिए आवश्यक उपकरण भी शामिल हैं।
पूंजीगत वस्तुओं पर बजट का फोकस :
अवसंरचना विकास: वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Capex) को लगभग 9% बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है। इसका लक्ष्य अंतर्देशीय पोत परिवहन को बढ़ावा देना और हाई-स्पीड रेल गलियारे का विस्तार करना है।
हाई-टेक टूल रूम: बड़े पैमाने पर उच्च-परिशुद्ध घटकों के स्थानीय डिजाइन और निर्माण के लिए केंद्रीय लोक सेवा उद्यम (CPSE) के नेतृत्व में हाई-टेक टूल रूम्स की स्थापना की जाएगी।
CIE योजना: टनल-बोरिंग मशीनों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ‘विनिर्माण और अवसंरचना उपकरण संवर्धन योजना’ (CIE Scheme) प्रस्तुत की गई है।
लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा: आयात निर्भरता और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए नई कंटेनर विनिर्माण योजना के लिए ₹10,000 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
शुल्क छूट: लिथियम-आयन सेल निर्माण और महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण में उपयोग की जाने वाली पूंजीगत वस्तुओं के लिए बुनियादी सीमा शुल्क (BCD) छूट का विस्तार किया गया है।
आयकर छूट: भारत में टोल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए, बजट में उस किसी भी अनिवासी संस्था हेतु पांच वर्षों की अवधि के लिए आयकर छूट का प्रस्ताव किया गया है, जो बॉन्डेड क्षेत्र में कार्यरत टोल निर्माता को पूंजीगत सामान, उपकरण या औजार उपलब्ध कराती है।
पूंजीगत वस्तु क्षेत्रक को मजबूत करने के लिए हालिया नीतिगत समर्थन :
PLI योजनाएं: उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं प्रौद्योगिकी अपनाने और उत्पादन के पैमाने को बढ़ाने में मदद कर रही हैं।
भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्रक में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना: उन्नत उत्कृष्टता केंद्रों (Centers of Excellence) और परीक्षण अवसंरचना पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को बहुउद्देशीय ग्रामीण विकास इंजन में परिवर्तित किया जाएगा
- सरकार की योजना 5 वर्षों में सभी पंचायतों और गांवों को शामिल करते हुए नए बहुउद्देशीय पीएसीएस/डेयरी/मत्स्य पालन सहकारी समितियों की स्थापना करने की है।
- पीएसीएस, यानी जमीनी स्तर की सहकारी ऋण संस्थाएं, सीआरसीएस (बहु-राज्य) या राज्य आरसीएस (एकल राज्य) द्वारा विनियमित होती हैं।
इन पहलों में पीएसीएस का कम्प्यूटरीकरण, राष्ट्रीय सहयोग नीति 2025, आदर्श उपनियम और समावेशी शासन संशोधन शामिल हैं। - सरकार ने अगले 5 वर्षों में देश की सभी पंचायतों और गांवों को कवर करने के लिए नई बहुउद्देशीय PACS/ डेयरी/ मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के बारे में
PACS अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना की जमीनी स्तर की संस्थाएं हैं। यह उधारकर्ताओं और उच्च वित्त-पोषक संस्थाओं (जैसे- अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक और RBI/ NABARD) के बीच अंतिम मील की कड़ी (last-mile link) के रूप में कार्य करती हैं। इसका अर्थ है कि ये सेवा वितरण की अंतिम कड़ी हैं, जो सीधे ग्राहकों (किसान) से जुड़ती हैं।
वर्तमान स्थिति: स्वीकृत PACS: 79,630, नए पंजीकृत PACS: 32,802 तथा डिजिटल किए गए PACS: 61,478।
विनियमन:
बहु-राज्य PACS: ये संविधान की संघ सूची की प्रविष्टि 44 के अंतर्गत आती हैं। साथ ही, बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत केंद्रीय सहकारी सोसायटी रजिस्ट्रार (CRCS) द्वारा प्रशासित होती हैं।
एकल-राज्य PACS: ये संविधान की राज्य सूची की प्रविष्टि 32 के अंतर्गत आती हैं और संबंधित राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम के तहत संबंधित राज्य सहकारी सोसायटी रजिस्ट्रार (RCS) द्वारा प्रशासित होती हैं।
PACS की क्षमता और महत्त्व :
कृषि: ‘विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना’ के माध्यम से बेहतर अवसंरचना और फसल कटाई उपरांत सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना गोदाम और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करती है।
डेयरी क्षेत्रक: 21,000 से अधिक नई डेयरी सहकारी समितियों के पंजीकरण के माध्यम से 5 वर्षों में दुग्ध खरीद को 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मात्स्यिकी क्षेत्रक: 1,000 मत्स्य सहकारी समितियों को ‘मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों’ (FFPOs) में बदलकर बाजार संपर्क और मूल्य संवर्धन में सुधार किया जा रहा है।
PACS को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई पहलें :
PACS कंप्यूटरीकरण परियोजना: एक साझे ERP (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग)-आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर के तहत PACS का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है।
राष्ट्रीय सहयोग नीति (NCP) 2025: सदस्यता का विस्तार किया जा रहा है और महिलाओं व कमजोर वर्गों के लिए नेतृत्वकारी भूमिकाएं निर्धारित की जा रही हैं।
आदर्श उप-नियमों (Model Bye-laws) को अपनाना: इसका उद्देश्य PACS को बहुउद्देशीय सेवा केंद्रों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाना है।
बहुउद्देशीय सेवा केंद्र अग्रलिखित रूपों में होंगे – पीएम किसान समृद्धि केंद्र, सामान्य सेवा केंद्र, वेयरहाउसिंग, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र आदि।
समावेशी शासन:
बहु-राज्य सहकारी सोसायटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत सहकारी बोर्डों में महिलाओं और SC/ST सदस्यों के अनिवार्य प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया गया है।
स्वयं सहायता समूहों (SHGs), लघु एवं सीमांत किसानों और जनजातीय समुदायों का समावेशन किया जा रहा है।
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