20 Oct छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों के सेवा अधिकार पर उठाए सवाल, राज्य सरकार को नोटिस
प्रासंगिकता — UPSC & State PCS: General Studies
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिलासपुर में पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों द्वारा दायर याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर सख्त रुख अपनाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार द्वारा इन कर्मियों की सेवा शर्तों, पात्रताओं और समानता के अधिकार की अनदेखी की जा रही है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिससे यह मामला राज्य के लोकतंत्रिक संस्थानों और न्यायपालिका के बीच संतुलन स्थापित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हो गया है। यह मामला न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न उठाता है, जहां सार्वजनिक सेवा में समान अवसर और कानून के समक्ष समानता के अधिकार की रक्षा की जानी आवश्यक है।
याचिकाकर्ताओं ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 16 (लोक रोजगार में अवसर की समानता) का हवाला दिया है। उनका तर्क है कि लंबे समय से चले आ रहे भेदभाव के कारण इन कर्मियों के सेवा हित प्रभावित हो रहे हैं। यह मामला उन लाखों लोगों की पीड़ा को उजागर करता है जो नक्सल विरोधी अभियानों में अपनी सेवाएं देने के बावजूद सरकार की ओर से न्यायसंगत व्यवहार के अभाव का सामना कर रहे हैं। उच्च न्यायालय का यह निर्णय न केवल इन कर्मियों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा करना राज्य का परम कर्तव्य है।
सलवा जुडूम अभियान की पृष्ठभूमि को देखते हुए यह मामला और भी गंभीर हो जाता है। वर्ष 2005 में शुरू हुए इस अभियान में स्थानीय युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) के रूप में शामिल किया गया था, जिन्हें बाद में राज्य सशस्त्र पुलिस बल में स्थानांतरित कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2011 में एसपीओ के सशस्त्र अभियानों में इस्तेमाल पर रोक लगाने के बाद भी इन कर्मियों की सेवा शर्तों को लेकर अस्पष्टता बनी रही। उच्च न्यायालय का यह कदम उन सभी पूर्व कर्मियों के लिए न्याय की उम्मीद जगाता है जिन्होंने राज्य की सुरक्षा में अपना योगदान दिया है।
इस मामले की सुनवाई राज्य सरकार की जवाबदेही और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को परखने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उच्च न्यायालय के इस निर्णय से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम होगी, जहां सार्वजनिक सेवा में लगे कर्मियों के अधिकारों की अनदेखी की जाती रही है। यह मामला UPSC और राज्य PCS परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है, जहां संविधान के मौलिक अधिकारों, न्यायपालिका की भूमिका और राज्य की जवाबदेही जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
स्रोत: amarujala.com
अभ्यास प्रश्न
Q1. बिलासपुर मामले में हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को जारी किए गए नोटिस का मुख्य कारण क्या था?
- पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों के वेतन में वृद्धि की मांग
- पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों की अनदेखी
- राज्य सरकार द्वारा सलवा जुडूम कर्मियों को नौकरी देने से इनकार
- पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
उत्तर
पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों की अनदेखी — हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों की अनदेखी के मामले में नोटिस जारी किया था।
Q2. सलवा जुडूम क्या था?
- छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय द्वारा चलाया गया एक सशस्त्र आंदोलन
- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाया गया एक जनजातीय कल्याण कार्यक्रम
- छत्तीसगढ़ में एक पारंपरिक लोक नृत्य
- छत्तीसगढ़ में एक ऐतिहासिक युद्ध
उत्तर
छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय द्वारा चलाया गया एक सशस्त्र आंदोलन — सलवा जुडूम 2005 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया गया एक सशस्त्र अभियान था, जिसमें आदिवासी युवकों को मिलिशिया के रूप में शामिल किया गया था।
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