02 Mar जम्मू-कश्मीर मामले में वैश्विक मंच से भारत का पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी जारी
मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 2 – के अंतर्गत ‘ अंतरराष्ट्रीय संबंध, महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठन, भारत के पड़ोसी देशों ’ खण्ड से संबंधित।
प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत – ‘ इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC), संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC), PoK, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR), भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ’ खण्ड से संबंधित।
ख़बरों में क्यों ?

- हाल ही में जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 61वें सत्र (फरवरी-मार्च 2026) में भारत ने पाकिस्तान के भ्रामक दावों और दुष्प्रचार का पुरजोर तरीके से खंडन किया है।
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का 61वाँ सत्र, जो 23 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक निर्धारित है, में भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह के नेतृत्व में भारत ने न केवल अपनी संप्रभुता की रक्षा की, बल्कि वैश्विक समुदाय के सामने पाकिस्तान की आर्थिक और नैतिक विफलताओं का कच्चा चिट्ठा भी खोल दिया, जो वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक जीत और पाकिस्तान की रणनीतिक विफलता को दर्शाता है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 61वें सत्र से संबंधित मुख्य तथ्य :
- UNHRC का 61वाँ सत्र 23 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक निर्धारित है। इस सत्र के दौरान चर्चा में रहे महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित है-
- पाकिस्तान और OIC का एजेंडा : पाकिस्तान ने एक बार फिर ‘इस्लामिक सहयोग संगठन’ (OIC) के मंच का दुरुपयोग करते हुए जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मनगढ़ंत मुद्दा उठाया।
- भारत का ‘राइट टू रिप्लाई’ अधिकार का उपयोग करना : भारत ने अपने ‘उत्तर देने के अधिकार’ (Right to Reply) का प्रयोग करते हुए पाकिस्तान के आरोपों को भारत के प्रति ‘ईर्ष्या से प्रेरित’ बताया है।
- भारत द्वारा विकास बनाम विनाश का तर्क देना : भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट पाकिस्तान को मिलने वाले ‘अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)’ बेलआउट पैकेज से भी बड़ा है, जो दोनों देशों और दोनों क्षेत्रों के बीच के ज़मीनी अंतर को साफ एवं स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) :

- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) एक अंतर-सरकारी निकाय है जो दुनिया भर में मानवाधिकारों के प्रचार और संरक्षण के लिए उत्तरदायी है।
- स्थापना : इसकी स्थापना सन 2006 में ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग’ के स्थान पर की गई थी।
- मुख्यालय : जिनेवा, स्विट्जरलैंड।
- संरचना : इसमें 47 सदस्य राष्ट्र होते हैं, जिन्हें क्षेत्रीय आधार पर 3 वर्ष के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
- भारत की स्थिति : भारत को वर्ष 2026-28 की अवधि के लिए सातवीं बार निर्विरोध चुना गया है, जो वैश्विक मानवाधिकारों के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत के लिए इसका महत्व :
- भारत की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में हालिया सक्रियता और सदस्यता के सामरिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से कई दूरगामी महत्व हैं। जो निम्नलिखित है –
- भारत को एक जिम्मेदार लोकतांत्रिक शक्ति के रूप में वैश्विक छवि का सुदृढ़ीकरण : भारत का इस परिषद में निर्विरोध रूप से चुना जाना यह सिद्ध करता है कि दुनिया भारत को एक जिम्मेदार लोकतांत्रिक शक्ति के रूप में देखती है।
- भारत का अपनी संप्रभुता की रक्षा करना : भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है। 1947 का विलय कानूनी और अंतिम रूप से मान्य है। गौरतलब यह है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग था, है हमेशा रहेगा।
- भारत द्वारा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाना : भारत ने जम्मू-कश्मीर में हुए सफल चुनावों और उच्च मतदान प्रतिशत का हवाला देकर यह साबित किया कि वहाँ की जनता ने सीमा पार आतंकवाद को नकार कर लोकतंत्र को चुना है।
- भारत द्वारा आर्थिक श्रेष्ठता का प्रदर्शन करना : चिनाब रेल पुल (दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल) जैसे बुनियादी ढाँचे का उल्लेख कर भारत ने अपनी विकास गाथा को मानवाधिकारों के सकारात्मक पहलू के रूप में पेश किया है।
भारत के लिए मुख्य चुनौतियाँ :
- भारत को मानवाधिकारों के अंतरराष्ट्रीय मंच पर निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
- पाकिस्तान द्वारा दुष्प्रचार (Propaganda War) करना : पाकिस्तान और कुछ कट्टरपंथी गुट अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार भारत विरोधी नैरेटिव बनाने का प्रयास करते हैं।
- पाकिस्तान द्वारा क्षेत्रीय राजनीतिक लाभ के लिए संस्थाओं का दुरुपयोग करना : पाकिस्तान द्वारा इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) जैसे संगठनों का उपयोग क्षेत्रीय राजनीतिक लाभ के लिए करना संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की निष्पक्षता को चुनौती देता है।
- दोहरा मापदंड अपनाना : वैश्विक शक्तियाँ अक्सर अपने हितों के अनुसार मानवाधिकारों की व्याख्या करती हैं, जिससे भारत जैसे देशों पर कभी-कभी अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।
- वैश्विक पटल पर PoK के मुद्दे को और अधिक प्रभावी ढंग से लाने की आवश्यकता : पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों (PoK) में मानवाधिकारों की स्थिति अत्यंत दयनीय है, जिसे वैश्विक पटल पर और अधिक प्रभावी ढंग से लाने की आवश्यकता है।
समाधान की राह :
- इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को एक बहुआयामी रणनीति अपनानी होगी। जो निम्नलिखित है –
- भारत को ‘बचाव’ के बजाय ‘आक्रामक’ कूटनीतिक रुख अपनाने की जरूरत : भारत का पक्ष रखते हुए जैसा कि अनुपमा सिंह ने किया, भारत को ‘बचाव’ के बजाय ‘आक्रामक’ रुख अपनाते हुए पाकिस्तान के आंतरिक मानवाधिकार उल्लंघनों (जैसे बलूचिस्तान और अल्पसंख्यकों की स्थिति) को उजागर करना चाहिए।
- तथ्य आधारित संवाद को वैश्विक मीडिया में अधिक प्रसारित करने की जरूरत : भारत को जम्मू-कश्मीर में हो रहे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के डेटा और विजुअल्स (जैसे चिनाब ब्रिज, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स) को वैश्विक मीडिया में अधिक प्रसारित करना चाहिए।
- OIC देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की जरूरत : भारत को OIC के प्रभावशाली सदस्य देशों (जैसे सऊदी अरब, UAE) के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को इतना मजबूत करना चाहिए कि वे पाकिस्तान के एजेंडे को संगठन के स्तर पर समर्थन न दें।
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में संस्थागत स्तर पर सुधार करने की आवश्यकता : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में ऐसे सुधारों की वकालत करना जिससे मानवाधिकारों का मुद्दा राजनीतिक लाभ का साधन न बने।
निष्कर्ष :

- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 61वें सत्र में भारत की प्रतिक्रिया वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान द्वारा अपने निहित स्वार्थ के लिए भारत के विरुद्ध किए जा रहे दुष्प्रचारों का केवल एक खंडन मात्र नहीं था, बल्कि यह एक ‘उभरते हुए भारत का आत्मविश्वास’ था।
- भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 61वें सत्र में वैश्विक स्तर पर स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि उसकी ‘आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता’ पर कोई समझौता नहीं होगा, और भारत का विकास ही मानवाधिकारों का सबसे बड़ा गारंटर है।
- “जम्मू-कश्मीर का विकास बजट IMF के बेलआउट पैकेज से दोगुना होना यह केवल एक आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की विफलता और भारत की सफलता का प्रमाण पत्र है।”
स्रोत – पी. आई. बी, ऑल इंडिया रेडिओ एवं द हिंदू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की संरचना और भारत की स्थिति के बारे में कौन से कथन सत्य हैं?
- UNHRC की स्थापना 2006 में ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग’ के स्थान पर की गई थी।
- इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क, अमेरिका में स्थित है।
- इसमें कुल 47 सदस्य राष्ट्र होते हैं जिन्हें क्षेत्रीय आधार पर चुना जाता है।
- भारत को वर्ष 2026-28 की अवधि के लिए सातवीं बार परिषद का सदस्य चुना गया है।
सही विकल्प का चयन करें:
A. केवल कथन 1, 2 और 3
B. केवल कथन 1, 3 और 4
C. केवल कथन 2, 3 और 4
D. केवल कथन 1 और 4
- उत्तर – केवल कथन B 1, 3 और 4.
- व्याख्या : कथन 2 गलत है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) का मुख्यालय न्यूयॉर्क, अमेरिका में नहीं बल्कि यह जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। अतः विकल्प B सही उत्तर है।
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. “जम्मू-कश्मीर का विकास बजट पाकिस्तान को मिलने वाले IMF बेलआउट पैकेज से भी अधिक होना, न केवल भारत की आर्थिक श्रेष्ठता को दर्शाता है, बल्कि मानवाधिकारों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रमाण भी है।” संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 61वें सत्र के संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (शब्द सीमा – 250 अंक – 15)

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