जयपुर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन का उद्घाटन: एकीकरण और सुगमता

जयपुर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन का उद्घाटन: एकीकरण और सुगमता

जयपुर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन का उद्घाटन: एकीकरण और सुगमता

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सरकारी सेवाओं का सरलीकरण

✎ जयपुर में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के कार्यालयों का एक स्थान पर एकीकरण, DGFT सेवाओं का 31 मार्च 2027 तक पूर्ण ऑनलाइन होना और 1 अप्रैल 2027 से व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता समाप्त करने का लक्ष्य, शासन में नागरिक-केंद्रित सुधार…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (सेवा वितरण, ई-गवर्नेंस, नागरिक-केंद्रित प्रशासन)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (व्यापार नीति, निर्यात संवर्धन, कारोबार करने में सुगमता)
  • Prelims: DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय), SCOMET सूची (विशेष रासायनिक, जीव, सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकी), DPIIT (उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग), ECGC (निर्यात साख गारंटी निगम), IEC (आयातक-निर्यातक कोड), विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992, वन-स्टॉप सेंटर और एकल खिड़की प्रणाली, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP)
  • Essay: सुशासन में प्रक्रियात्मक सुधार: कागज़ी प्रशासन से डिजिटल और नागरिक-केंद्रित शासन तक, कारोबार की सुगमता और प्रशासनिक विश्वास: स्व-प्रमाणन का दर्शन

त्वरित पुनरावृत्ति: जयपुर में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के कार्यालयों का एक स्थान पर एकीकरण, DGFT सेवाओं का 31 मार्च 2027 तक पूर्ण ऑनलाइन होना और 1 अप्रैल 2027 से व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता समाप्त करने का लक्ष्य, शासन में नागरिक-केंद्रित सुधार का ठोस उदाहरण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आभासी माध्यम से जयपुर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन का उद्घाटन किया। इसके साथ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा उसके संबद्ध एवं अधीनस्थ संगठनों के कार्यालयों को एक ही स्थान पर स्थापित करने की प्रक्रिया आरंभ हुई। जयपुर ऐसा करने वाला देश का पहला शहर और पहली राज्य राजधानी बन गया है। मंत्री ने यह पहल देश के अन्य शहरों, विशेषकर प्रत्येक राज्य की राजधानी में, दोहराने का आह्वान किया। साथ ही डीजीएफटी की सभी सेवाओं को पूर्णतः ऑनलाइन करने और इसके लिए 31 मार्च 2027 की समय-सीमा तय की गई, तथा 1 अप्रैल 2027 से इन सेवाओं के लिए व्यक्तिगत रूप से कार्यालय जाने की आवश्यकता समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया।

पृष्ठभूमि

  • मंत्रालय के 46 संगठन देश के विभिन्न स्थानों पर फैले हुए थे, जिससे नागरिकों और व्यवसायियों को अलग-अलग कार्यालयों के बीच दौड़ना पड़ता था। एक स्थान पर कार्यालय स्थापित करने की पहल इसी समन्वय-अभाव को दूर करने का प्रयास है।
  • वाणिज्य विभाग (Department of Commerce) व्यापार नीति का निर्धारण करता है, जबकि उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) औद्योगिक नीति, निवेश नीति और आंतरिक व्यापार से जुड़े नीतिगत कार्य देखता है। DGFT वाणिज्य विभाग के अधीन कार्य करता है और विदेश व्यापार नीति का प्रशासनिक क्रियान्वयन करता है।
  • विदेश व्यापार नीति का कानूनी आधार विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 है। इसी के अंतर्गत आयातक-निर्यातक कोड (IEC), लाइसेंस और परमिट जारी किए जाते हैं।
  • राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों के बाद सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने पर बल बढ़ा है, जिससे भौतिक उपस्थिति कम करने और प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने की दिशा में प्रगति हुई है।
  • भारत सरकार का लक्ष्य विकसित भारत @ 2047 है, जिसके अंतर्गत कारोबार की सुगमता और प्रशासनिक दक्षता को विकास की प्रमुख शर्त माना गया है।

वन-स्टॉप सेंटर और एकीकृत सेवा वितरण क्या है?

  • वन-स्टॉप सेंटर ऐसी व्यवस्था है जहाँ नागरिक या व्यवसायी एक ही स्थान पर विभिन्न सरकारी सेवाएँ और सूचनाएँ प्राप्त कर सकें, ताकि उन्हें कई कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
  • इस पहल में कार्यालयों का भौतिक एकीकरण और सेवाओं का डिजिटल एकीकरण दोनों शामिल हैं। केवल भवन एक स्थान पर होना पर्याप्त नहीं माना गया है, बल्कि प्रक्रियाओं में सरलता अनिवार्य बताई गई है।
  • सभी लाइसेंस और परमिट आवेदन, SCOMET अनुमोदन तथा अन्य सेवाएँ पूरी तरह ऑनलाइन करने का निर्देश दिया गया है। पुराने डेटा और अभिलेखों का डिजिटलीकरण इसकी पूर्व-शर्त है।
  • SCOMET सूची दोहरे उपयोग (Dual-Use) वाली वस्तुओं और प्रौद्योगिकी के निर्यात नियंत्रण से जुड़ी है। इसके अनुमोदन की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होना सुरक्षा और सुगम व्यापार दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण है।
  • जहाँ मूल दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य हो, वहाँ सत्यापन और अपलोड की सुविधा हेतु छोटे काउंटर या प्रवेश-द्वार पर कंप्यूटर लगाने का सुझाव है, ताकि भौतिक उपस्थिति न्यूनतम रहे।
  • स्व-प्रमाणन (Self-Certification) का अर्थ है कि नागरिक या व्यवसायी अपने दावे का प्रमाण स्वयं प्रस्तुत करे और प्रशासन उस पर विश्वास करे, जब तक अनियमितता का संदेह न हो। यह प्रशासनिक विश्वास की अवधारणा से जुड़ा है।
  • कारोबार की सुगमता के लिए प्रक्रियाओं, प्रारूपों और फॉर्म का सरलीकरण, विभागों के बीच समन्वय और संगठनात्मक बाधाओं को दूर करना आवश्यक माना जाता है। इसी से सेवा वितरण प्रणाली में वास्तविक परिवर्तन संभव है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
एक स्थान पर कार्यालय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सभी विभाग और लगभग 46 संगठन एक ही परिसर से कार्य करेंगे। जयपुर ऐसा करने वाला देश का पहला शहर और पहला राज्य राजधानी बना है।
वन-स्टॉप सेंटर (One-Stop Centre) निर्यात, निवेश और आंतरिक व्यापार से जुड़ी सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने का मॉडल, जिससे उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सहयोग मिलेगा।
ऑनलाइन प्रक्रिया लाइसेंस, परमिट, SCOMET अनुमोदन और अन्य सभी सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने का निर्देश, ताकि नागरिकों को कार्यालय जाने की आवश्यकता कम हो।
समय-सीमा का निर्धारण विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade – DGFT) के क्षेत्रीय कार्यालयों में डिजिटलीकरण 31 मार्च 2027 तक और 1 अप्रैल 2027 से व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता समाप्त करने का लक्ष्य।
स्व-प्रमाणन और प्रक्रिया सरलीकरण प्रक्रियाओं, प्रारूपों और फॉर्म को सरल बनाना तथा हितधारकों पर विश्वास के आधार पर स्व-प्रमाणन को बढ़ावा देना, जिससे सेवा वितरण में बदलाव आए।

महत्व

प्रशासनिक सुधार (Administrative Reform)

  • एक छत के नीचे कार्यालय लाने से विभागों के बीच समन्वय बढ़ता है और फाइलों की आवाजाही कम होती है।
  • नागरिक-केंद्रित शासन के सिद्धांत के अनुरूप सेवा वितरण प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव का प्रयास है।
  • स्व-प्रमाणन और प्रक्रिया सरलीकरण से शासन में भरोसे-आधारित मॉडल की ओर बढ़ने का संकेत मिलता है।

आर्थिक (Economic)

  • कारोबार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) बढ़ने से व्यवसायों की लागत और समय दोनों घटते हैं।
  • निर्यात प्रक्रियाओं के ऑनलाइन होने से निर्यातकों और आयातकों के लिए अनुमोदन की गति बढ़ेगी।
  • निवेश और आंतरिक व्यापार को सहयोग देने वाले केंद्र क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

नियामकीय (Regulatory)

  • SCOMET जैसे संवेदनशील वस्तुओं और प्रौद्योगिकियों के नियंत्रित निर्यात की प्रक्रिया भी ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के अंतर्गत लाइसेंस और परमिट की व्यवस्था का डिजिटल प्रबंधन नियमों के अनुपालन को सरल बना सकता है।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल विभाजन और डिजिटल साक्षरता

  • सभी निर्यातकों और छोटे व्यवसायियों के पास समान डिजिटल कौशल और इंटरनेट सुविधा नहीं है।
  • ऑनलाइन-केवल व्यवस्था से सूक्ष्म और लघु उद्यमों के बहिष्कृत होने का जोखिम है।
  • पुराने डेटा और अभिलेखों के डिजिटलीकरण की गुणवत्ता पर भी निर्भरता रहेगी।

2. भौतिक सत्यापन की आवश्यकता

  • जहाँ मूल दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन आवश्यक है, वहाँ पूर्ण डिजिटल प्रक्रिया लागू करना कठिन होगा।
  • छोटे काउंटर और प्रवेश द्वार पर कंप्यूटर जैसे अंतरिम उपाय भीड़ और विलंब का नया रूप बन सकते हैं।

3. स्व-प्रमाणन में जोखिम और जवाबदेही

  • स्व-प्रमाणन से प्रक्रिया तेज होती है, पर गलत घोषणा की स्थिति में जाँच और दंड की प्रभावी व्यवस्था आवश्यक है।
  • भरोसा-आधारित मॉडल में जोखिम-आधारित निरीक्षण और अनुपालन तंत्र का संतुलन बनाना होगा।

4. केंद्र-राज्य समन्वय

  • प्रत्येक राज्य की राजधानी में समान मॉडल लागू करने के लिए राज्य सरकारों के साथ भूमि, भवन और संसाधनों पर समन्वय आवश्यक है।
  • विषय की संवैधानिक स्थिति के अनुसार केंद्र और राज्य की भूमिकाओं का स्पष्ट विभाजन ज़रूरी है।

5. संगठनात्मक बाधाएँ और विभागीय सीमाएँ

  • विभिन्न विभागों और लगभग 500 कार्यालयों के बीच अलग-अलग कार्य-संस्कृति और प्रक्रियाएँ हैं।
  • बड़े परिसरों, जैसे मुंबई स्थित ईसीजीसी के कार्यालय, के स्थानांतरण में व्यावहारिक और वित्तीय चुनौतियाँ हो सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
डिजिटल पहुँच छोटे व्यवसायियों और दूरस्थ क्षेत्रों के निर्यातकों का ऑनलाइन प्रक्रिया से बाहर रहने का जोखिम
भौतिक सत्यापन मूल दस्तावेजों की जाँच के लिए पूर्ण डिजिटल संक्रमण में देरी की संभावना
स्व-प्रमाणन की जाँच गलत घोषणा रोकने के लिए निरीक्षण और दंड तंत्र की कमजोरी
राज्य स्तर पर दोहराव अन्य राज्य राजधानियों में समान मॉडल के लिए वित्तीय और प्रशासनिक समन्वय की कठिनाई
संगठनात्मक एकीकरण विभिन्न संगठनों की अलग-अलग कार्य-पद्धति से एकीकृत सेवा वितरण में बाधा

आगे की राह

  • डीजीएफटी क्षेत्रीय कार्यालयों में डिजिटलीकरण का कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने हेतु चरणबद्ध निगरानी और प्रगति-रिपोर्ट की व्यवस्था की जाए।
  • छोटे निर्यातकों और सूक्ष्म उद्यमों के लिए सहायता-डेस्क और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम चलाए जाएँ।
  • भौतिक सत्यापन वाली सेवाओं की सूची स्पष्ट कर उनमें जोखिम-आधारित तथा समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाए।
  • स्व-प्रमाणन के साथ यादृच्छिक जाँच और स्पष्ट दंड-प्रावधान जोड़े जाएँ, ताकि भरोसे और जवाबदेही में संतुलन बना रहे।
  • प्रत्येक राज्य की राजधानी में मॉडल अपनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संयुक्त कार्य-योजना और स्पष्ट भूमिका-विभाजन तय किया जाए।
  • प्रक्रियाओं, प्रारूपों और फॉर्म के सरलीकरण को सेवा-मानकों और नागरिक चार्टर से जोड़ा जाए, ताकि परिणाम मापे जा सकें।
  • सेवा वितरण की प्रगति के लिए नियमित प्रतिक्रिया-तंत्र बनाया जाए, जिसमें निर्यातक, आयातक और निवेशक अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कार्यालय सह-स्थापन (Co-location of Offices) · वन-स्टॉप सेंटर (One-Stop Centre) · विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) · विदेश व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 (Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992) · SCOMET सूची (Special Chemicals, Organisms, Materials, Equipment and Technologies List) · व्यापार सुविधा समझौता (Trade Facilitation Agreement) · व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) · स्व-प्रमाणन (Self-Certification) · नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-Centric Governance) · सेवा वितरण सुधार (Service Delivery Reform) · डिजिटल अभिशासन (Digital Governance) · जन विश्वास अधिनियम (Jan Vishwas Act)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246 एवं सातवीं अनुसूची: विदेशी व्यापार और वाणिज्य संघ सूची का विषय
  • अनुच्छेद 19(1)(छ): व्यापार और कारोबार की स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 301: राज्यक्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता

अवधारणा प्रवाह

सरकारी कार्यालयों का एक स्थान पर स्थापन (जयपुर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन)  →  विभागों और संगठनों के बीच समन्वय तथा एकीकृत वन-स्टॉप सेंटर का विकास  →  लाइसेंस, परमिट और SCOMET सहित सभी सेवाओं का पूर्ण ऑनलाइन संक्रमण  →  डीजीएफटी क्षेत्रीय कार्यालयों में डिजिटलीकरण (31 मार्च 2027 समय-सीमा)  →  1 अप्रैल 2027 से व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता समाप्त; भौतिक सत्यापन हेतु सीमित काउंटर  →  स्व-प्रमाणन और प्रक्रिया सरलीकरण से कारोबार में सुगमता और निर्यात-निवेश को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) उद्योग और आंतरिक व्यापार से संबंधित नीतियों के समन्वय के लिए नोडल विभाग है।
2. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) विदेश व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 के अंतर्गत कार्य करता है और SCOMET सूची से संबंधित अनुमोदन उसी के कार्यक्षेत्र में आते हैं।
3. निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) का मुख्यालय चेन्नई में स्थित है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: DPIIT वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का विभाग है और उद्योग तथा आंतरिक व्यापार संवर्धन इसका मुख्य दायित्व है। कथन 2 सही है: DGFT विदेश व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 के अंतर्गत विदेश व्यापार नीति लागू करता है और SCOMET से जुड़े लाइसेंसिंग व अनुमोदन उसके दायरे में हैं। कथन 3 गलत है: ECGC का मुख्यालय मुंबई में है, इसीलिए समाचार में मुंबई स्थित ECGC कार्यालय का उल्लेख है।

Q2. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): वन-स्टॉप सेंटर के माध्यम से निर्यातकों के लिए प्रक्रियागत समय और लेन-देन लागत में कमी आ सकती है।
कारण (R): व्यापार सुविधा समझौते (Trade Facilitation Agreement) के अनुच्छेद 10.4 में सदस्य देशों से व्यापार-संबंधी दस्तावेज़ों के लिए एकल बिंदु से सूचना प्रस्तुत करने की व्यवस्था स्थापित करने की अपेक्षा की गई है।

उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
  2. A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  3. A सही है, किंतु R गलत है
  4. A गलत है, किंतु R सही है

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — अभिकथन सही है: एकीकृत प्रक्रियाओं से दस्तावेज़ों का दोहराव और कार्यालयों के चक्कर घटते हैं, जिससे समय व लागत बचती है। कारण भी सही है: TFA का अनुच्छेद 10.4 एकल बिंदु से दस्तावेज़ प्रस्तुति (Single Window) से संबंधित है, जो भारत ने 2016 में अनुसमर्थित किया। कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि एकल बिंदु की व्यवस्था ही प्रक्रियागत समय घटाती है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलित कीजिए:
सूची I (संस्था)
A. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT)
B. महानियंत्रक, पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क कार्यालय
C. निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC)
D. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)

सूची II (कार्य)
1. उत्पादों का मानकीकरण और प्रमाणन
2. विदेश व्यापार नीति और आयात-निर्यात लाइसेंसिंग
3. निर्यात ऋण बीमा और गारंटी
4. पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क का पंजीकरण

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-2, B-4, C-3, D-1
  2. A-1, B-2, C-3, D-4
  3. A-2, B-1, C-3, D-4
  4. A-3, B-4, C-2, D-1

उत्तर: A-2, B-4, C-3, D-1 — DGFT विदेश व्यापार नीति और आयात-निर्यात लाइसेंसिंग (2) से जुड़ा है। महानियंत्रक कार्यालय पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क के पंजीकरण (4) का कार्य करता है, जो DPIIT के अंतर्गत आता है। ECGC निर्यात ऋण बीमा व गारंटी (3) देता है और BIS उत्पाद मानकीकरण व प्रमाणन (1) का कार्य करता है। अतः A-2, B-4, C-3, D-1 सही है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के कार्यालयों को एक ही स्थान पर स्थापित करने और निर्यात-आयात लाइसेंसिंग जैसी सेवाओं के पूर्ण ऑनलाइन होने की पहल नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा सकती है। इस मॉडल के प्रशासनिक और आर्थिक औचित्य का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि डिजिटल सेवा वितरण में किन ढाँचागत और समावेशन संबंधी चुनौतियों का समाधान आवश्यक है। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर संकेत:
1. भूमिका: जयपुर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन का उद्घाटन (4 नवंबर 2026), मंत्रालय के लगभग 46 संगठनों के कार्यालयों को एक स्थान पर लाने का लक्ष्य, और 1 अप्रैल 2027 से व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता समाप्त करने की समय-सीमा।
2. संवैधानिक एवं विधिक आधार: अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय और व्यापार की स्वतंत्रता, जिसमें राज्य द्वारा उचित प्रतिबंधों की अनुमति है); अनुच्छेद 301 (व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता); संघ सूची की प्रविष्टि 41 (विदेशों के साथ व्यापार) और प्रविष्टि 42 (अंतरराज्यीय व्यापार)। विदेश व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 5 के अंतर्गत विदेश व्यापार नीति और SCOMET सूची का संदर्भ।
3. प्रशासनिक लाभ: समन्वय में सुधार, फाइलों की आवाजाही घटना, विभागीय सीमाओं (silos) का कमजोर होना; मैक्स वेबर के नौकरशाही मॉडल से हटकर परिणाम-उन्मुख प्रशासन की ओर झुकाव (नव-लोक प्रबंधन दृष्टिकोण)।
4. सुधार-परंपरा: द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की चौथी रिपोर्ट (नागरिक-केंद्रित प्रशासन, 2008); सेवोत्तम (Sevottam) मॉडल; व्यापार सुविधा समझौते (TFA) का अनुच्छेद 10.4 और वन-स्टॉप सेंटर की वैश्विक अवधारणा; जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2023 द्वारा छोटे अपराधों के अपराधमुक्तिकरण और स्व-प्रमाणन की भूमिका।
5. आलोचनात्मक पक्ष: (क) कार्यालयों के केंद्रीकरण से जवाबदेही के नए केंद्र बनना; (ख) स्व-प्रमाणन से जोखिम-आधारित निरीक्षण और अनुपालन-तंत्र की आवश्यकता; (ग) डिजिटल विभाजन, वृद्ध और ग्रामीण उद्यमियों का बहिष्करण; (घ) डेटा संरक्षण, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप डेटा सुरक्षा; (ङ) पुराने अभिलेखों के डिजिटलीकरण में त्रुटियों का जोखिम; (च) मूल दस्तावेज़ों के भौतिक सत्यापन हेतु काउंटर और सहायता केंद्र की व्यवस्था।
6. संतुलित निष्कर्ष: पहल की सफलता केवल भवनों के एकीकरण पर नहीं, बल्कि प्रक्रिया-सरलीकरण, विश्वास-आधारित शासन, विभागीय समन्वय, डिजिटल साक्षरता और शिकायत-निवारण तंत्र पर निर्भर है। राज्य राजधानियों में इसके विस्तार की सफलता इन्हीं आयामों पर आँकी जानी चाहिए।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Rajasthan PCS (RPSC / RAS) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने राजस्थान के किस शहर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन का उद्घाटन किया है?

  1. जोधपुर
  2. जयपुर
  3. उदयपुर
  4. अजमेर

उत्तर: जयपुर — केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने जयपुर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन का उद्घाटन किया है, जिससे राज्य में व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

Mains: राजस्थान में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन के उद्घाटन से राज्य के औद्योगिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों पर क्या संभावित प्रभाव पड़ सकते हैं? संक्षेप में विश्लेषण कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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