28 Oct डिजिटल युग में भाषाई समावेशन : भारत का AI-ड्राइव परिवर्तन
यह लेख ‘डिजिटल युग में भाषाई समावेशन : भारत का AI-ड्राइव परिवर्तन’ पर केंद्रित है। जो कि दैनिक समसामयिक मामलों से संबंधित है।
पाठ्यक्रम:
GS- 2– भारतीय राजनीति और शासन – डिजिटल युग में भाषाई समावेशन : भारत का AI-संचालित परिवर्तन
प्रारंभिक परीक्षा के लिए
भाषायी समावेशन से क्या तात्पर्य है?
मुख्य परीक्षा के लिए
डिजिटल इंडिया और एनईपी 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भाषाई समावेशन का क्या महत्व है?
समाचार में क्यों?

- भारत सरकार, भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं और सैकड़ों क्षेत्रीय बोलियों को समर्थन प्रदान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (एनएलपी), मशीन लर्निंग और वाक् पहचान जैसी तकनीकों को एकीकृत करके डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में भाषाई समावेशन को बढ़ावा दे रही है।
- इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में डिजिटल सेवाओं, ई-गवर्नेंस प्लेटफार्मों और ऑनलाइन संसाधनों तक पहुँच प्राप्त कर सके, जिससे डिजिटल समावेशन और सहभागी शासन को मजबूती मिले।
भाषाई समावेशन को बढ़ावा देने वाले प्रमुख मंच :
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित भाषा प्लेटफ़ॉर्म और विस्तृत डिजिटल रिपॉज़िटरी डिजिटल युग में भारत की विविध भाषाओं के संरक्षण, उपयोग और विकास के तरीके को बदल रहे हैं। भाषिणी और भारतजेन जैसी पहल शासन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में बहुभाषी संचार को सक्षम बना रही हैं, जबकि आदि-वाणी जैसे अभिनव प्रयास आदिवासी और लुप्तप्राय भाषाओं को मुख्यधारा के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में ला रहे हैं।
- ये सभी पहल मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि भारत की भाषाई विरासत न केवल सुरक्षित रहे, बल्कि उसे कार्यात्मक, गतिशील और भविष्य के लिए तैयार भी बनाया जाए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (एनएलपी) और डिजिटल बुनियादी ढाँचे में तेज़ी से हुई प्रगति ने भारत की भाषाई विविधता को दर्ज करने, डिजिटल बनाने और पुनर्जीवित करने के प्रयासों में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। - ये तकनीकें सैकड़ों भारतीय भाषाओं और बोलियों में बड़े पैमाने पर भाषा डेटा संग्रह, रीयल-टाइम अनुवाद और वाक् पहचान को सुगम बनाती हैं—जिनमें से कई का ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व रहा है।
- यह डिजिटल परिवर्तन संचार की खाई को पाट रहा है, समावेशी शासन को बढ़ावा दे रहा है, और नागरिकों को उनकी मातृभाषा में सूचना और सार्वजनिक सेवाएँ उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त बना रहा है। संक्षेप में, भारत का बहुभाषी एआई पारिस्थितिकी तंत्र देश के भाषाई परिदृश्य को नया रूप दे रहा है, विविधता को डिजिटल समावेशन और समतामूलक विकास की ताकत में बदल रहा है।
आदि-वाणी : जनजातीय भाषा समावेशन के लिए एआई (AI)

महत्व / प्रभाव:
भाषाई समावेशन : शासन, शिक्षा व डिजिटल सेवाओं में आदिवासी भाषाओं के प्रयोग को संभव बनाकर भागीदारी-आधारित शासन को सशक्त करता है।
सांस्कृतिक संरक्षण : मौखिक परंपराओं, लोकगीतों और कहावतों का डिजिटल अभिलेखन।
डिजिटल सशक्तिकरण : एआई-आधारित एप्स व प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से भाषा-आधारित बहिष्करण को कम करना।
अनुसंधान व नवाचार: जनजातीय भाषाओं पर AI training datasets विकसित कर भारतीय भाषाई एआई-मॉडलों को सुदृढ़ बनाना।
भारत में भाषाई समावेशन को बढ़ावा देने वाले प्रमुख मंच
| प्लेटफ़ॉर्म / योजना | वर्ष / कार्यान्वयन एजेंसी | मुख्य उद्देश्य | मुख्य विशेषताएं और प्रौद्योगिकियां | भाषाएँ / दायरा | महत्व / प्रभाव |
|---|---|---|---|---|---|
| आदि-वाणी (AadiVaani) | 2024 में स्थापित; संस्कृति मंत्रालय एवं C-DAC द्वारा | आदिवासी भाषाओं का वास्तविक समय अनुवाद और संरक्षण | एआई, वाक् पहचान (Speech Recognition), प्राकृतिक भाषा संसाधन (NLP) | संताली, भीली, मुंडारी, गोंडी आदि | मौखिक भाषाई परंपराओं का डिजिटलीकरण; शिक्षा, शासन और सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण में उपयोग |
| लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण और परिरक्षण योजना (SPPEL) | 2013; शिक्षा मंत्रालय एवं CIIL, मैसूर | 10,000 से कम बोलने वालों वाली भाषाओं का दस्तावेज़ीकरण और डिजिटल संग्रह | टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो डेटासेट निर्माण; AI और NLP-आधारित अनुसंधान में उपयोग | लुप्तप्राय और कम ज्ञात भारतीय भाषाएँ | भाषाई डेटा को सुरक्षित रखना; अनुसंधान और AI प्रशिक्षण को बढ़ावा देना |
| संचिका (SANCHIKA) | CIIL, मैसूर द्वारा प्रबंधित | भारतीय भाषाओं का केंद्रीकृत डिजिटल रिपोजिटरी | शब्दकोश, कहानियाँ, मल्टीमीडिया संसाधन; AI मॉडल प्रशिक्षण के लिए डेटा स्रोत | अनुसूचित व जनजातीय भाषाएँ | शैक्षणिक अनुसंधान, शिक्षा, और सांस्कृतिक संरक्षण को सशक्त बनाना |
| भारतजेन (BharatGen) | SPPEL व संचिका डेटा पर आधारित राष्ट्रीय पहल | बहुभाषी AI अनुवाद और वाक् प्रणालियाँ विकसित करना | पाठ-से-पाठ व भाषण मॉडल; बड़े भारतीय भाषा डेटासेट का उपयोग | सभी 22 अनुसूचित भाषाएँ | शासन, शिक्षा व स्वास्थ्य में बहुभाषी डिजिटल समाधान सक्षम करना |
| GeM और GeM-AI | 2016; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय | सरकारी खरीद प्रणाली को भाषाई रूप से समावेशी बनाना | NLP व ML-आधारित AI सहायक; आवाज व पाठ-आधारित बातचीत | अनेक भारतीय भाषाएँ | सरकारी ई-बाज़ार में भाषा बाधाओं को कम करना; डिजिटल भागीदारी बढ़ाना |
| भाषिणी (Bhashini) (राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन – NLTMM) | इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय (MeitY) | वास्तविक समय AI अनुवाद से समावेशी शासन सुनिश्चित करना | मशीन अनुवाद, स्वचालित वाक् पहचान (ASR), प्राकृतिक भाषा समझ (NLU) | 22 अनुसूचित + जनजातीय भाषाएँ | डिजिटल सशक्तिकरण और भाषाई समावेशन को व्यापक बनाना |
मुख्य सफलतायें :

1. संसद भाषिनी : एआई-संचालित संसदीय अनुवाद
राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (एनएलटीएम) के अंतर्गत भाषिणी प्लेटफॉर्म का हिस्सा।
संसदीय बहसों और चर्चाओं का वास्तविक समय एआई अनुवाद सक्षम करता है।
संसदीय कार्यवाही को अनेक भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाकर नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देना।
शासन और लोकतांत्रिक संवाद में पारदर्शिता और भाषाई समावेशन को मजबूत करता है।
2. जनजातीय अनुसंधान, सूचना, शिक्षा, संचार और कार्यक्रम (टीआरआई-ईसीई) योजना : जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित।
जनजातीय भाषाओं और संस्कृतियों के संरक्षण के लिए नवीन अनुसंधान और दस्तावेज़ीकरण का समर्थन करता है।
एआई-आधारित अनुवाद उपकरण विकसित करना जो अंग्रेजी/हिंदी पाठ और भाषण को जनजातीय भाषाओं में और इसके विपरीत परिवर्तित करता है।
वास्तविक समय अनुवाद और डिजिटल संरक्षण के लिए मशीन लर्निंग, वाक् पहचान और एनएलपी को एकीकृत करता है।
सटीकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए जनजातीय अनुसंधान संस्थानों और भाषा विशेषज्ञों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है।जनजातीय समुदायों के डिजिटल सशक्तिकरण और लुप्तप्राय भाषाओं के पुनरोद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. डिजिटल अभिलेखागार और शैक्षणिक सहयोग
केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) जैसे संस्थान भाषिणी के साथ सहयोग करते हैं।
प्राचीन पांडुलिपियों, लोक साहित्य और मौखिक परंपराओं के डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित करें।
ये डिजिटल अभिलेखागार एआई और एनएलपी प्रणालियों के लिए समृद्ध डेटासेट बनाते हैं, जो सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक प्रौद्योगिकी से जोड़ते हैं।
सांस्कृतिक संरक्षण, एआई-संचालित अनुवाद और शैक्षणिक अनुसंधान के लिए भारत की क्षमता को मजबूत करता है।
4. एआई-संचालित बहुभाषी प्लेटफार्मों के माध्यम से शिक्षा को सशक्त बनाना
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) शिक्षा को अधिक समावेशी, सुलभ और भाषायी रूप से विविध बनाकर शिक्षा में परिवर्तन ला रही है।
यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है, जो कक्षा 5 तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा को बढ़ावा देती है, और अधिमानतः कक्षा 8 और उससे आगे तक।
यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक शिक्षार्थी अपनी मूल भाषा में ज्ञान प्राप्त कर सके, जिससे समझ और धारणा में सुधार हो।
a. ई-कुंभ पोर्टल
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) द्वारा विकसित।
विभिन्न भारतीय भाषाओं में तकनीकी पुस्तकों और अध्ययन सामग्री तक निःशुल्क पहुंच प्रदान करता है।
क्षेत्रीय भाषाओं में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के एनईपी 2020 के लक्ष्य का समर्थन करता है।
b. अनुवादिनी ऐप
एआईसीटीई द्वारा विकसित एक स्वदेशी एआई-आधारित बहुभाषी अनुवाद उपकरण।
इंजीनियरिंग, मेडिकल, कानून, स्नातक, स्नातकोत्तर और कौशल विकास से संबंधित पुस्तकों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद। अनुवादित सामग्री ई-कुंभ पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे तकनीकी शिक्षा तक स्थानीय भाषाओं में पहुँच का विस्तार होता है।
c. राष्ट्रीय अनुवाद मिशन (एनटीएम)
ज्ञान संबंधी ग्रंथों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने में सहायता करता है।
विभिन्न क्षेत्रों में भाषाई समानता और ज्ञान प्रसार को बढ़ावा देता है।
d. राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (एनएमएम)
प्राचीन भारतीय पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण पर काम करता है।
पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक डिजिटल संरक्षण तकनीकों के साथ जोड़ता है।
e. स्वयं प्लेटफॉर्म
बहुभाषी ऑनलाइन शिक्षा के लिए डिजिटल रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है।
2025 के मध्य तक 5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी नामांकित होंगे।
सरकार का लक्ष्य तीन वर्षों के भीतर सभी स्कूल और उच्च शिक्षा सामग्री को भारतीय भाषाओं में डिजिटल रूप से उपलब्ध कराना है।
5. शिक्षा और भाषाई समावेशन पर प्रभाव
एआई-आधारित अनुवाद और शिक्षण प्लेटफॉर्म स्कूलों, विश्वविद्यालयों और एड-टेक फर्मों को स्थानीयकृत शैक्षिक सामग्री प्रदान करने में मदद करते हैं।
शिक्षक-सहायता उपकरण, ई-लर्निंग मॉड्यूल और छात्रों के बीच समझ को बढ़ाता है।
भाषायी समानता को बढ़ावा देता है, यह सुनिश्चित करता है कि भाषा संबंधी बाधाओं के कारण कोई भी शिक्षार्थी पीछे न छूट जाए।
डिजिटल रूप से समावेशी ज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देते हुए भारत की भाषाई विविधता को सुदृढ़ करता है।
6. परिवर्तन के पीछे की तकनीक
भारत की बहुभाषी डिजिटल क्रांति उन्नत एआई और कम्प्यूटेशनल भाषाविज्ञान उपकरणों द्वारा संचालित है, जिन्हें भारत की भाषाई जटिलता के लिए डिज़ाइन किया गया है।
प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ :
स्वचालित वाक् पहचान (एएसआर) : यह बोली जाने वाली भारतीय भाषाओं को प्रतिलेखन और ध्वनि-आधारित अनुप्रयोगों के लिए सटीक पाठ में परिवर्तित करता है।
टेक्स्ट-टू-स्पीच (टीटीएस) : मूल भाषाओं में प्राकृतिक, सुबोध भाषण आउटपुट उत्पन्न करता है।
न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन (एनएमटी) : भारतीय भाषाओं के बीच संदर्भ-सचेत, वास्तविक समय अनुवाद प्रदान करता है।
प्राकृतिक भाषा समझ (एनएलयू) : यह एआई प्रणालियों को स्थानीय भाषाओं में आशय, अर्थ और भावना को समझने में सक्षम बनाता है।
ट्रांसफार्मर-आधारित आर्किटेक्चर (इंडिकबर्ट, एमबार्ट) : सटीक अनुवाद और समझ के लिए पूर्व-प्रशिक्षित AI मॉडल।
कॉर्पस विकास और डेटा क्यूरेशन : इसमें एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए पांडुलिपियों, लोककथाओं और शैक्षिक ग्रंथों से बड़े, प्रतिनिधि डेटासेट बनाना शामिल है।
निष्कर्ष :
- डिजिटल युग में भाषाई समावेशन की दिशा में भारत की यात्रा उसके सामाजिक और प्रशासनिक ढाँचे को नए सिरे से परिभाषित कर रही है। एआई नवाचार को सांस्कृतिक संरक्षण के साथ जोड़कर, देश यह सुनिश्चित कर रहा है कि उसकी भाषाई बहुलता सशक्तिकरण का वाहक बने, न कि बहिष्कार का।
- भाषिणी, आदि-वाणी, एसपीपीईएल, टीआरआई-ईसीई और एआईसीटीई के ई-कुंभ जैसी पहलों के माध्यम से, भारत अपनी भाषाओं को ज्ञान, संपर्क और समतामूलक डिजिटल विकास के इंजन में बदल रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. निम्नलिखित में से कौन सा प्लेटफ़ॉर्म जनजातीय भाषाओं के वास्तविक समय अनुवाद और संरक्षण के लिए भारत की पहली एआई-संचालित पहल है?
(a) भाषिणी
(b) आदि-वाणी
(c) भारतजेन
(d) संचिका
उत्तर: B
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. चर्चा कीजिए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और डिजिटल भाषा प्लेटफ़ॉर्म भारत में भाषाई समावेशन और सहभागी शासन को कैसे बढ़ावा दे रहे हैं। डिजिटल सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करते हुए भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उनकी भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। ( शब्द सीमा – 250, अंक – 15 )
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