डीआरडीओ साइबर हमले के दावे गलत और unverified: सरकारी अधिकारियों ने किया स्पष्ट

डीआरडीओ साइबर हमले के दावे गलत और unverified: सरकारी अधिकारियों ने किया स्पष्ट

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: DRDO, साइबर सुरक्षा, डेटा उल्लंघन, राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर युद्ध, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम
  • Essay: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ और समाधान, डिजिटल युग में डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

त्वरित पुनरावृत्ति: DRDO से संबंधित हालिया साइबर सुरक्षा घटना की रिपोर्टें ‘गलत और असत्यापित’ पाई गई हैं, जिसमें अधिकारियों ने किसी सक्रिय साइबर हमले या डेटा चोरी के प्रमाण से इनकार किया है, जबकि पुरानी जानकारी को दुर्भावनापूर्ण रूप से गढ़ा गया बताया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से संबंधित एक कथित साइबर सुरक्षा घटना की मीडिया रिपोर्टों को अधिकारियों ने ‘गलत और असत्यापित’ बताया है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में किसी सक्रिय साइबर हमले, अनाधिकृत नेटवर्क घुसपैठ या डेटा की चोरी का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि लीक किया गया अधिकांश डेटा अवर्गीकृत प्रकृति का है और 2020-2022 की पुरानी डेटा उल्लंघनों से संबंधित है, जिसे वित्तीय लाभ के लिए दुर्भावनापूर्ण तत्वों द्वारा गढ़ा गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में साइबर हमले और डेटा उल्लंघन की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, जिससे महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
  • DRDO भारत की रक्षा क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण है, और इसके डेटा की सुरक्षा देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • साइबर सुरक्षा खतरों में डेटा चोरी, रैंसमवेयर हमले, जासूसी और महत्वपूर्ण प्रणालियों को बाधित करना शामिल है।
  • भारत सरकार ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विभिन्न नीतियाँ और कानून बनाए हैं, जिनमें सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति शामिल हैं।
  • साइबर हमलों की बढ़ती जटिलता के कारण, रक्षा प्रतिष्ठानों को लगातार अपनी सुरक्षा प्रणालियों को अद्यतन करने और खतरों का पता लगाने की क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता है।
  • अक्सर, दुर्भावनापूर्ण तत्व पुरानी या अवर्गीकृत जानकारी का उपयोग करके जनता में भय और भ्रम पैदा करने का प्रयास करते हैं, जिसका उद्देश्य वित्तीय लाभ प्राप्त करना होता है।

साइबर सुरक्षा क्या है?

  • साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) सूचना प्रणालियों, नेटवर्क और डेटा को डिजिटल हमलों से बचाने की प्रक्रिया है।
  • इसका उद्देश्य डेटा की गोपनीयता (Confidentiality), अखंडता (Integrity) और उपलब्धता (Availability) सुनिश्चित करना है।
  • इसमें सूचना प्रौद्योगिकी (IT) प्रणालियों, औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों (ICS) और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा शामिल है।
  • साइबर सुरक्षा के प्रमुख घटकों में नेटवर्क सुरक्षा, एप्लिकेशन सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, पहचान प्रबंधन और आपदा रिकवरी शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में, साइबर सुरक्षा का अर्थ देश की रक्षा, खुफिया और महत्वपूर्ण सरकारी प्रणालियों को साइबर खतरों से बचाना है।
  • साइबर युद्ध (Cyber Warfare) एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र के कंप्यूटर नेटवर्क को बाधित करने या क्षति पहुँचाने के लिए किए गए हमलों को संदर्भित करता है।
  • भारत में, भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) साइबर सुरक्षा घटनाओं से निपटने वाली प्रमुख एजेंसी है।
  • डेटा उल्लंघन (Data Breach) तब होता है जब संवेदनशील, गोपनीय या संरक्षित डेटा अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा एक्सेस या चोरी कर लिया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
साइबर सुरक्षा घटना का खंडन DRDO ने मीडिया रिपोर्टों को ‘गलत और असत्यापित’ बताया, सक्रिय साइबर हमले के कोई सबूत नहीं।
डेटा की प्रकृति कथित लीक हुए अधिकांश डेटा ‘अवर्गीकृत’ (unclassified) प्रकृति के हैं और उनमें कोई गोपनीयता नहीं है।
पुराना डेटा उल्लंघन कुछ ‘महत्वपूर्ण’ के रूप में दिखाए जा रहे अवर्गीकृत डेटा 2020-2022 के पुराने डेटा उल्लंघन से संबंधित हैं।
दस्तावेजों में हेरफेर खतरे वाले तत्वों (threat actors) ने जानबूझकर दस्तावेजों में हेरफेर किया है ताकि वे ‘हालिया और गोपनीय’ लगें।
वित्तीय लाभ का उद्देश्य कथित लीक हुए डेटा को वित्तीय लाभ के लिए, घबराहट पैदा करने और अधिक धन एकत्र करने के लिए गढ़ा गया है।

महत्व

राष्ट्रीय सुरक्षा

  • DRDO जैसी संवेदनशील रक्षा अनुसंधान संस्था पर साइबर हमले की अफवाहें राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के लिए गंभीर चिंताएँ पैदा करती हैं, भले ही वे असत्य हों।
  • इस तरह की घटनाओं की त्वरित और पारदर्शी जाँच आवश्यक है ताकि जनता का विश्वास बना रहे और विरोधियों को गलत सूचना फैलाने से रोका जा सके।

साइबर सुरक्षा अवसंरचना

  • यह घटना भारत की साइबर सुरक्षा अवसंरचना (Cybersecurity Infrastructure) की मजबूती और भेद्यता दोनों को उजागर करती है।
  • रक्षा प्रतिष्ठानों को लगातार उन्नत साइबर खतरों से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल और निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।

सूचना युद्ध

  • यह घटना सूचना युद्ध (Information Warfare) और दुष्प्रचार (Disinformation) के बढ़ते खतरे को दर्शाती है, जहाँ गलत सूचना का उपयोग भय और अराजकता फैलाने के लिए किया जाता है।
  • सरकारी एजेंसियों को ऐसी रिपोर्टों का खंडन करने और सटीक जानकारी प्रदान करने के लिए प्रभावी संचार रणनीतियों की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ

1. उन्नत लगातार खतरे (Advanced Persistent Threats – APTs)

  • राज्य-प्रायोजित अभिनेताओं द्वारा किए गए परिष्कृत और दीर्घकालिक साइबर हमले, जो संवेदनशील नेटवर्क में घुसपैठ करने का प्रयास करते हैं।
  • इन हमलों का पता लगाना और उन्हें रोकना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि वे अक्सर धीमी गति से और गुप्त रूप से संचालित होते हैं।

2. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

  • सरकारी और रक्षा डेटा की गोपनीयता और अखंडता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, खासकर जब कर्मचारी लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण इरादे से डेटा लीक करते हैं।
  • डेटा एन्क्रिप्शन, एक्सेस नियंत्रण और नियमित सुरक्षा ऑडिट महत्वपूर्ण हैं।

3. साइबर सुरक्षा कौशल की कमी

  • भारत में साइबर सुरक्षा पेशेवरों की भारी कमी है, जिससे महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को सुरक्षित रखने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना आवश्यक है।

4. गलत सूचना और दुष्प्रचार

  • साइबर हमलों की झूठी या अतिरंजित रिपोर्टें सार्वजनिक विश्वास को कमजोर कर सकती हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनावश्यक चिंताएँ पैदा कर सकती हैं।
  • सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों पर गलत सूचना के प्रसार को नियंत्रित करना एक चुनौती है।

5. पुरानी प्रणालियाँ और पैचिंग

  • कई सरकारी प्रणालियाँ पुरानी तकनीक पर चलती हैं, जिनमें सुरक्षा कमजोरियाँ हो सकती हैं जिन्हें ठीक नहीं किया गया है।
  • नियमित पैचिंग और सिस्टम अपग्रेडेशन आवश्यक हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
साइबर हमले की अफवाहें राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक विश्वास पर नकारात्मक प्रभाव।
पुराना डेटा उल्लंघन संवेदनशील डेटा की दीर्घकालिक सुरक्षा और निगरानी में संभावित कमी।
डेटा का हेरफेर खतरे वाले तत्वों द्वारा गलत सूचना फैलाने और वित्तीय लाभ के लिए डेटा को विकृत करने का प्रयास।
अवर्गीकृत डेटा का दुरुपयोग भले ही डेटा अवर्गीकृत हो, फिर भी इसका उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने या दुष्प्रचार के लिए किया जा सकता है।
जागरूकता की कमी कर्मचारियों में साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल और डेटा हैंडलिंग के बारे में जागरूकता की कमी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • साइबर सुरक्षित भारत पहल (Cyber Surakshit Bharat Initiative)

आगे की राह

  • रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए एक व्यापक और अद्यतन राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति विकसित करना।
  • DRDO जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं में साइबर सुरक्षा ऑडिट और भेद्यता मूल्यांकन (Vulnerability Assessment) को नियमित और कठोर बनाना।
  • कर्मचारियों के लिए डेटा हैंडलिंग, फ़िशिंग (phishing) और सोशल इंजीनियरिंग (social engineering) हमलों के बारे में नियमित और अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • साइबर खुफिया जानकारी साझा करने और खतरों का पता लगाने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करना।
  • गलत सूचना और दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत और त्वरित संचार तंत्र स्थापित करना।
  • उन्नत साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकियों में निवेश करना, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) आधारित समाधान शामिल हैं।
  • साइबर सुरक्षा पेशेवरों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
  • लीक हुए डेटा की प्रामाणिकता और स्रोत की पुष्टि के लिए एक मजबूत फोरेंसिक क्षमता (Forensic Capability) विकसित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

साइबर सुरक्षा · डेटा ब्रीच · DRDO · राष्ट्रीय सुरक्षा · साइबर युद्ध · सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम · राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति · महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना · साइबर जासूसी · डेटा गोपनीयता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची’}

अवधारणा प्रवाह

DRDO पर साइबर हमले की मीडिया रिपोर्टें  →  DRDO द्वारा रिपोर्टों को ‘गलत और असत्यापित’ बताना  →  जांच में सक्रिय हमले का कोई सबूत नहीं मिला  →  लीक हुए डेटा का ‘अवर्गीकृत’ और ‘पुराना’ होना  →  खतरे वाले तत्वों द्वारा वित्तीय लाभ के लिए डेटा का हेरफेर

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के अधीन कार्य करता है।
2. यह भारत के सैन्य हार्डवेयर और प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान एवं विकास के लिए जिम्मेदार है।
3. इसके अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। DRDO रक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है और सैन्य अनुसंधान एवं विकास में संलग्न है। कथन 3 गलत है, DRDO के अध्यक्ष रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार होते हैं, न कि प्रधानमंत्री।

Q2. भारत में साइबर सुरक्षा से संबंधित कानूनों और नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) साइबर अपराधों और इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य को नियंत्रित करता है।
2. राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, 2013 का उद्देश्य महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (Critical Information Infrastructure) की सुरक्षा करना है।
3. CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) भारत में साइबर सुरक्षा घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने वाली नोडल एजेंसी है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 भारत में साइबर अपराधों और डिजिटल लेनदेन के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, 2013 का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना सहित साइबर स्पेस को सुरक्षित करना है। CERT-In भारत में साइबर सुरक्षा घटनाओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल ही में DRDO से संबंधित कथित साइबर सुरक्षा घटना की रिपोर्टों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में डेटा सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया है। भारत में साइबर सुरक्षा चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों पर चर्चा कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में भारत के समक्ष मौजूद प्रमुख साइबर सुरक्षा चुनौतियों का विश्लेषण करें, जैसे कि डेटा ब्रीच, साइबर जासूसी, महत्वपूर्ण अवसंरचना पर हमले, और साइबर युद्ध की बढ़ती संभावनाएँ। दूसरे भाग में, इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों पर चर्चा करें, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, CERT-In की भूमिका, राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC) और अन्य संस्थागत तथा तकनीकी पहलें शामिल हों। निष्कर्ष में, भविष्य की राह और निरंतर नवाचार की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: Hindustan Times


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