08 Aug तमिलनाडु सरकार ने संघ-राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया
✎ केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का आधार हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के वितरण को नियंत्रित करते हैं और समय-समय पर समीक्षा के अधीन रहते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ | GS Paper II — केंद्र-राज्य संबंध
- Prelims: केंद्र-राज्य संबंध, सरकारी आयोग, पुंछी आयोग, राजमन्नार समिति, अनुच्छेद 245, अनुच्छेद 246, सातवीं अनुसूची
- Essay: भारत में संघवाद: चुनौतियाँ और समाधान, सहकारी संघवाद: भारतीय लोकतंत्र का आधार
त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की संघीय संरचना का आधार हैं, जो विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के वितरण को नियंत्रित करते हैं और समय-समय पर समीक्षा के अधीन रहते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित उच्च-स्तरीय समिति को अपनी रिपोर्ट के भाग-I का अंग्रेजी संस्करण सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और समिति की रिपोर्ट तक आम जनता की पहुँच को आसान बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे पहले, रिपोर्ट का तमिल संस्करण पहले से ही सार्वजनिक था। सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण के लिए विशेष कॉपीराइट को भी रद्द करने का निर्देश दिया है।
पृष्ठभूमि
- केंद्र-राज्य संबंध भारतीय संविधान की मूल संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो संघ और राज्यों के बीच विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के वितरण को परिभाषित करते हैं।
- समय-समय पर, इन संबंधों की समीक्षा के लिए विभिन्न आयोगों और समितियों का गठन किया गया है, जैसे कि सरकारी आयोग (1983) और पुंछी आयोग (2007)।
- तमिलनाडु में DMK सरकार ने 15 अप्रैल, 2025 को सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता में केंद्र-राज्य संबंधों पर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।
- इस समिति में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन सदस्य के रूप में शामिल थे।
- समिति ने अपनी रिपोर्ट का भाग-I 16 फरवरी, 2026 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को प्रस्तुत किया, जिसे 18 फरवरी, 2026 को विधानसभा में पेश किया गया था।
भारत में केंद्र-राज्य संबंध क्या हैं?
- भारत का संविधान एक संघीय ढाँचे की स्थापना करता है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन होता है, लेकिन यह एकात्मक विशेषताओं के साथ एक मजबूत केंद्र की ओर झुका हुआ है।
- विधायी संबंध (अनुच्छेद 245-255) संसद और राज्य विधानसभाओं के बीच कानून बनाने की शक्तियों को परिभाषित करते हैं, जिसमें सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं।
- प्रशासनिक संबंध (अनुच्छेद 256-263) केंद्र और राज्यों के बीच कार्यकारी शक्तियों के समन्वय और सहयोग से संबंधित हैं, जिसमें राज्यों पर केंद्र का नियंत्रण और अखिल भारतीय सेवाएँ शामिल हैं।
- वित्तीय संबंध (अनुच्छेद 268-293) केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के स्रोतों और वितरण को नियंत्रित करते हैं, जिसमें कराधान शक्तियाँ, वित्त आयोग की सिफारिशें और अनुदान शामिल हैं।
- राज्यपाल का पद केंद्र-राज्य संबंधों में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है और राज्य प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- विभिन्न समितियों, जैसे कि राजमन्नार समिति (तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित), सरकारी आयोग और पुंछी आयोग ने केंद्र-राज्य संबंधों को सुदृढ़ करने और राज्यों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करने के लिए सिफारिशें की हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| तमिलनाडु सरकार का आदेश | संघ-राज्य संबंधों पर उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee on Union-State Relations) की रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का निर्देश। |
| रिपोर्ट का सार्वजनिक होना | रिपोर्ट के भाग-I का अंग्रेजी संस्करण अब https://hlcusr.tn.gov.in पर मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। |
| कॉपीराइट रद्द करना | समिति को रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण के भाग-I के लिए विशेष कॉपीराइट (Copyright) रद्द करने का भी निर्देश दिया गया। |
| समिति का गठन | पिछली DMK सरकार द्वारा 15 अप्रैल, 2025 को सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता में गठित। |
| समिति के सदस्य | सेवानिवृत्त IAS अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन। |
| रिपोर्ट प्रस्तुत करना | समिति ने अपनी रिपोर्ट का भाग-I 16 फरवरी, 2026 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को प्रस्तुत किया, जिसे 18 फरवरी को विधानसभा में पेश किया गया। |
महत्व
शासन और पारदर्शिता
- रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) बढ़ती है।
- नागरिकों और हितधारकों को संघ-राज्य संबंधों से संबंधित महत्वपूर्ण सिफारिशों तक सीधी पहुंच मिलती है, जिससे सूचित सार्वजनिक बहस को बढ़ावा मिलता है।
संघवाद को सुदृढ़ करना
- यह कदम भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) में राज्यों की भूमिका और चिंताओं को उजागर करता है।
- यह संघ और राज्यों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुधारों पर चर्चा को बढ़ावा देता है, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के लिए महत्वपूर्ण है।
नीति निर्माण और अनुसंधान
- रिपोर्ट सार्वजनिक होने से नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को संघ-राज्य संबंधों के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करने के लिए मूल्यवान डेटा और अंतर्दृष्टि मिलती है।
- यह भविष्य की नीतियों और सुधारों के लिए एक आधार प्रदान करता है, जिससे अधिक प्रभावी और न्यायसंगत शासन सुनिश्चित होता है।
चुनौतियाँ
1. संघ-राज्य संबंधों में तनाव
- राज्यों द्वारा अधिक स्वायत्तता (Autonomy) और वित्तीय संसाधनों की मांग।
- केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के मामलों में कथित हस्तक्षेप, जिससे अविश्वास पैदा होता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान: संघ और राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व
2. वित्तीय संसाधनों का वितरण
- राजस्व साझाकरण (Revenue Sharing) और अनुदान के वितरण को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच असहमति।
- राज्यों पर केंद्रीय योजनाओं का बोझ, जिससे उनके अपने विकास एजेंडे प्रभावित होते हैं।
यूपीएससी लिंक: वित्त आयोग, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
3. विधायी और प्रशासनिक मुद्दे
- समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषयों पर कानून बनाने में केंद्र की प्रमुखता।
- राज्यपाल की भूमिका और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर उनकी सहमति।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य विधायी और प्रशासनिक संबंध
4. भाषा और सांस्कृतिक विविधता
- भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए राज्यों की मांग।
- राष्ट्रीय नीतियों में क्षेत्रीय विशिष्टताओं को समायोजित करने की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: भारत की विविधता, संघवाद और क्षेत्रीयता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| रिपोर्ट की पहुंच | केवल अंग्रेजी संस्करण का सार्वजनिक होना, जबकि भाषाई विविधता वाले देश में अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी पहुंच महत्वपूर्ण है। |
| सिफारिशों का कार्यान्वयन | समिति की सिफारिशों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा स्वीकार करने और लागू करने की इच्छाशक्ति। |
| राजनीतिक इच्छाशक्ति | संघ-राज्य संबंधों में सुधार के लिए राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति का अभाव। |
| राज्यों की स्वायत्तता | राज्यों द्वारा अधिक स्वायत्तता की मांग और केंद्र की एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाना। |
| संस्थागत तंत्र | संघ-राज्य विवादों को हल करने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी संस्थागत तंत्रों की कमी। |
आगे की राह
- संघ-राज्य संबंधों पर विभिन्न आयोगों (जैसे सरकारी आयोग, पुंछी आयोग) की सिफारिशों का ईमानदारी से मूल्यांकन और कार्यान्वयन किया जाए।
- अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) और राष्ट्रीय विकास परिषद (National Development Council) जैसे मंचों को अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि राज्यों की चिंताओं को सुना जा सके।
- वित्तीय हस्तांतरण (Financial Transfers) और राजस्व साझाकरण के लिए एक पारदर्शी और न्यायसंगत तंत्र विकसित किया जाए, जिसमें राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए।
- राज्यपाल की भूमिका को संविधान की भावना के अनुरूप बनाया जाए, ताकि वह राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में निष्पक्षता से कार्य कर सकें।
- समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाते समय केंद्र सरकार राज्यों के साथ अधिक परामर्श करे।
- राज्यों को उनकी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए पर्याप्त स्वायत्तता प्रदान की जाए।
- सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केंद्र-राज्य संबंध · संघवाद · राज्यों की स्वायत्तता · सरकारी आयोग · पुंछी आयोग · न्यायिक समीक्षा · अनुच्छेद 245 · अनुच्छेद 246 · सातवीं अनुसूची · सहकारी संघवाद · टकरावपूर्ण संघवाद · राजकोषीय संघवाद
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 245-255’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य विधायी संबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 256-263’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 268-281’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 356’, ‘note’: ‘राज्यों में राष्ट्रपति शासन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 263’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय परिषद का गठन’}
अवधारणा प्रवाह
तमिलनाडु सरकार ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आदेश दिया → संघ-राज्य संबंधों पर समिति की रिपोर्ट उपलब्ध हुई → नागरिकों और शोधकर्ताओं को पहुंच मिली → संघवाद पर सार्वजनिक बहस और विश्लेषण बढ़ा → केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार की संभावना बढ़ी → सहकारी संघवाद को बढ़ावा मिला
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का संविधान केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का स्पष्ट विभाजन प्रदान करता है।
2. सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं।
3. अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary powers) राज्यों के पास निहित हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। भारत का संविधान अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का स्पष्ट विभाजन करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि अवशिष्ट शक्तियाँ भारत में संसद (केंद्र) के पास निहित हैं, न कि राज्यों के पास।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा आयोग केंद्र-राज्य संबंधों से संबंधित नहीं है?
- सरकारी आयोग
- राजमन्नार समिति
- पुंछी आयोग
- कोठारी आयोग
उत्तर: कोठारी आयोग — सरकारी आयोग, राजमन्नार समिति और पुंछी आयोग सभी केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा और सुधार के लिए गठित किए गए थे। कोठारी आयोग (1964-66) भारत में शिक्षा क्षेत्र में सुधारों से संबंधित था।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की वर्तमान स्थिति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, तमिलनाडु सरकार द्वारा केंद्र-राज्य संबंधों पर एक उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखने के हालिया कदम के महत्व पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत भारत में केंद्र-राज्य संबंधों के संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 245, 246, 248, सातवीं अनुसूची) और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (जैसे सरकारी आयोग, पुंछी आयोग) का संक्षिप्त परिचय देकर करें।
पहले भाग में, केंद्र-राज्य संबंधों की वर्तमान स्थिति का समालोचनात्मक परीक्षण करें। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल होने चाहिए:
1. **विधायी संबंध:** संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में शक्तियों का वितरण, समवर्ती सूची पर केंद्र के प्रभुत्व की प्रवृत्तियाँ।
2. **प्रशासनिक संबंध:** अखिल भारतीय सेवाओं की भूमिका, राज्यपाल की भूमिका (विशेषकर अनुच्छेद 356 के तहत), अंतर-राज्यीय परिषदों का महत्व।
3. **वित्तीय संबंध:** राजकोषीय संघवाद, वस्तु एवं सेवा कर (GST) के बाद राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर प्रभाव, वित्त आयोग की सिफारिशें।
4. **टकराव के क्षेत्र:** राजनीतिक ध्रुवीकरण, केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं पर निर्भरता, राज्यों की स्वायत्तता की मांग।
5. **सहकारी संघवाद की चुनौतियाँ:** नीति आयोग की भूमिका, केंद्र-राज्य सहयोग के उदाहरण और उनकी सीमाएँ।
दूसरे भाग में, तमिलनाडु सरकार द्वारा केंद्र-राज्य संबंधों पर उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखने के हालिया कदम के महत्व पर चर्चा करें:
1. **पारदर्शिता और जवाबदेही:** सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को बढ़ावा देना।
2. **लोकतांत्रिक भागीदारी:** नागरिकों और हितधारकों को केंद्र-राज्य संबंधों पर बहस में शामिल होने का अवसर प्रदान करना।
3. **नीति निर्माण में योगदान:** रिपोर्ट में निहित सिफारिशों पर व्यापक चर्चा को प्रोत्साहित करना, जिससे बेहतर नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।
4. **संघीय भावना को मजबूत करना:** राज्यों की चिंताओं और दृष्टिकोणों को राष्ट्रीय मंच पर लाना।
5. **अन्य राज्यों के लिए मिसाल:** अन्य राज्यों को भी ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए प्रेरित करना।
निष्कर्ष में, केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करने और सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कदमों के महत्व पर जोर दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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