10 Aug ताइवान ने चीन के खिलाफ रिकॉर्ड रक्षा बजट का ऐलान किया, जानिए पूरा मामला
✎ ताइवान का रिकॉर्ड रक्षा बजट चीन के बढ़ते सैन्य दबाव का मुकाबला करने और अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: ताइवान जलडमरूमध्य, एक-चीन नीति, रक्षा बजट, भू-राजनीति, सैन्य अभ्यास, चीन-ताइवान संबंध
- Essay: बदलती वैश्विक व्यवस्था में छोटे राष्ट्रों की सुरक्षा चुनौतियाँ, एशिया में शक्ति संतुलन और इसके निहितार्थ
त्वरित पुनरावृत्ति: ताइवान का रिकॉर्ड रक्षा बजट चीन के बढ़ते सैन्य दबाव का मुकाबला करने और अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ताइवान ने 2027 तक अपने सैन्य खर्च को रिकॉर्ड 1.1 ट्रिलियन NT डॉलर (34.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक बढ़ाने की योजना बनाई है। यह कदम चीन के बढ़ते सैन्य दबाव का मुकाबला करने और अमेरिका द्वारा ताइवान को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किए जाने के बीच आया है। प्रस्तावित रक्षा बजट ताइवान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3 प्रतिशत से अधिक होगा, जो चीन से संभावित खतरों के प्रति ताइवान की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- चीन ताइवान को अपना अविभाज्य हिस्सा मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बलपूर्वक उसे मुख्य भूमि में शामिल करने की धमकी देता है। ताइवान इस दावे को खारिज करता है और खुद को एक संप्रभु राष्ट्र मानता है।
- हाल के वर्षों में, चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य और तटरक्षक गतिविधियों में वृद्धि की है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ा है।
- ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने पदभार संभालने के बाद से रक्षा खर्च और सैन्य तैयारियों को प्राथमिकता दी है, जिसका लक्ष्य GDP का 3 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करना है।
- अमेरिका ताइवान को अपनी आत्मरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है, और उसे सैन्य सहायता भी प्रदान करता है।
- ताइवान वर्तमान में अपने वार्षिक हान कुआंग (Han Kuang) सैन्य अभ्यास कर रहा है, जो इसकी रक्षा तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ताइवान की रक्षा रणनीति और चीन के साथ संबंध
- ताइवान की रक्षा रणनीति मुख्य रूप से चीन के संभावित आक्रमण को रोकने और यदि आवश्यक हो तो उसका मुकाबला करने पर केंद्रित है। इसमें असममित युद्ध (Asymmetric Warfare) क्षमताओं का विकास शामिल है, जहाँ छोटे बल बड़े बल के खिलाफ अप्रत्याशित तरीकों का उपयोग करते हैं।
- ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) चीन और ताइवान को अलग करता है और इसे दुनिया के सबसे संभावित फ्लैशपॉइंट्स (Flashpoints) में से एक माना जाता है।
- एक-चीन नीति (One-China Policy) चीन का वह सिद्धांत है जिसके तहत वह ताइवान को चीन का हिस्सा मानता है। कई देश इस नीति को स्वीकार करते हैं, लेकिन ताइवान के साथ अनौपचारिक संबंध बनाए रखते हैं।
- ताइवान का सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम उन्नत हथियारों की खरीद, घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने और सैन्य प्रशिक्षण में सुधार पर केंद्रित है।
- T-डोम वायु-रक्षा प्रणाली ताइवान की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो द्वीप को हवाई खतरों से बचाएगी।
- ताइवान अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अमेरिका जैसे देशों से सैन्य उपकरण और प्रौद्योगिकी प्राप्त करता है।
- चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान के आसपास हवाई और नौसैनिक अभ्यास बढ़ा दिए हैं, जिसमें अक्सर ताइवान के हवाई रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) का उल्लंघन शामिल होता है।
- ताइवान की लोकतांत्रिक शासन प्रणाली और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| रिकॉर्ड रक्षा बजट | ताइवान द्वारा चीन के बढ़ते सैन्य दबाव का मुकाबला करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| GDP का 3% से अधिक | रक्षा व्यय को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3% से अधिक करने का लक्ष्य सैन्य आधुनिकीकरण और तैयारियों पर गंभीर ध्यान केंद्रित करता है। |
| NT$1.1 ट्रिलियन (2027) | यह प्रस्तावित राशि ताइवान के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा रक्षा आवंटन है, जो भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को दर्शाता है। |
| T-डोम वायु-रक्षा प्रणाली | यह प्रणाली हवाई खतरों से द्वीप की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे ताइवान की रक्षात्मक क्षमताएं मजबूत होंगी। |
| अमेरिकी दबाव | संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ताइवान को चीन को रोकने के लिए अधिक प्रयास करने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा में अमेरिकी हित को दर्शाता है। |
महत्व
सामरिक महत्व
- ताइवान का यह रिकॉर्ड रक्षा बजट चीन की बढ़ती सैन्य मुखरता के जवाब में उसकी रक्षात्मक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यह कदम ताइवान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
- यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता में बदलाव आ सकता है।
आर्थिक प्रभाव
- रक्षा व्यय में वृद्धि से ताइवान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का एक बड़ा हिस्सा सैन्य तैयारियों पर खर्च होगा, जिसका अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ सकता है।
- यह घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा दे सकता है, जिससे रोजगार सृजन और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन मिल सकता है।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, यह रक्षा उपकरणों के आयात और निर्यात को प्रभावित कर सकता है, जिससे वैश्विक रक्षा बाजार में बदलाव आ सकता है।
भू-राजनीतिक निहितार्थ
- यह बजट वृद्धि चीन-ताइवान संबंधों में तनाव को और बढ़ा सकती है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता का जोखिम बढ़ सकता है।
- यह संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ ताइवान के संबंधों को मजबूत करता है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा गठबंधनों को प्रभावित कर सकता है।
- यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर उद्योग पर संभावित प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि ताइवान इस क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी है।
चुनौतियाँ
1. चीन से सैन्य खतरा
- चीन ताइवान को अपना अविभाज्य हिस्सा मानता है और बल प्रयोग से उसे अपने नियंत्रण में लेने की धमकी देता है।
- चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताएं और ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास द्वीप की सुरक्षा के लिए एक निरंतर चुनौती पेश करते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सुरक्षा चुनौतियाँ
2. घरेलू राजनीतिक गतिरोध
- ताइवान में विपक्षी दलों का विधायिका पर नियंत्रण है, जिससे रक्षा बजट की अंतिम मंजूरी में देरी या बदलाव हो सकता है।
- राजनीतिक दलों के बीच गतिरोध के कारण केंद्रीय सरकार का बजट, जिसमें सैन्य निधि भी शामिल है, अभी तक अनुमोदित नहीं हुआ है।
यूपीएससी लिंक: शासन, राजनीतिक व्यवस्था
3. आर्थिक बोझ
- रिकॉर्ड रक्षा व्यय से ताइवान की अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ पड़ सकता है, जिससे अन्य सामाजिक और आर्थिक कार्यक्रमों के लिए धन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
- GDP के 3% से अधिक का रक्षा व्यय अन्य विकासात्मक प्राथमिकताओं से संसाधनों को हटा सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, राजकोषीय नीति
4. अंतर्राष्ट्रीय समर्थन की निरंतरता
- ताइवान की सुरक्षा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों का समर्थन महत्वपूर्ण है, लेकिन इस समर्थन की निरंतरता और प्रकृति भविष्य में बदल सकती है।
- अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण ताइवान के लिए राजनयिक समर्थन बनाए रखना एक चुनौती है।
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चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| चीन की सैन्य आक्रामकता | ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की बढ़ती सैन्य और तटरक्षक गतिविधि से संघर्ष का जोखिम बढ़ता है। |
| बजट अनुमोदन में देरी | विपक्षी-नियंत्रित विधायिका के कारण रक्षा बजट के अनुमोदन में देरी से सैन्य तैयारियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। |
| वित्तीय स्थिरता | रिकॉर्ड रक्षा व्यय से देश की राजकोषीय स्थिरता और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के लिए धन की उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है। |
| आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण | रक्षा नीति पर राजनीतिक दलों के बीच असहमति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सुसंगत दृष्टिकोण को कमजोर कर सकती है। |
| प्रौद्योगिकी हस्तांतरण | महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों के अधिग्रहण और हस्तांतरण में भू-राजनीतिक बाधाएं आ सकती हैं। |
आगे की राह
- ताइवान को अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने और मजबूत करने के लिए निवेश जारी रखना चाहिए, जिसमें उन्नत हथियार प्रणालियों और प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना चाहिए ताकि बाहरी खतरों के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सके।
- घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना चाहिए ताकि विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हो और आत्मनिर्भरता बढ़े।
- चीन के साथ तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए राजनयिक चैनलों और संवाद को खुला रखना चाहिए।
- रक्षा बजट के अनुमोदन और कार्यान्वयन में राजनीतिक सहमति बनाने के लिए घरेलू राजनीतिक दलों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
- साइबर सुरक्षा और सूचना युद्ध क्षमताओं में निवेश करना चाहिए ताकि आधुनिक युद्ध के खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ताइवान-चीन संबंध · रक्षा बजट · भू-राजनीतिक तनाव · हिंद-प्रशांत क्षेत्र · राष्ट्रीय सुरक्षा · सैन्य आधुनिकीकरण · आर्थिक संवृद्धि और रक्षा व्यय · अंतर्राष्ट्रीय संबंध · शक्ति संतुलन · कूटनीति और सैन्य शक्ति
अवधारणा प्रवाह
चीन की बढ़ती सैन्य मुखरता → ताइवान द्वारा रिकॉर्ड रक्षा बजट की योजना → सैन्य आधुनिकीकरण और तैयारियों में वृद्धि → क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर प्रभाव → चीन-ताइवान संबंधों में तनाव → हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा गतिशीलता पर असर
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ताइवान एक स्वशासित लोकतांत्रिक द्वीप है जिसे चीन अपना अभिन्न अंग मानता है।
2. संयुक्त राज्य अमेरिका ताइवान को रक्षात्मक हथियार बेचता है, लेकिन औपचारिक रूप से उसे एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं देता है।
3. ‘वन चाइना पॉलिसी’ (एक चीन नीति) के तहत, संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देश ताइवान को एक संप्रभु राज्य के रूप में मान्यता नहीं देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। ताइवान स्वयं को एक स्वतंत्र राष्ट्र मानता है, जबकि चीन उसे अपना ‘विद्रोही प्रांत’ मानता है और बलपूर्वक उसे मुख्य भूमि में मिलाने की धमकी देता है।
कथन 2 सही है। अमेरिका ताइवान संबंध अधिनियम के तहत ताइवान को आत्मरक्षा के लिए सहायता प्रदान करता है, लेकिन बीजिंग के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने के लिए ‘वन चाइना पॉलिसी’ का पालन करता है।
कथन 3 सही है। ‘वन चाइना पॉलिसी’ के तहत, चीन जनवादी गणराज्य (PRC) को चीन की एकमात्र वैध सरकार के रूप में मान्यता दी जाती है, और ताइवान (गणतंत्र चीन, ROC) को एक अलग संप्रभु राज्य के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ताइवान के रक्षा बजट में वृद्धि के संभावित कारणों को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?
- ताइवान की अर्थव्यवस्था में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण अतिरिक्त धन की उपलब्धता।
- चीन द्वारा ताइवान के आसपास सैन्य और तटरक्षक गतिविधियों में वृद्धि।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा ताइवान पर रक्षा व्यय बढ़ाने का दबाव।
- ताइवान की आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता को दूर करने के लिए सैन्य खर्च में वृद्धि।
उत्तर: चीन द्वारा ताइवान के आसपास सैन्य और तटरक्षक गतिविधियों में वृद्धि। — ताइवान के रक्षा बजट में वृद्धि का मुख्य कारण चीन द्वारा ताइवान के प्रति बढ़ती आक्रामकता और सैन्य दबाव है। चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और उसे बलपूर्वक नियंत्रित करने की धमकी देता है, जिसके जवाब में ताइवान अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ताइवान के रिकॉर्ड रक्षा बजट की योजना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाती है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और चर्चा कीजिए कि यह भारत के लिए क्या निहितार्थ रखता है। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ताइवान के बढ़ते रक्षा बजट और चीन के साथ उसके तनाव का संक्षिप्त परिचय दें।
2. भू-राजनीतिक परिदृश्य का समालोचनात्मक परीक्षण:
a. चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता और क्षेत्रीय प्रभुत्व की आकांक्षाएँ।
b. अमेरिका की ‘हिंद-प्रशांत रणनीति’ और ताइवान को समर्थन।
c. ताइवान की ‘असममित युद्ध’ (asymmetric warfare) रणनीति और सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर।
d. क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर प्रभाव और संभावित संघर्ष के जोखिम।
e. अन्य क्षेत्रीय शक्तियों (जापान, ऑस्ट्रेलिया आदि) की प्रतिक्रियाएँ।
3. भारत के लिए निहितार्थ:
a. ‘वन चाइना पॉलिसी’ पर भारत की स्थिति और ताइवान के साथ अनौपचारिक संबंध।
b. हिंद-प्रशांत में स्थिरता और मुक्त नौवहन का महत्व।
c. चीन के साथ भारत के अपने सीमा विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ।
d. भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और क्षेत्रीय भागीदारों के साथ सहयोग।
e. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (विशेषकर सेमीकंडक्टर) पर संभावित प्रभाव।
f. भारत की अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता।
4. निष्कर्ष: भारत के लिए एक संतुलित कूटनीतिक और सुरक्षा रणनीति की आवश्यकता पर बल दें, जो क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे।
स्रोत: Mint
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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