पारंपरिक व्यवसायों को बचाने के लिए नीति समर्थन क्यों जरूरी है? UPSC दृष्टिकोण

Policy support vital to preserve traditional occupations, says expert — diagram

पारंपरिक व्यवसायों को बचाने के लिए नीति समर्थन क्यों जरूरी है? UPSC दृष्टिकोण

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पारंपरिक व्यवसायों का संकट

✎ पारंपरिक व्यवसायों का संरक्षण न केवल सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक समावेशन, आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास के लिए भी आवश्यक है, जिसके लिए मजबूत नीतिगत समर्थन अपरिहार्य है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय समाज, सामाजिक मुद्दे  |  GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास
  • Prelims: पारंपरिक व्यवसाय, सामाजिक समावेशन, आर्थिक सशक्तिकरण, नीतिगत समर्थन, कारीगर समुदाय, कुटीर उद्योग, असंगठित क्षेत्र
  • Essay: बदलती अर्थव्यवस्था में पारंपरिक व्यवसायों का महत्व और चुनौतियाँ, सामाजिक समावेशन और सतत विकास के लिए नीतिगत हस्तक्षेप की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: पारंपरिक व्यवसायों का संरक्षण न केवल सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक समावेशन, आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास के लिए भी आवश्यक है, जिसके लिए मजबूत नीतिगत समर्थन अपरिहार्य है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

आंध्र विश्वविद्यालय में ‘बदलती अर्थव्यवस्था में पारंपरिक व्यावसायिक समुदाय: सामाजिक समावेशन और समावेशी विकास की चुनौतियाँ’ विषय पर एक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में वक्ताओं ने पारंपरिक आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि मशीनीकरण, कारखाने में बने उत्पाद और अनियमित आय के कारण ये समुदाय गंभीर आर्थिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत में पारंपरिक व्यवसाय सदियों से अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक विकास का अभिन्न अंग रहे हैं।
  • ये व्यवसाय अक्सर विशिष्ट समुदायों से जुड़े होते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित कौशल पर आधारित होते हैं।
  • आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण के बाद से, पारंपरिक व्यवसायों को बदलते बाजार की स्थितियों, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीकी प्रगति के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
  • अध्ययनों से पता चलता है कि लगभग 30% कारीगरों को बाजार तक अपर्याप्त पहुंच और बिचौलियों पर निर्भरता के कारण अपने पारंपरिक व्यवसायों से बाहर धकेल दिया गया है, जिससे उनकी आय कम हो गई है।
  • सामाजिक भेदभाव भी कई पारंपरिक व्यावसायिक समुदायों को प्रभावित करता रहता है, जिससे उनके लिए आर्थिक अवसर सीमित हो जाते हैं।
  • सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी उपाय किए जाने के बावजूद, पारंपरिक व्यावसायिक समुदायों को अभी भी गंभीर आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

पारंपरिक व्यवसाय और उनका महत्व

  • पारंपरिक व्यवसाय उन आजीविकाओं को संदर्भित करते हैं जो ऐतिहासिक रूप से विशिष्ट समुदायों द्वारा अपनाई जाती रही हैं और अक्सर स्थानीय संसाधनों, हस्तकला तथा पारंपरिक ज्ञान पर आधारित होती हैं।
  • इनमें हस्तशिल्प, बुनाई, मिट्टी के बर्तन बनाना, धातु का काम, कृषि-आधारित छोटे उद्योग और विभिन्न सेवाएँ शामिल हो सकती हैं।
  • ये व्यवसाय न केवल आर्थिक गतिविधियों का स्रोत हैं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक परंपराओं के संरक्षक भी हैं।
  • पारंपरिक व्यवसाय ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं, जिससे वे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण बन जाते हैं।
  • ये समुदाय अक्सर सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं, और इन व्यवसायों का संरक्षण सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
  • नीतिगत समर्थन के माध्यम से इन व्यवसायों को बढ़ावा देने से ग्रामीण आय में वृद्धि, पलायन में कमी और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • इन व्यवसायों को आधुनिक बाजार से जोड़ने, कौशल उन्नयन और वित्तीय सहायता प्रदान करने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पारंपरिक व्यवसाय · नीतिगत समर्थन · आर्थिक तनाव · सामाजिक समावेशन · समावेशी विकास · बाजार पहुंच · मध्यस्थों पर निर्भरता · सामाजिक भेदभाव · मैकेनाइजेशन · हस्तशिल्प · स्वरोजगार · कौशल विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. पारंपरिक व्यवसायों में लगे समुदाय भारत की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
2. मैकेनाइजेशन और कारखानों में बने उत्पादों ने पारंपरिक व्यवसायों को आर्थिक तनाव में डाल दिया है।
3. अपर्याप्त बाजार पहुंच और मध्यस्थों पर अत्यधिक निर्भरता पारंपरिक कारीगरों की आय को कम करती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1, 2 और 3 तीनों सही हैं। लेख में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पारंपरिक व्यवसाय भारत की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक विकास में योगदान करते हैं, मैकेनाइजेशन और कारखानों में बने उत्पादों ने उन्हें आर्थिक तनाव में डाल दिया है, और अपर्याप्त बाजार पहुंच तथा मध्यस्थों पर निर्भरता कारीगरों की आय को कम करती है।

Q2. पारंपरिक व्यवसायों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कारक उनके समक्ष प्रमुख चुनौती/चुनौतियाँ प्रस्तुत करता/करते है/हैं?
1. मैकेनाइजेशन का बढ़ता उपयोग
2. बाजार तक सीमित पहुंच
3. सामाजिक भेदभाव
4. अनियमित आय
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — लेख में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि मैकेनाइजेशन, कारखानों में बने उत्पाद, अनियमित आय, अपर्याप्त बाजार पहुंच और सामाजिक भेदभाव पारंपरिक व्यवसायों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ हैं। इसलिए, सभी चार कारक सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में पारंपरिक व्यवसायों के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। इन व्यवसायों को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा क्या नीतिगत उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पारंपरिक व्यवसायों का महत्व और भारतीय अर्थव्यवस्था, संस्कृति तथा सामाजिक विकास में उनका योगदान।
2. **प्रमुख चुनौतियाँ:**
* **आर्थिक चुनौतियाँ:** मैकेनाइजेशन, कारखानों में बने उत्पादों से प्रतिस्पर्धा, अनियमित आय, अपर्याप्त बाजार पहुंच, मध्यस्थों पर अत्यधिक निर्भरता, वित्तीय संसाधनों की कमी।
* **सामाजिक चुनौतियाँ:** सामाजिक भेदभाव, कौशल के हस्तांतरण में कमी, युवा पीढ़ी का इन व्यवसायों से विमुख होना।
* **नीतिगत और संस्थागत चुनौतियाँ:** अपर्याप्त नीतिगत समर्थन, जागरूकता की कमी।
3. **संरक्षण और संवर्धन हेतु नीतिगत उपाय:**
* **कौशल विकास और प्रशिक्षण:** पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीकों के साथ एकीकृत करना, नई पीढ़ी को प्रशिक्षण।
* **बाजार पहुंच में सुधार:** ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ना, मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन, प्रत्यक्ष विपणन चैनलों को बढ़ावा देना।
* **वित्तीय सहायता:** आसान ऋण सुविधाएँ, सब्सिडी, सूक्ष्म-वित्तपोषण।
* **सामाजिक सुरक्षा:** कारीगरों और श्रमिकों के लिए बीमा, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाएँ।
* **नीतिगत और कानूनी ढाँचा:** पारंपरिक व्यवसायों को मान्यता और संरक्षण देने वाली नीतियाँ, बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण।
* **जागरूकता और प्रचार:** पारंपरिक उत्पादों के सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
* **सरकारी योजनाएँ:** जैसे प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना (PM-VIKAS), हस्तशिल्प संवर्धन योजनाएँ।
4. **निष्कर्ष:** समावेशी विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए पारंपरिक व्यवसायों का महत्व तथा सतत नीतिगत समर्थन की आवश्यकता।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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