30 Jul पीएमकेएसवाई के अंतर्गत सिंचाई क्षमता में हुई वृद्धि: जानिए नवीनतम प्रगति
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर III — कृषि, सिंचाई, जल संसाधन | GS पेपर II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
- Prelims: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), हर खेत को पानी (HKKP), कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (CAD&WM), सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation), पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC), वाटरशेड विकास घटक (WDC), जल शक्ति मंत्रालय
- Essay: भारत में जल सुरक्षा और कृषि उत्पादकता में सरकारी योजनाओं की भूमिका, सतत कृषि विकास के लिए सिंचाई प्रबंधन और जल संरक्षण का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) ‘हर खेत को पानी’ और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के लक्ष्य के साथ भारत में सिंचाई कवरेज का विस्तार करने और जल-उपयोग दक्षता में सुधार करने के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, जल शक्ति मंत्रालय के तहत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के विभिन्न घटकों के अंतर्गत हुई प्रगति पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है। इस विज्ञप्ति में योजना के प्रमुख घटकों जैसे त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), हर खेत को पानी (HKKP) और वाटरशेड विकास घटक (WDC) के तहत सिंचाई क्षमता के सृजन, कमान क्षेत्र के विकास और केंद्रीय सहायता के वितरण का विवरण प्रस्तुत किया गया है। यह रिपोर्ट योजना के कार्यान्वयन और कृषि क्षेत्र पर इसके सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में कृषि क्षेत्र मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे फसल उत्पादन में अनिश्चितता बनी रहती है।
- सिंचाई कवरेज का विस्तार और जल-उपयोग दक्षता में सुधार कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय स्थिर करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- वर्ष 2015-16 में शुरू की गई PMKSY का उद्देश्य ‘हर खेत को पानी’ सुनिश्चित करना और जल-उपयोग दक्षता में सुधार करना है।
- यह योजना विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के प्रयासों को एकीकृत करती है ताकि सिंचाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान किया जा सके।
- योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है ताकि कम पानी में अधिक फसल प्राप्त की जा सके।
- वाटरशेड विकास के माध्यम से वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) क्या है?
- PMKSY भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित एक अम्ब्रेला योजना है, जिसे वर्ष 2015-16 में शुरू किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य ‘हर खेत को पानी’ सुनिश्चित करना और जल-उपयोग दक्षता में सुधार करना है।
- इसके तीन प्रमुख घटक हैं: (i) त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), (ii) हर खेत को पानी (HKKP), और (iii) वाटरशेड विकास घटक (WDC)।
- AIBP का कार्यान्वयन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जिसका लक्ष्य बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना है।
- HKKP के तीन उप-घटक हैं: कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (CAD&WM), सतही लघु सिंचाई (SMI), और जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरूद्धार (RRR), जिनका कार्यान्वयन भी जल शक्ति मंत्रालय करता है।
- वाटरशेड विकास घटक (WDC) का कार्यान्वयन भूमि संसाधन विभाग (DoLR) द्वारा किया जाता है, जो वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और मृदा संरक्षण पर केंद्रित है।
- ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) योजना, जो पहले PMKSY का हिस्सा थी और अब प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत कार्यान्वित की जा रही है, सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देती है।
- योजना का लक्ष्य सिंचाई कवरेज का विस्तार करना, ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ को सुदृढ़ करना, सूक्ष्म-सिंचाई को बढ़ावा देना और खेत पर जल प्रबंधन में सुधार करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अम्ब्रेला योजना | यह सुनिश्चित करती है कि सिंचाई से संबंधित विभिन्न पहलुओं को एक एकीकृत दृष्टिकोण के तहत कवर किया जाए, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। |
| बहु-घटक दृष्टिकोण | त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), हर खेत को पानी (HKKP) और वाटरशेड विकास घटक (WDC) जैसे घटक विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, जैसे कि बड़ी परियोजनाओं को पूरा करना, खेत स्तर पर पानी पहुंचाना और वर्षा जल संचयन। |
| सूक्ष्म सिंचाई पर जोर | ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) योजना के माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देना जल उपयोग दक्षता में सुधार करता है और फसल उत्पादकता बढ़ाता है। |
| कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (CAD&WM) | सिंचाई परियोजनाओं के तहत विकसित क्षेत्रों में जल वितरण प्रणाली को अनुकूलित करता है, जिससे पानी का समान और कुशल उपयोग सुनिश्चित होता है। |
| जल निकायों का पुनरुद्धार | पुरानी और निष्क्रिय जल संरचनाओं की मरम्मत और नवीनीकरण से उनकी भंडारण क्षमता और सिंचाई क्षमता बहाल होती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सिंचाई कवरेज में वृद्धि से कृषि उत्पादकता बढ़ती है, जिससे किसानों की आय में सुधार होता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
- जल उपयोग दक्षता में सुधार से कृषि लागत कम होती है और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलता है।
- सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने से कम पानी में अधिक उपज प्राप्त होती है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ होता है।
सामाजिक महत्व
- सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता से कृषि में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है, क्योंकि बेहतर सिंचाई से फसल उत्पादन स्थिर होता है और खाद्य आपूर्ति में वृद्धि होती है।
- किसानों के जीवन स्तर में सुधार होता है, जिससे ग्रामीण गरीबी कम होती है और सामाजिक समानता बढ़ती है।
पर्यावरणीय महत्व
- जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है, क्योंकि सूक्ष्म सिंचाई और कुशल जल प्रबंधन तकनीकों से पानी की बर्बादी कम होती है।
- भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ अत्यधिक दोहन होता है।
- वाटरशेड विकास गतिविधियों से मिट्टी का कटाव कम होता है और जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।
शासनिक महत्व
- यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को बढ़ावा देती है, जिससे सिंचाई परियोजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाकर, यह योजना एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती है जो जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत करता है।
चुनौतियाँ
1. परियोजना कार्यान्वयन में देरी
- भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और अंतर-राज्यीय जल विवादों के कारण परियोजनाओं को पूरा करने में अक्सर देरी होती है।
- इससे परियोजना लागत में वृद्धि होती है और किसानों को समय पर लाभ नहीं मिल पाता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास और उद्योग
2. जल उपयोग दक्षता
- पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों में पानी की बर्बादी अधिक होती है, और सूक्ष्म सिंचाई को अपनाने की दर अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची है।
- किसानों में आधुनिक सिंचाई तकनीकों के प्रति जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी है।
यूपीएससी लिंक: कृषि, जल संसाधन
3. रखरखाव और प्रबंधन
- सिंचाई अवसंरचना के उचित रखरखाव और प्रबंधन की कमी से उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
- जल उपयोगकर्ता संघों (Water User Associations) की भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा, स्थानीय स्वशासन
4. वित्तीय बाधाएँ
- परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और समय पर धन की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है, खासकर राज्य सरकारों के स्तर पर।
- केंद्रीय सहायता के वितरण और उपयोग में भी दक्षता की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति, वित्त आयोग
5. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- बदलते मौसम पैटर्न, अनियमित वर्षा और सूखे की बढ़ती घटनाओं से सिंचाई जल की उपलब्धता प्रभावित होती है।
- इससे जल संसाधन नियोजन और प्रबंधन में नई चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, आपदा प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अंतर-राज्यीय जल विवाद | राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा डालते हैं और समग्र जल प्रबंधन को प्रभावित करते हैं। |
| भूजल का अत्यधिक दोहन | सिंचाई के लिए भूजल पर बढ़ती निर्भरता कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट का कारण बन रही है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता पर खतरा है। |
| किसानों की जागरूकता का अभाव | आधुनिक सिंचाई तकनीकों और जल संरक्षण प्रथाओं के बारे में किसानों के बीच जागरूकता की कमी उनके व्यापक अपनाने में बाधा डालती है। |
| अधूरे कमांड क्षेत्र | कई सिंचाई परियोजनाओं में मुख्य नहरें तो बन जाती हैं, लेकिन खेत स्तर तक पानी पहुंचाने वाली वितरण प्रणालियाँ अधूरी रह जाती हैं, जिससे वास्तविक सिंचाई क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता। |
| तकनीकी और नवाचार का अभाव | सिंचाई प्रणालियों में आधुनिक प्रौद्योगिकियों (जैसे IoT, AI) का सीमित उपयोग जल प्रबंधन की दक्षता को कम करता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
- कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (CAD&WM)
- सतही लघु सिंचाई (SMI)
- जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरुद्धार (RRR)
- वाटरशेड विकास घटक (WDC)
- पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC)
- प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY)
आगे की राह
- परियोजना कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना।
- सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार करना।
- जल उपयोगकर्ता संघों (WUAs) को सशक्त बनाना और उन्हें सिंचाई प्रणालियों के रखरखाव और प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल करना।
- जल-उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों जैसे सेंसर-आधारित सिंचाई, रिमोट सेंसिंग और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करना।
- जल निकायों के पुनरुद्धार और वाटरशेड विकास गतिविधियों के लिए सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और कम पानी वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहन देना।
- अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना और सहकारी संघवाद को मजबूत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना · त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम · हर खेत को पानी · कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन · सतही लघु सिंचाई · जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरूद्धार · सूक्ष्म सिंचाई · पर ड्रॉप मोर क्रॉप · वाटरशेड विकास · जल-उपयोग दक्षता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदियों के जल संबंधी विवाद’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: “राज्य सूची में ‘जल’ का विषय”}
अवधारणा प्रवाह
सिंचाई सुविधाओं का अभाव → कृषि उत्पादकता में कमी → PMKSY का शुभारंभ → सिंचाई कवरेज का विस्तार → जल उपयोग दक्षता में वृद्धि → कृषि आय एवं खाद्य सुरक्षा में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) को वर्ष 2015-16 में शुरू किया गया था।
2. ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) योजना अब प्रधानमंत्री-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही है।
3. पीएमकेएसवाई का वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। पीएमकेएसवाई को 2015-16 में शुरू किया गया था और PDMC अब पीएम-आरकेवीवाई के तहत है। कथन 3 गलत है क्योंकि पीएमकेएसवाई का वाटरशेड विकास घटक भूमि संसाधन विभाग (DoLR) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, न कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा।
Q2. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा घटक जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा कार्यान्वित नहीं किया जाता है?
- त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी)
- हर खेत को पानी (एचकेकेपी)
- कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (सीएडी एंड डब्ल्यूएम)
- वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी)
उत्तर: वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) — वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) भूमि संसाधन विभाग (DoLR) द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। अन्य सभी घटक जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किए जाते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के प्रमुख घटकों और उनके उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए। साथ ही, भारत में कृषि उत्पादकता और जल संरक्षण पर इसके प्रभावों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पीएमकेएसवाई का संक्षिप्त परिचय, इसका शुभारंभ वर्ष (2015-16) और एक अम्ब्रेला योजना के रूप में इसकी प्रकृति।
2. **प्रमुख घटक और उनके उद्देश्य:**
* **त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी):** बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित।
* **हर खेत को पानी (एचकेकेपी):**
* **कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (सीएडी एंड डब्ल्यूएम):** सिंचाई क्षमता का उपयोग और जल प्रबंधन में सुधार।
* **सतही लघु सिंचाई (एसएमआई):** सतही जल स्रोतों से लघु सिंचाई योजनाओं का विकास।
* **जल निकायों की मरम्मत, नवीकरण और पुनरूद्धार (आरआरआर):** पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार।
* **वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी):** वर्षा जल संचयन, मृदा संरक्षण और भूजल पुनर्भरण।
* **पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पीडीएमसी):** सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देना।
3. **कृषि उत्पादकता पर प्रभाव:**
* सिंचाई कवरेज में वृद्धि (दिए गए डेटा का उपयोग – एआईबीपी, एचकेकेपी-एसएमआई, एचकेकेपी-आरआरआर, सीएडी एंड डब्ल्यूएम के तहत सृजित/विकसित क्षमता)।
* सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से फसल उत्पादकता में वृद्धि।
* फसल विविधीकरण और गहनता पर प्रभाव।
4. **जल संरक्षण पर प्रभाव:**
* जल-उपयोग दक्षता में वृद्धि।
* जल के आवागमन और उपयोग के दौरान होने वाले नुकसान में कमी।
* भूजल स्तर पर सकारात्मक प्रभाव (डब्ल्यूडीसी के माध्यम से)।
* आधुनिक कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (एम-सीएडीडब्ल्यूएम) पायलट योजना का उल्लेख।
5. **आलोचनात्मक मूल्यांकन/चुनौतियाँ:**
* परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी।
* अंतर-राज्यीय जल विवादों का प्रभाव।
* किसानों के बीच जागरूकता और भागीदारी की कमी।
* योजना के विभिन्न घटकों के बीच समन्वय की चुनौतियाँ।
* वित्तीय आवंटन और वास्तविक व्यय के बीच अंतर।
6. **निष्कर्ष:** योजना की समग्र सफलता और भविष्य की राह, जिसमें चुनौतियों का समाधान और सतत जल प्रबंधन पर जोर शामिल हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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