31 Jul पीएम आवास योजना-ग्रामीण: 3.11 करोड़ घर पूरे, 1.06 करोड़ शेष लक्ष्य
✎ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बेघर परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का घर उपलब्ध कराने और विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से उनके समग्र सशक्तिकरण का लक्ष्य रखती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे | GS Paper III — समावेशी विकास और इससे उत्पन्न होने वाले मुद्दे
- Prelims: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी), आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी), मनरेगा, जल जीवन मिशन (जेजेएम), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई), स्वयं सहायता समूह (एसएचजी)
- Essay: भारत में ग्रामीण विकास: चुनौतियाँ और समाधान, सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में सरकारी योजनाओं की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बेघर परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का घर उपलब्ध कराने और विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से उनके समग्र सशक्तिकरण का लक्ष्य रखती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत वर्ष 2025-26 के लिए जून 2026 तक 33.54 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं और कुल 35.54 लाख आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। योजना के तहत कुल 4.18 करोड़ आवासों का संचयी लक्ष्य आवंटित किया गया है, जिसमें से 3.92 करोड़ आवास स्वीकृत हुए हैं और 3.11 करोड़ आवास पूर्ण हो चुके हैं। ये आंकड़े योजना की प्रगति और शेष लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाते हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में ग्रामीण गरीबों के लिए आवास की आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से, इंदिरा आवास योजना (IAY) को पुनर्गठित करके 1 अप्रैल, 2016 को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) शुरू की गई थी।
- पीएमएवाई-जी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे और जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले सभी बेघर परिवारों और परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का घर उपलब्ध कराना है।
- लाभार्थियों का चयन सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के आंकड़ों का उपयोग करके किया जाता है, जिसमें ग्राम सभा द्वारा सत्यापन किया जाता है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
- यह योजना केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें मैदानी क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में लागत साझा की जाती है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 है।
- योजना में न केवल आवास निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है, बल्कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के साथ अभिसरण के माध्यम से लाभार्थियों को शौचालय, पेयजल, बिजली और एलपीजी कनेक्शन जैसी आवश्यक सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) क्या है?
- पीएमएवाई-जी ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) के तहत एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बेघर परिवारों और कच्चे या जीर्ण-शीर्ण घरों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का घर उपलब्ध कराना है।
- योजना के तहत मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पूर्वोत्तर राज्यों, दो पहाड़ी राज्यों (हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड) तथा जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख संघ राज्य क्षेत्रों में ₹1.30 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- आवास निर्माण के अतिरिक्त, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) के साथ अभिसरण के माध्यम से शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- मनरेगा (MGNREGA) के साथ अभिसरण के माध्यम से लाभार्थियों को उनके आवास के निर्माण के लिए अकुशल मजदूरी रोजगार भी प्रदान किया जाता है।
- जल जीवन मिशन (जेजेएम) और हर घर नल से जल (एचजीएनएसजे) जैसी योजनाओं के साथ अभिसरण के माध्यम से नल से पेयजल कनेक्शन प्रदान किए जाते हैं।
- लाभार्थियों को विद्युत मंत्रालय की योजनाओं के माध्यम से बिजली कनेक्शन और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत एलपीजी कनेक्शन भी प्रदान किए जाते हैं।
- योजना में लाभार्थी परिवारों की महिला सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में शामिल करके उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया जाता है।
- योजना के कार्यान्वयन में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, और केंद्र सरकार नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करती है तथा कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों को हल करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| वित्तीय सहायता | मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्यों में ₹1.30 लाख की इकाई सहायता, जिससे ग्रामीण गरीबों को आवास निर्माण में मदद मिलती है। |
| अभिसरण दृष्टिकोण | स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G), मनरेगा, जल जीवन मिशन (JJM), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) जैसी अन्य योजनाओं के साथ समन्वय, जिससे लाभार्थियों को समग्र लाभ मिलते हैं। |
| महिला सशक्तिकरण | लाभार्थी परिवारों की महिला सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ना, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है। |
| चरण-2 का विस्तार | मार्च 2029 तक अतिरिक्त 2 करोड़ आवासों को पूर्ण करने का लक्ष्य, जो ‘सभी के लिए आवास’ के दृष्टिकोण को मजबूत करता है। |
| नियमित निगरानी | मंत्रालय द्वारा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की प्रगति की नियमित समीक्षा और डैशबोर्ड पर योजना की निगरानी, जिससे कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण क्षेत्रों में बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी आवास सुविधा प्रदान करना, जिससे जीवन स्तर में सुधार होता है।
- शौचालय, पेयजल, बिजली और LPG कनेक्शन जैसी सुविधाओं के साथ आवास प्रदान करके समग्र स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों को बढ़ाना।
- महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उनके आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, जिससे लैंगिक समानता में योगदान मिलता है।
आर्थिक महत्व
- आवास निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, विशेषकर मनरेगा के साथ अभिसरण के माध्यम से अकुशल श्रमिकों को लाभ होता है।
- बेहतर आवास और सुविधाओं से ग्रामीण परिवारों की उत्पादकता और आय सृजन क्षमता में वृद्धि होती है।
- निर्माण सामग्री उद्योग और संबंधित क्षेत्रों को बढ़ावा मिलता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
शासन और नीतिगत महत्व
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का उदाहरण प्रस्तुत करना, जहाँ राज्य कार्यान्वयन में प्राथमिक भूमिका निभाते हैं।
- बहु-क्षेत्रीय अभिसरण दृष्टिकोण अपनाकर विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच तालमेल स्थापित करना, जिससे संसाधनों का अधिकतम उपयोग होता है।
- डैशबोर्ड और नियमित समीक्षा के माध्यम से योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना, जिससे सुशासन को बढ़ावा मिलता है।
चुनौतियाँ
1. लाभार्थियों की अनिच्छा और प्रवास
- कुछ लाभार्थियों द्वारा आवास निर्माण में अनिच्छा दिखाना।
- स्थायी प्रवास के कारण लाभार्थियों का उपलब्ध न होना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास
2. भूमि संबंधी मुद्दे
- भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा विलंब।
- मृतक लाभार्थियों का विवादित उत्तराधिकार, जिससे निर्माण प्रक्रिया रुक जाती है।
यूपीएससी लिंक: भूमि सुधार, सामाजिक मुद्दे
3. वित्तीय और प्रशासनिक बाधाएँ
- राज्य IFMIS से क्रेडिट पुष्टिकरण के अद्यतन में विलंब।
- समय-समय पर आम/विधानसभा/पंचायत चुनावों के कारण कार्यान्वयन में व्यवधान।
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय संघवाद, स्थानीय स्वशासन
4. सामग्री और श्रम की उपलब्धता
- भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता या उच्च लागत।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल और अकुशल श्रम की कमी।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| लक्ष्यों का अपूर्ण रहना | कुल आवंटित लक्ष्य 4.18 करोड़ आवासों के सापेक्ष 1.06 करोड़ आवासों का अभी भी अपूर्ण रहना, जो ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधा है। |
| राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन में असमानता | झारखंड जैसे कुछ राज्यों में स्वीकृत आवासों की तुलना में पूर्णता दर कम होना, जो क्षेत्रीय असमानताओं को दर्शाता है। |
| लाभार्थी-केंद्रित चुनौतियाँ | लाभार्थियों की अनिच्छा, प्रवास और उत्तराधिकार विवाद जैसे मुद्दे, जो योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को बाधित करते हैं। |
| संसाधन और समन्वय | भूमि आवंटन में विलंब और वित्तीय प्रणालियों में अद्यतन संबंधी समस्याएँ, जो अंतर-विभागीय समन्वय की कमी को दर्शाती हैं। |
| बाहरी कारक | चुनाव और भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता जैसे बाहरी कारक, जो योजना की प्रगति को धीमा करते हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G)
- स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G)
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)
- जल जीवन मिशन (JJM)
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)
आगे की राह
- राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ नियमित कार्यशालाओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों का त्वरित समाधान करना।
- भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन की प्रक्रिया में तेजी लाना और भूमि विवादों के निपटारे के लिए विशेष तंत्र स्थापित करना।
- वित्तीय प्रणालियों (जैसे IFMIS) के अद्यतन को सुव्यवस्थित करना और निधि जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाना।
- ग्रामीण मिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे कौशल विकास पहलों को बढ़ावा देना, ताकि कुशल श्रम की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
- भवन निर्माण सामग्री की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना।
- योजना की प्रगति की निगरानी के लिए डैशबोर्ड और प्रौद्योगिकी का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करना, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े।
- लाभार्थियों के साथ नियमित संवाद स्थापित करना और उनकी समस्याओं को समझने व उनका समाधान करने के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण · आवास का अधिकार · अभिसरण मॉडल · ग्रामीण विकास · सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण · कल्याणकारी योजनाएँ · लक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण · कार्यान्वयन चुनौतियाँ · बहु-मंत्रालयी समन्वय · स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण · मनरेगा · जल जीवन मिशन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन
- अनुच्छेद 47: पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाना तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करना राज्य का कर्तव्य
- अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
अवधारणा प्रवाह
ग्रामीण आवास की आवश्यकता → PMAY-G के तहत वित्तीय सहायता → अन्य योजनाओं के साथ अभिसरण → आवास निर्माण और सुविधाओं का प्रावधान → सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण → जीवन स्तर में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है।
2. मैदानी क्षेत्रों में लाभार्थी को ₹1.20 लाख और पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्यों में ₹1.30 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
3. इस योजना के तहत, शौचालय निर्माण के लिए कोई अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की जाती है, क्योंकि यह स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) का हिस्सा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सभी बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है।
कथन 2 सही है। मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पूर्वोत्तर राज्य, 2 पहाड़ी राज्यों (हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड) तथा जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख संघ राज्य क्षेत्रों में ₹1.30 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
कथन 3 गलत है। योजना के तहत प्रदान की जाने वाली इकाई सहायता के अतिरिक्त, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) के साथ अभिसरण के माध्यम से शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है।
Q2. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-से कारण विलंब के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं?
1. लाभार्थियों द्वारा अनिच्छा जताने के मामले
2. स्थायी प्रवास
3. मृतक लाभार्थियों का विवादित उत्तराधिकार
4. राज्य सरकारों द्वारा भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन में विलंब
5. भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3, 4 और 5
- केवल 1, 4 और 5
- 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: 1, 2, 3, 4 और 5 — दिए गए सभी कारण पीएमएवाई-जी के कार्यान्वयन में विलंब के लिए उत्तरदायी हैं। इनमें लाभार्थियों द्वारा अनिच्छा, स्थायी प्रवास, विवादित उत्तराधिकार, भूमि आवंटन में विलंब, राज्य IFMIS से क्रेडिट पुष्टिकरण में विलंब, चुनाव और भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता शामिल हैं।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सी योजनाएँ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के साथ अभिसरण (Convergence) मॉडल के तहत जुड़ी हुई हैं?
1. स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी)
2. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)
3. जल जीवन मिशन (जेजेएम)
4. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई)
सही युग्मों का चयन कीजिए:
- केवल एक युग्म
- केवल दो युग्म
- केवल तीन युग्म
- सभी चार युग्म
उत्तर: सभी चार युग्म — सभी चार योजनाएँ पीएमएवाई-जी के साथ अभिसरण मॉडल के तहत जुड़ी हुई हैं। एसबीएम-जी शौचालय निर्माण के लिए, मनरेगा अकुशल मजदूरी रोजगार के लिए, जेजेएम नल से पेयजल के लिए और पीएमयूवाई एलपीजी कनेक्शन के लिए अभिसरण में हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) ग्रामीण भारत में आवास के अधिकार को सुनिश्चित करने में किस हद तक सफल रही है? इसके कार्यान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: पीएमएवाई-जी का संक्षिप्त परिचय, इसके लक्ष्य और ग्रामीण आवास के अधिकार के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता।
2. सफलता का मूल्यांकन: योजना की उपलब्धियाँ, जैसे स्वीकृत और पूर्ण आवासों की संख्या (नवीनतम डेटा का उल्लेख करें: 3.92 करोड़ स्वीकृत, 3.11 करोड़ पूर्ण), अभिसरण मॉडल के माध्यम से प्रदान की गई अतिरिक्त सुविधाएँ (शौचालय, जल, बिजली, एलपीजी कनेक्शन, SHG से जुड़ाव) और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में इसका योगदान।
3. कार्यान्वयन चुनौतियाँ: विलंब के प्रमुख कारण, जैसे लाभार्थियों की अनिच्छा, स्थायी प्रवास, विवादित उत्तराधिकार, भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन में विलंब, क्रेडिट पुष्टिकरण में देरी, चुनाव और भवन निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता।
4. सरकार द्वारा उठाए गए कदम: लक्ष्यों का समयबद्ध आवंटन, पर्याप्त निधि जारी करना, नियमित समीक्षा, डैशबोर्ड पर निगरानी, कार्यशालाएँ, ग्रामीण मिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम और लंबित आवासों के निर्माण में तेजी लाने के प्रयास।
5. निष्कर्ष: योजना के महत्व को रेखांकित करते हुए, शेष लक्ष्यों को प्राप्त करने और समावेशी ग्रामीण विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments