पीएलआई योजनाओं से फार्मा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ी: UPSC के लिए महत्वपूर्ण अपडेट

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं ने भारत के फार्मास्युटिकल, सक्रिय औषधि अवयवों और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को म — diagram

पीएलआई योजनाओं से फार्मा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ी: UPSC के लिए महत्वपूर्ण अपडेट

PLI योजना विनिर्माण प्रवाहPLI योजनावित्तीय सहायतानिवेश आकर्षितफार्मा/एपीआई/उपकरणघरेलू विनिर्माणआपूर्ति श्रृंखलाआयात निर्भरताकमीआत्मनिर्भरताGDP/निर्यातयोगदानव्यापार घाटा कम
PLI योजना विनिर्माण प्रवाह

✎ PLI योजनाएँ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर, आयात निर्भरता को कम करके और उच्च मूल्य वाले उत्पादों में निवेश आकर्षित करके भारत को फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology)  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय
  • Prelims: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, सक्रिय औषधि अवयव (API), महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (KSM), दवा बनाने के काम आने वाली मध्यवर्ती सामग्री (DI), बल्क ड्रग्स के लिए PLI योजना, फार्मास्यूटिकल्स के लिए PLI योजना, चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI योजना, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका, भारत में नवाचार और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने में सरकारी नीतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: PLI योजनाएँ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर, आयात निर्भरता को कम करके और उच्च मूल्य वाले उत्पादों में निवेश आकर्षित करके भारत को फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने देश के फार्मास्युटिकल, सक्रिय औषधि अवयवों (API) और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण क्षेत्रों को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है। इन योजनाओं के तहत प्रदान की गई वित्तीय सहायता ने घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाया है, महत्वपूर्ण दवाओं के लिए आवश्यक API की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों को रोका है और चिकित्सा उपकरण उद्योग को बढ़ावा दिया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि हुई है।

पृष्ठभूमि

  • भारत विश्व में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा उत्पादक है और इसे ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में जाना जाता है।
  • हालांकि, महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (KSM), दवा बनाने के काम आने वाली मध्यवर्ती सामग्री (DI) और सक्रिय औषधि अवयवों (API) के लिए भारत की आयात पर निर्भरता अधिक रही है, विशेषकर चीन से।
  • कोविड-19 महामारी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की भेद्यता को उजागर किया, जिससे भारत में महत्वपूर्ण फार्मास्युटिकल उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हुई।
  • ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के तहत, सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात निर्भरता को कम करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में PLI योजनाओं की शुरुआत की।
  • फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि ये न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं, बल्कि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
  • इन योजनाओं का उद्देश्य उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों और उन्नत चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण में निवेश को आकर्षित करना और प्रौद्योगिकी अपनाने को प्रोत्साहित करना है।

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ क्या हैं?

  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल हैं जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात निर्भरता को कम करना है।
  • इन योजनाओं के तहत, पात्र कंपनियों को भारत में निर्मित उत्पादों की वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
  • फार्मास्युटिकल क्षेत्र में, तीन प्रमुख PLI योजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं: बल्क ड्रग्स के लिए PLI योजना, फार्मास्यूटिकल्स के लिए PLI योजना और चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए PLI योजना।
  • बल्क ड्रग्स के लिए PLI योजना (कुल वित्तीय परिव्यय ₹6,940 करोड़) का उद्देश्य 41 महत्वपूर्ण उत्पादों, विशेष रूप से API और अन्य आवश्यक फार्मास्युटिकल निर्माण ब्लॉक्स के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना है।
  • फार्मास्यूटिकल्स के लिए PLI योजना (कुल वित्तीय परिव्यय ₹15,000 करोड़) का लक्ष्य भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना, निवेश और उत्पादन में वृद्धि करना, तथा बायोफार्मास्यूटिकल्स, कॉम्प्लेक्स जेनेरिक, पेटेंट और ऑफ-पेटेंट दवाओं जैसे उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों की ओर बदलाव को प्रोत्साहित करना है।
  • चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए PLI योजना का उद्देश्य भारत में चिकित्सा उपकरण उद्योग को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
  • इन योजनाओं ने ग्रीनफील्ड विनिर्माण परियोजनाओं में बड़े निवेश को आकर्षित किया है, जिससे भारत की आपूर्ति-श्रृंखला लचीलेपन को मजबूती मिली है और रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
  • बल्क ड्रग्स PLI योजना के तहत, जून 2026 तक ₹5,210.74 करोड़ का निवेश किया गया है, और 28 API/KSM के निर्माण के लिए 39 परियोजनाएं चालू की गई हैं, जिससे पेनिसिलिन-जी और क्लैवुलैनिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों का घरेलू उत्पादन संभव हुआ है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन आयात पर निर्भरता कम करता है और आत्मनिर्भरता बढ़ाता है।
महत्वपूर्ण सक्रिय औषधि अवयवों (API) पर ध्यान दवाओं के उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करता है, जिससे आपूर्ति-श्रृंखला लचीली बनती है।
चिकित्सा उपकरण उद्योग का संवर्धन स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नवाचार और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देता है।
उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों पर जोर भारत को वैश्विक फार्मास्युटिकल मूल्य श्रृंखला में उच्च स्थान पर ले जाता है।
निवेश और रोजगार सृजन आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति देता है और कुशल कार्यबल के लिए अवसर पैदा करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान देता है।
  • निर्यात को बढ़ावा देता है और व्यापार घाटे को कम करने में मदद करता है।
  • रोजगार के अवसर सृजित करता है, विशेषकर फार्मा और मेडटेक क्षेत्रों में।

सामरिक महत्व

  • महत्वपूर्ण दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता कम करके राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है।
  • वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों के प्रति भारत की भेद्यता को कम करता है।
  • भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने और मजबूत करने में मदद करता है।

सामाजिक महत्व

  • उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करके सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
  • स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ और वहनीय बनाता है।
  • अनुसंधान और विकास (Research and Development) को बढ़ावा देकर नवाचार को प्रोत्साहित करता है।

चुनौतियाँ

1. अनुसंधान और विकास में निवेश

  • भारत में फार्मास्युटिकल आर एंड डी पर खर्च विकसित देशों की तुलना में कम है।
  • नए और अभिनव उत्पादों के विकास के लिए पर्याप्त निवेश की आवश्यकता है।

2. गुणवत्ता नियंत्रण और नियामक मानक

  • वैश्विक मानकों के अनुरूप सख्त गुणवत्ता नियंत्रण बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
  • नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और कुशल बनाने की आवश्यकता है।

3. कौशल विकास और मानव संसाधन

  • फार्मा और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण में विशेषज्ञता वाले कुशल कार्यबल की कमी।
  • उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता।

4. बुनियादी ढाँचा और लॉजिस्टिक्स

  • विनिर्माण इकाइयों के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे और कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की आवश्यकता।
  • विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में, आपूर्ति-श्रृंखला को मजबूत करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कच्चे माल की उपलब्धता कुछ महत्वपूर्ण सक्रिय औषधि अवयवों (API) के लिए अभी भी आयात पर निर्भरता।
प्रौद्योगिकी उन्नयन वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए निरंतर प्रौद्योगिकी उन्नयन की आवश्यकता।
पर्यावरण संबंधी चिंताएँ बल्क ड्रग उत्पादन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव और उनके प्रबंधन की चुनौती।
बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार को बढ़ावा देने और बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) की सुरक्षा के बीच संतुलन।
छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का एकीकरण छोटे खिलाड़ियों को पीएलआई योजनाओं का लाभ उठाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एकीकृत करने में सहायता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना
  • बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना
  • फार्मास्युटिकल्स के लिए पीएलआई योजना
  • चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना

आगे की राह

  • अनुसंधान और विकास (R&D) में सार्वजनिक और निजी निवेश को और बढ़ाना।
  • विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना।
  • फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण क्षेत्रों के लिए कुशल कार्यबल विकसित करने हेतु कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना।
  • नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखित करना।
  • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए निर्यात प्रोत्साहन रणनीतियों को लागू करना।
  • पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ग्रीन विनिर्माण प्रथाओं को बढ़ावा देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएँ (PLI Schemes) · फार्मास्युटिकल क्षेत्र · सक्रिय औषधि अवयव (API) · चिकित्सा उपकरण विनिर्माण · आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · आयात निर्भरता में कमी · घरेलू विनिर्माण · आर्थिक संवृद्धि · रोजगार सृजन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करना’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा पीएलआई योजनाओं की शुरुआत  →  फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण क्षेत्रों में निवेश में वृद्धि  →  घरेलू विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार  →  आयात निर्भरता में कमी और आत्मनिर्भरता में वृद्धि  →  आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल बड़े उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है, न कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को।
2. फार्मास्युटिकल्स के लिए PLI योजना बायोफार्मास्युटिकल्स और दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए विकसित दवाओं सहित उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों के विनिर्माण का समर्थन करती है।
3. बल्क ड्रग्स के लिए PLI योजना का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण सक्रिय औषधि अवयवों (APIs) के लिए भारत की आयात निर्भरता को कम करना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि फार्मास्युटिकल्स के लिए PLI योजना के तहत MSMEs सहित कुल 55 आवेदकों का चयन किया गया है। कथन 2 सही है क्योंकि यह योजना बायोफार्मास्युटिकल्स, कॉम्प्लेक्स जेनरिक और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं सहित उच्च मूल्य वाले उत्पादों का समर्थन करती है। कथन 3 सही है क्योंकि बल्क ड्रग्स के लिए PLI योजना का मुख्य उद्देश्य API के लिए आयात निर्भरता को कम करना और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का/के उद्देश्य है/हैं?
1. घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना।
2. आयात पर निर्भरता कम करना।
3. प्रौद्योगिकी अपनाने को प्रोत्साहित करना।
4. निर्यात को बढ़ावा देना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — PLI योजनाओं का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना, आयात निर्भरता को कम करना, प्रौद्योगिकी अपनाने को प्रोत्साहित करना और निर्यात को बढ़ावा देना है, जैसा कि फार्मास्युटिकल क्षेत्र में इन योजनाओं के तहत प्राप्त बिक्री और निर्यात के आंकड़ों से स्पष्ट है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ भारत के फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को कैसे मजबूत कर रही हैं? ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में इन योजनाओं के महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और उनके व्यापक उद्देश्यों का संक्षिप्त परिचय।
मुख्य भाग 1: PLI योजनाओं (जैसे बल्क ड्रग्स के लिए PLI, फार्मास्युटिकल्स के लिए PLI, चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI) ने फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को कैसे मजबूत किया है, इसका विस्तार से वर्णन करें। इसमें शामिल करें:
– घरेलू विनिर्माण क्षमताओं में वृद्धि (निवेश, उत्पादन)।
– महत्वपूर्ण सक्रिय औषधि अवयवों (APIs) में आत्मनिर्भरता।
– आयात निर्भरता में कमी (पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड आदि के उदाहरण)।
– उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों का उत्पादन।
– प्रौद्योगिकी अपनाने और नवाचार को प्रोत्साहन।
– रोजगार सृजन और निर्यात वृद्धि।
मुख्य भाग 2: ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में इन योजनाओं के महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण करें। इसमें शामिल करें:
– सकारात्मक प्रभाव: आर्थिक संवृद्धि, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता, आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन, रणनीतिक क्षेत्रों में सुरक्षा।
– आलोचनात्मक मूल्यांकन/चुनौतियाँ: क्या ये योजनाएँ सभी प्रकार के उद्योगों के लिए समान रूप से प्रभावी हैं? क्या छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को पर्याप्त लाभ मिल रहा है? क्या यह दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती है या केवल अल्पकालिक प्रोत्साहन है? क्या यह नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ लागत-दक्षता बनाए रख सकती है?
निष्कर्ष: भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए PLI योजनाओं के समग्र महत्व और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में उनकी भूमिका का सारांश, भविष्य की संभावनाओं और सुधार के क्षेत्रों पर संक्षिप्त टिप्पणी के साथ।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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