06 Aug महा जल मिशन: जल संकट समाधान हेतु अनुसंधान एवं नवाचार की शुरुआत
✎ MAHA जल कार्यक्रम, ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों के समाधान हेतु मिशन-उन्मुख एवं समाधान-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देना है, जिसमें औद्योगिक साझेदारियों और बहुविषयक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और आपदा प्रबंधन | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper II — शासन और सामाजिक न्याय
- Prelims: नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF), ANRF अधिनियम, 2023, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज़ (MAHA), MAHA जल कार्यक्रम, जल शक्ति मंत्रालय, WIN पोर्टल, जल शक्ति हैकाथॉन-2025
- Essay: भारत में जल सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान, सतत विकास के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: MAHA जल कार्यक्रम, ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों के समाधान हेतु मिशन-उन्मुख एवं समाधान-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देना है, जिसमें औद्योगिक साझेदारियों और बहुविषयक दृष्टिकोण पर विशेष बल दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में ‘MAHA जल कार्यक्रम’ के कार्यान्वयन के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) और जल शक्ति मंत्रालय की संयुक्त पहल ‘MAHA जल कार्यक्रम’ के उद्देश्यों, प्रमुख विषयों और कार्यान्वयन रणनीति पर प्रकाश डाला, जिसका लक्ष्य जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में जल संसाधनों का सतत प्रबंधन (Sustainable Management) एक गंभीर चुनौती है, जिसमें पेयजल की उपलब्धता, जल गुणवत्ता, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना शामिल है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) 2020 ने अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बनाने की सिफारिश की थी।
- इसी सिफारिश के आधार पर, ANRF अधिनियम, 2023 के तहत नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना की गई, जो प्राकृतिक विज्ञानों, मानविकी और सामाजिक विज्ञानों के वैज्ञानिक व तकनीकी इंटरफेस में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है।
- ANRF के अंतर्गत ‘मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज़ (MAHA)’ कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य देश की प्रमुख आवश्यकताओं के अनुसार मिशन मोड में प्राथमिकता-केंद्रित, समाधान-आधारित शोध को बढ़ावा देना है।
- MAHA जल कार्यक्रम, ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसे 01 जून 2026 को शुरू किया गया था, ताकि जल क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
- इस कार्यक्रम में औद्योगिक साझेदारियों सहित बहुविषयक (Multidisciplinary), बहुसंस्थागत (Multi-institutional) और बहु-अन्वेषक (Multi-investigator) परियोजनाओं पर जोर दिया गया है।
MAHA जल कार्यक्रम क्या है?
- MAHA जल कार्यक्रम नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों के समाधान हेतु मिशन-उन्मुख एवं समाधान-आधारित अनुसंधान का समर्थन करना है।
- यह कार्यक्रम ANRF के व्यापक ‘मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज़ (MAHA)’ के तहत आता है, जो देश की प्रमुख आवश्यकताओं के अनुसार विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है।
- कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य प्राथमिकता-केंद्रित, समाधान-आधारित शोध को बढ़ावा देना है, जिसमें औद्योगिक साझेदारियों सहित बहुविषयक, बहुसंस्थागत और बहु-अन्वेषक परियोजनाएँ शामिल हैं।
- इसके पाँच प्रमुख विषय हैं: जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन; पेयजल; जल गुणवत्ता; मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य; जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी; तथा जलवायु रिजिलियंस (Resilience) और अनुकूलन (Adaptation)।
- प्रस्ताव कंसोर्टियम मोड (Consortium Mode) में आमंत्रित किए जाते हैं, जिसमें अकादमिक संस्थानों/प्रयोगशालाओं, अनुसंधान संगठनों, DSIR-SIRO में पंजीकृत अनुसंधान संगठनों और धारा 8 की पात्र कंपनियों के साथ-साथ कम से कम एक स्टार्ट-अप/MSME/इंडस्ट्री पार्टनर की भागीदारी अनिवार्य है, जो कुल परियोजना लागत का 10% नकद योगदान देगा।
- स्टार्ट-अप/MSME की भागीदारी को सुगम बनाने और जल से जुड़ी नई तकनीकों के विकास और लागू करने की गति बढ़ाने के लिए ‘WIN पोर्टल’ (Water Innovation Network) की शुरुआत की गई है।
- जल क्षेत्र की मुख्य चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक, बड़े पैमाने पर लागू की जा सकने वाली और फील्ड-रेडी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘जल शक्ति हैकाथॉन-2025’ का भी आयोजन किया गया है।
- अनुसंधान एवं विकास संबंधी परिणामों को राज्यों, संघ राज्य क्षेत्रों, सहयोगी मंत्रालयों और परियोजना का कार्यान्वयन करने वाली एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है ताकि उन्हें अपनाया और कार्यान्वित किया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सांविधिक निकाय | एएनआरएफ अधिनियम, 2023 के तहत स्थापित, अनुसंधान को कानूनी और संस्थागत समर्थन प्रदान करता है। |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की सिफारिशें | अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करता है। |
| मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज़ (MAHA) | देश की प्रमुख आवश्यकताओं के अनुसार प्राथमिकता-केंद्रित, समाधान-आधारित शोध को बढ़ावा देता है। |
| MAHA जल कार्यक्रम | जल शक्ति मंत्रालय के साथ संयुक्त पहल, जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों के समाधान हेतु अनुसंधान का समर्थन करता है। |
| बहुविषयक, बहुसंस्थागत, बहु-अन्वेषक परियोजना | जटिल जल चुनौतियों के लिए व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है। |
| औद्योगिक साझेदारियाँ और स्टार्ट-अप/MSME भागीदारी | अनुसंधान को व्यावसायीकरण और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन से जोड़ता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- जल गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार से सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन स्तर में वृद्धि होगी।
- पेयजल की चुनौतियों का समाधान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा।
- जलवायु परिवर्तन के प्रति जल क्षेत्र की सुदृढ़ता बढ़ाने से समुदायों की भेद्यता कम होगी।
आर्थिक महत्व
- जल उपयोग दक्षता और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और आर्थिक लागत कम होगी।
- स्टार्ट-अप और MSME की भागीदारी से जल क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार सृजन होगा।
- जल-संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास और कार्यान्वयन से औद्योगिक उत्पादकता और कृषि दक्षता में सुधार होगा।
पर्यावरणिक महत्व
- जल संसाधनों के आकलन और सतत प्रबंधन से पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य पर जल प्रदूषण के प्रभावों को कम करने के लिए समाधान प्रदान करेगा।
- जलवायु सुदृढ़ता और अनुकूलन रणनीतियों के माध्यम से जल पारिस्थितिकी प्रणालियों की रक्षा की जाएगी।
शासनिक महत्व
- एएनआरएफ और जल शक्ति मंत्रालय के बीच सहयोग से विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा।
- राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य हितधारकों के साथ अनुसंधान परिणामों को साझा करने से नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद मिलेगी।
- मिशन-मोड दृष्टिकोण से जल क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करने में सरकारी प्रयासों को गति मिलेगी।
चुनौतियाँ
1. अनुसंधान से कार्यान्वयन तक का अंतराल
- विकसित प्रौद्योगिकियों और समाधानों को प्रयोगशाला से जमीनी स्तर पर लागू करने में चुनौतियाँ।
- हितधारकों, विशेषकर राज्यों और स्थानीय निकायों द्वारा नई तकनीकों को अपनाने में प्रतिरोध या क्षमता की कमी।
यूपीएससी लिंक: शासन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
2. वित्तपोषण और सततता
- अनुसंधान परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तपोषण सुनिश्चित करना।
- औद्योगिक साझेदारों और स्टार्ट-अप से अपेक्षित 10% नकद योगदान जुटाने में संभावित कठिनाइयाँ।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
3. डेटा प्रबंधन और साझाकरण
- विभिन्न संस्थानों और क्षेत्रों से जल-संबंधित डेटा का एकीकरण और मानकीकरण।
- अनुसंधान परिणामों और डेटा को प्रभावी ढंग से हितधारकों के साथ साझा करने के लिए मजबूत तंत्र की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शासन
4. बहु-हितधारक समन्वय
- बहुविषयक, बहुसंस्थागत और बहु-अन्वेषक परियोजनाओं में प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।
- विभिन्न सरकारी निकायों, अकादमिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच तालमेल स्थापित करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
5. मानव संसाधन और क्षमता निर्माण
- जल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता।
- नई प्रौद्योगिकियों को समझने और लागू करने के लिए हितधारकों की क्षमता का निर्माण।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन | अत्यधिक दोहन, अपर्याप्त डेटा और जलवायु परिवर्तन के कारण संसाधनों पर दबाव। |
| पेयजल की उपलब्धता | ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल तक पहुंच सुनिश्चित करना। |
| जल गुणवत्ता | औद्योगिक, कृषि और घरेलू प्रदूषण के कारण जल निकायों का दूषित होना। |
| मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य | दूषित जल के कारण होने वाली बीमारियाँ और पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव। |
| जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी | जल के अक्षम उपयोग और अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण की कमी। |
| जलवायु सुदृढ़ता और अनुकूलन | जलवायु परिवर्तन के कारण जल चक्र में अनिश्चितताएँ और चरम मौसमी घटनाएँ। |
आगे की राह
- अनुसंधान परिणामों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए एक मजबूत ‘अनुसंधान-से-कार्यान्वयन’ तंत्र विकसित करना।
- जल क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप और MSME को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- विभिन्न सरकारी मंत्रालयों, अकादमिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग को मजबूत करना।
- जल-संबंधित डेटा के एकीकरण, मानकीकरण और साझाकरण के लिए एक राष्ट्रीय मंच स्थापित करना।
- जल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए कुशल मानव संसाधन विकसित करने हेतु क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
- जल गुणवत्ता निगरानी और प्रबंधन के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और सेंसर का उपयोग बढ़ाना।
- जल संरक्षण और पुनर्चक्रण के महत्व के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) · महा जल कार्यक्रम · जल शक्ति मंत्रालय · मिशन मोड अनुसंधान · जल संसाधन प्रबंधन · सतत विकास · औद्योगिक साझेदारी · स्टार्ट-अप/MSME · जल गुणवत्ता · जलवायु अनुकूलन · WIN पोर्टल · जल शक्ति हैकाथॉन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदी विवादों का न्यायनिर्णयन’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची में जल’}
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशें → एएनआरएफ अधिनियम, 2023 के तहत एएनआरएफ की स्थापना → MAHA कार्यक्रम के तहत MAHA जल कार्यक्रम की शुरुआत → जल शक्ति मंत्रालय के साथ संयुक्त पहल → जल क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान हेतु अनुसंधान और नवाचार → WIN पोर्टल और जल शक्ति हैकाथॉन-2025 का आयोजन → अनुसंधान परिणामों का हितधारकों के साथ साझाकरण और कार्यान्वयन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ANRF की स्थापना ANRF अधिनियम, 2023 के अंतर्गत की गई है।
2. यह केवल प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देता है।
3. महा जल कार्यक्रम ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ANRF की स्थापना ANRF अधिनियम, 2023 के अंतर्गत की गई है। कथन 2 गलत है क्योंकि ANRF प्राकृतिक विज्ञान के साथ-साथ मानविकी व सामाजिक विज्ञान के वैज्ञानिक व तकनीकी इंटरफेस के क्षेत्र में भी अनुसंधान को बढ़ावा देता है। कथन 3 सही है क्योंकि महा जल कार्यक्रम ANRF तथा जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से महा जल कार्यक्रम का/के प्रमुख विषय है/हैं?
1. जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन
2. पेयजल और जल गुणवत्ता
3. मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य
4. जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी
5. जलवायु रिजिलियंस और अनुकूलन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 4 और 5
- 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: 1, 2, 3, 4 और 5 — महा जल कार्यक्रम के पाँच प्रमुख विषय हैं: जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन; पेयजल; जल गुणवत्ता; मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य; जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी; तथा जलवायु रिजिलियंस और अनुकूलन। अतः सभी विकल्प सही हैं।
Q3. अभिकथन (A): महा जल कार्यक्रम में औद्योगिक साझेदारियों सहित बहुविषयक, बहुसंस्थागत तथा बहु-अन्वेषक परियोजनाएँ शामिल हैं।
कारण (R): इसका उद्देश्य स्टार्ट-अप/MSME की भागीदारी को सुगम बनाना और जल से जुड़ी नई तकनीकों के विकास और लागू करने की गति बढ़ाना है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि महा जल कार्यक्रम एक बहुविषयक, बहुसंस्थागत और बहु-अन्वेषक परियोजना है जिसमें औद्योगिक साझेदारियाँ शामिल हैं। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन की सही व्याख्या करता है, क्योंकि औद्योगिक साझेदारियों और कंसोर्टियम मोड का उद्देश्य स्टार्ट-अप/MSME की भागीदारी को बढ़ावा देना और नई तकनीकों को विकसित करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के ‘महा जल कार्यक्रम’ के प्रमुख उद्देश्यों और कार्यप्रणाली की चर्चा कीजिए। जल क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने में यह कार्यक्रम कितना प्रभावी सिद्ध हो सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और ANRF अधिनियम, 2023 का संक्षिप्त परिचय। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के तहत इसकी स्थापना का उल्लेख।
2. **महा जल कार्यक्रम के उद्देश्य:**
* ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की संयुक्त पहल।
* जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों के समाधान हेतु मिशन-उन्मुख एवं समाधान-आधारित अनुसंधान का समर्थन।
* देश की प्रमुख आवश्यकताओं के अनुसार विशेष क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना।
3. **महा जल कार्यक्रम की कार्यप्रणाली:**
* पाँच प्रमुख विषय: जल संसाधन का आकलन और सतत प्रबंधन; पेयजल; जल गुणवत्ता; मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य; जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी; तथा जलवायु रिजिलियंस और अनुकूलन।
* कंसोर्टियम मोड में प्रस्ताव आमंत्रण (प्रधान अन्वेषक, अकादमिक संस्थान, अनुसंधान संगठन, धारा 8 कंपनियाँ)।
* औद्योगिक साझेदारियों की अनिवार्यता (कम से कम एक स्टार्ट-अप/MSME/इंडस्ट्री पार्टनर, कुल परियोजना लागत का 10% नकद योगदान)।
* WIN पोर्टल और जल शक्ति हैकाथॉन-2025 जैसी पहलें।
4. **प्रभावशीलता और महत्व:**
* मिशन मोड में अनुसंधान से लक्षित समाधानों का विकास।
* बहुविषयक और बहु-संस्थागत दृष्टिकोण से व्यापक समाधान।
* स्टार्ट-अप/MSME और औद्योगिक भागीदारी से नवाचार और व्यावसायीकरण को बढ़ावा।
* फील्ड-रेडी प्रौद्योगिकियों के विकास पर जोर।
* राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों जैसे हितधारकों के साथ अनुसंधान परिणामों को साझा करना।
* जल सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान।
5. **निष्कर्ष:** भारत के जल क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने और एक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण में महा जल कार्यक्रम की भूमिका का सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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