09 Aug महिला आरक्षण विधेयक: शिअद के समर्थन से BJP को मिला बड़ा राजनीतिक मौका, जानिए पूरा मामला

✎ महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करता है, जो अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान, संसद और राज्य विधायिका, केंद्र-राज्य संबंध, महिलाओं से संबंधित मुद्दे | GS Paper I — भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका
- Prelims: महिला आरक्षण विधेयक, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, परिसीमन आयोग, अनुच्छेद 330A, अनुच्छेद 332A, अनुच्छेद 334A, संसदीय सीटें, समान प्रतिनिधित्व
- Essay: भारत में महिला सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान, लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व का महत्व और समावेशी शासन
त्वरित पुनरावृत्ति: महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करता है, जो अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने केंद्र सरकार से महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) को तत्काल लागू करने की मांग की है। यह निर्णय अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद लिया गया, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को तुरंत आगे बढ़ाने की वकालत की।
पृष्ठभूमि
- महिला आरक्षण विधेयक, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से भी जाना जाता है, सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था।
- यह विधेयक लोकसभा (Lok Sabha) और राज्य विधानसभाओं (State Legislative Assemblies) में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है।
- इस आरक्षण में अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) की महिलाओं के लिए उप-आरक्षण भी शामिल है।
- यह आरक्षण जनगणना (Census) के बाद होने वाले परिसीमन के प्रभावी होने के बाद लागू होगा।
- परिसीमन का अर्थ है किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय के लिए चुनाव के उद्देश्य से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करना।
- भारत में परिसीमन का कार्य एक उच्च-शक्ति निकाय, परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जिसके आदेशों को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) क्या है?
- यह अधिनियम भारतीय संविधान में तीन नए अनुच्छेद जोड़ता है: अनुच्छेद 330A, 332A और 334A।
- अनुच्छेद 330A लोकसभा में महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 332A प्रत्येक राज्य की विधानसभा में महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 334A यह स्पष्ट करता है कि आरक्षण पहली जनगणना के बाद प्रभावी होगा जो अधिनियम के लागू होने के बाद प्रकाशित होगी, और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही यह लागू होगा।
- यह आरक्षण 15 वर्षों की अवधि के लिए होगा, जिसे संसद कानून द्वारा बढ़ा सकती है।
- आरक्षित सीटें रोटेशन (Rotation) द्वारा आवंटित की जाएंगी, जो संसद द्वारा बनाए गए कानून द्वारा निर्धारित की जाएंगी।
- इस विधेयक का उद्देश्य राजनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना और उन्हें अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| महिला आरक्षण विधेयक | महिलाओं को विधायी निकायों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करना, जिससे लैंगिक समानता और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। |
| परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया | जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन, जिससे सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके और किसी के साथ अन्याय न हो। |
| संसदीय सीटों में 50% वृद्धि | राज्यों की विधानसभाओं और संसद में प्रतिनिधित्व को बढ़ाना, जिससे अधिक लोगों को अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से आवाज उठाने का अवसर मिले। |
| तत्काल कार्यान्वयन की मांग | महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन प्रक्रिया को बिना किसी देरी के लागू करने पर जोर, ताकि इसके लाभ जल्द से जल्द मिल सकें। |
| शिरोमणि अकाली दल का समर्थन | एक प्रमुख क्षेत्रीय दल द्वारा इन विधेयकों का समर्थन, जो इनके व्यापक राजनीतिक स्वीकार्यता को दर्शाता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाएगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका मजबूत होगी।
- यह लैंगिक समानता (Gender Equality) के सिद्धांत को बढ़ावा देगा और समाज में महिलाओं की स्थिति को ऊपर उठाएगा।
राजनीतिक महत्व
- परिसीमन प्रक्रिया निर्वाचन क्षेत्रों का न्यायसंगत पुनर्गठन सुनिश्चित करेगी, जिससे ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को बल मिलेगा।
- संसदीय सीटों में वृद्धि से विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है, जिससे संघवाद (Federalism) की भावना मजबूत होगी।
शासनिक महत्व
- महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी से नीतियों और कानूनों में महिलाओं से संबंधित मुद्दों को बेहतर ढंग से संबोधित किया जा सकेगा।
- पारदर्शी परिसीमन प्रक्रिया से चुनावी प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी।
चुनौतियाँ
1. परिसीमन की निष्पक्षता
- परिसीमन प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना, जिससे कुछ राज्यों या क्षेत्रों को अनुचित लाभ या हानि हो सकती है।
- जनसंख्या वृद्धि के असमान पैटर्न के कारण विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व में संभावित असंतुलन।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
2. कार्यान्वयन में देरी
- महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधनों और अन्य प्रक्रियाओं में लगने वाला समय।
- परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा डेटा संग्रह और विश्लेषण की जटिलता।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: संवैधानिक संशोधन
3. सीटों की संख्या में वृद्धि का प्रभाव
- संसदीय सीटों की संख्या में 50% वृद्धि से संसद और विधानसभाओं के आकार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे प्रबंधन और कार्यप्रणाली पर दबाव बढ़ सकता है।
- बढ़ी हुई सीटों के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे और संसाधनों की व्यवस्था।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: संसद और राज्य विधानमंडल
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| महिला आरक्षण का कार्यान्वयन | यह विधेयक अभी तक कानून नहीं बना है और इसके कार्यान्वयन में कई प्रक्रियात्मक और राजनीतिक बाधाएँ आ सकती हैं। |
| परिसीमन की प्रक्रिया | परिसीमन एक संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसमें राज्यों के बीच सीटों के बँटवारे को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं, खासकर जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए। |
| राजनीतिक सर्वसम्मति | इन महत्वपूर्ण विधेयकों के सफल कार्यान्वयन के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सर्वसम्मति आवश्यक है, जो प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। |
| प्रतिनिधित्व का असंतुलन | यदि परिसीमन जनसंख्या वृद्धि के आधार पर होता है, तो दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। |
आगे की राह
- महिला आरक्षण विधेयक को जल्द से जल्द कानून बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति बनाई जाए।
- परिसीमन प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संचालित किया जाए, जिसमें सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाए।
- परिसीमन आयोग को पर्याप्त स्वायत्तता और संसाधन प्रदान किए जाएँ ताकि वह अपना कार्य प्रभावी ढंग से कर सके।
- जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के हितों की रक्षा के लिए एक उचित तंत्र विकसित किया जाए।
- संसदीय सीटों में वृद्धि के बाद संसद और विधानसभाओं के प्रभावी कामकाज के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे और प्रक्रियात्मक सुधार किए जाएँ।
- महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल विकास और नेतृत्व प्रशिक्षण जैसे अन्य उपायों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
महिला आरक्षण विधेयक · नारी शक्ति वंदन अधिनियम · परिसीमन · संवैधानिक संशोधन · स्थानीय निकायों में आरक्षण · समान प्रतिनिधित्व · संघवाद · राजनीतिक सशक्तिकरण · लिंग समानता · लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 82’, ‘note’: ‘प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन का प्रावधान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 170’, ‘note’: ‘राज्य विधानसभाओं के लिए परिसीमन का प्रावधान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 330A’, ‘note’: ‘लोकसभा में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण (प्रस्तावित)’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 332A’, ‘note’: ‘राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण (प्रस्तावित)’}
अवधारणा प्रवाह
महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन का प्रस्ताव → शिरोमणि अकाली दल सहित विभिन्न दलों का समर्थन → विधेयकों को कानून बनाने की प्रक्रिया → महिलाओं को विधायी निकायों में आरक्षण → जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन → लैंगिक समानता और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महिला आरक्षण विधेयक, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से भी जाना जाता है, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है।
2. यह आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी लागू होगा।
3. यह विधेयक तत्काल प्रभाव से लागू होता है, जिसके लिए किसी परिसीमन प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। कथन 2 भी सही है। यह आरक्षण SC और ST के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी लागू होगा। कथन 3 गलत है। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, यह आरक्षण अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होगा, तत्काल प्रभाव से नहीं।
Q2. महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में, परिसीमन (Delimitation) का क्या महत्व है?
- यह विधेयक के तत्काल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है।
- यह महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के निर्धारण और रोटेशन के लिए आवश्यक है।
- यह राज्यों को अपनी इच्छानुसार आरक्षण लागू करने की अनुमति देता है।
- यह केवल केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होता है।
उत्तर: यह महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के निर्धारण और रोटेशन के लिए आवश्यक है। — परिसीमन प्रक्रिया महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के निर्धारण और उनके रोटेशन (बारी-बारी से बदलने) के लिए महत्वपूर्ण है। विधेयक में यह प्रावधान है कि आरक्षण अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही प्रभावी होगा, ताकि सीटों का उचित और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ महिला आरक्षण विधेयक, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस विधेयक के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए और इसके क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों, विशेषकर परिसीमन और जनगणना की आवश्यकता के संदर्भ में, का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का संक्षिप्त परिचय और इसके महत्व पर प्रकाश।
2. **प्रमुख प्रावधान:**
* लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण।
* अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए उप-आरक्षण।
* आरक्षित सीटों का रोटेशन (बारी-बारी से बदलना) का प्रावधान।
* आरक्षण की अवधि 15 वर्ष, जिसे संसद द्वारा बढ़ाया जा सकता है।
3. **क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियाँ:**
* **परिसीमन की आवश्यकता:** विधेयक के लागू होने के लिए अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन की अनिवार्यता।
* **जनगणना में देरी:** जनगणना प्रक्रिया में संभावित देरी और उसका विधेयक के क्रियान्वयन पर प्रभाव।
* **राजनीतिक इच्छाशक्ति:** विधेयक को लागू करने के लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति और सर्वसम्मति का महत्व।
* **सीटों के रोटेशन का मुद्दा:** आरक्षित सीटों के रोटेशन से उत्पन्न होने वाली संभावित राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियाँ।
* **संघीय ढाँचा:** परिसीमन प्रक्रिया में राज्यों की भूमिका और संघीय ढाँचे पर इसका संभावित प्रभाव।
4. **आलोचनात्मक परीक्षण:**
* तत्काल क्रियान्वयन न होने के कारण महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण में देरी।
* परिसीमन प्रक्रिया की जटिलताएँ और इसमें लगने वाला समय।
* विधेयक के लाभों और चुनौतियों का संतुलन।
5. **निष्कर्ष:** महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने में विधेयक की क्षमता को स्वीकार करते हुए, इसके समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदमों पर बल।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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