मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0: बच्चों में कुपोषण उन्मूलन हेतु एक पहल

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0: बच्चों में कुपोषण उन्मूलन हेतु एक पहल

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS पेपर II — सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; गरीबी और भूख से संबंधित विषय  |  GS पेपर III — अर्थव्यवस्था: योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय
  • Prelims: मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0, पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन, गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM), पूरक पोषण कार्यक्रम, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
  • Essay: भारत में कुपोषण की चुनौती और उसके समाधान में सरकारी योजनाओं की भूमिका, बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में सामुदायिक सहभागिता का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 एक एकीकृत केंद्र प्रायोजित मिशन है जिसका लक्ष्य पोषण ट्रैकर ऐप के साथ 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों में पोषण परिणामों में सुधार लाना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों में पोषण संबंधी परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) का शुभारंभ किया है। इस पहल में आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए योजना को एकीकृत किया गया है। मंत्रालय ने ‘पोषण ट्रैकर’ एप्लिकेशन को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपकरण के रूप में भी प्रस्तुत किया है, जो लाभार्थियों की निगरानी और ट्रैकिंग में सहायक है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कुपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है, विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों से पता चलता है कि बच्चों में बौनापन (stunting), दुर्बलता (wasting) और कम वजन (underweight) की व्यापकता अभी भी चिंताजनक स्तर पर है।
  • कुपोषण न केवल शारीरिक विकास को बाधित करता है, बल्कि संज्ञानात्मक विकास और सीखने की क्षमता को भी प्रभावित करता है, जिससे देश के मानव पूंजी सूचकांक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • सरकार ने पहले भी पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan) जैसी पहलें शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच अभिसरण सुनिश्चित करके पोषण परिणामों में सुधार लाना है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013) के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण (supplementary nutrition) प्रदान करने का प्रावधान है।
  • कोविड-19 महामारी ने पोषण सुरक्षा की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है, जिससे कमजोर वर्गों के लिए खाद्य सुरक्षा और पोषण तक पहुंच सुनिश्चित करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 क्या है?

  • यह एक केंद्र प्रायोजित मिशन है, जिसका उद्देश्य 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों (14-18 वर्ष, आकांक्षी जिलों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में) में पोषण संबंधी परिणामों में सुधार लाना है।
  • मिशन पोषण 2.0 आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए योजना को एकीकृत करता है, जिससे पोषण संबंधी हस्तक्षेपों को सुव्यवस्थित किया जा सके।
  • यह कुपोषण को कम करने और सामुदायिक सहभागिता, जागरूकता अभियान, व्यवहार परिवर्तन और समर्थन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्वास्थ्य, सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार के लिए एक नई रणनीति पर आधारित है।
  • मिशन मातृ पोषण, शिशु और छोटे बच्चों के पोषण संबंधी मानदंडों, गंभीर तीव्र कुपोषण (Severe Acute Malnutrition – SAM)/मध्यम तीव्र कुपोषण (Moderate Acute Malnutrition – MAM) के उपचार और आयुष पद्धतियों के माध्यम से स्वास्थ्य पर केंद्रित है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची-II में निहित पोषण मानदंडों के अनुसार पूरक पोषण प्रदान किया जाता है, जिसमें जनवरी 2023 में संशोधित आहार विविधता-आधारित मानदंड शामिल हैं।
  • गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों को घर ले जाने वाले राशन (Take-Home Ration – THR) के रूप में अतिरिक्त पूरक पोषण प्रदान किया जाता है।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण के प्रबंधन के लिए संयुक्त रूप से प्रोटोकॉल जारी किया है, जिसमें समुदाय-आधारित दृष्टिकोण शामिल है।
  • ‘पोषण ट्रैकर’ एप्लिकेशन एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपकरण है, जो आंगनवाड़ी केंद्रों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की निगरानी और ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है, जिसमें सेवा वितरण की अंतिम सिरे तक निगरानी के लिए चेहरे की पहचान प्रणाली (Facial Recognition System – FRS) भी शामिल है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लक्ष्य समूह 0-6 वर्ष के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ और 14-18 वर्ष की किशोरियाँ (आकांक्षी जिलों व पूर्वोत्तर क्षेत्र में) शामिल हैं।
घटक योजनाएँ आंगनवाड़ी सेवाएँ, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए योजना को एकीकृत करता है।
पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन आंगनवाड़ी सेवाओं की वास्तविक समय में निगरानी और लाभार्थियों की ट्रैकिंग के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपकरण।
चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS) पोषण ट्रैकर ऐप में घर ले जाने वाले राशन (THR) के वितरण की अंतिम-छोर तक निगरानी सुनिश्चित करने के लिए।
संशोधित पोषण मानदंड जनवरी 2023 में संशोधित, आहार विविधता, गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन, स्वस्थ वसा और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर केंद्रित।
कुपोषण प्रबंधन प्रोटोकॉल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से जारी, गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) के प्रबंधन पर केंद्रित।

महत्व

सामाजिक प्रभाव

  • यह मिशन बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण (Malnutrition) को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा।
  • किशोरियों के पोषण पर ध्यान केंद्रित करने से भविष्य में स्वस्थ माताओं और बच्चों की पीढ़ी तैयार करने में मदद मिलेगी, जिससे अंतर-पीढ़ीगत कुपोषण चक्र टूटेगा।
  • समुदाय-आधारित दृष्टिकोण और जागरूकता अभियान लोगों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सही व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, जिससे समग्र सामुदायिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।

प्रशासनिक दक्षता

  • पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन के माध्यम से आंगनवाड़ी सेवाओं की वास्तविक समय में निगरानी से योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
  • चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS) का उपयोग लाभार्थियों तक लक्षित लाभ पहुँचाने में मदद करेगा, जिससे रिसाव (Leakage) और दुरुपयोग कम होगा।
  • डेटा-संचालित निर्णय लेने से नीति निर्माताओं को योजना की कमियों को पहचानने और आवश्यक सुधार करने में सहायता मिलेगी, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।

स्वास्थ्य एवं पोषण

  • संशोधित पोषण मानदंड आहार विविधता और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे बच्चों और महिलाओं के लिए अधिक संतुलित और गुणवत्तापूर्ण पूरक पोषण सुनिश्चित होता है।
  • गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) के प्रबंधन के लिए प्रोटोकॉल और अतिरिक्त पूरक पोषण का प्रावधान बच्चों में रुग्णता (Morbidity) और मृत्यु दर (Mortality) को कम करने में सहायक होगा।
  • आयुष पद्धतियों को शामिल करने से कुपोषण के प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण मिलेगा, जिससे दुर्बलता (Wasting), बौनापन (Stunting), एनीमिया (Anaemia) और अल्प वजन (Underweight) की व्यापकता कम होगी।

चुनौतियाँ

1. डेटा की सटीकता और उपयोग

  • पोषण ट्रैकर पर दर्ज डेटा की सटीकता सुनिश्चित करना एक चुनौती है, क्योंकि गलत या अपूर्ण डेटा गलत नीतियों को जन्म दे सकता है।
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (AWW) को डेटा प्रविष्टि और प्रौद्योगिकी के उपयोग में प्रशिक्षण और सहायता की आवश्यकता है।

2. सामुदायिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन

  • पोषण संबंधी व्यवहार में स्थायी परिवर्तन लाना एक धीमी और जटिल प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर जागरूकता और सामुदायिक लामबंदी की आवश्यकता है।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ और मिथक सही पोषण प्रथाओं को अपनाने में बाधा डाल सकते हैं।

3. संसाधनों का पर्याप्त आवंटन

  • मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की आवश्यकता होगी, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • पूरक पोषण की गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना एक लॉजिस्टिकल चुनौती हो सकती है।

4. अंतर-मंत्रालयी समन्वय

  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है, विशेषकर कुपोषण प्रबंधन प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन में।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ केंद्र का समन्वय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक केंद्र प्रायोजित मिशन है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डिजिटल डिवाइड दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता की कमी पोषण ट्रैकर के प्रभावी उपयोग में बाधा बन सकती है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर कार्यभार डेटा प्रविष्टि और FRS के उपयोग से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कार्यभार बढ़ सकता है, जिससे उनके मुख्य पोषण संबंधी कार्यों पर असर पड़ सकता है।
गुणवत्ता नियंत्रण पूरक पोषण की गुणवत्ता और वितरण श्रृंखला में भ्रष्टाचार या अक्षमता की संभावना, जिससे लाभार्थियों तक सही लाभ न पहुँच पाए।
जागरूकता की कमी लाभार्थियों और समुदाय के सदस्यों के बीच संशोधित पोषण मानदंडों और मिशन के उद्देश्यों के बारे में पर्याप्त जागरूकता का अभाव।
गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) की पहचान समुदाय स्तर पर SAM बच्चों की समय पर और सटीक पहचान सुनिश्चित करना, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ सीमित हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (Mission Saksham Anganwadi and Poshan 2.0)
  • पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan)
  • आंगनवाड़ी सेवाएँ (Anganwadi Services)

आगे की राह

  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण ट्रैकर और FRS के प्रभावी उपयोग के लिए नियमित और गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, साथ ही उनके कार्यभार को संतुलित किया जाए।
  • डिजिटल बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया जाए, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, ताकि पोषण ट्रैकर की पहुँच और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके।
  • सामुदायिक लामबंदी और व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC) रणनीतियों को स्थानीय संदर्भों के अनुरूप बनाया जाए, जिसमें स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील संदेशों का उपयोग हो।
  • पूरक पोषण की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जाए, जिसमें गुणवत्ता नियंत्रण, भंडारण और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी तंत्र शामिल हों।
  • कुपोषण प्रबंधन प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच समन्वय को और सुदृढ़ किया जाए।
  • मिशन के परिणामों का नियमित और स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाए, जिसमें डेटा की सटीकता और जमीनी स्तर पर प्रभाव का आकलन शामिल हो, ताकि आवश्यक नीतिगत समायोजन किए जा सकें।
  • आयुष पद्धतियों को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर एकीकृत किया जाए और उनके प्रभावी उपयोग के लिए दिशानिर्देश विकसित किए जाएँ।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 · पोषण ट्रैकर · गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) · पूरक पोषण कार्यक्रम · राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 · सामुदायिक सहभागिता · व्यवहार परिवर्तन संचार · मातृ एवं शिशु पोषण · आयुष पद्धतियाँ · केंद्र प्रायोजित योजना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास का अवसर’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों को शोषण से संरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और जन-स्वास्थ्य में सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

कुपोषण की उच्च दर (विशेषकर बच्चों और महिलाओं में)  →  मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 का शुभारंभ  →  पोषण ट्रैकर और FRS का उपयोग कर निगरानी  →  संशोधित पोषण मानदंड और कुपोषण प्रबंधन प्रोटोकॉल  →  समुदाय-आधारित दृष्टिकोण और जागरूकता अभियान  →  कुपोषण में कमी और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
2. इसके लाभार्थियों में 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ और 14-18 वर्ष की किशोरियाँ शामिल हैं।
3. ‘पोषण ट्रैकर’ एप्लिकेशन का उद्देश्य आंगनवाड़ी सेवाओं की वास्तविक समय में निगरानी करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है। कथन 2 सही है क्योंकि इसके लाभार्थियों में 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ और कुछ क्षेत्रों में 14-18 वर्ष की किशोरियाँ शामिल हैं। कथन 3 सही है क्योंकि ‘पोषण ट्रैकर’ एप्लिकेशन आंगनवाड़ी सेवाओं की वास्तविक समय में निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपकरण है।

Q2. मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत पूरक पोषण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची-II में निहित पोषण मानदंडों के अनुसार प्रदान किया जाता है।
2. जनवरी 2023 में संशोधित मानदंड मुख्य रूप से कैलोरी-आधारित हैं।
3. गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों को घर ले जाने वाले राशन (THR) के रूप में अतिरिक्त पूरक पोषण प्रदान किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि पूरक पोषण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची-II के मानदंडों के अनुसार प्रदान किया जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि जनवरी 2023 में संशोधित मानदंड आहार विविधता के सिद्धांतों पर आधारित हैं, न कि मुख्य रूप से कैलोरी-आधारित। कथन 3 सही है क्योंकि गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों को अतिरिक्त पूरक पोषण प्रदान किया जाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटने में मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। इस मिशन के प्रमुख घटकों और कार्यान्वयन चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के उद्देश्यों और बच्चों में कुपोषण को कम करने में इसकी क्षमता का मूल्यांकन करें। दूसरे भाग में, ‘पोषण ट्रैकर’, पूरक पोषण के संशोधित मानदंड, SAM प्रबंधन प्रोटोकॉल और सामुदायिक सहभागिता जैसे प्रमुख घटकों का विस्तार से वर्णन करें। अंत में, कार्यान्वयन से संबंधित संभावित चुनौतियों जैसे डेटा सटीकता, अंतिम-छोर तक वितरण और अंतर-मंत्रालयी समन्वय पर चर्चा करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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