मुख्यमंत्री मोदी से गन्ना किसानों की अपील: इथेनॉल नीति पर दृढ़ रहें

Mysuru: Sugarcane growers urge PM to stay firm on ethanol policy — concept mind map

मुख्यमंत्री मोदी से गन्ना किसानों की अपील: इथेनॉल नीति पर दृढ़ रहें

Ethanol Blending PolicyPetrolmixed with ethanolE20 target by 2025Ethanolfrom sugarcane/rice/maizecleaner fuel, less emissionsFarmershigher income from cropssupports agricultureImportsreduces crude oil dependencysaves foreign exchangeEnvironmentlower carbon emissionspromotes sustainability
Ethanol Blending Policy

✎ एथेनॉल सम्मिश्रण नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका लक्ष्य पेट्रोल में एथेनॉल का सम्मिश्रण बढ़ाना है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS पेपर III — अर्थव्यवस्था  |  GS पेपर III — पर्यावरण
  • Prelims: एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम, ई20 पेट्रोल, गन्ने से एथेनॉल उत्पादन, राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, कच्चे तेल का आयात, विदेशी मुद्रा भंडार
  • Essay: कृषि आय में वृद्धि और ग्रामीण विकास में एथेनॉल नीति की भूमिका, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता में जैव ईंधन का योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: एथेनॉल सम्मिश्रण नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका लक्ष्य पेट्रोल में एथेनॉल का सम्मिश्रण बढ़ाना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

मैसूरु के गन्ना उत्पादकों के एक संगठन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एथेनॉल सम्मिश्रण नीति (Ethanol Blending Policy) को जारी रखने का आग्रह किया है। किसानों का तर्क है कि यह नीति उनके कल्याण और देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है। यह कदम एथेनॉल नीति को लेकर चल रहे विवादों और आलोचनाओं के बीच आया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम शुरू किया है।
  • इस कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर उपयोग किया जाता है। सरकार का लक्ष्य 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण (E20) प्राप्त करना है।
  • एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने, चावल, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है, जिससे किसानों को अपनी उपज का अतिरिक्त मूल्य मिलता है।
  • एथेनॉल को एक स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जो जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करता है।
  • विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने एथेनॉल के उपयोग से वाहन इंजनों पर प्रतिकूल प्रभाव और ईंधन दक्षता में कमी आने का आरोप लगाते हुए नीति की आलोचना की है।

एथेनॉल सम्मिश्रण नीति क्या है?

  • एथेनॉल सम्मिश्रण नीति भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है।
  • इसका प्राथमिक लक्ष्य कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है।
  • यह नीति किसानों को उनकी कृषि उपज, विशेषकर गन्ना, चावल और मक्का से एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करती है।
  • एथेनॉल एक जैव ईंधन है जो जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
  • भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण (E20) का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पहले 2030 था।
  • राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) 2018 इस कार्यक्रम को दिशा प्रदान करती है, जिसमें जैव ईंधन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के प्रावधान हैं।
  • यह नीति ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश को विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
गन्ने के किसानों का समर्थन मैसूरु के गन्ना किसानों ने प्रधानमंत्री से इथेनॉल नीति पर दृढ़ रहने का आग्रह किया है, जो किसानों के कल्याण और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है।
इथेनॉल उत्पादन का विस्तार केंद्र सरकार गन्ने, चावल, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से इथेनॉल उत्पादन पर जोर दे रही है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
विदेशी मुद्रा की बचत कम कच्चे तेल के आयात से देश को लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
किसानों की आय में वृद्धि इथेनॉल के बढ़ते घरेलू उत्पादन और खपत से किसानों की आय में वृद्धि होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण के अनुकूल ईंधन इथेनॉल को पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है, जो प्रति व्यक्ति आय में सुधार और प्रदूषण कम करने में सहायक है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता में कमी: भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। इथेनॉल सम्मिश्रण (Ethanol Blending) नीति इस निर्भरता को कम करके विदेशी मुद्रा बचाने में मदद करती है, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता बढ़ती है।
  • किसानों की आय में वृद्धि: गन्ना, चावल और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से इथेनॉल के उत्पादन से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलती है।
  • राजकोषीय सुदृढीकरण: विदेशी मुद्रा की बचत से सरकार के पास सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सेवाओं में निवेश के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होते हैं, जिससे समग्र आर्थिक विकास को गति मिलती है।

सामरिक महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: इथेनॉल सम्मिश्रण नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है। घरेलू स्तर पर ईंधन का उत्पादन करने से वैश्विक तेल मूल्य में उतार-चढ़ाव के प्रति देश की संवेदनशीलता कम होती है।
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा: यह नीति ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप है, क्योंकि यह देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए घरेलू संसाधनों पर अधिक निर्भर बनाती है।

पर्यावरणीय महत्व

  • प्रदूषण में कमी: इथेनॉल एक स्वच्छ जलने वाला ईंधन है, जो जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करता है। इसके उपयोग से वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है।
  • जलवायु परिवर्तन शमन: इथेनॉल का उपयोग जलवायु परिवर्तन शमन प्रयासों में योगदान देता है, क्योंकि यह कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में सहायक है।

चुनौतियाँ

1. खाद्य सुरक्षा बनाम ईंधन

  • खाद्य फसलों का इथेनॉल उत्पादन में उपयोग: चावल और मक्का जैसी खाद्य फसलों का इथेनॉल उत्पादन में उपयोग करने से खाद्य सुरक्षा पर चिंताएं बढ़ सकती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां इन फसलों की कमी है।
  • फसलों की उपलब्धता और मूल्य अस्थिरता: इथेनॉल उत्पादन के लिए आवश्यक कृषि उत्पादों की उपलब्धता में कमी या उनके मूल्य में अस्थिरता नीति के कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकती है।

2. तकनीकी और बुनियादी ढाँचागत चुनौतियाँ

  • इंजन अनुकूलता: कुछ आलोचकों का दावा है कि इथेनॉल का उच्च प्रतिशत वाहन इंजनों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है और ईंधन दक्षता को कम कर सकता है, हालांकि सरकार इन दावों का खंडन करती है।
  • भंडारण और वितरण: इथेनॉल के बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण के लिए पर्याप्त भंडारण सुविधाओं और परिवहन बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है, जिसमें निवेश की कमी एक चुनौती हो सकती है।

3. नीतिगत निरंतरता और राजनीतिक दबाव

  • विपक्षी दलों का विरोध: विपक्षी दल और कुछ संगठन इथेनॉल नीति की आलोचना कर रहे हैं, जिससे नीतिगत निरंतरता पर दबाव आ सकता है।
  • दीर्घकालिक स्थिरता: नीति की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों के बीच आम सहमति और समर्थन महत्वपूर्ण है।

4. जल उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव

  • जल-गहन फसलें: गन्ना जैसी इथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली फसलें जल-गहन होती हैं, जिससे जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर जल-संकट वाले क्षेत्रों में।
  • अपशिष्ट प्रबंधन: इथेनॉल उत्पादन प्रक्रिया से निकलने वाले उप-उत्पादों और अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता होती है ताकि पर्यावरणीय प्रदूषण को रोका जा सके।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
खाद्य बनाम ईंधन खाद्य फसलों का इथेनॉल उत्पादन में उपयोग खाद्य सुरक्षा पर दबाव डाल सकता है।
इंजन अनुकूलता उच्च इथेनॉल सम्मिश्रण से वाहन इंजनों पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव और ईंधन दक्षता में कमी की चिंता।
बुनियादी ढाँचा इथेनॉल के बड़े पैमाने पर उत्पादन, भंडारण और वितरण के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे की कमी।
जल उपयोग गन्ना जैसी जल-गहन फसलों का इथेनॉल उत्पादन में उपयोग जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा सकता है।
राजनीतिक विरोध विपक्षी दलों और संगठनों द्वारा नीति की आलोचना से कार्यान्वयन में बाधाएं आ सकती हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blending Programme)

आगे की राह

  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इथेनॉल उत्पादन के लिए अधिशेष कृषि उत्पादों (जैसे क्षतिग्रस्त अनाज) का उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित करना।
  • इथेनॉल-अनुकूल वाहन इंजनों के विकास और मौजूदा वाहनों के अनुकूलन के लिए अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना।
  • इथेनॉल के भंडारण, परिवहन और वितरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे में निवेश बढ़ाना।
  • किसानों को इथेनॉल उत्पादन के लिए आवश्यक फसलों की खेती के लिए तकनीकी सहायता और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • इथेनॉल नीति के पर्यावरणीय प्रभावों, विशेष रूप से जल उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन पर व्यापक अध्ययन और सतत समाधान विकसित करना।
  • नीति के लाभों और चुनौतियों के बारे में जनता और हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाना ताकि गलत सूचनाओं का मुकाबला किया जा सके।
  • इथेनॉल उत्पादन के लिए वैकल्पिक फीडस्टॉक जैसे सेल्युलोसिक बायोमास (cellulosic biomass) के उपयोग की संभावनाओं का पता लगाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

एथेनॉल सम्मिश्रण नीति · गन्ना किसान · आत्मनिर्भर भारत · कच्चे तेल का आयात · विदेशी मुद्रा भंडार · पर्यावरण अनुकूल ईंधन · किसानों की आय · जैव ईंधन · ईंधन सुरक्षा · कृषि विविधीकरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा।
  • अनुच्छेद 39: राज्य अपनी नीति का संचालन इस प्रकार करेगा कि सभी नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त हों।
  • अनुच्छेद 48: राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का प्रयास करेगा।

अवधारणा प्रवाह

सरकार की इथेनॉल सम्मिश्रण नीति  →  गन्ना, चावल, मक्का से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा  →  किसानों की आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र को लाभ  →  कच्चे तेल के आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत  →  ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता में वृद्धि  →  पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का उपयोग और प्रदूषण में कमी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत की एथेनॉल सम्मिश्रण नीति का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण करके कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है।
2. एथेनॉल का उत्पादन केवल गन्ने से ही किया जा सकता है।
3. एथेनॉल को पर्यावरण अनुकूल ईंधन माना जाता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। एथेनॉल सम्मिश्रण नीति का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना है। कथन 2 गलत है। एथेनॉल का उत्पादन गन्ना, चावल, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जा सकता है। कथन 3 सही है। एथेनॉल को एक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन माना जाता है क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम उत्सर्जन करता है।

Q2. अभिकथन (A): भारत सरकार एथेनॉल उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
कारण (R): एथेनॉल के बढ़ते घरेलू उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सरकार एथेनॉल उत्पादन को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। कारण (R) भी सही है और A का सही स्पष्टीकरण है। एथेनॉल उत्पादन से गन्ना, चावल और मक्का उत्पादक किसानों को लाभ होता है, जिससे उनकी आय बढ़ती है। साथ ही, कच्चे तेल के आयात में कमी से विदेशी मुद्रा की बचत होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की एथेनॉल सम्मिश्रण नीति के प्रमुख उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए। यह नीति किसानों के कल्याण और देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता में किस प्रकार योगदान करती है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: एथेनॉल सम्मिश्रण नीति (Ethanol Blending Policy) का संक्षिप्त परिचय, इसके महत्व और हालिया संदर्भ का उल्लेख।
2. प्रमुख उद्देश्य: नीति के मुख्य उद्देश्यों को विस्तार से बताएं, जैसे कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, पर्यावरण प्रदूषण कम करना।
3. किसानों के कल्याण में योगदान: गन्ना, चावल, मक्का आदि उत्पादक किसानों की आय में वृद्धि, कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहन, फसल अवशेषों का उपयोग।
4. आर्थिक आत्मनिर्भरता में योगदान: आयात बिल में कमी, विदेशी मुद्रा भंडार का सुदृढ़ीकरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा, नए उद्योगों का विकास।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: नीति के कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों (जैसे खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव, तकनीकी मुद्दे) और उनके समाधान के लिए सुझावों का संक्षिप्त उल्लेख।
6. निष्कर्ष: नीति के दीर्घकालिक लाभों और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में इसकी भूमिका पर बल देते हुए निष्कर्ष।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment