यूपीएससी/पीसीएस हेतु परमाणु ऊर्जा आत्मनिर्भरता: सरकार का 2047 तक 100 गीगावॉट लक्ष्य

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सरकार — concept mind map

यूपीएससी/पीसीएस हेतु परमाणु ऊर्जा आत्मनिर्भरता: सरकार का 2047 तक 100 गीगावॉट लक्ष्य

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भारत परमाणु रोडमैप

✎ भारत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के साथ, स्वदेशी SMR, थोरियम आधारित प्रौद्योगिकियों और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से एक आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा  |  GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
  • Prelims: परमाणु ऊर्जा मिशन, लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम, थोरियम आधारित रिएक्टर, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), शांति अधिनियम, 2025
  • Essay: ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास में परमाणु ऊर्जा की भूमिका, भारत के आर्थिक विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के साथ, स्वदेशी SMR, थोरियम आधारित प्रौद्योगिकियों और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से एक आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में भारत के परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य, स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर विशेष बल दिया। यह प्रस्तुति भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तीन चरणों वाली रणनीति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य देश के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करके दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन, 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
  • सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई है: बड़े स्वदेशी रिएक्टरों को नवीन (ग्रीनफील्ड) स्थलों पर स्थापित करना और लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) को मौजूदा विकसित (ब्राउनफील्ड) स्थलों पर विकसित करना।
  • परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम, 2025 को परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थाओं की व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाने के लिए अधिनियमित किया गया है।
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) जैसे संस्थान भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और संबंधित पहलें

  • भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: यह कार्यक्रम देश के सीमित यूरेनियम संसाधनों और प्रचुर थोरियम भंडारों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • परमाणु ऊर्जा मिशन: केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित इस मिशन का लक्ष्य 2047 तक भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाना है, जिससे ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़े।
  • लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR): ये छोटे, मॉड्यूलर रिएक्टर होते हैं जिनकी क्षमता पारंपरिक बड़े रिएक्टरों की तुलना में कम होती है। इन्हें फैक्ट्री में निर्मित किया जा सकता है और साइट पर स्थापित किया जा सकता है, जिससे निर्माण समय और लागत कम होती है। भारत का लक्ष्य 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी SMR विकसित करना है।
  • थोरियम आधारित रिएक्टर: भारत थोरियम को परमाणु ईंधन के रूप में उपयोग करने की तकनीक विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, क्योंकि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार हैं। यह दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • शांति अधिनियम, 2025: यह अधिनियम परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थाओं की व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाने के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान करता है।
  • घरेलू विनिर्माण और अनुसंधान एवं विकास: सरकार घरेलू परमाणु विक्रेताओं को विकसित करने, निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास तंत्र को मजबूत करने और उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण पर जोर दे रही है।
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC): यह भारत में परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए अग्रणी अनुसंधान संस्थान है, जो SMR-200 और SMR-55 जैसे स्वदेशी SMR प्रौद्योगिकियों के डिजाइन और विकास में लगा हुआ है।
  • इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR): यह केंद्र सोडियम शीतित द्रुत प्रजनक रिएक्टरों (सोडियम कूल्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों) और संबंधित बंद ईंधन-चक्र सुविधाओं के लिए अनुसंधान और विकास करता है, जो भारत के तीन-चरणीय कार्यक्रम के दूसरे चरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य (2047 तक) दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संवृद्धि के लिए परमाणु ऊर्जा की भूमिका को बढ़ाना।
तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम थोरियम के विशाल भंडार का सतत उपयोग सुनिश्चित करते हुए भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।
लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना में लचीलापन, कम पूंजी लागत और दूरस्थ क्षेत्रों में ऊर्जा आपूर्ति।
घरेलू विनिर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, रोजगार सृजित करना और तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।
थोरियम आधारित प्रौद्योगिकियाँ भारत के प्रचुर थोरियम संसाधनों का उपयोग करके ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • परमाणु ऊर्जा क्षमता में वृद्धि से देश की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे औद्योगिक विकास और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
  • घरेलू विनिर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने से आयात बिल में कमी आएगी, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

सामरिक महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में परमाणु ऊर्जा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे भारत की सामरिक स्वायत्तता बढ़ती है।
  • उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों और SMRs का विकास भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करेगा।
  • थोरियम आधारित कार्यक्रम भारत को यूरेनियम के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा, जिससे भू-राजनीतिक जोखिम कम होंगे।

पर्यावरण महत्व

  • परमाणु ऊर्जा कार्बन उत्सर्जन मुक्त होती है, जिससे जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
  • यह स्वच्छ ऊर्जा का एक विश्वसनीय स्रोत है, जो वायु प्रदूषण को कम करने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने में सहायक है।

वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व

  • SMRs और उन्नत रिएक्टरों का विकास अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देगा, जिससे वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग क्षमताओं में वृद्धि होगी।
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) जैसे संस्थानों की भूमिका भारत को परमाणु प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनाएगी।

चुनौतियाँ

1. उच्च पूंजी लागत

  • परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में अत्यधिक पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, जो परियोजनाओं की लागत को बढ़ाता है।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी के बावजूद, प्रारंभिक निवेश एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

2. सुरक्षा और अपशिष्ट निपटान

  • परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से जुड़े सुरक्षा जोखिम और रेडियोधर्मी अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान की चुनौती बनी हुई है।
  • जनता में परमाणु ऊर्जा को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी एक बड़ी चुनौती हैं।

3. तकनीकी विशेषज्ञता और मानव संसाधन

  • उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों के विकास और संचालन के लिए उच्च स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होती है।
  • इस क्षेत्र में कुशल कार्यबल की कमी एक संभावित चुनौती हो सकती है।

4. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध और आपूर्ति श्रृंखला

  • परमाणु अप्रसार संधियों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कुछ प्रौद्योगिकियों और सामग्रियों तक पहुंच सीमित हो सकती है।
  • घटकों के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता भी एक चुनौती है।

5. भूमि अधिग्रहण और स्थानीय विरोध

  • परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता होती है, जिससे भूमि अधिग्रहण और स्थानीय समुदायों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
  • परियोजनाओं में देरी और लागत में वृद्धि हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परमाणु सुरक्षा दुर्घटनाओं का जोखिम और रेडियोधर्मी रिसाव की संभावना।
रेडियोधर्मी अपशिष्ट दीर्घकालिक भंडारण और सुरक्षित निपटान की जटिलता।
तकनीकी आत्मनिर्भरता उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए विदेशी निर्भरता कम करना।
सार्वजनिक स्वीकृति परमाणु ऊर्जा के प्रति जनता की आशंकाएं और विरोध।
वित्तीय व्यवहार्यता उच्च प्रारंभिक निवेश और लंबी निर्माण अवधि।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • परमाणु ऊर्जा मिशन

आगे की राह

  • परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण के नवीन मॉडल विकसित करना, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना शामिल है।
  • परमाणु सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करना तथा रेडियोधर्मी अपशिष्ट के सुरक्षित और स्थायी निपटान के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों का विकास करना।
  • परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त निवेश करना और वैज्ञानिक तथा इंजीनियरिंग प्रतिभाओं को आकर्षित करना।
  • SMRs और थोरियम आधारित रिएक्टरों के विकास में तेजी लाना ताकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ाया जा सके।
  • परमाणु ऊर्जा के लाभों और सुरक्षा उपायों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना ताकि सार्वजनिक स्वीकृति में सुधार हो सके।
  • घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को और मजबूत करना और निजी क्षेत्र को परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना ताकि उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

ऊर्जा मांग में वृद्धि  →  जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता  →  परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने की रणनीति  →  SMRs और थोरियम प्रौद्योगिकियों का विकास  →  2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य  →  ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपने विशाल थोरियम भंडार का सतत उपयोग करने पर केंद्रित है।
2. परमाणु ऊर्जा मिशन का लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाना है।
3. भारत लघु-मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200) का डिजाइन और विकास इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा किया जा रहा है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम थोरियम के उपयोग पर केंद्रित है। कथन 2 सही है। परमाणु ऊर्जा मिशन का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है। कथन 3 गलत है। BSMR-200 का डिजाइन और विकास भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा किया जा रहा है, न कि IGCAR द्वारा।

Q2. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार करें:
1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य
2. शांति अधिनियम, 2025: परमाणु क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाना
3. इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR): सोडियम शीतित द्रुत प्रजनक रिएक्टरों का विकास
उपरोक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल तीन — युग्म 1 गलत है। 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य परमाणु ऊर्जा मिशन से संबंधित है, न कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से। युग्म 2 सही है। शांति अधिनियम, 2025 का उद्देश्य परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थाओं की व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाना है। युग्म 3 सही है। IGCAR सोडियम शीतित द्रुत प्रजनक रिएक्टरों और संबंधित बंद ईंधन-चक्र सुविधाओं के लिए अनुसंधान और विकास कर रहा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के आत्मनिर्भर परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) और निजी क्षेत्र की भागीदारी की भूमिका का परीक्षण करें। परमाणु ऊर्जा मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में यह रणनीति कितनी प्रभावी हो सकती है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. परिचय: भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य का उल्लेख।
2. लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) की भूमिका:
– SMR की अवधारणा और लाभ (लचीलापन, सुरक्षा, कम निर्माण समय, छोटे पदचिह्न)।
– भारत में SMR विकास के प्रयास (BARC द्वारा BSMR-200, SMR-55)।
– ब्राउनफील्ड साइटों पर SMR की स्थापना का महत्व (जीवाश्म ईंधन संयंत्रों का प्रतिस्थापन, दूरस्थ क्षेत्रों में उपयोग)।
– 2033 तक पांच स्वदेशी SMR के विकास का लक्ष्य।
3. निजी क्षेत्र की भागीदारी की भूमिका:
– ‘शांति’ अधिनियम, 2025 का उल्लेख और इसका उद्देश्य (सार्वजनिक-निजी भागीदारी को सक्षम बनाना)।
– घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना (रिएक्टर प्रेशर वेसल्स जैसे महत्वपूर्ण घटकों का घरेलू उत्पादन)।
– निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास तंत्र को प्रोत्साहन।
– ज्ञान साझाकरण और मार्गदर्शन के माध्यम से भारतीय उद्योग को बढ़ावा देना।
4. परमाणु ऊर्जा मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में रणनीति की प्रभावशीलता:
– 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति में SMR और निजी भागीदारी का योगदान।
– ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों में भूमिका।
– चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख (पूंजी निवेश, नियामक ढांचा, सार्वजनिक स्वीकृति)।
5. निष्कर्ष: भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति और वैश्विक परमाणु ऊर्जा बाजार में इसकी स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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