08 Aug योजना कर्मचारियों ने मांग की: वेतन संशोधन और कार्यभार में कमी
✎ योजना श्रमिक विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करने वाले महत्वपूर्ण कर्मचारी हैं, जो अक्सर कम मज़दूरी, अत्यधिक काम के बोझ और अपर्याप्त सामाजिक सुरक्षा के साथ कार्य करते हैं, जिससे उनके लिए बेहतर कार्य-दशाओं…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास
- Prelims: योजना श्रमिक, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, न्यूनतम मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा, श्रम कानून, असमानता, कल्याणकारी योजनाएँ
- Essay: भारत में सामाजिक-आर्थिक न्याय की दिशा में योजना श्रमिकों की भूमिका और चुनौतियाँ, कल्याणकारी राज्य की अवधारणा और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों का भविष्य
त्वरित पुनरावृत्ति: योजना श्रमिक विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करने वाले महत्वपूर्ण कर्मचारी हैं, जो अक्सर कम मज़दूरी, अत्यधिक काम के बोझ और अपर्याप्त सामाजिक सुरक्षा के साथ कार्य करते हैं, जिससे उनके लिए बेहतर कार्य-दशाओं और न्यूनतम मज़दूरी की मांग एक प्रमुख सामाजिक-आर्थिक मुद्दा बन गई है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, आशा (Accredited Social Health Activist) कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मध्याह्न भोजन कर्मचारी और अन्य योजना श्रमिकों ने विशाखापत्तनम में एक रैली का आयोजन किया। उन्होंने अपनी मज़दूरी में संशोधन, काम के बोझ को कम करने और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग की। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि पिछले सात वर्षों से उनकी मज़दूरी में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जबकि जीवन-यापन की लागत में तेज़ी से वृद्धि हुई है। उन्होंने सरकार से न्यूनतम मासिक मज़दूरी 26,000 रुपये निर्धारित करने की मांग की।
पृष्ठभूमि
- योजना श्रमिक वे कर्मचारी होते हैं जो विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के तहत कार्य करते हैं, जैसे कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (National Rural Health Mission) के तहत आशा कार्यकर्ता और एकीकृत बाल विकास सेवा (Integrated Child Development Services) योजना के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता।
- ये श्रमिक अक्सर संविदात्मक आधार पर या मानदेय (honorarium) पर काम करते हैं, और उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन, भत्ते और सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त नहीं होते हैं।
- भारत में अनौपचारिक क्षेत्र (informal sector) के श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा है, और योजना श्रमिक इसी श्रेणी में आते हैं, जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- इन श्रमिकों को अक्सर कम मज़दूरी, अत्यधिक काम का बोझ, अपर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 1948 (Minimum Wages Act, 1948) का उद्देश्य श्रमिकों को शोषण से बचाना और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन-स्तर सुनिश्चित करना है, लेकिन योजना श्रमिकों के मामले में इसका पूर्ण कार्यान्वयन एक चुनौती बना हुआ है।
- कोविड-19 महामारी के दौरान इन श्रमिकों ने अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे उनके योगदान और बेहतर कार्य-दशाओं की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
योजना श्रमिक कौन होते हैं और उनकी भूमिका क्या है?
- योजना श्रमिक वे व्यक्ति होते हैं जो केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा वित्त पोषित विभिन्न सामाजिक कल्याण और विकास योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करते हैं।
- इनमें आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मध्याह्न भोजन योजना के कर्मचारी, ग्राम संगठन सहायक (Village Organisation Assistants) और स्कूल स्वच्छता कर्मचारी शामिल हैं।
- आशा कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को सहायता प्रदान करती हैं।
- मध्याह्न भोजन कर्मचारी सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में सहायक होते हैं, जिससे बच्चों के नामांकन और उपस्थिति में सुधार होता है।
- ये श्रमिक अक्सर अपने समुदायों से ही होते हैं, जिससे उन्हें स्थानीय आबादी के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ने और सरकारी योजनाओं के लाभों को उन तक पहुँचाने में मदद मिलती है।
- उनकी भूमिका केवल योजनाओं को लागू करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे सरकार और समुदाय के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में भी कार्य करते हैं, जिससे नीतियों को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाया जा सके।
- इन श्रमिकों को आमतौर पर मानदेय या प्रोत्साहन-आधारित भुगतान मिलता है, जो अक्सर उनकी सेवाओं के मूल्य और उनके द्वारा किए गए काम के अनुपात में नहीं होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| योजना कार्यकर्ता | ये जमीनी स्तर पर विभिन्न सरकारी योजनाओं को लागू करने वाले महत्वपूर्ण कर्मी हैं, जिनमें आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और मध्याह्न भोजन कर्मचारी शामिल हैं। |
| कम पारिश्रमिक | कई योजना कार्यकर्ताओं को न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान किया जाता है, जिससे उनके जीवन-यापन में कठिनाई आती है और उनके काम की गुणवत्ता प्रभावित होती है। |
| कार्यभार में वृद्धि | इन कार्यकर्ताओं पर लगातार बढ़ता कार्यभार और अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाली जाती हैं, जिससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। |
| सामाजिक सुरक्षा का अभाव | अधिकांश योजना कार्यकर्ताओं को नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा लाभ (जैसे पेंशन, स्वास्थ्य बीमा) प्राप्त नहीं होते हैं। |
| महंगाई का प्रभाव | बढ़ती महंगाई के बावजूद, कई वर्षों से उनके पारिश्रमिक में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जिससे उनकी क्रय शक्ति कम हुई है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- योजना कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और स्वच्छता जैसी आवश्यक सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- इन कार्यकर्ताओं की मांगें समाज के सबसे कमजोर वर्गों की आवाज का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो अक्सर अदृश्य रहते हैं लेकिन देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- उनके काम की उपेक्षा से बाल मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, कुपोषण और प्राथमिक शिक्षा में नामांकन जैसी सामाजिक विकास सूचकांकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
आर्थिक महत्व
- योजना कार्यकर्ताओं का उचित पारिश्रमिक और बेहतर कार्यदशाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकती हैं और स्थानीय क्रय शक्ति में वृद्धि कर सकती हैं।
- इन कार्यकर्ताओं को प्रदान किए जाने वाले लाभों में सुधार से श्रम बाजार में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि इनमें से अधिकांश महिलाएं हैं।
- इनकी मांगों को पूरा करने से सरकारी योजनाओं की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार होगा, जिससे सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह मुद्दा केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बंटवारे पर सवाल उठाता है, क्योंकि कई योजनाएं केंद्र प्रायोजित होती हैं लेकिन राज्य द्वारा लागू की जाती हैं।
- योजना कार्यकर्ताओं की मांगों पर ध्यान देना सुशासन (Good Governance) और समावेशी विकास (Inclusive Development) के सिद्धांतों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- यह मुद्दा श्रम कानूनों के दायरे और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों पर बहस को भी जन्म देता है।
चुनौतियाँ
1. कम पारिश्रमिक और कार्यभार
- योजना कार्यकर्ताओं को अक्सर न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान किया जाता है, जो बढ़ती महंगाई के कारण अपर्याप्त है।
- उन्हें कई योजनाओं के तहत काम करना पड़ता है, जिससे उनका कार्यभार अत्यधिक बढ़ जाता है और गुणवत्ता प्रभावित होती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, मानव संसाधन
2. सामाजिक सुरक्षा का अभाव
- इन कार्यकर्ताओं को नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह पेंशन, भविष्य निधि, स्वास्थ्य बीमा जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिलते हैं।
- कार्य के दौरान चोट या बीमारी की स्थिति में उन्हें पर्याप्त सहायता नहीं मिलती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सुरक्षा, श्रम कानून
3. कार्यदशाओं में सुधार की कमी
- उन्हें अक्सर बुनियादी सुविधाओं जैसे शौचालय, पेयजल और सुरक्षित कार्यस्थल के बिना काम करना पड़ता है।
- कार्य के दौरान उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार की शिकायतें भी आम हैं।
यूपीएससी लिंक: महिला सशक्तिकरण, कार्यस्थल सुरक्षा
4. योजनाओं का अस्थाई स्वरूप
- कई योजनाएं अस्थायी प्रकृति की होती हैं, जिससे कार्यकर्ताओं की नौकरी की सुरक्षा अनिश्चित रहती है।
- उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता है, जिससे उनके अधिकारों और लाभों में कमी आती है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी योजनाएं, श्रम नीतियां
5. डिजिटल उपकरणों का बोझ
- अनावश्यक मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल रिपोर्टिंग के कारण कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, खासकर उन लोगों पर जो डिजिटल रूप से साक्षर नहीं हैं।
- ये उपकरण अक्सर खराब कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में समस्या पैदा करते हैं।
यूपीएससी लिंक: ई-शासन, डिजिटल विभाजन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अत्यधिक कार्यभार | कई योजनाओं के तहत काम करने से दक्षता में कमी और व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव। |
| पारिश्रमिक में असमानता | न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान और नियमित कर्मचारियों की तुलना में वेतन में भारी अंतर। |
| सामाजिक सुरक्षा का अभाव | पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य लाभों की अनुपस्थिति, जिससे भविष्य की अनिश्चितता। |
| कार्यस्थल पर उत्पीड़न | कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार और सम्मान की कमी की शिकायतें। |
| स्थायीकरण का अभाव | अस्थायी कर्मचारी का दर्जा, जिससे नौकरी की सुरक्षा और अधिकारों का अभाव। |
| डिजिटल उपकरणों का बोझ | अनावश्यक ऐप और रिपोर्टिंग के कारण अतिरिक्त समय और प्रयास की आवश्यकता, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- आशा कार्यकर्ता (ASHA Workers)
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (Anganwadi Workers)
- मध्याह्न भोजन योजना (Midday Meal Scheme)
आगे की राह
- योजना कार्यकर्ताओं के लिए एक समान और न्यायसंगत न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की जाए, जो जीवन-यापन की लागत के अनुरूप हो।
- उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान सामाजिक सुरक्षा लाभ जैसे पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और भविष्य निधि प्रदान किए जाएं।
- कार्यभार को तर्कसंगत बनाया जाए और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के लिए उचित प्रोत्साहन या अतिरिक्त कर्मियों की व्यवस्था की जाए।
- कार्यस्थल पर उत्पीड़न और भेदभाव को रोकने के लिए सख्त नीतियां और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किए जाएं।
- योजना कार्यकर्ताओं को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की संभावनाओं का पता लगाया जाए, जिससे उनकी नौकरी की सुरक्षा और अधिकारों में सुधार हो।
- डिजिटल उपकरणों के उपयोग को सरल बनाया जाए और कार्यकर्ताओं को पर्याप्त प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए, ताकि अनावश्यक बोझ कम हो।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन किया जाए ताकि योजना कार्यकर्ताओं के मुद्दों का प्रभावी ढंग से समाधान हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
योजना श्रमिक · न्यूनतम मजदूरी · कार्यभार · सामाजिक सुरक्षा · असमानता · श्रम अधिकार · राजकोषीय दबाव · कल्याणकारी योजनाएँ · नीति निर्माण · मानवाधिकार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 39(a): आजीविका का पर्याप्त साधन
- अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाएँ
- अनुच्छेद 43: निर्वाह मजदूरी आदि
- अनुच्छेद 47: पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करना
अवधारणा प्रवाह
योजना कार्यकर्ता कम पारिश्रमिक और अधिक कार्यभार का सामना करते हैं। → बढ़ती महंगाई के कारण उनकी क्रय शक्ति कम होती है। → सामाजिक सुरक्षा लाभों की कमी से भविष्य अनिश्चित होता है। → कार्यदशाओं में सुधार की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन होते हैं। → सरकार पर उचित मजदूरी और बेहतर कार्यदशाएं प्रदान करने का दबाव बढ़ता है। → इन मांगों को पूरा करने से सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आशा कार्यकर्ताएँ राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत समुदाय-स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करती हैं।
2. आँगनवाड़ी कार्यकर्ताएँ एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना का हिस्सा हैं।
3. मध्याह्न भोजन योजना के कर्मचारी केवल प्राथमिक विद्यालयों में भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। आशा कार्यकर्ताएँ (ASHA workers) राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (National Rural Health Mission) का एक महत्वपूर्ण घटक हैं। कथन 2 भी सही है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ताएँ (Anganwadi workers) एकीकृत बाल विकास सेवा (Integrated Child Development Services – ICDS) योजना के तहत पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-विद्यालयी शिक्षा सेवाएँ प्रदान करती हैं। कथन 3 गलत है। मध्याह्न भोजन योजना (Midday Meal Scheme) के कर्मचारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों विद्यालयों में भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार हैं।
Q2. कथन (A): योजना श्रमिकों को अक्सर कम मजदूरी और अनिश्चित रोजगार का सामना करना पड़ता है।
कारण (R): ये श्रमिक प्रायः सरकारी योजनाओं के तहत संविदात्मक या मानदेय-आधारित पदों पर कार्यरत होते हैं, जहाँ नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान लाभ और सुरक्षा उपलब्ध नहीं होती।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है, क्योंकि योजना श्रमिक (scheme workers) अक्सर कम मजदूरी और अनिश्चित रोजगार की स्थितियों में काम करते हैं, जैसा कि समाचार में भी उल्लेख किया गया है। कारण (R) भी सही है और कथन (A) की सही व्याख्या करता है। इन श्रमिकों को अक्सर संविदात्मक (contractual) या मानदेय (honorarium) के आधार पर नियुक्त किया जाता है, जिससे उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों की तुलना में कम लाभ, सामाजिक सुरक्षा (social security) और नौकरी की सुरक्षा मिलती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में योजना श्रमिकों की वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। सरकार इन श्रमिकों के लिए बेहतर कार्य दशाएँ और उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करने हेतु क्या उपाय कर सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** योजना श्रमिकों (जैसे आशा, आँगनवाड़ी, मध्याह्न भोजन कर्मचारी) की भूमिका और उनके महत्व का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक परीक्षण:**
* **कम मजदूरी और मानदेय:** अक्सर न्यूनतम मजदूरी (minimum wage) से कम भुगतान।
* **कार्यभार और तनाव:** अत्यधिक कार्यभार, बहु-कार्य भूमिकाएँ और अपर्याप्त संसाधन।
* **सामाजिक सुरक्षा का अभाव:** पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व लाभ आदि जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित।
* **अनिश्चित रोजगार:** संविदात्मक प्रकृति और नौकरी की सुरक्षा का अभाव।
* **शिकायत निवारण तंत्र की कमी:** प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली का अभाव।
* **लैंगिक असमानता:** अधिकांशतः महिलाएँ होने के कारण लैंगिक असमानता (gender inequality) का प्रभाव।
3. **सरकार द्वारा किए जा सकने वाले उपाय:**
* **न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण:** सभी योजना श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी अधिनियम (Minimum Wages Act) के तहत उचित मजदूरी सुनिश्चित करना।
* **सामाजिक सुरक्षा का विस्तार:** कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), पेंशन और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं में शामिल करना।
* **कार्यभार का युक्तिकरण:** कार्यभार को कम करने और स्पष्ट कार्य-भूमिकाएँ परिभाषित करने के उपाय।
* **नियमितीकरण और संविदा सुधार:** जहाँ संभव हो, रोजगार को नियमित करना या संविदात्मक शर्तों में सुधार करना।
* **प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण:** उनके कौशल और दक्षता को बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण।
* **शिकायत निवारण तंत्र:** प्रभावी और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना।
* **बजटीय आवंटन में वृद्धि:** इन योजनाओं के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन सुनिश्चित करना।
* **मोबाइल एप्लीकेशन का युक्तिकरण:** अनावश्यक मोबाइल एप्लीकेशन के उपयोग को कम करना और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
4. **निष्कर्ष:** योजना श्रमिकों के महत्व को रेखांकित करते हुए, उनके अधिकारों और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देना।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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