राइस फोर्टिफिकेशन पर अस्थायी रोक : केन्द्र सरकार ने जारी किए नए निर्देश

राइस फोर्टिफिकेशन पर अस्थायी रोक : केन्द्र सरकार ने जारी किए नए निर्देश

मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 3 – के अंतर्गत ‘ भारतीय कृषि, भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास, भारत में खाद्य सुरक्षा, गरीबी और भूख से संबंधित मुद्दे ’ खण्ड से संबंधित।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत – ‘ कुपोषण, पीएम पोषण योजना, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK), फोर्टिफाइड चावल (FR), सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS), भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ’ खण्ड से संबंधित।

 

ख़बरों में क्यों ?

 

 

  • हाल ही में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य संबंधित कल्याणकारी योजनाओं के तहत चावल के फोर्टिफिकेशन को अस्थायी रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया है। 
  • केंद्र सरकार का यह फैसला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर द्वारा की गई एक व्यापक समीक्षा पर आधारित है। इस अध्ययन में पाया गया कि फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) में समय के साथ पोषक तत्वों का स्तर कम हो जाता है।
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर द्वारा की गई अध्ययन के अनुसार – नमी, उच्च तापमान, सापेक्ष आर्द्रता और भंडारण की खराब स्थितियाँ सूक्ष्म पोषक तत्वों (जैसे आयरन और विटामिन) की स्थिरता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं।
  • भारत के केंद्रीय भंडारों में चावल अक्सर 2 से 3 वर्षों तक रखा रहता है। इतनी लंबी अवधि तक भंडारण करने से फोर्टिफाइड चावल अपनी पोषण क्षमता खो देता है, जिससे इस पर किया जाने वाला निवेश निष्प्रभावी हो जाता है।
  • भारत में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए इस त्वरित निर्णय से चावल मिलिंग उद्योग और फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) निर्माताओं के सामने संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि उनके पास भारी मात्रा में कच्चा माल (जैसे फोलिक एसिड और प्रीमिक्स) स्टॉक में है।

 

राइस फोर्टिफिकेशन क्या होता है?

 

 

  • राइस फोर्टिफिकेशन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें साधारण चावल की पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उसमें कृत्रिम रूप से आवश्यक विटामिन और खनिज मिलाए जाते हैं।

 

राइस फोर्टिफिकेशन की मुख्य प्रक्रिया :

 

  • एक्सट्रूज़न तकनीक (Extrusion Technology) : इसमें टूटे हुए चावल को पीसकर पाउडर बनाया जाता है और उसमें पोषक तत्वों का ‘प्रीमिक्स’ मिलाया जाता है। फिर मशीन की मदद से इसे वापस चावल के दानों के आकार में ढाला जाता है, जिन्हें फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) कहते हैं।
  • मिश्रण : इन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) दानों को सामान्य चावल के साथ 1:100 के अनुपात में मिलाया जाता है (यानी 100 किलो सामान्य चावल में 1 किलो फोर्टिफाइड चावल)।
  • पोषक तत्व : इसमें मुख्य रूप से आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 मिलाया जाता है। इसके अलावा ऐच्छिक रूप से जिंक, विटामिन A और अन्य B-कॉम्प्लेक्स विटामिन भी जोड़े जा सकते हैं।
  • उपयोग : फोर्टिफाइड चावल दिखने, पकाने और स्वाद में सामान्य चावल जैसा ही होता है, जिससे उपभोक्ता के व्यवहार में बदलाव किए बिना कुपोषण से लड़ा जा सकता है।

 

भारत के लिए राइस फोर्टिफिकेशन का महत्त्व : 

 

  • भारत में ‘हिडन हंगर’ (सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। अतः भारत में राइस फोर्टिफिकेशन निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:
  • एनीमिया का मुकाबला : भारत में महिलाओं और बच्चों में एनीमिया (खून की कमी) की दर बहुत अधिक है। फोर्टिफाइड चावल में मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन के स्तर को सुधारने में मदद करता है।
  • शिशु स्वास्थ्य और जन्म दोष : फोलिक एसिड की उपस्थिति भ्रूण में ‘न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट’ (रीढ़ और मस्तिष्क के दोष) को रोकने में सहायक है।
  • तंत्रिका तंत्र की सुरक्षा : विटामिन B12 नसों की कार्यप्रणाली और DNA संश्लेषण के लिए अनिवार्य है। शाकाहारी आबादी में इसकी कमी आम है, जिसे यह चावल दूर करता है।
  • निम्न-आय वर्ग तक आसानी से व्यापक पहुँच : भारत की एक बड़ी आबादी (लगभग 65%) भोजन के मुख्य हिस्से के रूप में चावल का सेवन करती है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और मिड-डे मील के माध्यम से यह निम्न-आय वर्ग तक आसानी से पहुँच जाता है।
  • कुपोषण दूर करने का एक सस्ता और प्रभावी तरीका : अन्य चिकित्सा हस्तक्षेपों की तुलना में, चावल को फोर्टिफाई करना कुपोषण दूर करने का एक सस्ता और प्रभावी तरीका है।

 

भारत में राइस फोर्टिफिकेशन से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ : 

 

  • भारत में भले ही यह योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन इसके सफल रूप से क्रियान्वयन में देश में कई बाधाएँ और चुनौतियाँ भी विद्यमान हैं। जो निम्नलिखित है – 
  • स्थिरता और जीवनकाल का कम होना : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर के अध्ययन में जो बताया गया है, उस अध्ययन के अनुसार भारत की जलवायु (उच्च नमी और गर्मी) में इन पोषक तत्वों का जीवनकाल कम होता है। आमतौर पर 6-12 महीने बाद इनकी प्रभावकारिता घटने लगती है।
  • भंडारण और लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियाँ : भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास भंडारण चक्र लंबा है। आमतौर पर 2-3 साल पुराने चावल में फोर्टिफिकेशन का कोई लाभ नहीं बचता है।
  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संबंधी चिंताएँ : कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ‘थैलेसीमिया’ और ‘सिकल सेल एनीमिया’ से पीड़ित रोगियों के लिए अतिरिक्त आयरन हानिकारक हो सकता है। ऐसे रोगियों को फोर्टिफाइड चावल की पहचान के लिए लेबलिंग की कमी एक बड़ी चुनौती है।
  • गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन न होना : FRK के उत्पादन में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन न होना एक समस्या है। कई बार मिश्रण का अनुपात सही नहीं होता है। फलतः गुणवत्ता मानक संबंधी चुनौतियाँ भी विद्यमान रहती है। 
  • मिल मालिकों और बाज़ार का भारी आर्थिक क्षति होना : नीति में अचानक बदलाव से उन मिल मालिकों को आर्थिक क्षति हुई है जिन्होंने सरकार के निर्देश पर भारी निवेश कर मशीनें लगाई थीं।

 

समाधान की राह :

 

  • राइस फोर्टिफिकेशन के लाभों को सुरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं:
  • भंडारण अवधि में कमी (First-in, First-out) करने की जरूरत : फोर्टिफाइड चावल के लिए ‘FIFO’ (पहले आने वाला माल पहले निकले) नीति को सख्ती से लागू करना चाहिए ताकि चावल 1 साल से अधिक समय तक गोदामों में न रहे।
  • नमी-रोधी और तापमान-नियंत्रित पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करने की आवश्यकता : नमी-रोधी और तापमान-नियंत्रित पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करके सूक्ष्म पोषक तत्वों के क्षय को कम किया जा सकता है।
  • स्थानीय स्तर पर विकेंद्रीकृत खरीद और वितरण को बढ़ावा देने की जरूरत : चावल की स्थानीय स्तर पर खरीद और वितरण को बढ़ावा देना चाहिए ताकि लंबी परिवहन दूरी और लंबे भंडारण चक्र से बचा जा सके।
  • स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के प्रति लोगों को जागरूक करने एवं सटीक लेबलिंग की आवश्यकता : स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों (जैसे थैलेसीमिया) के प्रति लोगों को जागरूक करना और बोतलों/पैकेटों पर स्पष्ट चेतावनी देना अनिवार्य होना चाहिए।
  • कोटिंग तकनीक का उपयोग और तकनीकी का आधुनिक तरीके से उन्नयन करने की आवश्यकता : FRK निर्माण में ऐसी कोटिंग तकनीक का उपयोग करना चाहिए जो उच्च तापमान और नमी के प्रति अधिक प्रतिरोधी हो।
  • फसल सत्र के अनुसार नीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता : सरकार को उद्योगों के साथ समन्वय करना चाहिए और नीतियों में बदलाव फसल सत्र के अनुसार करना चाहिए ताकि चावल मिलर्स को वित्तीय घाटा न हो।

 

निष्कर्ष : 

 

 

  • भारत में पोषण सुरक्षा की दिशा में राइस फोर्टिफिकेशन एक क्रांतिकारी कदम रहा है, लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा इसे ‘अस्थायी रूप से’ रोकने के निर्णय ने एक नई बहस को जन्म दिया है। 
  • राइस फोर्टिफिकेशन भारत में कुपोषण के खिलाफ एक ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकता है, बशर्ते इसके क्रियान्वयन में वैज्ञानिक सटीकता और प्रबंधन कुशलता का आपस में कुशल हो। 
  • केंद्र सरकार द्वारा इसे ‘अस्थायी रूप से’ रोकना एक सुधारात्मक कदम माना जाना चाहिए, ताकि अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर एक अधिक मजबूत और स्थिर प्रणाली विकसित की जा सके। 
  • भारत को भविष्य में, पोषण सुरक्षा के लिए केवल चावल पर निर्भर रहने के बजाय आहार में विविधता अर्थात ‘आहार – विविधता’ को बढ़ावा देना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं बिज़नेस स्टैंडर्ड।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. भारत में राइस फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया और तकनीक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. एक्सट्रूज़न तकनीक में टूटे हुए चावल के पाउडर को पोषक तत्वों के प्रीमिक्स के साथ मिलाकर फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) तैयार किया जाता है।
  2. सामान्य चावल और फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) का मिश्रण 1:50 के अनुपात में किया जाता है।
  3. फोर्टिफाइड चावल में मुख्य रूप से आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 का समावेश अनिवार्य रूप से किया जाता है।
  4. फोर्टिफाइड चावल को पकाने की विधि और इसका स्वाद सामान्य चावल से पूरी तरह भिन्न होता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 

A. केवल कथन 1 और 2 

B. केवल कथन 1 और 3 

C. केवल कथन 2, 3 और 4 

D. कथन 1, 2, 3 और 4 सभी। 

  • उत्तर – B. केवल कथन 1 और 3.
  • व्याख्या : कथन 2 गलत है क्योंकि सामान्य चावल और फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) का सही मिश्रण अनुपात 1:100 है। 
  • कथन 4 गलत है क्योंकि फोर्टिफाइड चावल को पकाने की विधि और इसका स्वाद सामान्य चावल से पूरी तरह भिन्न नहीं होता है, बल्कि फोर्टिफाइड चावल दिखने, पकाने और स्वाद में सामान्य चावल जैसा ही होता है। अतः विकल्प B सही उत्तर है। 

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. भारत में ‘राइस फोर्टिफिकेशन’ के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। क्या आपको लगता है कि इस योजना का ‘अस्थायी निलंबन’ पोषण सुरक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक सुधारात्मक कदम है? तर्क सहित उत्तर दीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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