06 Aug लोकसभा ने पारित किया कराधान विधेयक, यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का प्रावधान शामिल
✎ कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और UPI तथा RuPay कार्ड भुगतानों पर MDR लगाने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करना है, जिससे…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोज़गार से संबंधित विषय। | GS Paper III — निवेश मॉडल। | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं उनके अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर प्रभाव।
- Prelims: कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस), MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट), भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण, डिजिटल भुगतान, RuPay कार्ड
- Essay: भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था का भविष्य और समावेशी विकास, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने में कराधान नीतियों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और UPI तथा RuPay कार्ड भुगतानों पर MDR लगाने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करना है, जिससे डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारत में डेटा केंद्रों का उपयोग करना आसान बनाना है। इसके प्रावधानों में से एक यह भी है कि यह भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करता है और सरकार को UPI तथा RuPay कार्ड भुगतानों के लिए मौजूदा शून्य-MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) व्यवस्था को बदलने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
पृष्ठभूमि
- वर्तमान में, बैंक और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को UPI और RuPay डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क लगाने से प्रतिबंधित किया गया है।
- प्रस्तावित परिवर्तनों के तहत, केंद्र सरकार को एक अधिसूचना के माध्यम से उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान विधियों या लेनदेन को निर्दिष्ट करने का अधिकार होगा जो शुल्क-मुक्त रहेंगे।
- यह विधेयक 5 जून को जारी अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट प्रदान की थी।
- यह विधेयक फंड प्रबंधकों को भारत में स्थानांतरित करने की सुविधा भी प्रदान करता है, जिससे उनके वैश्विक आय पर देश में कर लगने से रोकने के लिए आवश्यक शर्तों की संख्या कम हो जाती है।
- घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए, विधेयक उन विदेशी कंपनियों के लिए मौजूदा आयकर छूट को 2040-41 तक बढ़ाता है जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने के लिए अनुबंध निर्माताओं को नियुक्त करती हैं।
- यह विधेयक मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके आवश्यक घटकों तथा सहायक उपकरणों सहित निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की एक श्रृंखला की पहचान करता है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए, यह कानून उन विदेशी कंपनियों के लिए 15 साल की आयकर छूट का प्रस्ताव करता है जो भारत में अनुबंध निर्माताओं को आपूर्ति करने से पहले सीमा शुल्क-बंधित गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक घटकों का भंडारण करती हैं।
MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) क्या है?
- MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वह शुल्क है जो एक व्यापारी अपने ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक को भुगतान करता है।
- यह शुल्क आमतौर पर लेनदेन मूल्य के प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है।
- MDR का उद्देश्य भुगतान प्रणाली के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने और विकसित करने की लागत को कवर करना है, जिसमें पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) टर्मिनल, नेटवर्क कनेक्टिविटी और सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
- भारत में, सरकार ने डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देने के लिए UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR को शून्य कर दिया था।
- शून्य MDR व्यवस्था के कारण बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को इन लेनदेन से कोई राजस्व प्राप्त नहीं होता है, जिससे उनके लिए डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे में निवेश करना मुश्किल हो जाता है।
- प्रस्तावित विधेयक सरकार को UPI और RuPay कार्ड भुगतानों पर MDR लगाने की अनुमति देने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिससे भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
- MDR का पुन: परिचय डिजिटल भुगतान प्रदाताओं को प्रोत्साहन प्रदान कर सकता है और उन्हें नवाचार तथा बुनियादी ढांचे के विस्तार में निवेश करने में सक्षम बना सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में संशोधन | UPI और RuPay कार्ड भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है। सरकार को शुल्क-मुक्त लेनदेन निर्दिष्ट करने का अधिकार देता है। |
| विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors – FPIs) के लिए आय-कर छूट | सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर छूट। भारत में विदेशी पूंजी आकर्षित करने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए। |
| फंड प्रबंधकों के भारत में स्थानांतरण को सुगम बनाना | भारत में फंड प्रबंधकों के लिए शर्तों को कम करना ताकि उनकी वैश्विक आय देश में कराधान के दायरे में न आए। भारत को एक आकर्षक वित्तीय केंद्र बनाने के लिए। |
| इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के लिए आय-कर छूट का विस्तार | भारत में अनुबंध निर्माताओं (contract manufacturers) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली विदेशी कंपनियों के लिए 2040-41 तक आय-कर छूट का विस्तार। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए। |
| सीमा शुल्क-बंधुआ गोदामों (customs-bonded warehouses) में इलेक्ट्रॉनिक घटकों के भंडारण पर छूट | विदेशी कंपनियों के लिए 15 साल की आय-कर छूट जो भारत में अनुबंध निर्माताओं को आपूर्ति करने से पहले सीमा शुल्क-बंधुआ गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक घटकों का भंडारण करती हैं। इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए। |
| विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक ढाँचे का सरलीकरण | भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करने के लिए मौजूदा अनुमोदन और अधिसूचना आवश्यकताओं को हटाना। भारत में डेटा केंद्र उद्योग को बढ़ावा देने और ‘प्रक्रिया निश्चितता’ (process certainty) प्रदान करने के लिए। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह विधेयक भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का समर्थन करने और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए देश में डेटा केंद्रों का उपयोग करना आसान बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
- MDR प्रावधानों में बदलाव से भुगतान प्रणाली प्रदाताओं और बैंकों को UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति मिल सकती है, जिससे डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और निवेश में वृद्धि हो सकती है।
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और फंड प्रबंधकों के लिए कर छूट से भारत में निवेश का माहौल बेहतर होगा, जिससे पूंजी प्रवाह और आर्थिक संवृद्धि (economic growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के प्रावधान ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Self-Reliant India) पहल के अनुरूप हैं और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में मदद करेंगे।
रणनीतिक महत्व
- यह विधेयक भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डेटा केंद्र हब के रूप में स्थापित करने की सरकार की रणनीति का हिस्सा है, जिससे देश की तकनीकी संप्रभुता और आर्थिक लचीलापन बढ़ेगा।
- MDR पर सरकार का नियंत्रण डिजिटल भुगतान प्रणालियों के विकास को दिशा देने और वित्तीय समावेशन (financial inclusion) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश और विनिर्माण के लिए प्रोत्साहित करना भू-राजनीतिक स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
शासनिक महत्व
- यह विधेयक ‘प्रक्रिया निश्चितता’ प्रदान करता है, जिससे निवेशकों और व्यवसायों के लिए भारत में परिचालन करना आसान हो जाता है, जो ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) के लक्ष्य के अनुरूप है।
- भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम को आयकर अधिनियम से अलग करना नियामक स्पष्टता प्रदान करता है और डिजिटल भुगतान क्षेत्र के लिए एक स्वतंत्र कानूनी ढाँचा स्थापित करता है।
चुनौतियाँ
1. MDR का भार
- UPI लेनदेन पर MDR लगाने से उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान अपनाने की गति धीमी हो सकती है।
- यह वित्तीय समावेशन के प्रयासों को प्रभावित कर सकता है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहाँ डिजिटल साक्षरता और भुगतान क्षमता कम है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वित्तीय समावेशन, डिजिटल भुगतान
2. विदेशी पूंजी पर निर्भरता
- विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए कर छूट पर अत्यधिक निर्भरता घरेलू निवेश और बचत को हतोत्साहित कर सकती है।
- वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के प्रति अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलता बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश मॉडल, पूंजी बाजार
3. घरेलू उद्योग पर प्रभाव
- विदेशी कंपनियों को दी जाने वाली व्यापक कर छूट घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती पैदा कर सकती है, यदि समान प्रोत्साहन उपलब्ध न हों।
- यह घरेलू अनुसंधान और विकास (R&D) निवेश को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति, मेक इन इंडिया
4. नियामक जटिलताएँ
- विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कर छूट और प्रोत्साहन नियामक जटिलताएँ पैदा कर सकते हैं, जिससे अनुपालन लागत बढ़ सकती है।
- यह कर प्रशासन में चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: नियामक ढाँचा, कर सुधार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| UPI पर MDR | उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ, डिजिटल भुगतान अपनाने में संभावित कमी। |
| विदेशी निवेश पर कर छूट | घरेलू निवेश को हतोत्साहित करने और वैश्विक पूंजी प्रवाह पर अत्यधिक निर्भरता का जोखिम। |
| घरेलू विनिर्माण बनाम विदेशी प्रोत्साहन | विदेशी कंपनियों को व्यापक छूट से घरेलू उद्योग के लिए प्रतिस्पर्धात्मक असमानता। |
| कर प्रशासन की जटिलता | विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशिष्ट छूटों से नियामक और अनुपालन संबंधी चुनौतियाँ। |
आगे की राह
- MDR लागू करते समय, छोटे व्यापारियों और निम्न-मूल्य वाले लेनदेन के लिए रियायती या शून्य शुल्क सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि डिजिटल भुगतान के व्यापक अपनाने को बढ़ावा मिल सके।
- घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माताओं को भी समान प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान किया जाना चाहिए ताकि एक समान प्रतिस्पर्धी माहौल सुनिश्चित हो सके।
- कर छूट और प्रोत्साहनों की प्रभावशीलता का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे वांछित परिणाम दे रहे हैं और कर आधार का अनावश्यक क्षरण नहीं कर रहे हैं।
- नियामक ढाँचे को और सरल बनाया जाना चाहिए, विशेष रूप से विदेशी निवेशकों और व्यवसायों के लिए, ताकि भारत में निवेश और परिचालन की प्रक्रिया को और सुगम बनाया जा सके।
- डिजिटल भुगतान साक्षरता और बुनियादी ढाँचे में निवेश जारी रखना चाहिए, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, ताकि MDR के संभावित नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।
- भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनाने के लिए केवल कर प्रोत्साहनों पर निर्भर रहने के बजाय, बुनियादी ढाँचे के विकास, कौशल संवर्धन और अनुसंधान एवं विकास में निवेश पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक · इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण · विदेशी पूंजी · भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 · UPI और RuPay डेबिट कार्ड · मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) · शून्य-MDR व्यवस्था · डेटा केंद्र · राजकोषीय नीति · डिजिटल भुगतान · आर्थिक संवृद्धि · मेक इन इंडिया
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 265: विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया जाएगा।
- अनुच्छेद 246: संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण (सातवीं अनुसूची)।
- अनुच्छेद 110: धन विधेयक की परिभाषा (कराधान से संबंधित)।
अवधारणा प्रवाह
कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित। → भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन। → सरकार को UPI पर MDR लगाने का अधिकार। → विदेशी निवेश और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए कर छूट। → भारत में विदेशी पूंजी आकर्षित करना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना। → आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना है।
2. यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करता है।
3. वर्तमान में, UPI और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर MDR लगाने की अनुमति है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक का एक मुख्य उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करता है ताकि MDR व्यवस्था को बदला जा सके। कथन 3 गलत है क्योंकि वर्तमान में UPI और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर MDR लगाने पर प्रतिबंध है, यह विधेयक इसी व्यवस्था को बदलने का प्रावधान करता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रावधान कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 में शामिल है/हैं?
1. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट प्रदान करना।
2. भारत में फंड मैनेजरों के स्थानांतरण को सुविधाजनक बनाना।
3. अनुबंध निर्माताओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट का विस्तार करना।
4. विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक ढांचे को सरल बनाना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी चारों प्रावधान विधेयक में शामिल हैं। विधेयक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को आयकर छूट देता है, फंड मैनेजरों के स्थानांतरण को सरल बनाता है, अनुबंध निर्माताओं के लिए आयकर छूट बढ़ाता है और विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक आवश्यकताओं को कम करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए। यह विधेयक भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे प्रभावित कर सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का संक्षिप्त परिचय, इसके मुख्य उद्देश्यों (विदेशी पूंजी आकर्षित करना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना) का उल्लेख।
2. **विधेयक के प्रमुख प्रावधान:**
* भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन और UPI/RuPay पर MDR व्यवस्था में बदलाव का प्रावधान।
* विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए आयकर छूट (ब्याज आय और पूंजीगत लाभ)।
* भारत में फंड मैनेजरों के स्थानांतरण को सुविधाजनक बनाना (शर्तों में कमी)।
* अनुबंध निर्माताओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट का विस्तार (2040-41 तक)।
* सीमा शुल्क-बंधुआ गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक घटकों के भंडारण के लिए आयकर छूट।
* विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक ढांचे का सरलीकरण।
3. **इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर प्रभाव:**
* विदेशी निवेश को प्रोत्साहन (मेक इन इंडिया)।
* आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण।
* घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा।
* निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों (मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि) के उत्पादन में वृद्धि।
4. **डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव:**
* MDR व्यवस्था में संभावित बदलाव (शून्य-MDR से हटना)।
* भुगतान सेवा प्रदाताओं और बैंकों के लिए राजस्व मॉडल में परिवर्तन।
* उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर संभावित शुल्क का प्रभाव।
* डिजिटल लेनदेन की लागत और पहुंच पर बहस।
* RBI के MDR प्रस्तावों का संदर्भ।
5. **निष्कर्ष:** विधेयक के संभावित लाभ (आर्थिक संवृद्धि, रोजगार सृजन) और डिजिटल भुगतान पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों का संतुलित मूल्यांकन।
स्रोत: Times of India
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments