07 Aug लोकसभा ने पास किया टैक्स संशोधन बिल: जानिए UPI और ऑफशोर फंड्स पर क्या बदला?
✎ कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करके सरकार को UPI लेनदेन पर MDR शुल्क लगाने की अनुमति देना है, ताकि डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। | GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप तथा उनके डिज़ाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
- Prelims: भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस), मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR), डिजिटल भुगतान, राजकोषीय नीतियाँ, वित्तीय समावेशन
- Essay: डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन: चुनौतियाँ एवं अवसर, भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था का भविष्य: नीतियाँ और प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करके सरकार को UPI लेनदेन पर MDR शुल्क लगाने की अनुमति देना है, ताकि डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाया जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में लोकसभा ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। इस विधेयक का उद्देश्य भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करना है, जिससे सरकार को बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस) तथा अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति मिल सकेगी। यह संशोधन मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाता है जो इन संस्थाओं को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज करने से रोकता था।
पृष्ठभूमि
- वर्तमान में, UPI लेनदेन पर कोई MDR शुल्क नहीं लगता है, जिससे यह उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए निःशुल्क है।
- RTGS (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) और NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर) जैसे अन्य वास्तविक समय के भुगतान माध्यमों पर सेवा शुल्क लागू होते हैं।
- सरकार का उद्देश्य बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाना है, ताकि भारत में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की निरंतरता और वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
- यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम को आयकर अधिनियम से अलग करने का भी प्रस्ताव करता है, जिससे सरकार को सीधे विधायी समायोजन के बिना शून्य-MDR ढांचे को संशोधित करने का कानूनी अधिकार मिलेगा।
- विपक्षी दलों के विरोध के बीच बिना किसी चर्चा के यह विधेयक लोकसभा में पारित किया गया।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है?
- मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो एक व्यापारी अपने ग्राहकों से डेबिट या क्रेडिट कार्ड, या अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक को भुगतान करता है।
- यह शुल्क आमतौर पर लेनदेन मूल्य के प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है।
- MDR बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और कार्ड नेटवर्क के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो उन्हें भुगतान बुनियादी ढांचे को बनाए रखने और उन्नत करने में मदद करता है।
- भारत में, सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कुछ समय के लिए UPI लेनदेन पर MDR को शून्य कर दिया था।
- MDR का उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल विभिन्न हितधारकों (जैसे जारीकर्ता बैंक, अधिग्रहणकर्ता बैंक और भुगतान नेटवर्क) की लागतों को कवर करना है।
- यह शुल्क व्यापारियों के लिए एक लागत है, जिसे वे या तो स्वयं वहन करते हैं या इसे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल करके उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन | यह सरकार को बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार देता है। |
| मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) प्रावधान को हटाना | यह मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाता है जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड पर MDR शुल्क लेने से रोकता था। |
| राजकोषीय और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 | यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करता है। |
| UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की संभावना | यह बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाने में मदद कर सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की निरंतरता और विकास सुनिश्चित होगा। |
| आयकर अधिनियम से भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम का अलगाव | यह सरकार को शून्य-MDR ढांचे को सीधे विधायी समायोजन के बिना संशोधित करने का कानूनी अधिकार देता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह संशोधन बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए राजस्व का एक स्थायी मॉडल बनाने में मदद करेगा, जिससे भारत में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र का विकास सुनिश्चित होगा।
- MDR शुल्क लगाने की अनुमति से इन संस्थाओं को परिचालन लागत को कवर करने और नवाचार में निवेश करने में मदद मिल सकती है, जिससे डिजिटल भुगतान का विस्तार होगा।
- यह विधेयक भारत को वैश्विक पूंजी, विनिर्माण और व्यापार के लिए एक अधिक आकर्षक और अनुमानित स्थान बनाने का लक्ष्य रखता है, जिससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह सरकार को डिजिटल भुगतान नीतियों में अधिक लचीलापन प्रदान करता है, जिससे वह बदलती आर्थिक और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुसार MDR ढांचे को समायोजित कर सके।
- यह विधेयक आयकर अधिनियम (Income Tax Act) से भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम (Payment and Settlement Systems Act) को अलग करता है, जिससे सरकार को शून्य-MDR ढांचे को संशोधित करने का कानूनी अधिकार मिलता है।
सामाजिक प्रभाव
- हालांकि वर्तमान में उपभोक्ताओं के लिए UPI लेनदेन मुफ्त हैं, भविष्य में शुल्क लगने की संभावना है, जिससे डिजिटल लेनदेन की लागत बढ़ सकती है।
- व्यापारियों को UPI लेनदेन पर संभावित शुल्क के कारण बढ़ी हुई लागत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे मूल्य निर्धारण और उपभोक्ता व्यवहार प्रभावित हो सकता है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल समावेशन पर प्रभाव
- UPI लेनदेन पर शुल्क लगने से छोटे व्यापारी और कम आय वाले उपभोक्ता डिजिटल भुगतान से दूर हो सकते हैं, जिससे वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के प्रयासों को झटका लग सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वित्तीय समावेशन
2. उपभोक्ता और व्यापारी पर बोझ
- MDR शुल्क लागू होने से व्यापारियों की परिचालन लागत बढ़ेगी, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर कीमतों में वृद्धि के रूप में पड़ सकता है।
- यह डिजिटल लेनदेन को महंगा बना सकता है, जिससे नकदी-आधारित लेनदेन की ओर वापसी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: उपभोक्ता संरक्षण
3. डिजिटल भुगतान की वृद्धि पर असर
- शून्य-MDR नीति ने UPI को व्यापक रूप से अपनाने में मदद की है। शुल्क लगाने से इसकी लोकप्रियता और उपयोग की दर धीमी हो सकती है, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: डिजिटल अर्थव्यवस्था
4. राजस्व मॉडल की स्थिरता
- हालांकि यह बैंकों के लिए राजस्व मॉडल को मजबूत करने के लिए है, अत्यधिक शुल्क लगाने से लेनदेन की मात्रा कम हो सकती है, जिससे अपेक्षित राजस्व लाभ प्राप्त नहीं हो पाएगा।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: बैंकिंग क्षेत्र
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| UPI लेनदेन पर शुल्क | उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है। |
| डिजिटल समावेशन | शुल्क लगने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन को अपनाने की गति धीमी हो सकती है, जिससे वित्तीय समावेशन के लक्ष्य प्रभावित होंगे। |
| प्रतिस्पर्धा और नवाचार | यदि शुल्क अत्यधिक होते हैं, तो यह नए भुगतान समाधानों के लिए नवाचार को हतोत्साहित कर सकता है और UPI की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम कर सकता है। |
| पारदर्शिता और विनियमन | शुल्क संरचना और उसके विनियमन में पारदर्शिता की कमी से हितधारकों के बीच अनिश्चितता और अविश्वास पैदा हो सकता है। |
आगे की राह
- सरकार को MDR शुल्क के लिए एक संतुलित और प्रगतिशील ढांचा विकसित करना चाहिए, जो बैंकों के राजस्व हितों और उपभोक्ताओं/व्यापारियों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करे।
- छोटे व्यापारियों और कम मूल्य वाले लेनदेन के लिए रियायती या शून्य MDR जारी रखने पर विचार किया जाना चाहिए ताकि डिजिटल समावेशन को बढ़ावा दिया जा सके।
- शुल्क संरचना के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि उपभोक्ताओं और व्यापारियों को संभावित परिवर्तनों के बारे में सूचित किया जा सके।
- डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए एक नियामक सैंडबॉक्स (Regulatory Sandbox) दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
- शुल्क के प्रभावों का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए और आवश्यकतानुसार नीतिगत समायोजन किए जाने चाहिए ताकि डिजिटल भुगतान की वृद्धि और स्वीकार्यता सुनिश्चित हो सके।
- भुगतान सेवा प्रदाताओं को अपनी दक्षता बढ़ाने और लागत कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि शुल्क का बोझ कम हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 · UPI लेनदेन · मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) · डिजिटल भुगतान · राजस्व मॉडल · वित्तीय समावेशन · आर्थिक संवृद्धि · कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 · डिजिटल अर्थव्यवस्था · नीतिगत निर्णय · भुगतान सेवा प्रदाता · शून्य MDR ढांचा
अवधारणा प्रवाह
लोकसभा ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया। → यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करता है। → संशोधन बैंकों को UPI लेनदेन पर MDR शुल्क लगाने की अनुमति देता है। → इसका उद्देश्य बैंकों के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाना है। → संभावित रूप से उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए UPI लेनदेन की लागत बढ़ सकती है। → यह डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य को प्रभावित करेगा।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करना है।
2. यह विधेयक बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति देता है।
3. वर्तमान में, UPI लेनदेन उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क हैं, लेकिन विधेयक भविष्य में शुल्क लगाने की अनुमति देता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई भी नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक का उद्देश्य भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करना है। कथन 2 सही है क्योंकि विधेयक बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति देने का प्रावधान करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि वर्तमान में UPI लेनदेन उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क हैं, लेकिन विधेयक सरकार को भविष्य में इस ढांचे को संशोधित करने की शक्ति देता है, जिससे शुल्क लग सकते हैं।
Q2. अभिकथन (A): कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाना है।
कारण (R): यह विधेयक बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति देकर ऐसा करता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि विधेयक का एक मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाना है। कारण (R) भी सही है और यह A का सही स्पष्टीकरण है क्योंकि MDR लगाने की अनुमति देकर ही एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाया जा सकता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। हाल ही में पारित कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के संदर्भ में, UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के संभावित प्रभावों का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: UPI की संक्षिप्त परिभाषा और भारत में डिजिटल भुगतान में इसकी महत्ता।
2. UPI की भूमिका का परीक्षण:
a. वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) में योगदान।
b. लेनदेन की सुगमता और गति।
c. लागत-प्रभावीता और पारदर्शिता।
d. छोटे व्यवसायों और ग्रामीण क्षेत्रों पर प्रभाव।
e. डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।
3. कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का संदर्भ:
a. विधेयक के मुख्य प्रावधान: भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन।
b. MDR लगाने की अनुमति का प्रावधान।
c. शून्य-MDR ढांचे को समाप्त करने का उद्देश्य (बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए राजस्व मॉडल)।
4. MDR लगाने के संभावित प्रभावों का मूल्यांकन:
a. सकारात्मक प्रभाव: बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए स्थायी राजस्व मॉडल, बुनियादी ढांचे में निवेश, नवाचार को बढ़ावा।
b. नकारात्मक प्रभाव: व्यापारियों पर लागत का बोझ, उपभोक्ताओं पर संभावित शुल्क, UPI अपनाने की गति पर प्रभाव, छोटे व्यापारियों पर प्रतिकूल असर।
c. संतुलन की आवश्यकता: सरकार की भूमिका और नीतिगत निर्णय।
5. निष्कर्ष: डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और सभी हितधारकों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: Mint
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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