20 Jul विश्व व्यापार संगठन में भारत की 8वीं व्यापार नीति समीक्षा 2026: प्रमुख बिंदु और तैयारी
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, भारत और विश्व व्यापार संगठन | GS Paper III — अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोज़गार, सरकारी बजट, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक संवृद्धि पर इनका प्रभाव
- Prelims: विश्व व्यापार संगठन (WTO), व्यापार नीति समीक्षा (TPR), वाणिज्य सचिव, मुक्त व्यापार समझौता (FTA), वस्तु एवं सेवा कर (GST), एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI)
- Essay: वैश्वीकरण के युग में भारत की आर्थिक संवृद्धि और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की भूमिका, बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में भारत की बढ़ती भूमिका और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: विश्व व्यापार संगठन की व्यापार नीति समीक्षा एक महत्वपूर्ण पारदर्शिता तंत्र है जो सदस्य देशों की व्यापार नीतियों का आकलन कर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में पारदर्शिता और समझ को बढ़ावा देता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भारत की 8वीं व्यापार नीति समीक्षा (TPR) बैठक 21 और 23 जुलाई 2026 को निर्धारित है। इस समीक्षा में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल करेंगे। यह समीक्षा 1 जनवरी 2021 से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि को कवर करेगी और भारत की व्यापार नीतियों, आर्थिक प्रदर्शन तथा सुधारों का आकलन करेगी।
पृष्ठभूमि
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सभी सदस्य देशों की व्यापार नीतियों की नियमित अंतराल पर समीक्षा की जाती है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता और समझ को बढ़ाना है।
- समीक्षा का अंतराल विश्व व्यापार में सदस्य देश की हिस्सेदारी पर निर्भर करता है; भारत की समीक्षा हर पाँच साल में एक बार की जाती है।
- यह समीक्षा दो मुख्य दस्तावेज़ों पर आधारित होती है: संबंधित सदस्य द्वारा प्रस्तुत नीतिगत बयान (सरकारी रिपोर्ट) और WTO सचिवालय द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट।
- भारत के लिए 8वीं TPR प्रक्रिया जून 2025 में शुरू हुई, जिसमें वाणिज्य विभाग ने 100 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के साथ परामर्श किया।
- समीक्षा अवधि (2021-2025) के दौरान, भारतीय अर्थव्यवस्था ने महामारी के बाद उल्लेखनीय लचीलापन और तीव्र विकास दर प्रदर्शित की है, जिससे यह प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है।
- 2025-26 में, वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 863.1 अरब अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया, जो 2021-22 की तुलना में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
व्यापार नीति समीक्षा (Trade Policy Review – TPR) क्या है?
- व्यापार नीति समीक्षा (TPR) विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पारदर्शिता तंत्र है।
- इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों की व्यापार नीतियों और प्रथाओं की व्यापक समीक्षा करना है।
- इसमें सीमा शुल्क (border) और सीमा के भीतर (behind-the-border) के कई उपाय शामिल होते हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करते हैं।
- TPR का लक्ष्य WTO में पारदर्शिता, पूर्वानुमान और सदस्य देशों की व्यापार नीतियों की बेहतर समझ को बढ़ावा देना है।
- यह समीक्षा व्यापार नीति समीक्षा निकाय (Trade Policy Review Body – TPRB) द्वारा आयोजित की जाती है, जिसमें WTO के सभी सदस्य देश शामिल होते हैं।
- समीक्षा के दौरान, सदस्य देश अपनी नीतियों पर प्रश्न पूछते हैं और संबंधित देश अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
- भारत की 8वीं TPR में डिजिटलीकरण, MSME, अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी, विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत अभियान जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- भारत की पिछली समीक्षाओं में व्यापार उदारीकरण, निवेश नीतियों और कृषि सुधारों जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| नियमित समीक्षा | विश्व व्यापार में सदस्य देश की हिस्सेदारी के आधार पर समीक्षा अंतराल का निर्धारण, भारत के लिए हर पाँच साल में। |
| दो मुख्य दस्तावेज़ | समीक्षा सदस्य देश द्वारा प्रस्तुत नीतिगत बयान (सरकारी रिपोर्ट) और WTO सचिवालय द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर। |
| व्यापक अवधि | आठवीं TPR में 1 जनवरी 2021 से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि शामिल है, जो हालिया आर्थिक प्रदर्शन का आकलन करती है। |
| बहु-मंत्रालयी परामर्श | वाणिज्य विभाग ने 100 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के परामर्श से रिपोर्ट तैयार की, जो नीति निर्माण की व्यापकता को दर्शाता है। |
| पारदर्शिता तंत्र | TPR WTO के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पारदर्शिता तंत्र है, जो सदस्य देशों की व्यापार नीतियों की व्यापक समीक्षा करता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह समीक्षा भारत के आर्थिक लचीलेपन और तीव्र विकास दर को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करती है, विशेषकर महामारी के बाद की रिकवरी में।
- निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि (2025-26 में 863.1 अरब अमेरिकी डॉलर) भारत की बढ़ती वैश्विक व्यापारिक स्थिति को रेखांकित करती है।
- मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के माध्यम से व्यापारिक साझेदारों के साथ भारत की मजबूत भागीदारी को उजागर करती है, जिससे भविष्य के व्यापारिक संबंधों को मजबूती मिलती है।
नीतिगत महत्व
- GST संरचना के युक्तिकरण और सरलीकरण जैसे कर सुधारों तथा UPI जैसी डिजिटल पहलों को वैश्विक समुदाय के सामने प्रस्तुत करने का मंच है।
- यह समीक्षा भारत को अपनी ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ जैसी प्रमुख पहलों और उनके व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों को स्पष्ट करने का अवसर देती है।
- अन्य सदस्य देशों द्वारा पूछे गए 900 से अधिक प्रश्न भारत की नीतियों और आर्थिक मॉडल में उनकी गहरी रुचि को दर्शाते हैं, जो नीति निर्माण में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया को समझने में मदद करता है।
रणनीतिक महत्व
- यह भारत को WTO के भीतर अपनी व्यापार नीतियों, दृष्टिकोण और भविष्य के विजन को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने का अवसर देता है।
- यह पारदर्शिता तंत्र भारत को अन्य सदस्य देशों की व्यापार नीतियों को समझने और अपनी नीतियों को अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप ढालने में सहायता करता है।
- यह भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और व्यापारिक स्थिति को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं में भारत की स्थिति मजबूत होती है।
चुनौतियाँ
1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों का अनुपालन
- WTO के नियमों और समझौतों के साथ घरेलू नीतियों को संरेखित करना एक सतत चुनौती है, खासकर जब भारत अपनी विकासशील अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करता है।
- कृषि सब्सिडी, बौद्धिक संपदा अधिकार और सेवाओं में व्यापार जैसे क्षेत्रों में WTO के नियमों का पालन करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना जटिल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: WTO और भारत
2. संरक्षणवादी प्रवृत्तियाँ
- वैश्विक स्तर पर बढ़ती संरक्षणवादी प्रवृत्तियाँ और व्यापार बाधाएँ भारत के निर्यात लक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं।
- कुछ विकसित देशों द्वारा लगाई गई गैर-टैरिफ बाधाएँ और तकनीकी व्यापार बाधाएँ भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को सीमित कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
3. विकासशील देशों की विशेष और विभेदक व्यवहार की मांग
- भारत जैसे विकासशील देश WTO में ‘विशेष और विभेदक व्यवहार’ (Special and Differential Treatment) की मांग करते हैं, लेकिन विकसित देश अक्सर इसका विरोध करते हैं, जिससे वार्ताएँ जटिल हो जाती हैं।
- यह सुनिश्चित करना कि WTO के नियम विकासशील देशों को अपनी अर्थव्यवस्थाओं को विकसित करने के लिए पर्याप्त नीतिगत स्थान प्रदान करें, एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: WTO के विकासशील देश
4. डिजिटलीकरण और संबंधित सुधारों पर प्रश्न
- अन्य सदस्य देशों द्वारा डिजिटलीकरण और संबंधित सुधारों पर उठाए गए प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर देना, यह सुनिश्चित करते हुए कि ये सुधार WTO के सिद्धांतों के अनुरूप हैं।
- डिजिटल व्यापार के लिए एक वैश्विक ढांचा विकसित करने में भारत की भूमिका और उसके निहितार्थों को स्पष्ट करना।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: डिजिटल अर्थव्यवस्था और व्यापार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| वैश्विक व्यापार अनिश्चितताएँ | भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा भारत के व्यापार प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। |
| WTO में सुधार | WTO की विवाद निपटान प्रणाली का निष्क्रिय होना और नए नियमों पर आम सहमति का अभाव वैश्विक व्यापार शासन को कमजोर करता है। |
| पर्यावरण और श्रम मानक | विकसित देशों द्वारा व्यापार को पर्यावरण और श्रम मानकों से जोड़ने का दबाव भारत के निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। |
| MSME का एकीकरण | सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करना और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना। |
| महिलाओं की भागीदारी | अर्थव्यवस्था और व्यापार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करना और चुनौतियों का समाधान करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- आत्मनिर्भर भारत अभियान
- विकसित भारत
आगे की राह
- WTO के नियमों के अनुरूप अपनी व्यापार नीतियों को और अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमानित बनाना।
- मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के माध्यम से प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करना और नए बाजारों की तलाश करना।
- निर्यात विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित करना, विशेषकर उच्च मूल्य वर्धित वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देना।
- घरेलू उद्योगों, विशेषकर MSME को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने हेतु क्षमता निर्माण और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देना।
- डिजिटल व्यापार और ई-कॉमर्स के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा विकसित करना, जो नवाचार को बढ़ावा दे और उपभोक्ता हितों की रक्षा करे।
- WTO के भीतर विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग करना और सुधारों की वकालत करना।
- पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) मानकों के बढ़ते महत्व को ध्यान में रखते हुए व्यापार नीतियों को संरेखित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विश्व व्यापार संगठन (WTO) · व्यापार नीति समीक्षा (TPR) · भारत का विदेशी व्यापार · आर्थिक लचीलापन · डिजिटल पहलें · मुक्त व्यापार समझौते (FTA) · वस्तु एवं सेवा कर (GST) · आत्मनिर्भर भारत अभियान · विकसित भारत · पारदर्शिता तंत्र
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में विदेशी व्यापार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 253’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी करना’}
अवधारणा प्रवाह
भारत की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) WTO में निर्धारित होती है। → वाणिज्य सचिव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भारत की रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। → WTO सचिवालय भी भारत की व्यापार नीतियों पर एक रिपोर्ट तैयार करता है। → अन्य सदस्य देश भारत की नीतियों पर प्रश्न पूछते हैं और बयान देते हैं। → यह प्रक्रिया भारत की व्यापार नीतियों में पारदर्शिता और समझ बढ़ाती है। → भारत को अपनी आर्थिक उपलब्धियों और भविष्य के विजन को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. TPR का उद्देश्य सदस्य देशों की व्यापार नीतियों में पारदर्शिता और पूर्वानुमान को बढ़ाना है।
2. भारत जैसे सदस्य देशों की TPR हर पाँच साल में एक बार की जाती है।
3. TPR केवल सदस्य देश द्वारा प्रस्तुत नीतिगत बयान के आधार पर की जाती है, WTO सचिवालय की रिपोर्ट पर नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि TPR WTO के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पारदर्शिता तंत्र है। कथन 2 भी सही है क्योंकि भारत की नीति समीक्षा हर पाँच साल में एक बार की जाती है। कथन 3 गलत है क्योंकि समीक्षा सदस्य द्वारा प्रस्तुत नीतिगत बयान और WTO सचिवालय द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट, दोनों के आधार पर की जाती है।
Q2. हाल ही में संपन्न हुई भारत की 8वीं व्यापार नीति समीक्षा (TPR) के दौरान, भारत की किन उपलब्धियों को उजागर किया गया है?
1. विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से व्यापारिक साझेदारों के साथ मजबूत भागीदारी।
2. वस्तु एवं सेवा कर (GST) संरचना का युक्तिकरण और सरलीकरण जैसे कर सुधार।
3. एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) और व्यापार सुगमता के लिए डिजिटल उपकरणों को शामिल करना।
4. महामारी के बावजूद आर्थिक विकास दर में निरंतर गिरावट।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 2 और 3
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — कथन 1, 2 और 3 सही हैं, क्योंकि ये सभी भारत की 8वीं TPR में उजागर की गई उपलब्धियाँ हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि समीक्षा अवधि के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था ने महामारी के बाद ज़बरदस्त वापसी की और तेज़ विकास दर बनाए रखी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विश्व व्यापार संगठन (WTO) की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) एक महत्वपूर्ण पारदर्शिता तंत्र है। भारत की हालिया 8वीं TPR के संदर्भ में, इसके महत्व और भारत के आर्थिक प्रदर्शन तथा व्यापार नीतियों पर इसके प्रभाव का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत TPR के महत्व और उद्देश्यों को बताते हुए करें। फिर भारत की 8वीं TPR के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालें, जिसमें समीक्षा अवधि, भारत का आर्थिक लचीलापन, विदेशी व्यापार में वृद्धि और डिजिटल पहलें तथा कर सुधार जैसी प्रमुख उपलब्धियाँ शामिल हों। अंत में, TPR के माध्यम से भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति पर पड़ने वाले प्रभावों और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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