14 Aug विश्व हाथी दिवस 2025 : पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण बनाम संघर्ष
पाठ्यक्रम – मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र – 3 के अंतर्गत – पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता, मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे, कारण, प्रभाव और एवं समाधान की राह।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए – वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), विश्व हाथी दिवस 2025, एशियाई हाथी, IUCN रेड लिस्ट, प्रोजेक्ट एलिफेंट, हाथियों की अवैध हत्या की निगरानी (MIKE) कार्यक्रम, पर्यावरण
खबरों में क्यों

- हाल ही में 12 अगस्त, 2025 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) द्वारा तमिलनाडु के कोयंबटूर में विश्व हाथी दिवस (World Elephant Day) का आयोजन किया गया।
- इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय “मानव-हाथी संघर्ष” पर केंद्रित रहा, जो वर्तमान में हाथियों के संरक्षण के सबसे जटिल मुद्दों में से एक है।
- यह दिवस हाथियों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और लोगों में हाथियों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।
भारत में हाथी संरक्षण की स्थिति और पारिस्थितिकी तंत्र को नियंत्रित करने में हाथियों महत्व :

- भारत, विश्व के जंगली एशियाई हाथियों का घर है। यहाँ दुनिया के लगभग 60% हाथी पाए जाते हैं, जिनमें भारतीय हाथी की उप-प्रजाति विशेषकर भारतीय हाथी ( एलिफस मैक्सिमस इंडिकस – Elephas maximus indicus ) प्रमुख है।
- हाथी हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण संरक्षक हैं। इन्हें पारिस्थितिकी तंत्र का ‘इंजीनियर’ भी कहा जाता है क्योंकि ये बीज फैलाने, पौधों के पोषण चक्र को बनाए रखने और जलवायु संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- हाथी न केवल ‘कीस्टोन प्रजाति’ (जिसका अर्थ है कि ये पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को नियंत्रित करते हैं), बल्कि ‘अम्ब्रेला प्रजाति’ भी हैं, क्योंकि इनके संरक्षण से कई अन्य प्रजातियाँ भी सुरक्षित रहती हैं। इसके साथ ही ये ‘फ्लैगशिप प्रजाति’ के रूप में काम करते हैं, यानी संरक्षण अभियान का चेहरा हैं।
- भारत में एशियाई हाथी मुख्य रूप से दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व और मध्य भारत के जंगलों में पाए जाते हैं।
- वर्तमान में लगभग 28,000 से 30,000 हाथी चार बड़े क्षेत्रीय निवासों में फैले हुए हैं। इस वजह से इनके आवास और प्रवासन गलियारों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
हाथियों की संरक्षण की वर्तमान स्थिति :
- एशियाई हाथी आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में लुप्तप्राय (Vulnerable) प्रजाति के रूप में दर्ज हैं।
- भारत में इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अनुसूची I में रखा गया है, जो इसे उच्चतम संरक्षण स्तर प्रदान करता है।
- इसके अतिरिक्त, CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) के तहत हाथियों की अंतरराष्ट्रीय व्यापार करना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
- सन 1992 में केंद्र सरकार ने MoEF&CC के अंतर्गत प्रोजेक्ट एलीफेंट शुरू किया था।
- इस योजना के तहत 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हाथियों के संरक्षण, उनके आवासों की सुरक्षा, और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए कदम उठाए जाते हैं।
- वर्तमान में यह योजना प्रोजेक्ट टाइगर के साथ विलय कर ‘ प्रोजेक्ट टाइगर और एलीफेंट ’ के नाम से संचालित हो रही है।

हाथी – मानव संघर्ष को कम करने के लिए नवीन संरक्षण प्रयास और तकनीक :
- हाथी-मानव संघर्ष को कम करने के लिए कई अभिनव तकनीकों को अपनाया जा रहा है। इनमें से एक प्रोजेक्ट री-हैब है, जिसे खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा चलाया जा रहा है।
- इसमें मधुमक्खी के छत्ते का उपयोग किया जाता है। हाथी मधुमक्खियों से डरते हैं, इसलिए उनके रास्ते में मधुमक्खी के बक्से रखकर हाथियों को गांवों और फसलों से दूर रखा जाता है।
- इससे न केवल हाथियों और मनुष्यों की जान बचती है, बल्कि किसानों को शहद बेचकर आय भी होती है।
- इसके अलावा, भूमि उपयोग, आवास के खंडित होने की निगरानी के लिए आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकें, जैसे उपग्रह डेटा और भूमि उपयोग/आवरण विश्लेषण, प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत उपयोग में लाई जा रही हैं।
भारत में हाथी संरक्षण की प्रमुख उपलब्धियां :
- भारत में जंगली हाथियों की आबादी पिछले कुछ दशकों में स्थिर या बढ़ी है। वर्ष 2007 में लगभग 27,700 के करीब थी, जो 2017 में बढ़कर लगभग 30,000 हो गई। इसके लिए 14 राज्यों में 33 हाथी अभयारण्यों की स्थापना की गई है, जो हाथियों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करते हैं। ये अभयारण्य न केवल हाथियों बल्कि अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित क्षेत्र हैं।
- इसके अतिरिक्त, 15 राज्यों में वन विभागों ने 150 से अधिक हाथी गलियारों की पहचान कर उनकी जमीन पर जांच-पड़ताल की है, जिससे खंडित आवासों को जोड़कर हाथियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
विश्व हाथी दिवस का मुख्य उद्देश्य और महत्व :
- विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त को मनाया जाता है।
- इसकी शुरुआत 2012 में कनाडा की पेट्रीशिया सिम्स और थाईलैंड के एलिफेंट रीइंट्रोडक्शन फाउंडेशन ने की थी।
- इसका मकसद हाथियों के संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इस दिशा में प्रेरित करना है।
- विश्व हाथी दिवस के माध्यम से लाखों लोग हाथियों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाते हैं और संरक्षण की मांग करते हैं।
- आज विश्व के 100 से अधिक संगठन इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
हाथियों से संबंधित कुछ रोचक तथ्य :

- हाथी तीन प्रमुख प्रजातियों में पाए जाते हैं: अफ्रीकी सवाना हाथी, अफ्रीकी वन हाथी, और एशियाई हाथी।
- अफ्रीकी हाथियों के कान बड़े और महाद्वीप के आकार के समान होते हैं, जबकि एशियाई हाथियों के कान छोटे और भारतीय उपमहाद्वीप के आकार से मिलते-जुलते हैं।
- अफ्रीकी हाथियों की सूंड के सिर पर दो ‘उंगलियां’ होती हैं, जबकि एशियाई हाथियों की सूंड पर केवल एक ‘उंगली’ होती है।
- दुनिया का सबसे बड़ा स्थलीय जीव अफ्रीकी सवाना हाथी है।
- हाथी लगभग 65 वर्ष तक जीवित रह सकते हैं।
- मादा हाथी लगभग 11 वर्ष की उम्र में यौवनावस्था में प्रवेश करती हैं और उनकी गर्भावस्था लगभग 22 महीने की होती है। वे 40 वर्ष की उम्र तक प्रजनन में सक्षम रहती हैं।
- हाथी सामाजिक प्राणी हैं जिनका परिवार मातृप्रधान होता है, जहाँ सबसे बुजुर्ग मादा परिवार की नेतृत्व करती है।
- उनकी दाँत को हाथीदांत कहा जाता है, जिसका अवैध व्यापार उनके लिए सबसे बड़ा खतरा है।
- हाथी संवाद के लिए ध्वनि, स्पर्श, गंध और यहां तक कि भूकंपीय कंपन का उपयोग करते हैं।
- पिछले सौ वर्षों में अफ्रीकी हाथियों की संख्या में 90% की कमी आ गई है, जबकि देश में एशियाई हाथियों की संख्या आधी से भी कम रह गई है।
भारत में हाथी संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ :

- हाथियों और ट्रेन के बीच होने वाली टक्कर : वर्ष 2009 से 2024 के बीच खासकर असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल और उत्तराखंड में लगभग 186 हाथी ट्रेन की चपेट में आए हैं। इसके कारण रेलवे पटरियों का गलियारों से गुजरना, कम दृश्यता, तेज़ ट्रेन की रफ्तार और चेतावनी प्रणाली की कमी प्रमुख हैं।
- आवास विखंडन और उससे उत्पन्न हानि : मानव बस्तियों के विस्तार, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचागत विकास के कारण हाथियों के जंगल छोटे-छोटे खंडों में टूट गए हैं। इससे हाथी अपने पारंपरिक आवास और प्रवासन मार्ग खो रहे हैं।
- मानव और हाथियों के बीच होने वाले आपसी संघर्ष : जब हाथियों का आवास सिकुड़ता है, तो वे गांवों और खेतों की ओर बढ़ते हैं, जिससे फसलें नष्ट होती हैं और मनुष्य तथा हाथी दोनों की जान जाती है। इस संघर्ष में हर साल लगभग 400-500 लोग और 60 से अधिक हाथी मरते हैं।
- जलवायु परिवर्तन का प्रभाव : अनियमित वर्षा, सूखा और बाढ़ जैसी चरम जलवायु घटनाओं के कारण हाथियों के प्राकृतिक जल और भोजन स्रोत प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वे मानव बस्तियों के करीब आते हैं।
- हाथियों का अवैध शिकार : हाथीदांत के अवैध व्यापार के कारण नर हाथियों का शिकार होता है, जिससे लिंगानुपात बिगड़ता है। इसके अलावा मांस, त्वचा, और पूँछ के बालों के लिए भी अवैध शिकार जारी है।
- बुनियादी ढांचे से उत्पन्न खतरे : बिजली के नीचे लटकी तारों से करंट लगना, घातक फंदे या जाल और खुले कुओं में गिरने की घटनाएं हाथियों के लिए जानलेवा साबित होती हैं।
हाथियों के संरक्षण के लिए आगे / समाधान की राह :
- हाथियों और ट्रेन के बीच होने वाली टक्करों को रोकना : रेलवे ट्रैक पर अंडरपास, ओवरपास, और घुसपैठ पहचान प्रणाली (IDS) लगाकर हाथियों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकती है। इससे ट्रेन चालकों को पूर्व चेतावनी मिल सकेगी।
- प्राकृतिक और तकनीकी उपायों से दुर्घटनाओं को रोकने की आवश्यकता : खेतों के चारों ओर मिर्च पाउडर और इंजन तेल की फेंसिंग लगाना, और मधुमक्खी के छत्ते लगाकर हाथियों को फसलों से दूर रखना प्रभावी उपाय हैं। केला और नेपियर घास जैसी ट्रैप फसलें भी हाथियों को मुख्य फसलों से दूर रखने में मदद करती हैं।
- आवास संरक्षण की आवश्यकता : भूमि अधिग्रहण रोकना, ग्रामसभा की सहमति से पुनर्वास करना और खंडित आवासों को जोड़ना आवश्यक है।
- हाथियों की गतिविधि की निगरानी के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की आवश्यकता : GPS कॉलर ट्रैकिंग के जरिए हाथियों की गतिविधि की निगरानी कर सकते हैं। इससे प्रवासन मार्ग और संघर्ष क्षेत्र का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।
- शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी की जरूरत : स्थानीय समुदायों को संरक्षण में शामिल करना, हाथी संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और गैर-घातक संघर्ष प्रबंधन के प्रशिक्षण प्रदान करना जरूरी है।
निष्कर्ष :

- हाथियों का संरक्षण मात्र एक पारिस्थितिकीय प्रयास नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की निरंतरता का प्रतीक है। ये जीव न केवल वनों की आत्मा हैं, बल्कि उनके संरक्षण से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिरता मिलती है।
- आज जब मानव गतिविधियों के चलते जंगल सिमट रहे हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव गहराते जा रहे हैं, ऐसे समय में हाथियों और मनुष्यों के बीच संघर्ष की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि एक समग्र दृष्टिकोण से संभव है, जिसमें वैज्ञानिक योजना, नवाचार आधारित समाधान, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और प्रभावी प्रशासनिक प्रतिबद्धता शामिल हो।
- “जहाँ हाथी चलते हैं, वहाँ जंगल साँस लेते हैं।” यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—कि यदि हमने इन वनों के संरक्षकों को नहीं बचाया, तो पूरी पारिस्थितिक संरचना असंतुलित हो सकती है।
- हाथियों के संरक्षण की दिशा में भारत ने कई सराहनीय पहल की हैं, लेकिन अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। आवासों की सुरक्षा, गलियारों की पुनर्स्थापना, अवैध शिकार की रोकथाम, और संघर्ष प्रबंधन के लिए तकनीकी और सामाजिक उपायों को एकीकृत करना अनिवार्य है।
- हर साल मनाया जाने वाला विश्व हाथी दिवस हमें इस बात की याद दिलाता है कि यह संरक्षण का कार्य केवल वन विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझी जिम्मेदारी है। यदि आज हम सतर्क और सक्रिय नहीं हुए, तो भविष्य में यह मौन संकट विकराल रूप ले सकता है।
- हाथियों की गूंज सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं है, यह हमारे अस्तित्व की कहानी का हिस्सा है। इनकी रक्षा करके हम न केवल एक प्रजाति को बचाते हैं, बल्कि उस संतुलित संसार की रक्षा करते हैं जिसमें हम स्वयं भी जीवित रह सकते हैं।
स्रोत – पी. आई. बी एवं इंडियन एक्सप्रेस।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. भारत में हाथियों के संरक्षण के लिए निम्नलिखित में से कौन-कौन से उपाय अपनाए गए हैं?
- प्रोजेक्ट एलीफेंट योजना
- प्रोजेक्ट री-हैब योजना
- हाथियों की सूंड की कटाई
- हाथी गलियारों की पहचान और उसका संरक्षण
नीचे दिए कूट के आधार पर सही विकल्प का चयन कीजिए :
A. केवल 1, 2 और 3
B. केवल 1, 2 और 4
C. इनमें से कोई नहीं
D. उपरोक्त सभी।
उत्तर – B
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. विश्व हाथी दिवस 2025 के संदर्भ में भारत में एशियाई हाथियों के संरक्षण से जुड़ी प्रमुख पारिस्थितिकीय एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। इसके साथ ही, उनके दीर्घकालिक अस्तित्व एवं जैव विविधता संतुलन के लिए प्रभावी संरक्षण रणनीतियों की चर्चा कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

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