साझा सुरक्षा, साझा समृद्धि : भारत – बहरीन के द्विपक्षीय संबंधों का नया युग एवं उच्च संयुक्त आयोग की पांचवीं बैठक

साझा सुरक्षा, साझा समृद्धि : भारत – बहरीन के द्विपक्षीय संबंधों का नया युग एवं उच्च संयुक्त आयोग की पांचवीं बैठक

मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 2 – के ‘ अंतर्राष्ट्रीय संबंध ’ के अंतर्गत भारत के हितों पर उसके पड़ोसी देशों या उसके मित्र देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव, भारत का अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय समूह और समझौते।

प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA), होर्मुज़ जलडमरूमध्य, उच्च संयुक्त आयोग (HJC), ‘लिंक वेस्ट नीति’ का रूपांतरण ‘एक्ट वेस्ट नीति’ से संबंधित।

 

ख़बरों में क्यों?

 

 

  • हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित भारत और बहरीन के पाँचवें उच्च संयुक्त आयोग (HJC) की बैठक भारत के बदलते विदेश नीति और अंतर्राष्ट्रीय संबंध के संदर्भ में संपूर्ण विश्व के रणनीतिक और राजनीतिक जगत में खबरों के केन्द्र में है। 
  • दोनों देशों के बीच हुए इस बैठक में दोनों देशों ने पहलगाम आतंकी हमले (2025) की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने, क्षमता निर्माण और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और मज़बूत करने पर सहमति व्यक्त की है।
  • भारत और बहरीन के पाँचवें उच्च संयुक्त आयोग (HJC) की यह बैठक भारत–बहरीन संबंधों के बढ़ते सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक आयामों को पुनः रेखांकित करती है, विशेषकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया क्षेत्र भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के प्रश्नों के कारण वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ है।

 

उच्च संयुक्त आयोग (HJC) की बैठक के प्रमुख परिणाम : 

 

आतंकवाद-निरोध और सुरक्षा सहयोग : 

 

  • इस बैठक में दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आतंकवाद किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता और वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती है। भारत और बहरीन ने आतंकवादी नेटवर्कों के विरुद्ध साझा कार्रवाई के लिए सहयोग को सशक्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
  • इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और गहराने की आशा व्यक्त की। इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा-प्रशिक्षण, खुफिया साझेदारी, और साइबर सुरक्षा ढाँचों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया गया। यह क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा में भारत-बहरीन के साझा हितों का प्रतीक है।

 

आर्थिक और व्यापारिक सहयोग : 

 

  • भारत और बहरीन के बीच आर्थिक संबंध इस बैठक का दूसरा प्रमुख आयाम रहे। वर्ष 2024–25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.64 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। यह इस बात का संकेत है कि भारत बहरीन के शीर्ष पाँच व्यापारिक भागीदारों में से एक है।
  • इस बैठक में दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश से संबंधित एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया। इस समूह का उद्देश्य दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह को बढ़ावा देना और व्यापारिक अड़चनों को कम करना है।
  • इसके साथ – ही – साथ, उन्होंने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) की वार्ताओं में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। यह समझौता व्यापारिक संबंधों को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
  • इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने दोहरे कराधान से बचाव (Double Taxation Avoidance Agreement – DTAA) पर वार्ता आरंभ करने तथा द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty) पर प्रगति दर्ज करने पर सहमति व्यक्त की। ये पहलें निवेशकों के लिए पारदर्शी और स्थिर आर्थिक वातावरण सुनिश्चित करेंगी।

 

क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति : 

 

  • भारत और बहरीन के पाँचवें उच्च संयुक्त आयोग (HJC) की इस बैठक के दौरान गाजा शांति योजना पर भी चर्चा हुई। 
  • भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तुत इस योजना के प्रति अपना समर्थन दोहराया और इसे पश्चिम एशिया में स्थायी और संतुलित समाधान का मार्ग बताया।
  • भारत का यह दृष्टिकोण पश्चिम एशिया में उसकी दीर्घकालिक नीति — संवाद, स्थिरता और विकास के त्रिकोण — के अनुरूप है। 
  • बहरीन, जो खाड़ी क्षेत्र के राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य में एक प्रमुख भूमिका निभाता है, इस दिशा में भारत का स्वाभाविक साझेदार है।

 

भारत–बहरीन संबंधों का रणनीतिक महत्त्व : 

 

भू-राजनीतिक एवं सामरिक दृष्टि से : 

 

  • बहरीन फारस की खाड़ी के होर्मुज़ जलडमरूमध्य के समीप स्थित है, यह वह मार्ग है जिससे होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% भाग गुजरता है। इस दृष्टि से बहरीन का भौगोलिक स्थान न केवल भारत बल्कि विश्व समुदाय के लिए भी अत्यंत रणनीतिक महत्त्व रखता है।
  • भारत के लिए यह स्थान ऊर्जा आयात, समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया के साथ भौगोलिक-सामरिक जुड़ाव को सुदृढ़ करने का केंद्र है। बहरीन में भारत की सक्रिय उपस्थिति ‘एक्ट वेस्ट नीति’ के अंतर्गत पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक पहुँच को संतुलित करती है।

 

रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा सहयोग : 

 

  • भारत और बहरीन के बीच रक्षा सहयोग लगातार प्रगाढ़ होता जा रहा है। दोनों देश संयुक्त समुद्री बलों (Combined Maritime Forces) और पैसेज अभ्यास (PASSEX) के माध्यम से समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।
  • बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना का पाँचवाँ बेड़ा (U.S. Fifth Fleet / NAVCENT) इस क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा के लिए एक प्रमुख केंद्र है। भारत, बहरीन के इस नेटवर्क से सामरिक रूप से जुड़कर क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय और समुद्री निगरानी तंत्र को मज़बूत बना सकता है।

 

आर्थिक साझेदारी और निवेश के अवसर : 

 

  • भारत और बहरीन के बीच आर्थिक संबंध निरंतर विस्तार पा रहे हैं। वर्ष 2019 के बाद से द्विपक्षीय निवेश में लगभग 40% की वृद्धि दर्ज की गई है। व्यापार, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, निर्माण, और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएँ खुली हैं।
  • भारत के लिए बहरीन गेटवे टू गल्फ की भूमिका निभाता है, वहीं बहरीन के लिए भारत एक विशाल और स्थिर बाजार उपलब्ध कराता है। दोनों देशों के निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी इन संबंधों को और गति प्रदान कर रही है।

 

बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग : 

 

  • बहरीन वर्ष 2026–27 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का अस्थायी सदस्य बनेगा। इस स्थिति में भारत को पश्चिम एशिया में एक विश्वसनीय सहयोगी प्राप्त होगा, जिसके साथ वह क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी मुद्दों पर समन्वय कर सकेगा।
  • इसके अतिरिक्त, दोनों देश गैर-संरेखित आंदोलन (NAM), संयुक्त राष्ट्र और आईओआरए (Indian Ocean Rim Association) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर साझा हितों की रक्षा के लिए साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं।

 

प्रवासी भारतीय समुदाय : 

 

  • बहरीन में लगभग 3.32 लाख भारतीय नागरिक निवास करते हैं, जो वहाँ की कुल आबादी का लगभग एक-चौथाई हैं। यह समुदाय बहरीन की अर्थव्यवस्था, विशेषकर निर्माण, स्वास्थ्य, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
  • प्रवासी भारतीय केवल आर्थिक योगदानकर्ता ही नहीं हैं, बल्कि वे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु के रूप में भी कार्य करते हैं। बहरीन सरकार द्वारा भारतीय समुदाय को दी जा रही सुविधाएँ और सम्मान दोनों देशों के गहरे संबंधों का प्रतीक हैं।

 

भारत की विदेश नीति में नीति-आधारित दृष्टिकोण : ‘लिंक वेस्ट’ से ‘एक्ट वेस्ट’ तक का रूपांतरण : 

 

  • भारत की विदेश नीति में हाल के वर्षों में “लिंक वेस्ट नीति” का रूपांतरण “एक्ट वेस्ट नीति” में हुआ है, जो पश्चिम एशिया के साथ सक्रिय, संतुलित और बहुआयामी संबंधों की दिशा में भारत के दृष्टिकोण को दर्शाती है।
  • बहरीन इस नीति का एक प्रमुख स्तंभ है। इसके माध्यम से भारत खाड़ी देशों के साथ अपने रणनीतिक संवाद, ऊर्जा सहयोग, व्यापारिक संबंध और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है।
  • भारत की एक्ट ईस्ट नीति जहाँ पूर्वी एशिया के देशों के साथ आर्थिक जुड़ाव को गहराती है, वहीं एक्ट वेस्ट नीति पश्चिम एशिया के साथ संतुलित भू-राजनीतिक रणनीति का निर्माण करती है, जिसमें बहरीन का स्थान केंद्रीय है।

 

निष्कर्ष : 

 

  • भारत–बहरीन संबंध आज एक संतुलित, बहुआयामी और दूरदर्शी साझेदारी का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग केवल व्यापार और सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कूटनीति, ऊर्जा, निवेश, संस्कृति और प्रवासी कल्याण के क्षेत्रों में भी विस्तार पा रहा है।
  • बहरीन का रणनीतिक भौगोलिक स्थान, उसका स्थिर शासन ढाँचा, और भारत के साथ उसकी ऐतिहासिक मित्रता इसे भारत की पश्चिम एशियाई नीति का अभिन्न अंग बनाते हैं। वहीं भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और आर्थिक शक्ति के कारण बहरीन के लिए भी भारत एक विश्वसनीय साझेदार बन चुका है।
  • 5वें उच्च संयुक्त आयोग की बैठक ने दोनों देशों के रिश्तों को नए युग के सहयोग मॉडल में रूपांतरित करने की दिशा में ठोस आधार प्रदान किया है, जहाँ सुरक्षा, व्यापार और मानवीय जुड़ाव तीनों ही स्तंभ इस साझेदारी को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करेंगे।
  • भारत–बहरीन का यह संबंध न केवल भारत की एक्ट वेस्ट नीति को सुदृढ़ करता है, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि के उद्देश्य को भी साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू। 

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न : 

 

Q.1. भारत–बहरीन के पाँचवें उच्च संयुक्त आयोग (HJC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. इस बैठक में भारत और बहरीन ने आतंकवाद से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने पर सहमति व्यक्त की।
  2. दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया।
  3. बैठक में दोनों पक्षों ने संयुक्त सैन्य बलों (Combined Maritime Forces) से अलग रहने का निर्णय लिया।
  4. दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा प्रशिक्षण पर बल दिया।

नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

A. केवल 1 और 2

B. केवल 1, 2 और 4

C. केवल 2 और 3

D. केवल 1 और 3

उत्तर –  B. केवल 1, 2 और 4

 

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. भारत–बहरीन संबंधों का विश्लेषण कीजिए कि वे भारत की ‘लिंक वेस्ट’ से ‘एक्ट वेस्ट’ नीति के विकास में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और प्रवासी कूटनीति के आयामों को किस प्रकार सुदृढ़ करते हैं। इसके साथ ही, समकालीन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में आतंकवाद की जटिलता, उसके कारणों, अंतर्संबंधों एवं अप्रिय गठजोड़ों का विवेचन करते हुए, उसके उन्मूलन हेतु प्रभावी उपायों का सुझाव प्रस्तुत कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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