08 Nov स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26: छत्तीसगढ़ के तीन शहरों को राष्ट्रीय पुरस्कार
✎ स्वच्छ सर्वेक्षण केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय का वार्षिक नगरीय स्वच्छता मूल्यांकन है, और नगरपालिकाओं का ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अनुच्छेद 243W तथा बारहवीं अनुसूची के अंतर्गत उनका संवैधानिक दायित्व है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (Governance): नगरीय स्थानीय शासन, 74वाँ संविधान संशोधन और केंद्र-राज्य-स्थानीय निकाय समन्वय | GS Paper III — पर्यावरण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता और अपशिष्ट पृथक्करण
- Prelims: स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) और उसकी वार्षिक रैंकिंग प्रणाली, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (Swachh Bharat Mission – Urban) की शुरुआत 2014 और इसका मिशन 2.0 चरण, केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs – MoHUA) की भूमिका, 74वाँ संविधान संशोधन, अनुच्छेद 243W और बारहवीं अनुसूची, बारहवीं अनुसूची की मद: लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता संरक्षण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016), गारबेज फ्री सिटी (Garbage Free City) स्टार रेटिंग, राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने की परंपरा और उसका संवैधानिक संदर्भ
- Essay: स्वच्छता: सरकारी अभियान से जन-आंदोलन तक, शहरी स्थानीय निकाय सशक्त होंगे तो सेवा-वितरण बेहतर होगा
त्वरित पुनरावृत्ति: स्वच्छ सर्वेक्षण केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय का वार्षिक नगरीय स्वच्छता मूल्यांकन है, और नगरपालिकाओं का ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अनुच्छेद 243W तथा बारहवीं अनुसूची के अंतर्गत उनका संवैधानिक दायित्व है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और बिल्हा नगरीय निकायों का राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए चयन हुआ है। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर इस चयन की औपचारिक जानकारी दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 11 नवंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में इन तीनों नगरीय निकायों को सम्मानित करेंगी। यह समाचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि नगरीय स्वच्छता का मूल्यांकन केवल सफाई के भौतिक कार्यों पर नहीं, बल्कि सेवा-स्तर, नागरिक सहभागिता और सफाई कर्मियों की भूमिका पर भी आधारित है।
पृष्ठभूमि
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की शुरुआत 2014 में हुई थी। इसका उद्देश्य खुले में शौच से मुक्ति और शहरों में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देना था। बाद में इसका दूसरा चरण स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के रूप में शुरू किया गया।
- स्वच्छ सर्वेक्षण की शुरुआत 2016 में हुई और इसे केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा हर वर्ष आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य नगरीय निकायों के बीच तुलनात्मक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से स्वच्छता सुधार को प्रोत्साहित करना है।
- नगरपालिकाएँ संविधान के भाग IXA के अंतर्गत स्वशासन की संस्थाएँ हैं। 74वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 243W के अनुसार राज्य विधानमंडल नगरपालिकाओं को बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध कार्य सौंप सकते हैं।
- बारहवीं अनुसूची की एक मद ‘लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता संरक्षण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ है। इसी कारण शहरी सफाई मूलतः नगरीय निकायों की संवैधानिक जिम्मेदारी के दायरे में आती है, हालाँकि नीति-निर्देश और वित्तीय सहायता केंद्र और राज्य स्तर से मिलती है।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 ने स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण, गीले, सूखे और घरेलू खतरनाक अपशिष्ट के अलग संग्रह तथा अपशिष्ट प्रसंस्करण और निपटान के नियम निर्धारित किए। यही नियम स्वच्छ सर्वेक्षण के मूल्यांकन-ढाँचे की नीतिगत पृष्ठभूमि हैं।
स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है?
- स्वच्छ सर्वेक्षण शहरों की स्वच्छता का वार्षिक, तुलनात्मक और रैंकिंग-आधारित मूल्यांकन है, जिसे केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) संचालित करता है।
- इसका मूल्यांकन केवल सड़कों की सफाई पर नहीं होता, बल्कि ठोस अपशिष्ट के संग्रह, पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान, खुले में शौच से मुक्ति, तथा नागरिक प्रतिक्रिया जैसे पहलुओं पर होता है।
- ‘गारबेज फ्री सिटी’ (Garbage Free City) स्टार रेटिंग शहर में कचरा-प्रबंधन की स्थिति का स्तर बताती है। यह रेटिंग शहर के सेवा-स्तर का प्रमाण मानी जाती है।
- सर्वेक्षण में नागरिकों की प्रतिक्रिया (Citizen Feedback) को महत्व दिया जाता है, जिससे नगरीय सेवाओं के अंतिम उपयोगकर्ता की राय मूल्यांकन में शामिल होती है।
- स्वच्छता के क्षेत्र में नगरीय निकाय वास्तविक कार्यान्वयन की इकाइयाँ हैं, जबकि नीति, दिशानिर्देश और मूल्यांकन ढाँचा केंद्र स्तर पर तैयार होता है। इसलिए यह सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण भी है।
- पुरस्कार-आधारित प्रोत्साहन से राज्यों और नगरीय निकायों में प्रतिस्पर्धी सुधार को बढ़ावा मिलता है, परंतु इसकी वास्तविक उपयोगिता तभी है जब परिणाम दैनिक सेवा-गुणवत्ता में दिखें।
- स्वच्छता की सफलता में सफाई कर्मियों, स्थानीय निकाय के कर्मचारियों और नागरिकों के व्यवहार की केंद्रीय भूमिका है। इसीलिए इसे जन-भागीदारी आधारित शासन का मॉडल माना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) | आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs, MoHUA) द्वारा किया जाने वाला वार्षिक सर्वेक्षण, जो नगरीय निकायों की स्वच्छता सेवाओं और परिणामों का मूल्यांकन करता है |
| राष्ट्रीय पुरस्कार | रायपुर, बिलासपुर और बिल्हा का चयन, जो छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को दर्शाता है |
| राष्ट्रपति द्वारा सम्मान | 11 नवंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में, जिससे स्वच्छता उपलब्धियों को संवैधानिक प्रमुख के स्तर पर मान्यता मिलती है |
| ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) | घरों से कचरे का संग्रह, पृथक्करण (segregation) और प्रसंस्करण, जो स्वच्छता मूल्यांकन के केंद्र में रहते हैं |
| सफाई मित्र और नागरिक सहभागिता | सफाई कार्य की वास्तविक इकाई और जनभागीदारी, जिनके बिना स्वच्छता के परिणाम टिकाऊ नहीं हो सकते |
महत्व
प्रशासनिक महत्व
- नगरीय निकायों के कार्य-निष्पादन को प्रतिस्पर्धी और साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन से जांचा जाता है, जिससे प्रशासन में जवाबदेही बढ़ती है
- सर्वेक्षण का परिणाम अन्य नगरीय निकायों के लिए सर्वोत्तम पद्धतियों (best practices) का स्रोत बनता है
सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व
- ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन जल-जनित और वेक्टर-जनित रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक है
- खुले में कचरा फेंकने पर रोक से शहरी बस्तियों का स्वास्थ्य-स्तर सुधरता है
पर्यावरणीय महत्व
- कचरे के पृथक्करण और प्रसंस्करण से भूमि-भराव (landfill) का दबाव घटता है
- स्वच्छ शहर वायु और जल प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण में योगदान दे सकते हैं
संघीय और सहकारी आयाम
- केंद्र द्वारा मूल्यांकन और राज्य तथा स्थानीय निकायों द्वारा क्रियान्वयन, सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का व्यावहारिक उदाहरण है
- राज्य सरकार को सूचित करने की औपचारिक प्रक्रिया केंद्र-राज्य समन्वय का एक सामान्य तरीका दर्शाती है
चुनौतियाँ
1. सफाई मित्रों की कार्य दशा और सामाजिक सुरक्षा
- सफाई कार्य में लगे श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपकरण, नियमित वेतन और स्वास्थ्य बीमा की स्थिति असमान है
- सफाई कार्य में सामाजिक असमानता और गरिमा से जुड़े प्रश्न अब भी बने हुए हैं
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय; श्रम कल्याण
2. ठोस अपशिष्ट का पूर्ण प्रसंस्करण
- संग्रहित कचरे का बड़ा हिस्सा अब भी प्रसंस्करण के बजाय डंपिंग स्थलों तक पहुंचता है
- निर्माण और विध्वंस (C&D) कचरे तथा ई-कचरे के लिए अलग तंत्र की कमी बनी हुई है
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और प्रबंधन; शहरी नियोजन
3. सर्वेक्षण परिणाम और वास्तविक परिवर्तन का अंतर
- रैंकिंग के लिए की गई तैयारी और दैनिक सेवा-स्तर में निरंतरता के बीच अंतर संभव है
- दस्तावेज़ी प्रमाण और जमीनी स्थिति का मिलान सुनिश्चित करना चुनौती है
यूपीएससी लिंक: सुशासन; शासन में प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन
4. नगरीय निकायों की वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता
- नगरीय निकायों की अपनी राजस्व क्षमता सीमित है और वे राज्य अनुदानों पर अधिक निर्भर रहते हैं
- कर्मचारियों की कमी और तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव सेवा-वितरण को प्रभावित करता है
यूपीएससी लिंक: स्थानीय शासन; राज्य वित्त; वित्त आयोग की भूमिका
5. नागरिक व्यवहार में स्थायी परिवर्तन
- घरों और बाज़ारों में गीले-सूखे कचरे का पृथक्करण अब भी पूरी तरह नियमित नहीं है
- सार्वजनिक स्थलों पर कचरा फेंकने की आदत बदलने के लिए निरंतर जन-जागरूकता आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक स्वास्थ्य; सामाजिक परिवर्तन में जनभागीदारी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सफाई मित्रों की सुरक्षा | सुरक्षा उपकरण, बीमा और सम्मानजनक कार्य-स्थितियों का अभाव सेवा की गुणवत्ता और श्रमिक कल्याण दोनों को प्रभावित कर सकता है |
| ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण | डंपिंग पर निर्भरता से भूमि और भूजल प्रदूषण का खतरा बना रहता है |
| मूल्यांकन और वास्तविकता का अंतर | रैंकिंग-केंद्रित तैयारी से दीर्घकालिक सेवा-स्तर में सुधार सीमित हो सकता है |
| वित्तीय क्षमता | नगरीय निकायों की सीमित राजस्व क्षमता से परियोजनाओं का रखरखाव कठिन होता है |
| नागरिक व्यवहार | पृथक्करण और कचरा न फैलाने की आदत पूरी तरह नहीं बदली है |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (Swachh Bharat Mission-Urban)
आगे की राह
- स्वच्छ सर्वेक्षण के मानकों को केवल रैंकिंग के बजाय सेवा-स्तर के निरंतर सुधार का आधार बनाया जाए
- ठोस अपशिष्ट के स्रोत पर पृथक्करण को अनिवार्य और नियमित बनाने के लिए घर-घर जागरूकता अभियान चलाए जाएं
- निर्माण और विध्वंस कचरे तथा ई-कचरे के लिए अलग संग्रह और प्रसंस्करण व्यवस्था विकसित की जाए
- सफाई मित्रों को नियमित वेतन, सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य बीमा और सम्मानजनक कार्य-स्थितियां सुनिश्चित की जाएं
- नगरीय निकायों की राजस्व क्षमता बढ़ाने के लिए संपत्ति कर और उपयोगकर्ता शुल्क जैसे स्रोतों को सुदृढ़ किया जाए
- तकनीकी विशेषज्ञता के लिए नगरीय निकायों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति और क्षमता-निर्माण पर बल दिया जाए
- रायपुर, बिलासपुर और बिल्हा के अनुभव को अन्य नगरीय निकायों के साथ सर्वोत्तम पद्धतियों के रूप में साझा किया जाए
- सफाई कार्य में नागरिक सहभागिता को स्कूलों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय समुदायों के माध्यम से संस्थागत रूप दिया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) · नगरीय स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies) · 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (74th Constitutional Amendment Act) · बारहवीं अनुसूची (Twelfth Schedule) · अनुच्छेद 243W · राज्य सूची (State List) – प्रविष्टि 5 व 6 · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (Swachh Bharat Mission – Urban) · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) · राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) · कचरा-मुक्त शहर स्टार रेटिंग (Garbage Free City Star Rating) · नागरिक सहभागिता (Citizen Participation)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243W: नगरीय निकायों के कार्य और शक्तियां
- बारहवीं अनुसूची: सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
अवधारणा प्रवाह
केंद्र द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण का आयोजन और नगरीय निकायों से आंकड़ों व प्रमाणों का संग्रह → सेवा-स्तर (संग्रह, पृथक्करण, प्रसंस्करण, नागरिक प्रतिक्रिया) के आधार पर शहरों का मूल्यांकन → राष्ट्रीय स्तर पर चयन और केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार को औपचारिक सूचना → राष्ट्रपति द्वारा विज्ञान भवन में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मान → सम्मान की पहचान से अन्य नगरीय निकायों को सर्वोत्तम पद्धतियां अपनाने की प्रेरणा → स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के लक्ष्यों की ओर सेवा-स्तर और नागरिक व्यवहार में टिकाऊ सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के कार्यों के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता, संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सम्मिलित हैं।
2. अनुच्छेद 243W राज्य विधानमंडल को नगरपालिकाओं को शक्तियाँ और अधिकार प्रदान करने की व्यवस्था करने का अधिकार देता है।
3. संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के 18 कार्य सूचीबद्ध हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के कार्य हैं। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 243W (74वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया) राज्य को नगरपालिकाओं को शक्तियाँ सौंपने का प्रावधान देता है। कथन 3 गलत है: 18 कार्यों की सूची बारहवीं अनुसूची में है, जबकि ग्यारहवीं अनुसूची पंचायतों के 29 कार्यों से संबंधित है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): स्वच्छ सर्वेक्षण जैसी केंद्र-प्रायोजित रैंकिंग प्रणाली ऐसे क्षेत्र में कार्य करती है जहाँ नगरीय स्वच्छता की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों और स्थानीय निकायों की है।
कारण (R): लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता तथा स्थानीय शासन राज्य सूची की प्रविष्टियों में आते हैं।
संविधान के संदर्भ में उपर्युक्त कथनों के संबंध में सही विकल्प चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — राज्य सूची की प्रविष्टि 5 (स्थानीय शासन, जिसमें नगरपालिकाएँ सम्मिलित हैं) और प्रविष्टि 6 (लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता) राज्यों के विषय हैं। इसी संवैधानिक ढाँचे के कारण केंद्र सहभागी और प्रोत्साहन-आधारित भूमिका निभाता है, सीधा विधायी नियंत्रण नहीं रखता।
Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
कॉलम I
A. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016
B. संविधान की बारहवीं अनुसूची
C. अनुच्छेद 243I
कॉलम II
1. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत अधिसूचित
2. नगरपालिकाओं के 18 कार्यों की सूची
3. राज्य वित्त आयोग के गठन से संबंधित प्रावधान
सही सुमेलन चुनिए:
- A-1, B-2, C-3
- A-2, B-1, C-3
- A-1, B-3, C-2
- A-3, B-2, C-1
उत्तर: A-1, B-2, C-3 — ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 और 8 के अंतर्गत अधिसूचित हैं (A-1)। बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के 18 कार्य हैं (B-2)। अनुच्छेद 243I राज्य वित्त आयोग के गठन का प्रावधान करता है (C-3)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) जैसी प्रतिस्पर्धी रैंकिंग प्रणाली ने नगरीय स्वच्छता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है, किंतु संवैधानिक दृष्टि से यह क्षेत्र मुख्यतः राज्यों और नगरीय स्थानीय निकायों का है। इस प्रसंग में केंद्र द्वारा प्रोत्साहन-आधारित हस्तक्षेप की भूमिका का समीक्षात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि नगरीय स्थानीय निकायों के पास वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता अपर्याप्त हो, तो ऐसे पुरस्कार-उन्मुख प्रयास दीर्घकालिक संस्थागत सुधार का विकल्प क्यों नहीं बन पाते? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा: (1) संवैधानिक आधार: 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा भाग IXA (अनुच्छेद 243P से 243ZG) जोड़ा गया; अनुच्छेद 243W के अंतर्गत राज्य विधानमंडल नगरपालिकाओं को शक्तियाँ सौंपता है; बारहवीं अनुसूची में स्वच्छता, संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित 18 कार्य हैं। राज्य सूची की प्रविष्टि 5 और 6 का उल्लेख करें। (2) केंद्र की भूमिका: स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (2014) और उसका दूसरा चरण (2021); स्वच्छ सर्वेक्षण का प्रारंभ (2016) और उसकी श्रेणियाँ (सेवा स्तर प्रगति, नागरिक प्रतिक्रिया, प्रमाणन); कचरा-मुक्त शहर स्टार रेटिंग; ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत)। सहकारी संघवाद की अवधारणा का उपयोग करें। (3) वित्तीय पक्ष: अनुच्छेद 243X (कर लगाने की शक्ति), अनुच्छेद 243I और 243Y के अंतर्गत राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें, वित्त आयोगों के अनुदान और नगरीय स्थानीय निकायों की राजस्व क्षमता की सीमाएँ। (4) विश्लेषण के बिंदु: प्रतिस्पर्धा से नवाचार और पारदर्शिता बढ़ती है, किंतु रैंकिंग-आधारित प्रोत्साहन सतही सुधार (जैसे दृश्य सफाई) को बढ़ावा दे सकते हैं; स्थायी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (स्रोत पर पृथक्करण, प्रसंस्करण और लैंडफिल प्रबंधन) के लिए संस्थागत क्षमता चाहिए। सफाई कर्मियों और अनौपचारिक कचरा-संग्राहकों की भूमिका का उल्लेख करें। (5) विभिन्न मत: राष्ट्रीय एकरूपता और मानक-निर्धारण के पक्ष में तर्क बनाम स्थानीय विविधता और राज्य स्वायत्तता के पक्ष में तर्क; बलवंत राय मेहता समिति (1957) की विकेंद्रीकरण की सिफारिश का संदर्भ। (6) निष्कर्ष: पुरस्कार प्रेरक हैं, परंतु स्थायी परिणाम के लिए राज्य वित्त आयोग का सशक्तीकरण, नगरीय क्षमता-निर्माण और नागरिक सहभागिता की संस्थागत व्यवस्था अनिवार्य है।
स्रोत: amarujala.com
Chhattisgarh PCS (CGPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के संदर्भ में, छत्तीसगढ़ के किन शहरों/कस्बों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा?
- A. रायपुर और दुर्ग
- B. बिलासपुर और राजनांदगांव
- C. रायपुर, बिलासपुर और बिल्हा
- D. दुर्ग, बिलासपुर और बिल्हा
उत्तर: C. रायपुर, बिलासपुर और बिल्हा — स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में रायपुर, बिलासपुर और बिल्हा को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है।
Mains: स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और बिल्हा को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के महत्व पर प्रकाश डालिए। (लगभग 50 शब्द)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best PSIR optional coaching for upsc
- Best economics optional coaching for upsc
- Best PSIR optional teacher for upsc
- Best teacher of PSIR optional for upsc
- नरसिंहपुर एनकाउंटर: सीबीआई जांच, राज्य सरकार की अनुशंसा - November 8, 2026
- Strait of Hormuz & Gulf of Oman Incidents: UPSC Geography - November 8, 2026
- स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26: छत्तीसगढ़ के तीन शहरों को राष्ट्रीय पुरस्कार - November 8, 2026

No Comments