26 Feb स्वदेशी ताकत का शंखनाद : नौसेना के बेड़े में शामिल होगा आईएनएस अंजदीप
मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र -3- के अंतर्गत ‘ सूचना एवं प्रौद्योगिकी’ खण्ड से संबंधित।
प्रारंभिक परीक्षा के अंतर्गत – ‘ मेक इन इंडिया, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), उन्नत संवेदन प्रणाली, ‘अभय’ सोनार सिस्टम, स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स, हल्के टॉरपीडो, डॉल्फिन हंटर, A2/AD क्षमता, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), स्वार्म टेक्नोलॉजी’ खण्ड से संबंधित।
ख़बरों में क्यों ?

- हाल ही भारतीय नौसेना की सामरिक क्षमता में 27 फरवरी 2026 को एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। चेन्नई में आयोजित होने वाले एक भव्य समारोह में, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की उपस्थिति में युद्धपोत ‘अंजदीप’ को आधिकारिक रूप से कमीशन किया जाएगा।
- युद्धपोत ‘अंजदीप’ का भारतीय नौसेना में शामिल करना केवल एक जहाज का जलावतरण भर नहीं है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ‘समुद्री संप्रभुता’ का पूरी दुनिया के लिए उद्घोष है।
नामकरण का मुख्य आधार : गौरवशाली अतीत और विरासत का पुनर्जन्म :
- भारतीय नौसेना की नौसैनिक परंपराओं को जीवित रखते हुए, इस युद्धपोत का नाम कर्नाटक के कारवार तट पर स्थित रणनीतिक अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है।
- ऐतिहासिक जुड़ाव : यह 2003 में सेवानिवृत्त हुए पुराने ‘अंजदीप’ की विरासत को आधुनिक अवतार में आगे बढ़ाएगा।
- भौगोलिक महत्व : अंजदीप द्वीप भारत की पश्चिमी समुद्री सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जो अब इस नए युद्धपोत की पहचान बन गया है।
युद्धपोत अंजदीप की प्रमुख तकनीकी विशिष्टताएँ :
- गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित अंजदीप, ASW SWC (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) परियोजना का तीसरा गौरवशाली युद्धपोत है। अपनी अचूक मारक क्षमता और सटीक टोह लेने की शक्ति के कारण इसे नौसैनिक गलियारों में ‘डॉल्फिन हंटर’ के नाम से संबोधित किया जा रहा है। इसकी प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- अभिनव संरचना और गतिशीलता : इस युद्धपोत की कुल लंबाई लगभग 77 मीटर है। यह अत्याधुनिक ‘वॉटरजेट प्रोपल्शन’ तकनीक से सुसज्जित है, जो इसे न केवल उच्च गति प्रदान करती है बल्कि उथले पानी के जटिल क्षेत्रों में भी अद्वितीय पैंतरेबाज़ी की क्षमता देती है।
- आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण : ‘मेक इन इंडिया’ पहल को साकार करते हुए इस पोत में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत की घरेलू रक्षा निर्माण शक्ति को वैश्विक स्तर पर प्रमाणित करता है।
- अचूक मारक क्षमता और हथियार प्रणाली : पनडुब्बियों के काल के रूप में विकसित इस पोत में भारत द्वारा निर्मित पनडुब्बी-रोधी रॉकेट और उन्नत श्रेणी के हल्के टॉरपीडो (Lightweight Torpedoes) तैनात किए गए हैं, जो किसी भी समुद्री खतरे को पलक झपकते ही नष्ट करने में सक्षम हैं।
- उन्नत संवेदन प्रणाली (Advanced Sensors) : यह पोत विशेष रूप से उथले पानी के लिए डिजाइन किए गए स्वदेशी ‘अभय’ सोनार सिस्टम से लैस है। यह सेंसर प्रणाली दुश्मन की सबसे शांत पनडुब्बियों की आहट को भी पकड़ने में तकनीकी रूप से दक्ष है।
- बहुआयामी और रणनीतिक भूमिका : अंजदीप की कार्यक्षमता केवल पनडुब्बी-रोधी अभियानों तक सीमित नहीं है; यह समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने, गहन तटीय सुरक्षा निगरानी करने और खोज व बचाव कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए एक बहुआयामी प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है।
भारत के लिए इसका रणनीतिक और सामरिक महत्व :

- भारत की 7,517 किलोमीटर लंबी तटरेखा की सुरक्षा के लिए ‘अंजदीप’ एक गेम-चेंजर सिद्ध होगा, जो निम्नलिखित है –
- चीनी हस्तक्षेप पर अंकुश : हिंद महासागर में बढ़ती चीनी पनडुब्बियों की गतिविधियों के बीच, यह ‘अंडरवॉटर डोमेन अवेयरनेस’ (UDA) को अभूतपूर्व मजबूती देगा।
- तटीय सुरक्षा का कवच : गहरे समुद्र के बड़े जहाजों के विपरीत, अंजदीप उथले पानी में छिपी दुश्मन की छोटी और ‘साइलेंट’ पनडुब्बियों को खोजने में माहिर है।
- A2/AD क्षमता : यह दुश्मन के लिए भारतीय बंदरगाहों और रणनीतिक चोक-पॉइंट्स (जैसे मलक्का जलडमरूमध्य) तक पहुँचना नामुमकिन बना देगा।
युद्धपोत अंजदीप के समक्ष मुख्य चुनौतियाँ और उसका समाधान :
- भारतीय नौसेना के इस आधुनिक युद्धपोत के सफल संचालन और इसकी प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ विद्यमान हैं, जिनका समाधान अत्याधुनिक स्वदेशी नवाचारों के माध्यम से किया गया है। जो निम्नलिखित है –
उथले पानी में ध्वनि हस्तक्षेप :
- चुनौती : समुद्र के तटीय या उथले क्षेत्रों में लहरों, समुद्री जीवों और मानवीय गतिविधियों के कारण अत्यधिक शोर होता है, जिससे पारंपरिक सोनार प्रणालियों के लिए दुश्मन की ‘साइलेंट’ पनडुब्बियों की सटीक पहचान करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
- समाधान : इस समस्या से निपटने के लिए अंजदीप में AI-संचालित उन्नत एल्गोरिदम और स्वदेशी ‘अभय’ सोनार का उपयोग किया गया है। यह तकनीक शोर के भारी डेटा के बीच से दुश्मन की पनडुब्बी की विशिष्ट ध्वनि तरंगों (Acoustic Signatures) को फ़िल्टर करने में सक्षम है।
डिजिटल नेटवर्क और साइबर सुरक्षा :
- चुनौती : आधुनिक युद्धपोत पूरी तरह से एकीकृत डिजिटल नेटवर्क और स्वचालन पर आधारित होते हैं, जिससे शत्रु देशों द्वारा डेटा हैकिंग, सिग्नल जैमिंग या रिमोट कंट्रोल में हस्तक्षेप का खतरा सदैव बना रहता है।
- समाधान : भारतीय नौसेना ने इसके लिए स्वदेशी सुरक्षित संचार प्रणालियों और ‘क्लोज्ड-लूप’ नेटवर्क आर्किटेक्चर को अपनाया है। यह सुनिश्चित करता है कि युद्धपोत का डेटा और कमांड सिस्टम बाहरी साइबर हमलों से पूरी तरह सुरक्षित रहे।
लॉजिस्टिक प्रबंधन और निर्माण की समय-सीमा :
- चुनौती : एक ही श्रेणी के 8 युद्धपोतों की श्रृंखला को निर्धारित समय-सीमा के भीतर तैयार करना और उनके जटिल कल-पुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखना एक बड़ी औद्योगिक चुनौती है।
- समाधान : इस चुनौती को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से हल किया गया है। GRSE जैसे सार्वजनिक उपक्रमों ने निजी क्षेत्र के वेंडरों के साथ मिलकर निर्माण प्रक्रिया को गति दी है, जिससे स्वदेशी उपकरणों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
मानवरहित प्रणालियों के साथ समन्वय :
- चुनौती : भविष्य के युद्धों में केवल जहाज की शक्ति पर्याप्त नहीं होगी; इसे समुद्र के नीचे चलने वाले ड्रोन्स (UUVs) के साथ तालमेल बैठाना होगा, जो तकनीकी रूप से काफी जटिल प्रक्रिया है।
- समाधान : अंजदीप को एक ‘मदर-शिप’ के रूप में डिजाइन किया गया है, जो भविष्य में स्वार्म टेक्नोलॉजी का समर्थन करेगा। यह एक ही समय में कई अंडरवॉटर ड्रोन्स को नियंत्रित कर भारत की समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को कई गुना बढ़ा देगा।
हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में विदेशी पनडुब्बियों की बढ़ती सक्रियता :
- चुनौती : हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में विदेशी पनडुब्बियों की बढ़ती सक्रियता, विशेष रूप से ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति के तहत, भारत की तटीय सुरक्षा के लिए निरंतर खतरा पैदा करती है।
- समाधान : अंजदीप को A2/AD (Anti-Access/Area Denial) रणनीति के तहत तैनात किया गया है। अपनी विशिष्ट मारक क्षमता के कारण यह दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए भारतीय बंदरगाहों और रणनीतिक चौकियों के पास प्रवेश करना लगभग असंभव बना देता है। निष्कर्षतः, ये समाधान न केवल आईएनएस अंजदीप की मारक क्षमता को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि इसे भविष्य के डिजिटल और मानवरहित युद्धक्षेत्र के लिए भी तैयार करते हैं।
भारत का रक्षा निर्यातक के रूप में वैश्विक प्रभाव :
- आईएनएस अंजदीप का सफल संचालन भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक ‘विश्वसनीय भागीदार’ के रूप में स्थापित करता है।
- दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका : वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों के लिए, जिन्हें किफायती और घातक तटीय सुरक्षा समाधान चाहिए, अंजदीप एक बेहतरीन विकल्प है।
- ब्लू इकोनॉमी की सुरक्षा : यह जहाज भविष्य में समुद्री संसाधनों के उत्खनन और मित्र देशों की सुरक्षा के लिए ‘लीज’ मॉडल पर भी उपलब्ध हो सकता है।
निष्कर्ष :

- आईएनएस अंजदीप केवल धातु और मशीनरी का ढांचा नहीं है; यह भारतीय नौसेना के ‘खरीदार’ से ‘निर्माता’ बनने के संकल्प का जीवंत प्रमाण है। यह युद्ध को रोकने की क्षमता रखने वाला वह ‘मौन प्रहरी’ है, जो शांति काल में सुरक्षा और युद्ध काल में विजय सुनिश्चित करेगा। भविष्य के अदृश्य और तकनीक-आधारित समुद्री युद्ध में, अंजदीप भारत की रक्षा पंक्ति का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
- आईएनएस अंजदीप का नौसेना में शामिल होना भारतीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ क्षण है। यह न केवल हमारी सीमाओं को अभेद्य बनाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की इंजीनियरिंग और सैन्य कौशल का लोहा भी मनवाता है।
- मेक इन इंडिया का गौरव यह युद्धपोत उथले पानी का वह ‘मौन शिकारी’ है जो भारत की नीली अर्थव्यवस्था और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसका सामरिक महत्व इस बात में है कि यह युद्ध को जीतने की ही नहीं, बल्कि युद्ध को रोकने की क्षमता भी रखता है। भविष्य में जब समुद्र के नीचे युद्ध अदृश्य ड्रोन्स और AI द्वारा लड़ा जाएगा, तब अंजदीप जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म ही भारत की रक्षा पंक्ति का नेतृत्व करेंगे।
- जय हिंद, शं नो वरुण : (समुद्र के देवता हमारे लिए शुभ हों।)
स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. युद्धपोत ‘अंजदीप’ के तकनीकी विनिर्देशों और निर्माण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?
- यह ASW SWC (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) परियोजना का तीसरा युद्धपोत है।
- इसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित किया गया है और इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है।
- इसकी लंबाई लगभग 110 मीटर है और यह केवल गहरे समुद्र में संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- यह ‘वॉटरजेट प्रोपल्शन’ तकनीक और स्वदेशी ‘अभय’ सोनार सिस्टम से लैस है।
विकल्प :
A. केवल कथन 1 और 2
B. केवल कथन 2, 3 और 4
C. केवल कथन 1, 2 और 4
D. उपरोक्त सभी।
- उत्तर – C. केवल कथन 1, 2 और 4
- व्याख्या : कथन 3 गलत है क्योंकि इसकी लंबाई लगभग 77 मीटर है और यह विशेष रूप से उथले पानी के लिए बनाया गया है। अतः विकल्प C सही उत्तर है।
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q.1. भारतीय नौसेना की सामरिक शक्ति और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को सुदृढ़ करने में स्वदेशी युद्धपोत ‘अंजदीप’ की तकनीकी विशेषताओं और रणनीतिक महत्व का विश्लेषण कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

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