हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर्स (HVICs) : भारत की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता को विकसित करना

हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर्स (HVICs) : भारत की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता को विकसित करना

यह लेखहाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर्स (HVICs) : भारत की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना” पर आधारित है।  जो कि दैनिक समसामयिक मामलों से संबंधित है।

सामान्य अध्ययन-III :    पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट

हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर्स (HVICs)  क्या है?

उद्देश्य : संपूर्ण हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला (उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग) तथा भारत की पहली बड़े पैमाने की हाइड्रोजन प्रदर्शन परियोजनाओं का प्रदर्शन करना। मूल रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इनकी परिकल्पना की गई थी। अब इन्हें राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत एकीकृत किया गया है।
NGHM एक अम्ब्रेला कार्यक्रम है। इसे ग्रीन हाइड्रोजन तंत्र बनाने के लिए 2023 में शुरू किया गया था।
इसका लक्ष्य 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करना है।

भारत ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करना और ग्रीन हाइड्रोजन (GH2) इकोसिस्टम के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना है।

ग्रीन हाइड्रोजन (GH2) क्या है?

परिचय :  ग्रीन हाइड्रोजन उस हाइड्रोजन को कहा जाता है, जो इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से तैयार की जाती है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर, पवन या जल विद्युत का उपयोग करके जल अणुओं (H₂O) को हाइड्रोजन (H₂) और ऑक्सीजन (O₂) में विभाजित किया जाता है।
इसे बायोमास गैसीफिकेशन की प्रक्रिया से भी तैयार किया जा सकता है, जिसमें बायोमास को हाइड्रोजन-समृद्ध गैस में परिवर्तित किया जाता है।
उत्सर्जन मानक: भारत हाइड्रोजन को “ग्रीन” श्रेणी में वर्गीकृत करता है, यदि इसकी उत्पादन प्रक्रिया से कुल उत्सर्जन उत्पादित 1 किलोग्राम हाइड्रोजन पर 2 किलोग्राम CO₂ समतुल्य से अधिक न हो।

हाइड्रोजन के अन्य प्रकार

प्रमुख अनुप्रयोग:

इस्पात उद्योग नवाचार : कार्बन उत्सर्जन को कम करने और स्थिरता को बढ़ाने हेतु लौह न्यूनीकरण और अन्य इस्पात निर्माण प्रक्रियाओं में कार्बन आधारित ईंधन के लिये इस्पात उद्योग में हरित हाइड्रोजन की खोज की जा रही है।
वर्तमान में इसकी व्यवहार्यता और इस्पात उत्पादन में एकीकरण का परीक्षण करने के लिये पाँच पायलट परियोजनाएँ चल रही हैं।
सड़क परिवहन : NGHM ने 10 मार्गों पर 37 हाइड्रोजन-संचालित वाहनों (बसों और ट्रकों) से संबंधित पाँच प्रमुख पायलट परियोजनाएँ शुरू की हैं, जिन्हें 208 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त है।
शिपिंग और समुद्री परिचालन : वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह (₹25 करोड़) और दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण, कांडला में मेगावाट पैमाने पर हरित हाइड्रोजन सुविधा विकसित की जा रही है, ताकि स्वच्छ समुद्री परिचालन को समर्थन दिया जा सके।
उच्च ऊँचाई गतिशीलता : नवंबर 2024 में, NTPC ने लेह (3,650 मीटर) में विश्व की सबसे अधिक ऊँचाई वाली ग्रीन हाइड्रोजन गतिशीलता परियोजना शुरू की, जिसमें 5 हाइड्रोजन बसें और एक ईंधन स्टेशन शामिल हैं।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) क्या है?

NGHM: NGHM का लक्ष्य भारत को स्वच्छ हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाना, औद्योगिक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को मज़बूत करना, जीवाश्म ईंधनों के आयात पर निर्भरता घटाना और स्थायित्व व आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

लक्ष्य:

वर्ष 2030 तक, मिशन का लक्ष्य हरित हाइड्रोजन (ग्रीन हाइड्रोजन) उत्पादन के लिये 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना और प्रतिवर्ष 50 MMT ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है।
मिशन का लक्ष्य 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश के अवसर प्रदान करना, 6 लाख नौकरियाँ उत्पन्न करना, जीवाश्म ईंधन के आयात को प्रत्येक 1 लाख करोड़ रुपये तक कम करना है तथा हाइड्रोजन से संबंधित योग्यता में 5,600 से अधिक प्रशिक्षुओं को पहले ही प्रमाणित किया जा चुका है।
वित्त पोषण : इस मिशन के लिये शुरुआती बजटीय प्रावधान 19,744 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2029–30 तक) रखा गया है, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांज़िशन (SIGHT) कार्यक्रम सहित इसके प्रमुख घटकों के लिये धन आवंटन शामिल है।

वैश्विक साझेदारियाँ:

यूरोपीय संघ-भारत सहयोग : यूरोपीय संघ-भारत व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद के अंतर्गत अपशिष्ट से हाइड्रोजन उत्पादन पर 30 से अधिक संयुक्त प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
भारत-यूके साझेदारी : फरवरी 2025 में, भारत और यूके ने एक समर्पित मानक साझेदारी कार्यशाला के माध्यम से हाइड्रोजन मानकीकरण पर अपने सहयोग को मज़बूत किया।
H 2 ग्लोबल के साथ साझेदारी : नवंबर 2024 में, भारत के सौर ऊर्जा निगम (SECI) ने भारतीय हरित हाइड्रोजन के निर्यात के लिये बाज़ार-आधारित तंत्र की सुविधा के लिये H 2 ग्लोबल स्टिफ्टंग (जर्मनी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये।

सिंगापुर सहयोग : अक्तूबर 2025 में, सेम्बकॉर्प इंडस्ट्रीज ने उत्पादन, भंडारण और निर्यात के लिये एकीकृत हरित हाइड्रोजन और अमोनिया हब विकसित करने के लिये वी.ओ चिदंबरनार और पारादीप पोर्ट प्राधिकरणों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये।

ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने हेतु भारत द्वारा की गई प्रमुख पहल क्या हैं?

SIGHT योजना : SIGHT योजना ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रोलाइज़रों के विनिर्माण के लिये वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य सतत् ऊर्जा की ओर संक्रमण को तीव्र करना है।
ग्रीन हाइड्रोजन हब का विकास : अक्तूबर 2025 में, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने तीन प्रमुख बंदरगाहों को मान्यता दी;
दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (गुजरात), वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण (तमिलनाडु) और पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण (ओडिशा) को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में स्थापित किया गया है, जो उत्पादन, उपभोग एवं निर्यात के लिये एकीकृत केंद्र के रूप में कार्य करेंगे।
ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (GHCI) : अप्रैल 2025 में शुरू की गई GHCI, हाइड्रोजन को ‘ग्रीन’ के रूप में प्रमाणित करने के लिये एक ढाँचा प्रदान करती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा से हो और उत्सर्जन मानकों को पूरा करता हो।
इसका उद्देश्य हाइड्रोजन उत्पादन में पारदर्शिता, अनुरेखण क्षमता (ट्रेसेबिलिटी) और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।
अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा प्रमाणन आवश्यकताएँ : GHCI के तहत, कोई भी ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई जो सरकारी सब्सिडी प्राप्त करती है या घरेलू बाज़ार में हाइड्रोजन बेचती है, उसे फाइनल सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य होगा।  ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) मान्यता और प्रमाणन प्रक्रियाओं की निगरानी करेगा।
स्ट्रैटेजिक हाइड्रोजन इनोवेशन पार्टनरशिप (SHIP) : SHIP का उद्देश्य सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है, ताकि प्रतिस्पर्द्धी हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों का विकास किया जा सके।
इसमें एक समर्पित अनुसंधान एवं विकास फंड शामिल है और नवोन्मेष को बढ़ावा देने तथा घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने के लिये समूह-आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाता है।

निष्कर्ष :

ग्रीन हाइड्रोजन भारत के भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा परिदृश्य के लिये महत्त्वपूर्ण है, जो कम कार्बन उत्सर्जन वाली, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को गति प्रदान करता है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन घरेलू उत्पादन, नवाचार और वैश्विक बाज़ार पहुँच में तेज़ी लाएगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करेगा और भारत को एक स्थायी एवं सुरक्षित भविष्य की ओर वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिये तैयार करेगा।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. भारत में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-कौन से कारक सहायक हैं?
1.नवीकरणीय ऊर्जा (विशेषकर सौर एवं पवन) की प्रचुर उपलब्धता
2.इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण का घरेलू विकास
3.राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) का क्रियान्वयन
4.समुद्री जल से सीधा हाइड्रोजन उत्पादन हेतु विकसित तकनीक
5.कार्बन क्रेडिट बाज़ार का विस्तार
नीचे दिए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
A. 1, 2 और 3 केवल
B. 1, 3 और 5 केवल
C. 1, 2, 3 और 5 केवल
D. 1, 2, 3, 4 और 5

सही उत्तर: C. 1, 2, 3 और 5 केवल

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

Q. वर्ष 2070 तक भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में ग्रीन हाइड्रोजन की क्षमता का आकलन कीजिये। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) इस परिवर्तन में महत्त्वपूर्ण भूमिका कैसे निभा सकता है?

 

 

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