08 Aug आंध्र प्रदेश को चेतावनी: तेलंगाना पुलिचिंतला परियोजना से खतरा, सीपीआई ने किया विरोध

✎ अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का समाधान भारतीय संघवाद की एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसके लिए संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 262), संसदीय कानूनों (जैसे अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956) और विशिष्ट संस्थागत तंत्रों (जैसे नदी…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान और राजव्यवस्था | GS Paper II — संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध | GS Paper III — भारत में जल संसाधन
- Prelims: कृष्णा नदी, पुलिचंतला परियोजना, राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014, सर्वोच्च परिषद (Apex Council), कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB), अंतर-राज्यीय जल विवाद
- Essay: भारत में अंतर-राज्यीय जल विवाद: चुनौतियाँ और समाधान, संघवाद और जल संसाधन प्रबंधन: संतुलन की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का समाधान भारतीय संघवाद की एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसके लिए संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 262), संसदीय कानूनों (जैसे अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956) और विशिष्ट संस्थागत तंत्रों (जैसे नदी प्रबंधन बोर्ड और सर्वोच्च परिषद) के माध्यम से एक संतुलित और सहकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने आंध्र प्रदेश सरकार से तेलंगाना द्वारा कृष्णा नदी पर पुलिचंतला परियोजना के पास राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना के निर्माण को रोकने का आग्रह किया है। CPI का दावा है कि यह नई योजना आंध्र प्रदेश में पुलिचंतला जलाशय पर निर्भर कई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे हजारों किसानों को कठिनाई होगी।
पृष्ठभूमि
- पुलिचंतला परियोजना कृष्णा नदी पर एक महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसे मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- यह परियोजना गुंटूर, पालनाडु, प्रकाशम, बापटला, कृष्णा, NTR और एलुरु जिलों में लगभग 13 लाख एकड़ कृष्णा डेल्टा क्षेत्र को सिंचाई सुरक्षा प्रदान करती है।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 के अनुसार, कृष्णा बेसिन में किसी भी नई लिफ्ट सिंचाई योजना को शुरू करने से पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च परिषद (Apex Council) और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की स्वीकृति आवश्यक है।
- तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना ₹394 करोड़ की अनुमानित लागत से सूर्यपेट जिले में बुग्गा मदारम और डोंडापाडु गांवों के बीच बनाई जा रही है।
- यह योजना प्रतिदिन 2,500 क्यूसेक पानी उठाने की क्षमता रखती है और इसका उद्देश्य नागार्जुनसागर लेफ्ट नहर प्रणाली की मुक्त्याला मेजर शाखा के तहत लगभग 14,000 एकड़ में सिंचाई सुविधाओं को स्थिर करना है।
- CPI का आरोप है कि इस नई योजना के लिए सर्वोच्च परिषद और KRMB से कोई आवश्यक अनुमोदन प्राप्त नहीं किया गया है, जिससे कानूनी चिंताएँ बढ़ गई हैं।
अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद और संबंधित तंत्र
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 262 अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के न्यायनिर्णयन से संबंधित है। यह संसद को कानून द्वारा किसी भी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के जल के उपयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित किसी भी विवाद या शिकायत के न्यायनिर्णयन का प्रावधान करने का अधिकार देता है।
- संसद ने इस शक्ति का प्रयोग करते हुए दो कानून बनाए हैं: नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 और अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956।
- नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 केंद्र सरकार को अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के विनियमन और विकास के लिए नदी बोर्ड स्थापित करने का अधिकार देता है।
- अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 केंद्र सरकार को अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए एक तदर्थ न्यायाधिकरण (ad-hoc tribunal) स्थापित करने का अधिकार देता है। न्यायाधिकरण का निर्णय अंतिम और संबंधित पक्षों के लिए बाध्यकारी होता है।
- कृष्णा नदी जल विवाद भारत के सबसे जटिल और लंबे समय से चले आ रहे अंतर-राज्यीय जल विवादों में से एक है, जिसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य शामिल हैं।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत, कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) और गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड (GRMB) का गठन किया गया था ताकि दोनों राज्यों (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) के बीच नदी जल के कुशल प्रबंधन और बंटवारे को सुनिश्चित किया जा सके।
- सर्वोच्च परिषद (Apex Council) का गठन भी आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत किया गया था, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री करते हैं। यह KRMB और GRMB के कामकाज की निगरानी करती है और दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे से संबंधित मुद्दों पर निर्णय लेती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पुलीचिंतला परियोजना | कृष्णा नदी पर स्थित, यह आंध्र प्रदेश के गुंटूर, पालनाडू, प्रकाशम, बापटला, कृष्णा, NTR और एलुरु जिलों में लगभग 13 लाख एकड़ कृष्णा डेल्टा अयस्कट (Ayacut) को सिंचाई सुरक्षा प्रदान करती है। यह निचले इलाकों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करती है। |
| राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना | तेलंगाना सरकार द्वारा कृष्णा नदी पर पुलीचिंतला परियोजना के पास प्रस्तावित। इसका उद्देश्य नागार्जुनसागर लेफ्ट नहर प्रणाली की मुक्त्याला मेजर शाखा के तहत लगभग 14,000 एकड़ में सिंचाई सुविधाओं को स्थिर करना है। |
| जल उठाने की क्षमता | प्रस्तावित राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना प्रतिदिन 2,500 क्यूसेक पानी उठाने की क्षमता रखती है। |
| आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 | इन धाराओं के अनुसार, कृष्णा बेसिन में किसी भी नई लिफ्ट सिंचाई योजना को शुरू करने से पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता वाली एपेक्स काउंसिल (Apex Council) और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (Krishna River Management Board – KRMB) की मंजूरी आवश्यक है। |
महत्व
अंतर-राज्यीय जल विवाद
- यह मामला कृष्णा नदी के जल बँटवारे को लेकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच चल रहे अंतर-राज्यीय जल विवादों को उजागर करता है।
- यह विवाद दोनों राज्यों के कृषि और पेयजल आवश्यकताओं पर सीधा प्रभाव डालता है, जिससे किसानों और आम जनता के लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
संघवाद और संवैधानिक प्रावधान
- यह मुद्दा भारतीय संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों और अंतर-राज्यीय जल विवादों को सुलझाने में संवैधानिक प्रावधानों (जैसे आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014) के महत्व पर प्रकाश डालता है।
- एपेक्स काउंसिल और KRMB जैसे संस्थानों की भूमिका अंतर-राज्यीय जल प्रबंधन में केंद्रीय प्राधिकरण के महत्व को दर्शाती है।
पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव
- नई परियोजनाओं से मौजूदा लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं पर संभावित नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे हजारों एकड़ कृषि भूमि और हजारों किसानों का जीवन प्रभावित हो सकता है।
- जल संसाधनों के अनियंत्रित दोहन से पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बिगड़ सकता है और संबंधित क्षेत्रों में जल संकट गहरा सकता है।
चुनौतियाँ
1. अंतर-राज्यीय जल विवादों का समाधान
- राज्यों के बीच जल संसाधनों के बँटवारे को लेकर सहमति बनाना एक जटिल कार्य है, खासकर जब दोनों राज्यों की कृषि और पेयजल आवश्यकताएँ अधिक हों।
- ऐसी परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाले कानूनी और तकनीकी मुद्दों को हल करना, जिसमें विभिन्न कानूनों और नियमों की व्याख्या शामिल है, एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, अंतर-राज्यीय संबंध
2. नियामक निकायों की भूमिका
- कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) और एपेक्स काउंसिल जैसे नियामक निकायों की प्रभावशीलता और उनके निर्णयों का अनुपालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- इन निकायों की सिफारिशों को लागू करने में राज्यों के असहयोग से विवाद और बढ़ सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: संवैधानिक निकाय, नियामक संस्थाएँ
3. पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव आकलन
- नई सिंचाई परियोजनाओं के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का सटीक आकलन करना और उन पर विचार करना आवश्यक है।
- किसानों और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा करना, जो ऐसी परियोजनाओं से सीधे प्रभावित होते हैं, एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रभाव आकलन, सामाजिक न्याय
4. कानूनी और न्यायिक हस्तक्षेप
- विवादों को सुलझाने के लिए कानूनी कार्रवाई और न्यायिक हस्तक्षेप (Judicial Intervention) की आवश्यकता हो सकती है, जिससे प्रक्रिया लंबी और महंगी हो सकती है।
- न्यायिक निर्णयों का सम्मान और उनका कार्यान्वयन सुनिश्चित करना भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: न्यायिक समीक्षा, संवैधानिक कानून
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना | तेलंगाना द्वारा बिना अपेक्षित मंजूरी के कृष्णा नदी पर पुलीचिंतला परियोजना के पास निर्माण। |
| आंध्र प्रदेश पर प्रभाव | पुलीचिंतला जलाशय पर निर्भर 21 लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और 51 अन्य योजनाओं का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना। |
| कृषि और पेयजल आपूर्ति | लगभग 50,000 एकड़ कृषि भूमि और हजारों किसानों के लिए पेयजल आपूर्ति बाधित होने की आशंका। |
| कानूनी वैधता | आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 के तहत एपेक्स काउंसिल और KRMB की मंजूरी का अभाव। |
आगे की राह
- आंध्र प्रदेश सरकार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, एपेक्स काउंसिल और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) के साथ तत्काल इस मामले को उठाना चाहिए।
- KRMB को प्रस्तावित योजना की तकनीकी और कानूनी वैधता की विस्तृत जाँच करनी चाहिए, जिसमें आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
- दोनों राज्यों को जल संसाधनों के न्यायसंगत बँटवारे के लिए बातचीत और सहयोग का मार्ग अपनाना चाहिए, जिससे दीर्घकालिक समाधान निकल सके।
- एपेक्स काउंसिल को अंतर-राज्यीय जल विवादों को सुलझाने में अपनी भूमिका को सक्रिय रूप से निभाना चाहिए और विवादित परियोजनाओं पर त्वरित निर्णय लेना चाहिए।
- यदि आवश्यक हो, तो आंध्र प्रदेश सरकार को परियोजना को रोकने के लिए कानूनी कार्रवाई करने पर विचार करना चाहिए, ताकि संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन न हो।
- किसी भी नई परियोजना को शुरू करने से पहले व्यापक पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव आकलन (Environmental and Social Impact Assessment) किया जाना चाहिए।
- जल प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों को शामिल किया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अंतर-राज्यीय जल विवाद · कृष्णा नदी जल विवाद · आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 · राज्यों के अधिकार · संघवाद · जल शक्ति मंत्रालय · कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) · सर्वोच्च परिषद (Apex Council) · सिंचाई परियोजनाएँ · सतत जल प्रबंधन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘राज्य सूची में जल संबंधी विषय’}
अवधारणा प्रवाह
तेलंगाना द्वारा राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना का प्रस्ताव → बिना अपेक्षित मंजूरी के परियोजना का निर्माण → आंध्र प्रदेश की मौजूदा सिंचाई योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका → CPI द्वारा आंध्र प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप का आग्रह → आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों का उल्लंघन → एपेक्स काउंसिल और KRMB की भूमिका का आह्वान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पुलिचंतला परियोजना कृष्णा नदी पर स्थित है और इसका उद्देश्य निचले क्षेत्रों में सिंचाई व पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
2. आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 के तहत कृष्णा बेसिन में किसी भी नई लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए सर्वोच्च परिषद और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की मंजूरी आवश्यक है।
3. राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना का निर्माण आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा कृष्णा नदी पर किया जा रहा है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। पुलिचंतला परियोजना कृष्णा नदी पर है और इसका उद्देश्य निचले क्षेत्रों में सिंचाई व पेयजल आपूर्ति है। कथन 2 भी सही है। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 84 और 85 के तहत कृष्णा बेसिन में नई लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए सर्वोच्च परिषद और KRMB की मंजूरी आवश्यक है। कथन 3 गलत है। राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना का निर्माण तेलंगाना सरकार द्वारा किया जा रहा है, न कि आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा।
Q2. कृष्णा नदी जल विवाद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
(A) केंद्रीय जल आयोग
(B) कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB)
(C) राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी
(D) अंतर-राज्यीय परिषद
- A
- B
- C
- D
उत्तर: B — कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) का गठन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत कृष्णा नदी के जल के प्रबंधन और संबंधित विवादों के समाधान के लिए किया गया था। यह अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान में एक महत्वपूर्ण नियामक निकाय है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद भारत में संघवाद के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करते हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कृष्णा नदी जल विवाद के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का संक्षिप्त परिचय और भारतीय संघवाद पर उनके निहितार्थ।
2. **कृष्णा नदी जल विवाद का संदर्भ:**
* पुलिचंतला परियोजना और राजीव गांधी लिफ्ट सिंचाई योजना के बीच वर्तमान विवाद का उल्लेख।
* आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत जल बँटवारे और प्रबंधन के प्रावधानों पर प्रकाश।
* धारा 84 और 85 के तहत सर्वोच्च परिषद (Apex Council) और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की भूमिका का उल्लेख।
3. **संघवाद के लिए चुनौतियाँ:**
* **सहकारी संघवाद का क्षरण:** राज्यों के बीच अविश्वास और सहयोग की कमी।
* **संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन:** अधिनियमों और निर्णयों की अनदेखी।
* **विकास परियोजनाओं पर प्रभाव:** परियोजनाओं में देरी और आर्थिक नुकसान।
* **राजनीतिकरण:** जल विवादों का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग।
* **नागरिकों पर प्रभाव:** कृषि, पेयजल और आजीविका पर नकारात्मक असर।
4. **समाधान और आगे का मार्ग:**
* **संस्थागत तंत्रों का सुदृढ़ीकरण:** KRMB और सर्वोच्च परिषद को अधिक अधिकार देना।
* **न्यायिक हस्तक्षेप:** आवश्यकता पड़ने पर उच्चतम न्यायालय की भूमिका।
* **सहयोग और संवाद:** राज्यों के बीच रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा देना।
* **वैज्ञानिक डेटा का उपयोग:** जल बँटवारे के लिए निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार।
* **राष्ट्रीय जल नीति:** एक व्यापक और प्रभावी राष्ट्रीय जल नीति की आवश्यकता।
5. **निष्कर्ष:** अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान में सहकारी संघवाद के महत्व पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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