आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम: 2047 तक विकसित भारत के लिए पंचायती राज को मजबूत बनाना

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम: 2047 तक विकसित भारत के लिए पंचायती राज को मजबूत बनाना

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और आधारभूत संरचना; संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों का विकेंद्रीकरण और वित्त  |  GS Paper II — शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय
  • Prelims: आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ पंचायत पोर्टल, मॉडल ओएसआर नियम, पंचायती राज संस्थाएँ, सोलहवाँ वित्त आयोग, स्थानीय स्वशासन, ई-गवर्नेंस, पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI)
  • Essay: विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्थानीय स्वशासन की भूमिका, डिजिटल सशक्तिकरण और वित्तीय आत्मनिर्भरता के माध्यम से ग्रामीण भारत का विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ पोर्टल और मॉडल ओएसआर नियम पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय रूप से सशक्त और तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय पंचायती राज एवं मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने हाल ही में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ पंचायत पोर्टल और पंचायती राज संस्थाओं (Panchayati Raj Institutions – PRIs) के लिए राजस्व के स्वयं के स्रोत (Own Source Revenue – OSR) नियमों का मॉडल जारी किया। ये पहलें वित्तीय रूप से सशक्त, तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर पंचायतों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जो विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय संविधान का 73वाँ संशोधन अधिनियम, 1992, पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन की नींव मजबूत हुई।
  • पंचायती राज संस्थाएँ भारत की लोकतांत्रिक और विकास यात्रा का केंद्र हैं, जो जमीनी स्तर पर शासन और समावेशी ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • इन संस्थाओं को अक्सर वित्तीय संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी स्वायत्तता और विकास परियोजनाओं को लागू करने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • सोलहवें वित्त आयोग (Sixteenth Finance Commission) ने पंचायती राज संस्थाओं के स्वयं के राजस्व (OSR) को मजबूत करने के लिए सिफारिशें की हैं, जिन्हें इन नई पहलों के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
  • ई-गवर्नेंस (e-Governance) और डिजिटल उपकरणों का उपयोग जमीनी स्तर पर शासन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) – डेटा संचालित शासन फॉर विकसित भारत के लिए मंत्रालय को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2026 के तहत स्वर्ण पुरस्कार प्रदान किया गया है, जो मंत्रालय के प्रयासों को दर्शाता है।
  • विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों का सतत और समावेशी विकास आवश्यक है, जिसमें आत्मनिर्भर पंचायतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, समर्थ पोर्टल और मॉडल ओएसआर नियम क्या हैं?

  • **आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम:** यह पंचायती राज मंत्रालय की एक अनूठी पहल है, जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों और ब्लॉक पंचायतों को स्थानीय संसाधनों और अवसरों की पहचान करने तथा उन्हें स्थायी राजस्व सृजन परियोजनाओं में परिवर्तित करने में सक्षम बनाना है।
  • इस कार्यक्रम के तहत, मंत्रालय के समर्पित तकनीकी सहयोग से स्थायी परिचालन लागत (Own Sustainable Operational Cost – OSOC) उत्पन्न करने वाली, ऋण योग्य, राजस्व उत्पन्न करने वाली परियोजनाएँ विकसित की जाएँगी।
  • वित्तपोषण सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility) योगदान, अन्य योजनाओं के समन्वय और बैंक वित्त (NABARD और HUDCO जैसे संस्थागत भागीदारों के माध्यम से) द्वारा सुगम बनाया जाएगा।
  • चार वर्षों में कुल 350 परियोजनाएँ विकसित की जानी हैं, जिनमें पहले वर्ष में 50 परियोजनाएँ और अगले तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष 100 परियोजनाएँ शामिल हैं।
  • कम से कम 50 लाख रुपये की OSOC वाली ग्राम पंचायतें और कम से कम 1 करोड़ रुपये की OSOC वाली ब्लॉक पंचायतें, जिनका कार्यकाल कम से कम तीन वर्ष शेष हो, आवेदन करने के लिए पात्र हैं। विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए सीमा में छूट दी गई है।
  • **समर्थ पंचायत पोर्टल:** यह पंचायती राज मंत्रालय की एक डिजिटल पहल है, जिसे प्रौद्योगिकी-आधारित ओएसआर प्रबंधन के माध्यम से ग्राम पंचायतों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक एकीकृत, विन्यास योग्य राष्ट्रीय मंच है।
  • यह पोर्टल पंचायत राजस्व के सुचारू और पारदर्शी कराधान, भुगतान और निगरानी को सुगम बनाएगा, जिससे वित्तीय दक्षता और जवाबदेही बढ़ेगी।
  • **मॉडल ओएसआर नियम:** ये नियम राज्यों को पंचायत राजस्व को मजबूत करने के लिए एक मार्गदर्शक ढाँचा प्रदान करते हैं। ये पहलें सोलहवें वित्त आयोग की स्वयं के राजस्व (OSR) को मजबूत करने की सिफारिशों के अनुरूप हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम यह कार्यक्रम पंचायतों को स्थानीय संपत्तियों और अवसरों की पहचान करने तथा उन्हें स्थायी राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलने में सक्षम बनाएगा। इसका उद्देश्य ऋण योग्य, राजस्व उत्पन्न करने वाली परियोजनाओं में उनका समावेश करना है।
समर्थ पंचायत पोर्टल यह पोर्टल पंचायत राजस्व के सुचारु और पारदर्शी कराधान, भुगतान और निगरानी को सुगम बनाएगा। यह ग्राम पंचायतों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित ओएसआर (राजस्व के स्वयं के स्रोत) प्रबंधन प्रदान करेगा।
मॉडल ओएसआर नियम ये नियम राज्यों को पंचायत राजस्व को मजबूत करने के लिए एक मार्गदर्शक ढाँचा प्रदान करेंगे, जिससे स्वयं के राजस्व स्रोतों को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वित्तपोषण तंत्र परियोजनाओं का वित्तपोषण सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योगदान, अन्य योजनाओं के समन्वय और बैंक वित्त (नाबार्ड, HUDCO जैसे संस्थागत भागीदारों के साथ) के माध्यम से किया जाएगा।
परियोजना लक्ष्य चार वर्षों में कुल 350 परियोजनाएं विकसित की जानी हैं, जिसमें पहले वर्ष में 50 परियोजनाएं और अगले तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष 100 परियोजनाएं शामिल हैं।

महत्व

आर्थिक सशक्तिकरण

  • यह पहल पंचायतों को अपने स्वयं के राजस्व स्रोतों (OSR) को मजबूत करने में मदद करेगी, जिससे वे वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
  • स्थानीय संपत्तियों को राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • समर्थ पंचायत पोर्टल राजस्व संग्रह में पारदर्शिता और दक्षता लाकर वित्तीय कुप्रबंधन को कम करेगा।

शासन और लोकतंत्र

  • वित्तीय रूप से सशक्त पंचायतें जमीनी स्तर पर बेहतर शासन प्रदान कर सकेंगी और नागरिकों की जरूरतों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सकेंगी।
  • यह कार्यक्रम सहभागी लोकतंत्र को मजबूत करेगा, क्योंकि स्थानीय संसाधनों का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जाएगा।
  • डिजिटल उपकरण और स्थायी राजस्व स्रोत शासन में सुधार करेंगे और समावेशी ग्रामीण विकास को गति देंगे, जो ‘विकसित भारत-2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

संस्थागत सुदृढीकरण

  • यह पहल पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को भारत की लोकतांत्रिक और विकास यात्रा के केंद्र में लाती है, उनकी क्षमता और प्रभावशीलता को बढ़ाती है।
  • सोलहवें वित्त आयोग (Sixteenth Finance Commission) की सिफारिशों के अनुरूप, यह स्वयं के राजस्व को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करता है, जो पंचायती राज संस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार है।
  • नाबार्ड (NABARD) और HUDCO जैसे संस्थागत भागीदारों की भागीदारी परियोजनाओं के वित्तपोषण और कार्यान्वयन में स्थिरता सुनिश्चित करेगी।

चुनौतियाँ

1. वित्तीय संसाधनों की कमी

  • कई पंचायतों के पास अपने स्वयं के राजस्व स्रोत बहुत सीमित होते हैं, जिससे वे केंद्रीय और राज्य सरकारों पर अत्यधिक निर्भर रहती हैं।
  • स्थानीय स्तर पर राजस्व सृजन परियोजनाओं की पहचान करने और उन्हें सफलतापूर्वक लागू करने के लिए विशेषज्ञता और प्रारंभिक पूंजी का अभाव हो सकता है।

2. क्षमता निर्माण और जागरूकता

  • पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को नए कार्यक्रमों, पोर्टल और नियमों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता की आवश्यकता होगी।
  • तकनीकी साक्षरता का अभाव समर्थ पंचायत पोर्टल के पूर्ण उपयोग में बाधा बन सकता है, खासकर दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में।

3. राज्यों के साथ समन्वय

  • मॉडल ओएसआर नियमों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए राज्यों को अपने कानूनों और विनियमों में संशोधन करने की आवश्यकता होगी, जिसमें राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता है।
  • राज्यों के बीच नियमों के कार्यान्वयन में भिन्नता से असमान विकास हो सकता है।

4. परियोजना कार्यान्वयन और निगरानी

  • राजस्व सृजन परियोजनाओं की पहचान, योजना, वित्तपोषण और कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना एक चुनौती होगी।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से वित्तपोषण को आकर्षित करने में चुनौतियां आ सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सीमित राजस्व आधार अधिकांश पंचायतों के पास संपत्ति कर, बाजार शुल्क आदि जैसे स्वयं के राजस्व स्रोत बहुत कम होते हैं, जिससे वे विकास कार्यों के लिए बाहरी वित्तपोषण पर निर्भर रहती हैं।
तकनीकी और मानव संसाधन की कमी पंचायतों में अक्सर तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी होती है, जो डिजिटल पोर्टलों के प्रभावी उपयोग और जटिल परियोजनाओं के प्रबंधन में बाधा डालती है।
राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार परियोजनाओं के चयन, वित्तपोषण और कार्यान्वयन में बाधा डाल सकता है, जिससे संसाधनों का दुरुपयोग हो सकता है।
डेटा प्रबंधन और पारदर्शिता राजस्व संग्रह और व्यय के सटीक डेटा के अभाव में पारदर्शिता बनाए रखना और जवाबदेही सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है।
अंतर-राज्यीय असमानताएं राज्यों के बीच पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण और वित्तीय स्थिति में महत्वपूर्ण अंतर हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर एक समान विकास चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम

आगे की राह

  • पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए व्यापक क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिसमें वित्तीय प्रबंधन, परियोजना विकास और डिजिटल साक्षरता शामिल हो।
  • राज्यों को मॉडल ओएसआर नियमों को अपने स्थानीय कानूनों में शामिल करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिसमें आवश्यक विधायी और प्रशासनिक सहायता प्रदान की जाए।
  • समर्थ पंचायत पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि दूरदराज के क्षेत्रों में भी पंचायतों की इस तक पहुंच हो और वे इसका उपयोग करने में सक्षम हों।
  • राजस्व सृजन परियोजनाओं की पहचान, मूल्यांकन और कार्यान्वयन के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र स्थापित किया जाए, जिसमें नागरिक समाज संगठनों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से वित्तपोषण को आकर्षित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रोत्साहन प्रदान किए जाएं।
  • पंचायतों के वित्तीय प्रदर्शन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए, और सफल परियोजनाओं की सर्वोत्तम प्रथाओं को अन्य पंचायतों के साथ साझा किया जाए।
  • सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, पंचायतों के लिए वित्तीय हस्तांतरण और स्वयं के राजस्व स्रोतों को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत उपाय किए जाएं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पंचायती राज संस्थाएँ · आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम · समर्थ पंचायत पोर्टल · राजस्व के स्वयं के स्रोत (OSR) · विकसित भारत-2047 · सोलहवाँ वित्त आयोग · स्थानीय स्वशासन · ग्रामीण विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 243-G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
  • अनुच्छेद 243-H: पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 243-I: वित्त आयोग का गठन

अवधारणा प्रवाह

पंचायतों की वित्तीय निर्भरता  →  राजस्व के स्वयं के स्रोतों (OSR) को मजबूत करने की आवश्यकता  →  आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम और समर्थ पोर्टल का शुभारंभ  →  स्थानीय संपत्तियों का राजस्व सृजन में परिवर्तन  →  पंचायतों का आर्थिक सशक्तिकरण और बेहतर शासन  →  विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. पंचायती राज मंत्रालय द्वारा हाल ही में शुरू की गई ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों को स्थानीय संपत्तियों को स्थायी राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलने में सक्षम बनाना है।
2. इस कार्यक्रम के तहत वित्तपोषण केवल सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से किया जाएगा।
3. नाबार्ड (NABARD) और हुडको (HUDCO) इस कार्यक्रम के संस्थागत भागीदार हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संपत्तियों को राजस्व सृजन परियोजनाओं में बदलना है। कथन 2 गलत है क्योंकि वित्तपोषण सार्वजनिक-निजी भागीदारी, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, अन्य योजनाओं के समन्वय और बैंक वित्त के माध्यम से भी होता है। कथन 3 सही है क्योंकि नाबार्ड और हुडको इसके संस्थागत भागीदार हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ का/के प्राथमिक उद्देश्य है/हैं?
1. पंचायत राजस्व के सुचारू और पारदर्शी कराधान को सुगम बनाना।
2. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी करना।
3. प्रौद्योगिकी-आधारित राजस्व के स्वयं के स्रोत (OSR) प्रबंधन के माध्यम से ग्राम पंचायतों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 और 3 सही हैं क्योंकि समर्थ पंचायत पोर्टल का उद्देश्य पंचायत राजस्व के कराधान, भुगतान और निगरानी को सुगम बनाना तथा प्रौद्योगिकी-आधारित OSR प्रबंधन के माध्यम से पंचायतों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि पोर्टल का प्राथमिक ध्यान राजस्व प्रबंधन पर है, न कि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पर।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल ही में शुरू किए गए ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ और ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ भारत में पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने में किस प्रकार सहायक होंगे? ग्रामीण विकास और जमीनी स्तर पर शासन में इन पहलों के संभावित प्रभावों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ और ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली का संक्षिप्त परिचय दें। दूसरे भाग में, ये पहलें पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने और राजस्व के स्वयं के स्रोत (OSR) को मजबूत करने में कैसे मदद करेंगी, इस पर चर्चा करें। अंत में, ग्रामीण विकास, सहभागी लोकतंत्र और जमीनी स्तर पर नागरिक-केंद्रित शासन पर इनके संभावित सकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण करें, साथ ही कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों या सीमाओं का भी उल्लेख करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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