11 Aug आरबीआई 11 अगस्त 2026 को ओवरनाइट वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो नीलामी करेगा: यूपीएससी के लिए महत्वपूर्ण
✎ परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी RBI का एक मौद्रिक उपकरण है जो नीलामी के माध्यम से अतिरिक्त बैंकिंग तरलता को अवशोषित करके मुद्रा बाजार दरों को स्थिर करने में मदद करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। | GS Paper III — सरकारी बजट।
- Prelims: तरलता समायोजन सुविधा (LAF), परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR), रिवर्स रेपो दर, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), मौद्रिक नीति, तरलता प्रबंधन
- Essay: भारत में मौद्रिक नीति का बदलता परिदृश्य और आर्थिक स्थिरता में इसकी भूमिका।, भारतीय अर्थव्यवस्था में RBI की भूमिका: स्थिरता और विकास के बीच संतुलन।
त्वरित पुनरावृत्ति: परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी RBI का एक मौद्रिक उपकरण है जो नीलामी के माध्यम से अतिरिक्त बैंकिंग तरलता को अवशोषित करके मुद्रा बाजार दरों को स्थिर करने में मदद करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 11 अगस्त, 2026 को तरलता समायोजन सुविधा (LAF) के तहत एक दिवसीय परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय वर्तमान और विकसित होती तरलता स्थितियों की समीक्षा के बाद लिया गया है, जिसमें प्रणाली में अतिरिक्त तरलता (liquidity) को अवशोषित करना मुख्य उद्देश्य है। इस नीलामी के माध्यम से RBI ₹1,00,000 करोड़ की राशि को अवशोषित करेगा, जो वित्तीय प्रणाली में मुद्रा आपूर्ति को विनियमित करने के उसके प्रयासों का हिस्सा है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) देश का केंद्रीय बैंक है, जो मौद्रिक नीति (monetary policy) तैयार करता है, उसका कार्यान्वयन करता है और उसकी निगरानी करता है। इसका मुख्य उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जबकि आर्थिक संवृद्धि (economic growth) के लक्ष्य को ध्यान में रखना है।
- तरलता समायोजन सुविधा (LAF) RBI का एक प्रमुख मौद्रिक नीति उपकरण है, जिसका उपयोग वह अर्थव्यवस्था में तरलता को विनियमित करने के लिए करता है। LAF में रेपो (Repo) और रिवर्स रेपो (Reverse Repo) दोनों परिचालन शामिल हैं।
- रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक RBI से धन उधार लेते हैं, जबकि रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक RBI में अतिरिक्त धन जमा करते हैं। ये दरें अर्थव्यवस्था में ऋण की लागत और उपलब्धता को प्रभावित करती हैं।
- परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी एक ऐसा तंत्र है जिसके तहत RBI बैंकों से निश्चित अवधि के लिए अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करता है, लेकिन इसकी दर नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित होती है, न कि एक निश्चित दर पर। यह RBI को बाजार की स्थितियों के अनुसार अधिक लचीलापन प्रदान करता है।
- जब बैंकिंग प्रणाली में अत्यधिक तरलता होती है, तो RBI इसे अवशोषित करने के लिए रिवर्स रेपो परिचालन का उपयोग करता है, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) के दबाव को कम करने और ब्याज दरों को वांछित स्तर पर बनाए रखने में मदद मिलती है।
- RBI नियमित रूप से तरलता की स्थिति की समीक्षा करता है और उसके अनुसार अपने मौद्रिक नीति उपकरणों को समायोजित करता है ताकि वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके और अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल माहौल बना रहे।
परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी क्या है?
- परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा तरलता प्रबंधन के लिए उपयोग किया जाने वाला एक मौद्रिक नीति उपकरण है।
- यह तरलता समायोजन सुविधा (LAF) का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता (surplus liquidity) को अवशोषित करना है।
- सामान्य रिवर्स रेपो परिचालन के विपरीत, जहाँ दर RBI द्वारा निर्धारित की जाती है, VRRR नीलामी में रिवर्स रेपो दर नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित होती है। बैंक अपनी बोली लगाते हैं कि वे किस दर पर RBI को अपनी अतिरिक्त निधि उधार देने को तैयार हैं।
- RBI इस उपकरण का उपयोग तब करता है जब बैंकिंग प्रणाली में बड़ी मात्रा में अतिरिक्त तरलता होती है, जिसे पारंपरिक निश्चित दर रिवर्स रेपो परिचालन के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रबंधित नहीं किया जा सकता है।
- VRRR नीलामी RBI को तरलता को अधिक कुशलता से प्रबंधित करने, मुद्रा बाजार दरों को लक्षित स्तरों के करीब रखने और मुद्रास्फीति के दबावों को नियंत्रित करने में मदद करती है।
- यह बैंकों को अपनी अतिरिक्त निधि पर प्रतिफल अर्जित करने का अवसर भी प्रदान करता है, जबकि RBI को प्रणाली से तरलता को बाहर निकालने में मदद करता है।
- नीलामी आमतौर पर एक निश्चित अवधि के लिए आयोजित की जाती है, जैसे कि एक दिन (ओवरनाइट), सात दिन या चौदह दिन, जैसा कि RBI की प्रेस विज्ञप्ति में निर्दिष्ट होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ओवरनाइट वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी | यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा तरलता प्रबंधन (Liquidity Management) के लिए उपयोग किया जाने वाला एक मौद्रिक नीति उपकरण है। |
| तरलता समायोजन सुविधा (LAF) के तहत | LAF RBI का एक प्रमुख ढाँचा है जो बैंकों को अपनी दैनिक तरलता आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करता है। |
| ₹1,00,000 करोड़ की अधिसूचित राशि | यह प्रणाली से इतनी राशि की तरलता को अवशोषित करने का संकेत देता है, जो अधिशेष तरलता की स्थिति को दर्शाता है। |
| एक दिन की अवधि | यह अल्पकालिक तरलता प्रबंधन पर RBI के तात्कालिक ध्यान को दर्शाता है। |
| परिवर्तनीय दर (Variable Rate) | यह RBI को बाजार की स्थितियों के आधार पर ब्याज दर तय करने की अनुमति देता है, जिससे अधिक लचीलापन आता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- अधिशेष तरलता का प्रबंधन: VRRR नीलामी के माध्यम से, RBI बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करता है, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
- मुद्रास्फीति नियंत्रण: प्रणाली में अत्यधिक तरलता ऋण वृद्धि को बढ़ावा दे सकती है और मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती है। VRRR इस पर अंकुश लगाने में सहायक है।
- अल्पकालिक ब्याज दरों का स्थिरीकरण: तरलता को अवशोषित करके, RBI अंतर-बैंक बाजार (Inter-bank Market) में अल्पकालिक ब्याज दरों को स्थिर करने में मदद करता है, जिससे मौद्रिक नीति का प्रभावी संचरण सुनिश्चित होता है।
मौद्रिक नीति का महत्व
- नीतिगत दरों का संचरण: VRRR नीलामी RBI की नीतिगत दरों (जैसे रेपो दर) के संचरण को मजबूत करती है, जिससे अर्थव्यवस्था में ऋण और जमा दरों पर उनका प्रभाव पड़ता है।
- बाजार में विश्वास: RBI द्वारा सक्रिय तरलता प्रबंधन बाजार में स्थिरता और विश्वास का संकेत देता है, जिससे निवेशकों और व्यवसायों को मदद मिलती है।
बैंकिंग प्रणाली पर प्रभाव
- बैंकों के लिए निवेश का अवसर: VRRR नीलामी बैंकों को अपनी अतिरिक्त निधि को RBI के पास सुरक्षित रूप से निवेश करने का अवसर प्रदान करती है, जिस पर उन्हें ब्याज मिलता है।
- वित्तीय स्थिरता: तरलता के उचित प्रबंधन से बैंकिंग प्रणाली की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है, जिससे किसी भी प्रणालीगत जोखिम को कम किया जा सके।
चुनौतियाँ
1. अधिशेष तरलता का लगातार बने रहना
- यदि बैंकिंग प्रणाली में लगातार अधिशेष तरलता बनी रहती है, तो यह RBI के लिए एक चुनौती बन सकती है, क्योंकि इसे अवशोषित करने के लिए बार-बार हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।
- अत्यधिक तरलता मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा सकती है और वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: मौद्रिक नीति और वित्तीय बाजार
2. ब्याज दर संचरण में चुनौतियाँ
- VRRR नीलामी के माध्यम से तरलता को अवशोषित करने के बावजूद, यह हमेशा सुनिश्चित नहीं होता है कि नीतिगत दरों का संचरण (Transmission) अर्थव्यवस्था में ऋण और जमा दरों पर पूरी तरह से हो।
- बैंकों की अपनी आंतरिक तरलता स्थिति और ऋण मांग जैसे कारक संचरण को प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: मौद्रिक नीति और वित्तीय बाजार
3. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ
- वैश्विक आर्थिक विकास, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसी बाहरी अनिश्चितताएँ घरेलू तरलता की स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे RBI के लिए तरलता प्रबंधन और जटिल हो जाता है।
- पूंजी प्रवाह में बदलाव भी तरलता को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अधिशेष तरलता का लगातार बने रहना | मुद्रास्फीति का दबाव और वित्तीय स्थिरता के लिए संभावित जोखिम। |
| ब्याज दर संचरण की प्रभावशीलता | नीतिगत दरों का अर्थव्यवस्था में वास्तविक प्रभाव सुनिश्चित करना। |
| वैश्विक आर्थिक कारक | बाहरी झटकों से घरेलू तरलता और मौद्रिक नीति पर प्रभाव। |
| सरकारी व्यय और राजकोषीय स्थिति | सरकारी व्यय में वृद्धि या कमी बैंकिंग प्रणाली में तरलता को प्रभावित कर सकती है। |
आगे की राह
- RBI को बाजार की तरलता स्थितियों की बारीकी से निगरानी जारी रखनी चाहिए और आवश्यकतानुसार तरलता प्रबंधन उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।
- मौद्रिक नीति संचरण को मजबूत करने के लिए बैंकों के साथ संवाद और नीतिगत उपायों को बढ़ावा देना चाहिए।
- वैश्विक आर्थिक विकास और उनके घरेलू तरलता पर पड़ने वाले प्रभावों का सक्रिय रूप से विश्लेषण करना चाहिए।
- वित्तीय प्रणाली में किसी भी संभावित जोखिम को कम करने के लिए विवेकपूर्ण विनियमन और पर्यवेक्षण को बनाए रखना चाहिए।
- तरलता प्रबंधन के लिए विभिन्न उपकरणों, जैसे स्थायी जमा सुविधा (Standing Deposit Facility – SDF) का प्रभावी ढंग से उपयोग करना चाहिए।
- सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के बीच सामंजस्य सुनिश्चित करना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- [‘अनुच्छेद 282’, ‘संघ या राज्य द्वारा व्यय’]
- [‘अनुच्छेद 292’, ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’]
अवधारणा प्रवाह
RBI तरलता की स्थिति की समीक्षा करता है। → बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष तरलता की पहचान की जाती है। → RBI तरलता को अवशोषित करने का निर्णय लेता है। → ओवरनाइट VRRR नीलामी की घोषणा की जाती है। → बैंक अपनी अतिरिक्त निधि RBI के पास जमा करते हैं। → प्रणाली से तरलता अवशोषित होती है और ब्याज दरें स्थिर होती हैं। → मुद्रास्फीति नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता में सहायता मिलती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंकों से अतिरिक्त चलनिधि को अवशोषित करने के लिए आयोजित की जाती है।
2. VRRR नीलामी चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) का एक हिस्सा है।
3. रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक RBI से धन उधार लेते हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। VRRR नीलामी वास्तव में RBI द्वारा प्रणाली से अतिरिक्त चलनिधि को अवशोषित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक उपकरण है और यह LAF का एक घटक है। कथन 3 गलत है क्योंकि रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों से धन उधार लेता है, न कि इसके विपरीत। बैंक RBI से रेपो दर पर उधार लेते हैं।
Q2. चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित है?
- A. रेपो दर: वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों से धन उधार लेता है।
- B. रिवर्स रेपो दर: वह दर जिस पर वाणिज्यिक बैंक RBI से धन उधार लेते हैं।
- C. सीमांत स्थायी सुविधा (MSF): वह दर जिस पर बैंक आपातकालीन स्थिति में RBI से धन उधार ले सकते हैं।
- D. बैंक दर: वह दर जिस पर RBI सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदता और बेचता है।
उत्तर: C. सीमांत स्थायी सुविधा (MSF): वह दर जिस पर बैंक आपातकालीन स्थिति में RBI से धन उधार ले सकते हैं। — विकल्प C सही है। MSF वह सुविधा है जिसके तहत बैंक आपातकालीन स्थिति में RBI से ओवरनाइट आधार पर धन उधार ले सकते हैं। विकल्प A और B गलत हैं क्योंकि रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक RBI से उधार लेते हैं, और रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर RBI बैंकों से उधार लेता है। विकल्प D गलत है क्योंकि बैंक दर वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को दीर्घकालिक ऋण देता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति के संचालन में चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) के महत्व का परीक्षण कीजिए। VRRR नीलामी जैसे इसके घटकों के माध्यम से यह किस प्रकार अर्थव्यवस्था में चलनिधि को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मौद्रिक नीति के उद्देश्य और LAF की भूमिका का संक्षिप्त परिचय।
2. **LAF का महत्व:**
* अल्पकालिक चलनिधि प्रबंधन में केंद्रीय भूमिका।
* मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में योगदान।
* वित्तीय बाजारों में दरों को स्थिर करने में मदद।
* मौद्रिक नीति संचरण (monetary policy transmission) को सुगम बनाना।
3. **LAF के घटक और उनका कार्य:**
* **रेपो दर:** बैंकों को धन उपलब्ध कराना, प्रणाली में चलनिधि डालना।
* **रिवर्स रेपो दर:** बैंकों से अतिरिक्त चलनिधि अवशोषित करना।
* **परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी:** विशेष रूप से अतिरिक्त चलनिधि को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक उपकरण, जो बाजार की स्थितियों के अनुसार दर निर्धारित करता है। हालिया समाचार का संदर्भ।
* **सीमांत स्थायी सुविधा (MSF):** आपातकालीन चलनिधि सहायता।
4. **चलनिधि प्रबंधन में प्रभावशीलता:**
* बाजार में मांग और आपूर्ति के आधार पर दरों का निर्धारण।
* अल्पकालिक ब्याज दरों को लक्षित करने में सहायता।
* प्रणालीगत जोखिमों को कम करना।
* बाजार सहभागियों को स्पष्ट संकेत देना।
5. **निष्कर्ष:** LAF और VRRR जैसी नीतियां RBI को गतिशील आर्थिक वातावरण में चलनिधि को नियंत्रित करने और व्यापक आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में कैसे सक्षम बनाती हैं, इसका सारांश।
स्रोत: RBI
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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