इज़राइल – हमास शांति समझौता : गाज़ा में स्थायी शांति और पुनर्निर्माण की नई उम्मीद

इज़राइल – हमास शांति समझौता : गाज़ा में स्थायी शांति और पुनर्निर्माण की नई उम्मीद

पाठ्यक्रम – मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 2 – के ‘ अंतर्राष्ट्रीय संबंध ’ के अंतर्गत – इज़राइल-हमास शांति समझौता : गाजा में स्थायी शांति और पुनर्निर्माण की एक नई आशा खण्ड से संबंधित। 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए – विश्व बैंक, यूरोपीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (EBRD), यूनिसेफ, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP), अब्राहम समझौता, फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण (PA)  

मुख्य परीक्षा के लिए – इज़राइल-हमास शांति समझौते को सफल बनाने में मुख्य समस्याएँ क्या हैं?

 

खबरों में क्यों ?

 

 

  • इज़राइल और हमास के बीच हाल ही में हुआ शांति समझौता मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम माना जा रहा है। यह समझौता गाज़ा पट्टी में महीनों तक चली भीषण लड़ाई, मानवीय संकट और व्यापक विनाश के बाद सामने आया है। इसके तहत अस्थायी संघर्षविराम, बंधक–कैदी विनिमय, और मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति जैसे प्रावधान शामिल हैं, जो क्षेत्र में स्थिरता और पुनर्निर्माण की दिशा में आशा की नई किरण हैं।
  • इस कूटनीतिक पहल को बल देने के लिए यूनाइटेड किंगडम ( संयुक्त राजशाही ) ने गाज़ा के पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर एक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है। 
  • यह सम्मेलन मिस्र के शर्म-अल-शेख में होने वाले बहु-देशीय शांति सम्मेलन से पहले आयोजित किया जा रहा है, जिसमें ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सहित कई वैश्विक नेता भाग ले रहे हैं।
  • ब्रिटेन ने गाज़ा में जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (WASH) सेवाओं के लिए 20 मिलियन पाउंड की सहायता राशि की घोषणा की है, जिसे UNICEF, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) और नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (NRC) जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के माध्यम से वितरित किया जाएगा।
  • यह समझौता केवल युद्धविराम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवीय संवेदना की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। 
  • इसका उद्देश्य गाज़ा में स्थायी शांति, पुनर्निर्माण और राजनीतिक स्थिरता की दिशा में ठोस नींव रखना है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इज़राइल और हमास के बीच गहरे अविश्वास, राजनीतिक मतभेद और प्रशासनिक पुनर्गठन जैसे जटिल मुद्दों को किस प्रकार सुलझाया जाता है।

 

संघर्ष की पृष्ठभूमि :

 

  • 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इज़राइल पर किए गए व्यापक हमलों के बाद इज़राइल–हमास युद्ध शुरू हुआ। इस हमले में सैकड़ों निर्दोष नागरिक मारे गए, जिसके बाद इज़राइल ने गाज़ा पर सैन्य अभियान शुरू किया।
    लगातार बमबारी, नाकेबंदी और सैन्य अभियानों के कारण गाज़ा का अधिकांश बुनियादी ढाँचा ध्वस्त हो गया और लाखों नागरिक विस्थापित हुए।
    पिछले दो वर्षों में मिस्र, क़तर और संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के बावजूद कोई स्थायी युद्धविराम नहीं हो सका। प्रमुख अड़चनें — बंधक विनिमय, सीमा नियंत्रण और गाज़ा में राजनीतिक प्रशासन — रहीं, जिन्हें लेकर सहमति नहीं बन पाई थी।

 

शांति योजना के प्रमुख बिंदु :

 

  • युद्धविराम : इज़राइल और हमास के बीच अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की गई है, ताकि मानवीय सहायता पहुँचाने और आगे की बातचीत के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जा सके।
  • बंधक–कैदी विनिमय : हमास 20 जीवित इज़राइली बंधकों को रिहा करेगा। इसके बदले इज़राइल 2,000 फ़िलिस्तीनी कैदियों को छोड़ेगा, जिनमें 250 आजीवन कारावास पाए हुए कैदी और 1,700 अक्टूबर 2023 के बाद गिरफ्तार किए गए व्यक्ति शामिल हैं। यह विनिमय समझौते के लागू होने के 72 घंटों के भीतर सम्पन्न होगा।
  • मानवीय सहायता की पहुँच : युद्धविराम के तहत गाज़ा में खाद्य, जल, चिकित्सा और राहत सामग्री की आपूर्ति को अनुमति दी जाएगी। यह सहायता अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों — WFP, UNICEF और NRC — के माध्यम से पहुँचाई जाएगी।
  • एक बहु-चरणीय शांति प्रक्रिया का प्रारंभिक भाग : यह समझौता एक बहु-चरणीय शांति प्रक्रिया का प्रारंभिक भाग है। इसके आगामी चरणों में गाज़ा के पुनर्निर्माण, शासन सुधारों और दीर्घकालिक क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

 

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और प्रमुख देशों की भूमिका :

 

  • इस समझौते को सफल बनाने में अमेरिका, मिस्र, क़तर और ब्रिटेन की सक्रिय भूमिका रही।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे “स्थायी शांति की दिशा में निर्णायक कदम” बताया।
  • मिस्र ने शर्म-अल-शेख में तैयारियाँ कीं, जहाँ 20 से अधिक देशों के नेता — जिनमें ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर भी शामिल थे — गाज़ा की पुनर्बहाली और राजनीतिक समाधान पर विचार-विमर्श के लिए एकत्र हुए।
  • यूनाइटेड किंगडम ने वेस्ट ससेक्स में एक अलग गाज़ा रिकवरी शिखर सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की, जिससे युद्धग्रस्त क्षेत्र के पुनर्निर्माण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता दोहराई गई।

 

ब्रिटेन की मानवीय और पुनर्निर्माण सहायता :

 

  • ब्रिटिश सरकार ने गाज़ा के लिए £20 मिलियन की सहायता राशि निर्धारित की है, जो विशेष रूप से जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (WASH) परियोजनाओं पर केंद्रित होगी।
  • इसके अतिरिक्त, ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय की एजेंसी “Wilton Park” एक तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित करेगी, जिसमें फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण, सऊदी अरब, जॉर्डन, जर्मनी, इटली, और विश्व बैंक तथा यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (EBRD) जैसी संस्थाएँ भाग लेंगी।
  • इस सम्मेलन का उद्देश्य गाज़ा के दीर्घकालिक पुनर्निर्माण और निवेश रणनीतियों पर समन्वय बनाना है।

 

वर्तमान समय में समझौते का महत्व :

 

  • मानवीय राहत : युद्धविराम के माध्यम से लाखों गाज़ावासियों तक राहत सामग्री और स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँच सकेंगी, जो वर्षों से नाकेबंदी और संघर्ष की त्रासदी झेल रहे हैं। यह कदम गाज़ा की मानवीय स्थिति में तत्काल सुधार लाने का प्रयास है।
  • विश्वास निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक कदम : बंधक और कैदी विनिमय दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह प्रक्रिया आगे की स्थायी शांति वार्ताओं के लिए अनुकूल माहौल बनाएगी।
  • एक ठोस और व्यावहारिक समाधान के रूप में कूटनीतिक उपलब्धि : पिछले महीनों में कई बार युद्धविराम के प्रयास विफल रहे, किंतु यह समझौता पहली बार एक ठोस और व्यावहारिक समाधान के रूप में सामने आया है। इससे क्षेत्रीय राजनीति में कूटनीतिक गतिशीलता आई है।
  • क्षेत्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करना : गाज़ा में संघर्षविराम का असर केवल इज़राइल–फ़िलिस्तीन पर नहीं, बल्कि लेबनान, सीरिया, और लाल सागर क्षेत्र पर भी पड़ेगा, जहाँ युद्ध के फैलाव की आशंका बनी हुई थी। इस शांति से क्षेत्रीय तनावों में कमी आएगी।

 

समझौते का व्यापक प्रभाव :

 

  • यह समझौता न केवल गाज़ा में बल्कि व्यापक मध्य-पूर्वी भू-राजनीति पर भी असर डालेगा। यदि यह स्थायी शांति में बदलता है, तो यह अब्राहम समझौते जैसे अन्य क्षेत्रीय गठबंधनों को नई दिशा देगा।
  • इसके अलावा, यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह प्रमाणित करेगा कि कूटनीति और वार्ता अब भी हिंसा और आतंकवाद पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

 

स्थायी शांति की राह में मुख्य आगामी चुनौतियाँ :

 

  • नाजुक भरोसा का होना : इज़राइल और हमास दोनों ही पक्षों के बीच दशकों से चली आ रही अविश्वास की भावना इस समझौते की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। छोटी सी उकसावे की घटना भी युद्धविराम को तोड़ सकती है।
  • आंतरिक राजनीतिक दबाव : इज़राइल और हमास दोनों के भीतर कठोर विचारधारात्मक समूह हैं जो किसी भी समझौते को “कमज़ोरी” मानते हैं। राजनीतिक नेतृत्व को अपने-अपने घरेलू दबावों का सामना करना पड़ेगा।
  • शासन में हमास की भूमिका का विवाद : ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों ने गाज़ा के प्रशासन में “हमास की कोई भूमिका नहीं” की नीति अपनाई है। परंतु गाज़ा की जमीनी हकीकत में हमास की उपस्थिति को नज़रअंदाज़ करना प्रशासनिक जटिलताएँ उत्पन्न कर सकता है।
  • वित्तीय पारदर्शिता और पुनर्निर्माण : गाज़ा का पुनर्निर्माण एक दीर्घकालिक और महंगा कार्य होगा, जिसके लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय विश्वास आवश्यक है। भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता इस प्रक्रिया में बाधक बन सकती हैं।

 

समाधान / आगे की राह :

 

  1. फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण की भूमिका को सशक्त बनाने की आवश्यकता : गाज़ा के प्रशासन और पुनर्निर्माण में फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) की भागीदारी को मजबूत करना आवश्यक है, ताकि एक स्थायी और वैध शासन प्रणाली विकसित हो सके।
  2. मानवीय सहायता की निरंतरता सुनिश्चित करना : अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सुनिश्चित करना होगा कि सहायता की आपूर्ति राजनीतिक अवरोधों से मुक्त रहे और नागरिकों तक सीधे पहुँचे।
  3. समावेशी संवाद को बढ़ावा देने की जरूरत : शांति प्रक्रिया केवल इज़राइल और हमास तक सीमित न रहकर व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक हितधारकों — मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ — को शामिल करे।
  4. निगरानी और अनुपालन व्यवस्था की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तंत्र बनाए जाने की जरूरत : युद्धविराम के पालन, राहत वितरण और पुनर्निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तंत्र बनाया जाना चाहिए।
  5. दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान पर ध्यान देने की आवश्यकता : अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गाजा संघर्ष के समाधान को व्यापक इजरायल-फिलिस्तीनी शांति प्रक्रिया से जोड़ना होगा, जिसमें अंततः एक दो-राज्य समाधान की दिशा में काम करना शामिल है।

 

निष्कर्ष :

 

  1. इज़राइल–हमास शांति समझौता आधुनिक इतिहास के सबसे जटिल और रक्तरंजित संघर्षों में से एक को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक अवसर प्रस्तुत करता है। यह केवल हथियारों की खामोशी नहीं, बल्कि कूटनीति की पुनर्स्थापना, मानवीय करुणा की विजय और साझा वैश्विक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। 
  2. इस शांति समझौता की इस राह में अविश्वास, राजनीतिक मतभेद और पुनर्निर्माण की चुनौतियाँ गंभीर हैं, फिर भी यह पहल उस सामूहिक इच्छा का परिचायक है कि दुनिया अब हिंसा के चक्र को समाप्त कर स्थायी शांति की ओर बढ़ना चाहती है।
  3. अमेरिका, ब्रिटेन, मिस्र और क़तर जैसे देशों की मध्यस्थता इस तथ्य को पुष्ट करती है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकजुट होकर कार्य करे, तो गाज़ा जैसी त्रासदी भी पुनर्निर्माण और स्थिरता की भूमि बन सकती है। गाज़ा के लाखों पीड़ितों के लिए यह समझौता केवल एक राजनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवन, गरिमा और भविष्य की नई आशा है।
  4. इज़राइल–हमास शांति समझौता में हालाँकि स्थायी शांति का मार्ग अभी लंबा और कठिन है, परंतु यह क्षण एक नई शुरुआत का प्रतीक है — एक ऐसा समय जब संवाद, सहयोग और संवेदना के माध्यम से विनाश पर मानवता की विजय संभव है। 
  5. यदि सभी पक्ष धैर्य, विश्वास और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ें, तो यह समझौता न केवल गाज़ा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर कर सकता है।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं द हिन्दू। 

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. गाज़ा में हाल ही में हुए अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 

  1. यूनाइटेड किंगडम वेस्ट ससेक्स में गाज़ा के पुनर्निर्माण पर एक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा।
  2. शांति योजना के पहले चरण में एक अस्थायी युद्धविराम और इज़राइल और हमास के बीच बंधकों और कैदियों का आदान-प्रदान शामिल है। 
  3. गाजा के लिए यूनाइटेड किंगडम की सहायता यूनिसेफ, विश्व खाद्य कार्यक्रम और नॉर्वेजियन शरणार्थी परिषद जैसी एजेंसियों के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

नीचे दिए गए में से कौन- सा / से कथन सही हैं?
(a) 1 और 2 ही
(b) 2 और 3 ही
(c) 1 और 3 ही
(d) 1, 2 और 3

उत्तर – (d)

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. “ इज़राइल–हमास शांति समझौता आधुनिक युग के सबसे दीर्घकालिक संघर्षों में से एक को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ” इस कथन के संदर्भ में इस समझौते के महत्व, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की भूमिका तथा आगामी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा कीजिए। ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
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