एक्सिओम – 4 और भारत : भारत की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रा

एक्सिओम – 4 और भारत : भारत की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रा

पाठ्यक्रम – सामान्य अध्ययन -3- विज्ञान और प्रौद्योगिकी – एक्सिओम – 4 और भारत : भारत की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रा

प्रारंभिक परीक्षा के लिए :

एक्सिओम मिशन 4, फाल्कन 9 रॉकेट, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस), मिशन चंद्रयान, मिशन मंगलयान 

मुख्य परीक्षा के लिए : 

एक्सिओम मिशन-4 क्या है? भारत के लिए मानव अंतरिक्ष उड़ान का क्या महत्व है? अंतरिक्ष में वैश्विक शांति और सहयोग को बढ़ावा देने में इसरो की क्या भूमिका है?

 

ख़बरों में क्यों?

 

 

  • हाल ही में एक्सिओम मिशन 4 की लॉन्चिंग में आई तकनीकी बाधाओं के चलते यह मिशन फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है। फाल्कन 9 रॉकेट में तरल ऑक्सीजन (एलओएक्स) के रिसाव और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के ज्वेज्दा मॉड्यूल से जुड़ी कुछ तकनीकी चिंताओं के कारण इस अभियान को स्थगित करना पड़ा। इस स्थिति में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक्सिओम स्पेस, नासा और स्पेसएक्स के साथ मिलकर समाधान तलाशने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई है। 
  • हाल ही में 11 जून को स्पेसएक्स द्वारा मिशन में देरी की औपचारिक घोषणा की गई, जिसमें जरूरी मरम्मत कार्यों के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता जताई गई। इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने स्पष्ट किया है कि मिशन की सफलता के लिए सुरक्षा और प्रणालीगत अखंडता सर्वोपरि है और इन चुनौतियों का समाधान पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी से किया जा रहा है।

 

एक्सिओम-4 मिशन के बारे में :

 

क्रम सं. मुख्य बिंदु विवरण
1 बहुस्तरीय विलंब मौसम की स्थिति, फाल्कन 9 एलओएक्स रिसाव, तथा आईएसएस ज्वेज्दा मॉड्यूल में दबाव विसंगति के कारण एक्स-4 के प्रक्षेपण में देरी हुई।
2 फाल्कन 9 में LOx लीक स्पेसएक्स ने पोस्ट-स्टेटिक अग्नि निरीक्षण के दौरान तरल ऑक्सीजन (एलओएक्स) रिसाव की पहचान की, जिसे प्रक्षेपण से पहले मरम्मत की आवश्यकता थी।
3 ज़्वेज़्दा मॉड्यूल समस्या ज्वेज्दा मॉड्यूल के पीआरके वेस्टिबुल में दबाव में गिरावट के कारण रूसी अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा निरीक्षण और सीलिंग शुरू कर दी गई।
4 सुरक्षा पर जोर इसरो, नासा, एक्सिओम और स्पेसएक्स ने देरी के बीच सुरक्षा और मिशन की अखंडता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
5 चालक दल संरचना चालक दल में पैगी व्हिटसन (कमांडर), शुभांशु शुक्ला (भारत), स्लावोज़ उज़्नियास्की (पोलैंड), टिबोर कापू (हंगरी) शामिल हैं।
6 ऐतिहासिक भागीदारी भारत, पोलैंड और हंगरी के प्रथम बार अंतरिक्ष यात्री अपनी सरकारों द्वारा समर्थित आई.एस.एस. मिशन में भाग लेंगे।
7 14 दिवसीय वैज्ञानिक मिशन चालक दल दो सप्ताह तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा, जिसमें इसरो और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के अनुसंधान भी शामिल होंगे।
8 लॉन्च की तारीख तय मरम्मत कार्य पूरा होने और रेंज की उपलब्धता के आधार पर नई लॉन्च तिथि की घोषणा अभी की जानी है।
9 वृद्ध होते आईएसएस की चिंताएं ज्वेज्दा मॉड्यूल में पहले भी रिसाव की समस्या रही है, जो आईएसएस प्रणालियों के रखरखाव में चुनौतियों को दर्शाता है, क्योंकि यह 2030 तक सेवानिवृत्त होने वाला है।

 

मिशन का उद्देश्य :

 

  1. सूक्ष्म गुरुत्व अनुसंधान का संचालन : आई.एस.एस. पर जीवन विज्ञान, पदार्थ विज्ञान और जैव चिकित्सा में उन्नत वैज्ञानिक प्रयोग करना।
    2. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना : भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए पहली सरकार समर्थित अंतरिक्ष उड़ानें, अंतरिक्ष अन्वेषण में वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देंगी।
    3. मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण का समर्थन : उभरते अंतरिक्ष राष्ट्रों के अंतरिक्ष यात्रियों को वास्तविक अंतरिक्ष उड़ान का अनुभव प्रदान करना, जिससे भारत के गगनयान जैसे भविष्य के राष्ट्रीय मिशनों को सहायता मिलेगी।
    4. नई प्रौद्योगिकियों का परीक्षण : अंतरिक्ष स्थितियों में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को मान्य करना, जिससे भविष्य के गहन अंतरिक्ष और वाणिज्यिक मिशनों के विकास में योगदान मिल सके।
    5. अग्रिम वाणिज्यिक अंतरिक्ष लक्ष्य : वाणिज्यिक चालक दल मिशन क्षमताओं का प्रदर्शन करके दुनिया का पहला निजी अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के एक्सिओम स्पेस के दृष्टिकोण की ओर बढ़ें।
    6. शांतिपूर्ण अंतरिक्ष कूटनीति को बढ़ावा देना : संयुक्त मिशनों के माध्यम से राष्ट्रों के बीच सहयोग को मजबूत करना, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को सुदृढ़ करना।
    7. STEM आउटरीच को बढ़ावा देना : अंतरिक्ष से लाइव शैक्षिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों के माध्यम से वैश्विक युवाओं और शिक्षकों को प्रेरित करें।
    8. आई.एस.एस. के बाद के ऑपरेशनों की तैयारी करें : 2030 तक आई.एस.एस. की अपेक्षित सेवानिवृत्ति के बाद वाणिज्यिक निम्न पृथ्वी कक्षा मिशनों के लिए परिचालन मॉडल स्थापित करने में सहायता करना।

 

एक्स-4 मिशन में इसरो और भारत की भूमिका :

 

  1. अंतरिक्ष यात्री प्रतिनिधित्व : एक्स-4 मिशन में भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला शामिल हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों में भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतिनिधित्व करते हैं।
    2. सफल तैयारी के लिए सहायता : शुक्ला की भागीदारी भारत के स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान से पहले बहुमूल्य उड़ान अनुभव प्रदान करेगी, जिससे परिचालन तत्परता बढ़ेगी।
    3. वैश्विक साझेदारों के साथ इसरो का समन्वय : इसरो एक्स-4 की सुरक्षा, मिशन की सफलता और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करने के लिए एक्सिओम स्पेस, नासा और स्पेसएक्स के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है।
    4. भारत की वैश्विक अंतरिक्ष उपस्थिति को मजबूत करना : एक्स-4 के माध्यम से भारत अंतरिक्ष कूटनीति और मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करता है।
    5. वैज्ञानिक योगदान : इसरो मिशन के दौरान शुक्ला द्वारा आईएसएस पर किए जाने वाले भारतीय वैज्ञानिक पेलोड और अनुसंधान मॉड्यूल के विकास में सहायता कर रहा है।
    6. सार्वजनिक सहभागिता और प्रेरणा : इस मिशन से भारतीय युवाओं को प्रेरणा मिलेगी, STEM शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उभरती स्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ेगी।
    7. अंतर्राष्ट्रीय मिशनों में अग्रणी कदम : यह भारत के लिए पहली बार ऐतिहासिक है, जब सरकार द्वारा प्रायोजित अंतरिक्ष यात्री किसी अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशन में भाग ले रहा है, जिससे भविष्य के बहुपक्षीय अंतरिक्ष उपक्रमों में गहन एकीकरण के लिए मंच तैयार हो रहा है।

 

अंतरिक्ष मिशन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग :

 

  1. साझा वैज्ञानिक लक्ष्य : देश जलवायु परिवर्तन, अंतरिक्ष और ग्रह विज्ञान जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग करते हैं, जिससे वैश्विक वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ावा मिलता है।
    2. लागत और जोखिम साझाकरण : संयुक्त मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण के उच्च वित्तीय और तकनीकी जोखिमों को साझा करने में मदद करते हैं, जिससे आई.एस.एस. जैसी बड़े पैमाने की परियोजनाएं व्यवहार्य बनती हैं।
    3. कूटनीति को मजबूत करना : अंतरिक्ष साझेदारी शांतिपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा देती है, जैसा कि Ax-4, NISAR (इसरो-नासा) और NASA द्वारा समर्थित चंद्रयान-3 जैसे मिशनों में देखा गया है।
    4. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं क्षमता निर्माण : उभरते देशों को उन्नत प्रौद्योगिकियों, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता तक पहुंच प्राप्त होती है, जिससे उन्हें स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमताओं का निर्माण करने में मदद मिलती है।
    5. मानकीकरण और डेटा साझाकरण : सहयोग प्रणाली संगतता और वैश्विक डेटा विनिमय सुनिश्चित करता है – जो आपदा प्रतिक्रिया, पृथ्वी अवलोकन और संचार के लिए महत्वपूर्ण है।
    6. वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र को बढ़ावा : सहयोग से स्पेसएक्स जैसी निजी कंपनियों को वैश्विक एजेंसियों के साथ साझेदारी करने में मदद मिलेगी, जिससे अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नवाचार और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
    7. भावी अंतरिक्ष शासन : चूंकि आई.एस.एस. समाप्ति के करीब है, इसलिए संयुक्त मिशन आई.एस.एस. के बाद की रणनीतियों को आकार दे रहे हैं तथा शांतिपूर्ण, नियम-आधारित अंतरिक्ष व्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं।

 

वैश्विक अंतरिक्ष मिशनों में भारत की बढ़ती भूमिका :

 

  1. एक्सिओम मिशन-4 में भागीदारी : ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की भूमिका वैश्विक वाणिज्यिक मिशन में भारत के पहले सरकारी समर्थित अंतरिक्ष यात्री की है।
  2. समानता को बढ़ावा : अंतर्राष्ट्रीय मिशन वास्तविक समय का अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे भारत के आगामी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को सहायता मिलती है।
  3. रणनीतिक सहयोग : इसरो नासा (निसार), सीएनईएस (मेघा-ट्रॉपिक्स) और अन्य के साथ साझेदारी कर रहा है, जिससे वैश्विक विश्वास मजबूत हो रहा है।
  4. वाणिज्यिक प्रक्षेपण केंद्र : इसरो द्वारा प्रक्षेपित 430 से अधिक विदेशी उपग्रह एक कम लागत वाले, विश्वसनीय प्रक्षेपण प्रदाता के रूप में इसकी भूमिका को उजागर करते हैं।
  5. वैज्ञानिक योगदान : चंद्रयान और मंगलयान जैसे मिशनों ने वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान को मूल्यवान डेटा से समृद्ध किया है।
  6. उन्नत पेलोड विकास : भारत अंतरराष्ट्रीय मिशनों को अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराता है, जिससे तकनीकी प्रतिष्ठा बढ़ती है।
  7. अंतरिक्ष कूटनीति : भारत शांतिपूर्ण, समावेशी अंतरिक्ष उपयोग की वकालत करता है और विकासशील देशों के बीच नेतृत्व प्राप्त कर रहा है।

 

निष्कर्ष : 

 

  • एक्स-4 में भारत की भागीदारी अंतरिक्ष अन्वेषण में इसकी बढ़ती वैश्विक छवि को उजागर करती है, जिसमें वैज्ञानिक महत्वाकांक्षा, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी क्षमता का संयोजन है। जैसे-जैसे दुनिया वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशनों और आईएसएस मिशनों की ओर बढ़ रही है, भारत भविष्य में मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष कूटनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।

 

स्त्रोत – पी. आई. बी एवं इंडियन एक्सप्रेस।

 

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. एक्सिओम मिशन-4 (एक्स-4) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसमें इसरो, नासा, स्पेसएक्स और एक्सिओम स्पेस के बीच सहयोग शामिल है।
2. यह पहली बार है जब कोई सरकारी प्रायोजित भारतीय अंतरिक्ष यात्री आई.एस.एस. मिशन में भाग ले रहा है।
3. इसका उद्देश्य आई.एस.एस. पर सूक्ष्म गुरुत्व वातावरण में वैज्ञानिक प्रयोग करना है।
उपर्युक्त में से कौन सा / से कथन सत्य हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तरः (d) 

 

मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

 

Q.1. चर्चा कीजिए कि एक्सिओम मिशन-4 में भारत की भागीदारी को उसकी अंतरिक्ष कूटनीति और मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता में एक मील का पत्थर क्यों माना जा रहा है? भारत की व्यापक अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के संदर्भ में इस मिशन का क्या महत्व है? ( शब्द सीमा – 250 अंक – 15 )

 

Dr. Akhilesh Kumar Shrivastava
No Comments

Post A Comment