एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: खनिज कराधान में निश्चितता लाने वाला विधेयक, जानिए प्रमुख प्रावधान

एमएमडीआर संशोधन विधेयक, 2026 — concept mind map

एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: खनिज कराधान में निश्चितता लाने वाला विधेयक, जानिए प्रमुख प्रावधान

MMDRA 2026 Billराज्यों द्वारा करनए कर लगाने की शक्तिसीमितकराधानअप्रत्याशित शुरूआतनियंत्रितकेंद्र सरकारनियंत्रणखान विनियमनविधेयक उद्देश्यसमान राजकोषीय ढाँचाव्यावसायिक व्यवहार्यतानिवेशकों का विश्वासपूर्वव्यापी प्रभावनियंत्रितखनन क्षेत्रअत्यधिक कर बोझनियमित
MMDRA 2026 Bill

✎ खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में कराधान को सुव्यवस्थित करना और राज्यों द्वारा नए कर लगाने की शक्ति को सीमित करके देश भर में एक समान और संतुलित राजकोषीय ढाँचा स्थापित करना है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, खनिज संसाधन, औद्योगिक नीति
  • Prelims: MMDR अधिनियम, 1957, MMDR संशोधन विधेयक, 2026, खनिज कराधान, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, रॉयल्टी, खनिज विकास
  • Essay: भारत में सतत खनिज विकास: आर्थिक संवृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन, सहकारी संघवाद और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन

त्वरित पुनरावृत्ति: खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में कराधान को सुव्यवस्थित करना और राज्यों द्वारा नए कर लगाने की शक्ति को सीमित करके देश भर में एक समान और संतुलित राजकोषीय ढाँचा स्थापित करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026) संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया है। यह विधेयक खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन करता है, जिसका उद्देश्य देश भर में खनिज क्षेत्र के लिए एक समान और संतुलित राजकोषीय ढाँचा तैयार करना है। यह विधेयक राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिज भूमि पर नए कर लगाने की शक्ति को सीमित करता है, जिससे खनन क्षेत्र में कराधान संबंधी अनिश्चितताओं और असमानताओं को दूर किया जा सके।

पृष्ठभूमि

  • खनिज (Minerals) किसी भी देश के बुनियादी ढाँचे, डिजिटल प्रणालियों, विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन हैं।
  • भारत में खनन कार्य खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957) द्वारा शासित होता है। इस अधिनियम की धारा 2 के तहत, केंद्र सरकार व्यापक जनहित में खानों के विनियमन और खनिज विकास को नियंत्रित करती है।
  • वर्तमान में, खनन क्षेत्र पर अत्यधिक कर का बोझ, करों, उपकर (Cess) और अन्य शुल्कों की अप्रत्याशित शुरूआत, तथा राज्यों के बीच करों की गैर-समान दरें जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं।
  • इन चुनौतियों के कारण खनन व्यावसायिक रूप से अव्यवहार्य हो गया है, छोटे और मध्यम स्तर के खनन ऑपरेटरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, और घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे खनिज आयात में वृद्धि हुई है।
  • करों को पूर्वव्यापी (Retrospective) प्रभाव से लागू करने से कानूनी अनिश्चितता पैदा हुई है और निवेशकों का विश्वास कम हुआ है, जिससे आर्थिक विकास धीमा हुआ है और आम नागरिक के लिए जीवन यापन की लागत बढ़ी है।

खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?

  • यह विधेयक खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन करता है, जिसका मुख्य उद्देश्य खनिज क्षेत्र में कराधान और लेवी (Levy) के मौजूदा ढांचे से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का समाधान करना है।
  • विधेयक के तहत, केंद्र सरकार अब खनिज सामग्री वाली भूमि को भी विनियमित करेगी, जो खानों के विनियमन और खनिजों के विकास पर केंद्र के मौजूदा नियंत्रण के अतिरिक्त है।
  • नई धारा 9D के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कोई नया कर, उपकर या अन्य लेवी नहीं लगाया जाएगा, चाहे वह किसी भी नाम से पुकारा जाए।
  • इसका लक्ष्य खनन क्षेत्र में राजकोषीय बोझ को कम करना, निवेश को प्रोत्साहित करना, कानूनी अनिश्चितता को दूर करना और देश भर में सामंजस्यपूर्ण खनिज विकास सुनिश्चित करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
खनिज युक्त भूमि पर केंद्र का नियंत्रण केंद्र सरकार अब खनिज सामग्री वाली भूमि को भी विनियमित करेगी, जिससे खनन गतिविधियों का अधिक सुसंगत और एकीकृत प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
राज्य लेवी पर सीमा (नई धारा 9D) राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कोई नया कर, उपकर या अन्य लेवी लगाने से प्रतिबंधित किया गया है, जिससे खनन क्षेत्र में कराधान की एकरूपता आएगी।
पिछले शुल्कों के संदर्भ में नियम संशोधन लागू होने से पहले राज्य द्वारा भुगतान या एकत्र नहीं किए गए किसी भी लेवी को अमान्य माना जाएगा, जिससे कानूनी अनिश्चितता कम होगी।
धारा 13 के तहत नियम बनाने की शक्ति केंद्र सरकार को खनिज क्षेत्र से संबंधित नियम बनाने का अधिकार दिया गया है, जिससे नीति निर्माण में अधिक स्पष्टता और दक्षता आएगी।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह विधेयक खनन क्षेत्र पर अत्यधिक कर के बोझ को कम करके व्यावसायिक व्यवहार्यता को बढ़ाएगा, जिससे खनिज निष्कर्षण को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • करों और शुल्कों की अप्रत्याशित शुरूआत को रोककर, यह छोटे और मध्यम स्तर के खनन ऑपरेटरों को स्थिरता प्रदान करेगा।
  • उच्च और असमान शुल्कों को समाप्त करके, यह स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा और आयात पर निर्भरता कम करेगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।

शासन और नियामक महत्व

  • यह विधेयक देश भर में खनिज क्षेत्र के लिए एक समान और संतुलित राजकोषीय ढांचा बनाएगा, जिससे राज्यों के बीच करों की असमान दरें समाप्त होंगी।
  • पूर्वव्यापी प्रभाव से कर लगाने पर रोक लगाकर, यह कानूनी अनिश्चितता को दूर करेगा और निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा।
  • केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्ति देकर, यह विनियमन में अधिक स्पष्टता और दक्षता लाएगा, जिससे सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा मिलेगा।

सामाजिक महत्व

  • निष्कर्षण चरण में अत्यधिक कर के बोझ को कम करने से वस्तुओं और सेवाओं की लागत में कमी आएगी, जिससे आम नागरिक के जीवन यापन की लागत कम होगी।
  • स्थिर और अनुमानित खनन नीति से रोजगार सृजन और स्थानीय समुदायों के विकास में मदद मिलेगी, जिससे सामाजिक-आर्थिक समानता बढ़ेगी।

चुनौतियाँ

1. खनन क्षेत्र पर अत्यधिक कर का बोझ

  • खनन क्षेत्र पर विभिन्न करों, उपकरों और शुल्कों का संचयी प्रभाव बहुत अधिक था, जिससे खनन गतिविधियां व्यावसायिक रूप से अव्यवहार्य हो गई थीं।
  • इसने खनिज निष्कर्षण को हतोत्साहित किया और कुछ मामलों में खदानों को बंद करने पर मजबूर किया।

2. करों और शुल्कों की अप्रत्याशित शुरूआत

  • खनन कार्य शुरू होने के बाद भी करों, उपकरों और अन्य शुल्कों की अप्रत्याशित शुरूआत ने खनन ऑपरेटरों के लिए अनिश्चितता पैदा की।
  • इससे विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर के ऑपरेटरों को असमान रूप से प्रभावित किया।

3. राज्यों के बीच करों की गैर-समान दरें

  • विभिन्न राज्यों में करों और अन्य शुल्कों की दरों में असमानता थी, जिससे पूरे देश में एक समान खनन नीति का अभाव था।
  • इससे उद्योगों को स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से बचने और महंगे आयात पर निर्भर रहने के लिए प्रेरित किया।

4. पूर्वव्यापी कराधान

  • करों को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करने से कानूनी अनिश्चितता पैदा हुई और निवेशकों का विश्वास कम हुआ।
  • इससे खनन क्षेत्र में निवेश के लिए प्रतिकूल माहौल बना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अत्यधिक राजकोषीय बोझ खनन को अव्यवहार्य बनाना, निष्कर्षण को हतोत्साहित करना और खदानें बंद होना।
अप्रत्याशित कर और शुल्क छोटे और मध्यम ऑपरेटरों पर प्रतिकूल प्रभाव, अनिश्चितता।
गैर-समान कर दरें स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से बचना, उच्च आयात, कमजोर बाजार।
पूर्वव्यापी कराधान कानूनी अनिश्चितता, निवेशकों का विश्वास कम होना।
उच्च अनुपालन लागत कई और असंगत करों के कारण आर्थिक विकास धीमा होना।
वस्तुओं और सेवाओं की लागत में वृद्धि निष्कर्षण में अत्यधिक कर का बोझ अंततः आम नागरिक के जीवन यापन की लागत बढ़ाता है।

आगे की राह

  • खनन क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए एक स्थिर और अनुमानित नीतिगत ढांचा बनाए रखना।
  • खनिज अन्वेषण (Mineral Exploration) और निष्कर्षण में नवीनतम तकनीकों को अपनाने को प्रोत्साहित करना।
  • खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए सतत खनन प्रथाओं को बढ़ावा देना।
  • खनन से प्रभावित स्थानीय समुदायों के साथ परामर्श और उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करना और भारतीय संदर्भ में उन्हें अपनाना।
  • खनन क्षेत्र में कौशल विकास और रोजगार सृजन के अवसरों को बढ़ावा देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

MMDR संशोधन विधेयक, 2026 · खनिज कराधान · राजकोषीय ढाँचा · खनन क्षेत्र · संघवाद · राज्य सरकारों की कराधान शक्तियाँ · निवेशक विश्वास · आर्थिक संवृद्धि · खनिज विकास और विनियमन अधिनियम, 1957 · राष्ट्रीय हित

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों का प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 265’, ‘note’: ‘कानून के अधिकार के बिना कोई कर नहीं’}

अवधारणा प्रवाह

खनन क्षेत्र पर अत्यधिक कर बोझ और असमानता  →  खनन गतिविधियों की व्यावसायिक अव्यवहार्यता और निवेश में कमी  →  एमएमडीआर संशोधन विधेयक, 2026 का प्रस्ताव  →  केंद्र का नियंत्रण और राज्य लेवी पर सीमा  →  खनन क्षेत्र में कराधान में निश्चितता और एकरूपता  →  आर्थिक संवृद्धि, निवेश प्रोत्साहन और सुशासन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 भारत में खनन गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
2. MMDR संशोधन विधेयक, 2026 राज्यों को खनिज अधिकारों पर कोई नया कर लगाने से पूरी तरह प्रतिबंधित करता है।
3. यह विधेयक खनन क्षेत्र में कराधान की एकरूपता और निश्चितता लाने का प्रयास करता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि MMDR अधिनियम, 1957 भारत में खनन को नियंत्रित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि विधेयक राज्यों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों/प्रतिबंधों के बिना कोई नया कर लगाने से रोकता है, पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं करता। कथन 3 सही है क्योंकि विधेयक का उद्देश्य खनन क्षेत्र में कराधान की एकरूपता और निश्चितता लाना है।

Q2. MMDR संशोधन विधेयक, 2026 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रावधान सही है/हैं?
1. यह केंद्र सरकार को खनिज-युक्त भूमि को विनियमित करने की शक्ति प्रदान करता है।
2. यह राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए पिछले शुल्कों को, यदि वे संशोधन लागू होने से पहले भुगतान या एकत्र नहीं किए गए थे, अमान्य घोषित करता है।
3. यह केंद्र सरकार को MMDR अधिनियम की धारा 13 के तहत नियम बनाने का अधिकार देता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक केंद्र को खनिज-युक्त भूमि को विनियमित करने की शक्ति देता है। कथन 2 सही है क्योंकि विधेयक में प्रावधान है कि संशोधन लागू होने से पहले राज्य द्वारा भुगतान या एकत्र नहीं किए गए किसी भी लेवी को अमान्य माना जाएगा। कथन 3 सही है क्योंकि विधेयक MMDR अधिनियम की धारा 13 में संशोधन करता है ताकि केंद्र सरकार को नियम बनाने का अधिकार दिया जा सके।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए। यह विधेयक भारत में खनिज क्षेत्र के कराधान ढांचे में एकरूपता और निश्चितता लाने में किस प्रकार सहायक होगा? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** MMDR संशोधन विधेयक, 2026 का संक्षिप्त परिचय देते हुए इसके मुख्य उद्देश्य (खनिज क्षेत्र में कराधान की एकरूपता और निश्चितता) को रेखांकित करें।
2. **विधेयक के प्रमुख प्रावधान:**
* खनिज युक्त भूमि पर केंद्र का नियंत्रण (MMDR अधिनियम की धारा 2 के अतिरिक्त)।
* नई धारा 9D: राज्य लेवी पर सीमा – राज्य सरकारों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर नए कर/उपकर/लेवी लगाने पर प्रतिबंध, केवल केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन।
* पिछले शुल्कों के संदर्भ में नियम: संशोधन से पहले भुगतान न किए गए शुल्कों को अमान्य करना।
* धारा 13 के तहत केंद्र को नियम बनाने की शक्ति।
3. **एकरूपता और निश्चितता लाने में सहायता:**
* **अत्यधिक कर बोझ में कमी:** कई और अप्रत्याशित शुल्कों से मुक्ति।
* **राज्यों के बीच असमान दरों का समाधान:** एक समान राजकोषीय ढाँचा।
* **पूर्वव्यापी कराधान पर रोक:** कानूनी अनिश्चितता समाप्त, निवेशक विश्वास में वृद्धि।
* **छोटे और मध्यम ऑपरेटरों को लाभ:** अतिरिक्त लागतों के बोझ से मुक्ति।
* **स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रोत्साहन:** आयात निर्भरता में कमी।
* **आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन:** खनन को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाना।
* **वस्तुओं और सेवाओं की लागत पर प्रभाव:** अंतिम उपभोक्ता के लिए जीवन यापन की लागत में कमी।
4. **निष्कर्ष:** विधेयक के महत्व को दोहराते हुए, राष्ट्रीय हित में संतुलित और सतत खनिज विकास सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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