13 Aug एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: खनिज कराधान में एकरूपता एवं निश्चितता
✎ MMDR संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत के खनिज क्षेत्र में कराधान संबंधी चुनौतियों का समाधान करना, एक समान राजकोषीय ढाँचा स्थापित करना और निवेश को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर II — राजव्यवस्था, शासन और सामाजिक न्याय | GS पेपर III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन
- Prelims: MMDR अधिनियम, 1957, MMDR संशोधन विधेयक, 2026, खनिज कराधान, संघवाद, राजकोषीय ढाँचा, खनन क्षेत्र
- Essay: भारत में प्राकृतिक संसाधनों का सतत और न्यायसंगत विकास, संघवाद और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध: चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: MMDR संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत के खनिज क्षेत्र में कराधान संबंधी चुनौतियों का समाधान करना, एक समान राजकोषीय ढाँचा स्थापित करना और निवेश को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026) हाल ही में संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया है। यह विधेयक देश भर में खनिज क्षेत्र के लिए एक समान और संतुलित राजकोषीय ढाँचा बनाने के उद्देश्य से खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन करता है। इसका मुख्य लक्ष्य खनन क्षेत्र पर अत्यधिक कर के बोझ को कम करना, कराधान में एकरूपता लाना और कानूनी अनिश्चितता को दूर करना है, जिससे खनिज निष्कर्षण को प्रोत्साहन मिल सके।
पृष्ठभूमि
- भारत में खनन कार्य खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957) के तहत संचालित होता है।
- यह अधिनियम संघ को व्यापक जनहित में खानों के विनियमन और खनिज विकास को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
- मौजूदा कराधान ढाँचे में खनन क्षेत्र पर भारी कर का बोझ, करों की अप्रत्याशित शुरुआत और राज्यों के बीच गैर-समान दरें जैसी चुनौतियाँ थीं।
- इन चुनौतियों के कारण खनन व्यावसायिक रूप से अव्यवहार्य हो गया था, जिससे खनिज निष्कर्षण हतोत्साहित हुआ और खदानें बंद हुईं।
- उच्च और असमान शुल्कों ने उद्योगों को स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से बचने के लिए प्रेरित किया, जिससे उच्च आयात और पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न हुईं।
- करों को पूर्वव्यापी (retrospective) रूप से लागू करने से कानूनी अनिश्चितता पैदा हुई और निवेशकों का विश्वास कम हुआ।
- प्राकृतिक संसाधनों के न्यासी के रूप में राज्य की जिम्मेदारी है कि वह राष्ट्रीय हितों की रक्षा करे और पूरे भारत में सामंजस्यपूर्ण खनिज विकास सुनिश्चित करे।
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
- यह विधेयक खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन करता है, जिसका उद्देश्य खनिज क्षेत्र के लिए एक समान और संतुलित राजकोषीय ढाँचा बनाना है।
- यह राज्य सरकारों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों/प्रतिबंधों के बिना खनिज अधिकारों और खनिज भूमि पर कोई नया कर, उपकर या अन्य लेवी (levy) लगाने से रोकता है।
- विधेयक में एक नई धारा 9डी जोड़ी गई है, जो खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर राज्य सरकार द्वारा किसी भी नाम से कोई कर, उपकर या अन्य लेवी लगाने पर सीमा लगाती है।
- यह प्रावधान खनिज मात्रा, खनिज मूल्य, रॉयल्टी (royalty) या किसी अन्य आधार पर लगाए जाने वाले शुल्कों पर भी लागू होता है।
- संशोधन लागू होने से पहले राज्य द्वारा भुगतान या एकत्र नहीं किए गए किसी भी लेवी को अमान्य माना जाएगा, हालांकि पहले से जमा की गई या वसूल की गई राशि वापस नहीं की जाएगी।
- यह विधेयक केंद्र सरकार को खनिज युक्त भूमि को विनियमित करने का अधिकार देता है, जिसकी पहचान MMDR अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार की जाएगी।
- MMDR अधिनियम की धारा 13 में संशोधन किया गया है ताकि केंद्र सरकार को नियम बनाने का अधिकार दिया जा सके, जिससे खनिज क्षेत्र में एकरूपता और निश्चितता लाई जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| खनिज युक्त भूमि पर केंद्र का नियंत्रण | केंद्र सरकार अब खनिज सामग्री वाली भूमि को भी विनियमित करेगी, जिससे देश भर में एकरूपता आएगी। |
| नई धारा 9D – राज्य लेवी पर सीमा | राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कोई नया कर, उपकर या अन्य लेवी लगाने से रोका गया है, जिससे कराधान में निश्चितता आएगी। |
| पिछले शुल्कों के संदर्भ में नियम | संशोधन लागू होने से पहले राज्य द्वारा भुगतान या एकत्र नहीं किए गए किसी भी लेवी को अमान्य माना जाएगा, जिससे पूर्वव्यापी कराधान की समस्या का समाधान होगा। |
| धारा 13 के तहत नियम बनाने की शक्ति | केंद्र सरकार को खनिज क्षेत्र के विनियमन के लिए नियम बनाने का अधिकार दिया गया है, जिससे नीति निर्माण में स्पष्टता और दक्षता आएगी। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह विधेयक खनन क्षेत्र पर अत्यधिक कर के बोझ को कम करके व्यावसायिक व्यवहार्यता को बढ़ाएगा, जिससे खनिज निष्कर्षण को प्रोत्साहन मिलेगा।
- करों और शुल्कों की दरों में एकरूपता से उद्योगों को स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे बाजार मजबूत होंगे और परिवहन लागत कम होगी।
- स्थानीय खनिज संसाधनों के बावजूद उच्च खनिज आयात की समस्या का समाधान होगा, जिससे देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
शासन और नियामक महत्व
- यह संशोधन देश भर में खनिज क्षेत्र के लिए एक समान और संतुलित राजकोषीय ढांचा स्थापित करेगा, जिससे राज्यों के बीच करों की गैर-समान दरों की समस्या का समाधान होगा।
- पूर्वव्यापी प्रभाव से कर लगाने पर रोक लगने से कानूनी अनिश्चितता कम होगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, जिससे खनन क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा।
- यह विधेयक केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कराधान शक्तियों के संबंध में स्पष्टता प्रदान करता है, जिससे संघवाद के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित होता है।
सामाजिक महत्व
- निष्कर्षण चरण में अत्यधिक कर के बोझ में कमी से वस्तुओं और सेवाओं की लागत कम होगी, जिससे आम नागरिक के जीवन यापन की लागत में कमी आएगी।
- छोटे और मध्यम स्तर के खनन ऑपरेटरों पर अतिरिक्त और अप्रत्याशित लागतों का बोझ कम होगा, जिससे उनकी स्थिरता और विकास सुनिश्चित होगा।
चुनौतियाँ
1. खनन क्षेत्र पर अत्यधिक कर का बोझ
- वर्तमान में, खनन क्षेत्र पर कई प्रकार के कर, उपकर और अन्य शुल्क लगाए जाते हैं, जिससे कुल कर का बोझ बहुत अधिक हो जाता है।
- इस अत्यधिक बोझ के कारण खनन व्यावसायिक रूप से अव्यवहार्य हो गया है, जिससे खनिज निष्कर्षण हतोत्साहित होता है और खदानें बंद हो जाती हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: खनिज संसाधन, औद्योगिक नीति
2. करों की अप्रत्याशित शुरुआत और गैर-समान दरें
- खनन कार्य शुरू होने के बाद भी करों, उपकर और अन्य शुल्कों की अप्रत्याशित शुरुआत होती है, जिससे अनिश्चितता बढ़ती है।
- राज्यों के बीच करों और अन्य शुल्कों की दरें गैर-समान हैं, जिससे पूरे देश में एक समान व्यावसायिक वातावरण का अभाव है।
यूपीएससी लिंक: राजव्यवस्था: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
3. पूर्वव्यापी कराधान और कानूनी अनिश्चितता
- करों, उपकर या लेवी को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करने की प्रथा ने कानूनी अनिश्चितता पैदा की है।
- इससे निवेशकों का विश्वास कम हुआ है और खनन क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश बाधित हुआ है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश, व्यापार सुगमता
4. उच्च आयात और कमजोर आपूर्ति श्रृंखलाएँ
- उच्च और असमान शुल्कों ने उद्योगों को स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से बचने के लिए प्रेरित किया है, जिससे कमजोर बाजार और उच्च परिवहन लागत पैदा हुई है।
- पर्याप्त स्थानीय खनिज संसाधनों के बावजूद, महंगी घरेलू आपूर्ति के कारण उच्च खनिज आयात का संकट भी पैदा हुआ है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| खनन पर भारी कर | खनन को व्यावसायिक रूप से अव्यवहार्य बनाता है, निष्कर्षण को हतोत्साहित करता है। |
| करों की अप्रत्याशित शुरुआत | कानूनी अनिश्चितता और निवेशकों का विश्वास कम करता है। |
| राज्यों में असमान कर दरें | उद्योगों को स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं से बचने के लिए प्रेरित करता है। |
| पूर्वव्यापी कर | निवेशकों का विश्वास कम करता है और आर्थिक विकास धीमा करता है। |
| उच्च अनुपालन लागत | आर्थिक विकास को धीमा करता है और छोटे ऑपरेटरों को प्रभावित करता है। |
आगे की राह
- खनन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक स्थिर और अनुमानित नीतिगत ढांचा सुनिश्चित करना।
- खनिज अन्वेषण और निष्कर्षण में नवीनतम तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
- पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए खनिज संसाधनों के सतत विकास के लिए नियामक तंत्र को मजबूत करना।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना ताकि खनिज क्षेत्र के लिए एक सामंजस्यपूर्ण नीतिगत दृष्टिकोण सुनिश्चित हो सके।
- खनन से प्रभावित स्थानीय समुदायों के लिए कौशल विकास और वैकल्पिक आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना।
- खनन अपशिष्ट के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के लिए नीतियां विकसित करना ताकि संसाधन दक्षता बढ़ाई जा सके।
- खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल समाधानों का उपयोग करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
MMDR संशोधन विधेयक, 2026 · खनिज क्षेत्र में कराधान · राज्यों के कराधान अधिकार · संघवाद और खनिज विनियमन · खनन क्षेत्र का आर्थिक विकास · निवेशकों का विश्वास · राष्ट्रीय आर्थिक विकास · खनिज आयात पर निर्भरता · स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएं · कानूनी अनिश्चितता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषय-वस्तु’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों में विषयों का विभाजन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 265’, ‘note’: ‘कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया जाएगा’}
अवधारणा प्रवाह
खनन क्षेत्र पर अत्यधिक कर का बोझ और अनिश्चितता → निवेश में कमी और खनिज निष्कर्षण में बाधा → MMDR संशोधन विधेयक, 2026 का अधिनियमन → कराधान में निश्चितता और एकरूपता का आगमन → खनन क्षेत्र में निवेश और आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 भारत में खनन गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
2. MMDR संशोधन विधेयक, 2026 राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों पर कोई नया कर लगाने से रोकता है।
3. यह विधेयक खनन क्षेत्र में कराधान और लेवी के मौजूदा ढांचे से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का समाधान करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि MMDR अधिनियम, 1957 भारत में खनन को नियंत्रित करता है। कथन 2 सही है क्योंकि विधेयक राज्य सरकारों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के बिना खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कोई नया कर लगाने से रोकता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि विधेयक का उद्देश्य खनन क्षेत्र में भारी कर बोझ, अप्रत्याशित करों और गैर-समान दरों जैसी चुनौतियों का समाधान करना है।
Q2. MMDR संशोधन विधेयक, 2026 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रावधान सही है/हैं?
1. केंद्र सरकार अब खनिज सामग्री वाली भूमि को विनियमित करेगी।
2. राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कोई कर, उपकर या अन्य लेवी नहीं लगाया जाएगा।
3. संशोधन लागू होने से पहले राज्य द्वारा भुगतान या एकत्र नहीं किए गए किसी भी लेवी को अमान्य माना जाएगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक केंद्र को खनिज सामग्री वाली भूमि को विनियमित करने का अधिकार देता है। कथन 2 सही है क्योंकि यह राज्य सरकारों द्वारा खनिज अधिकारों पर कर लगाने पर रोक लगाता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह संशोधन लागू होने से पहले राज्य द्वारा भुगतान या एकत्र नहीं किए गए किसी भी लेवी को अमान्य मानता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ MMDR संशोधन विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण कीजिए। यह विधेयक भारत में खनिज क्षेत्र के समक्ष मौजूद किन चुनौतियों का समाधान करता है और इसके संभावित आर्थिक प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत MMDR संशोधन विधेयक, 2026 के संदर्भ और इसके मुख्य उद्देश्य (खनिज क्षेत्र में कराधान में निश्चितता और एकरूपता लाना) से करें।
**भाग 1: प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण**
* **केंद्र का नियंत्रण:** खनिज युक्त भूमि पर केंद्र सरकार के विनियमन की शक्ति।
* **राज्य लेवी पर सीमा:** राज्य सरकारों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर नए कर, उपकर या लेवी लगाने पर प्रतिबंध।
* **पिछले शुल्कों का संदर्भ:** संशोधन से पहले भुगतान न किए गए लेवी को अमान्य मानना, लेकिन पहले से एकत्र की गई राशि की वापसी नहीं।
* **नियम बनाने की शक्ति:** MMDR अधिनियम की धारा 13 में संशोधन कर केंद्र सरकार को नियम बनाने का अधिकार देना।
**भाग 2: चुनौतियों का समाधान**
* **भारी कर का बोझ:** खनन क्षेत्र पर अत्यधिक कराधान को कम करना।
* **अप्रत्याशित कर:** खनन कार्य शुरू होने के बाद करों, उपकर और शुल्कों की अप्रत्याशित शुरूआत को रोकना।
* **कई कर:** खनिजों के उत्पादन या प्रेषण पर कई शुल्कों को समाप्त करना।
* **गैर-समान दरें:** राज्यों के बीच करों की असमान दरों को दूर करना।
* **पूर्वव्यापी कराधान:** पूर्वव्यापी प्रभाव से कर लगाने की प्रथा को समाप्त करना।
**भाग 3: संभावित आर्थिक प्रभाव**
* **निवेशकों का विश्वास:** कानूनी और राजकोषीय निश्चितता से निवेश को बढ़ावा।
* **खनन को प्रोत्साहन:** अत्यधिक बोझ कम होने से खनन गतिविधियों का पुनरुद्धार।
* **लागत में कमी:** वस्तुओं और सेवाओं की अंतिम लागत में कमी, जिससे जीवन यापन की लागत पर सकारात्मक प्रभाव।
* **स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएं:** उद्योगों को स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो।
* **आर्थिक संवृद्धि:** खनन क्षेत्र में स्थिरता और विकास से समग्र आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा।
निष्कर्ष में, विधेयक के महत्व को दोहराएं कि यह खनिज क्षेत्र में एक समान और संतुलित राजकोषीय ढांचा स्थापित करके राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सतत खनिज विकास सुनिश्चित करता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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